अटल जी की यह अमूल्य धरोहर

हृदयनारायण दीक्षित
पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी पर ढेर सारी पुस्तकें हैं। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन उनके पत्रकारीय जीवन पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन अनूठा है। श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी प्रखर राष्ट्रवादी नेता, श्रेष्ठ वक्ता, सर्वश्रेष्ठ सांसद और सफल प्रधानमंत्री रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन सभी के लिए प्रशंसनीय व अनुकरणीय है। उनका जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्र प्रेम से ओत प्रोत हैं। उनके जीवन का एक-एक क्षण भारत माता को समर्पित हैं। उनका व्यक्तित्व कृतित्व आनंदवर्द्धन है। श्री अटल जी का शिष्ट, सौम्य, अजातशत्रु स्वरूप बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। मुझे उनके निकट रहने का सौभाग्य मिला है। उनके चिंतन की गहनता, वैचारिक विविधता, प्रशासक की दृढ़ता सहज आकर्षण रही है। जनसंघ के संस्थापक से लेकर भारतीय जनता पार्टी को शिखर तक पहुंचाने में उनका योगदान प्रशंसनीय है। उनकी कविताओं में संवेदनशीलता है। उनकी लेखनी झकझोर कर रख देने वाली है। उनके विचार स्पष्ट हैं। भाषा तरल सरल विरल है। वे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और सीधे पत्रकारिता में आ गए थे। पत्रकारिता का चुनाव करना, उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। उस समय पूरे देश में स्वतंत्रता की लहर चल रही थी। पत्रकार के रूप में उन्होंने अपने दायित्व का पूरी लगन और निष्ठा से पालन किया। अटल जी प्रतिभाशाली लेखक, उच्चकोटि के संपादक तथा विलक्षण प्रतिभा वाले सहृदय कवि हैं।
श्री अटल जी के पत्रकारीय जीवन पर पुस्तक लिखने का यह प्रयास निसंदेह सराहनीय है। अटल जी जैसे विराट व्यक्तित्व वाले लेखक, कवि और पत्रकार के कृतित्व को एक जगह संग्रहित करना कोई सरल कार्य नहीं है। विभिन्न विषयों राष्ट्र, समाज, संस्कृति आदि पर उनके लेखों को प्रस्तुत कर उसे पुस्तक का रूप देना दुरूह कार्य है। सौरभ जी इस अनुष्ठान में शत-प्रतिशत सफल रहे हैं। पुस्तक प्रेरक हैं। डॉ0 सौरभ मालवीय जी का वैचारिक धरातल स्पष्ट है। वे प्राध्यापक और प्रखर वक्ता हैं। इनकी यह कृति अभिनंदनीय है। शुभकामनाएं। इस पुस्तक से पत्रकारों, कवियों, पाठकों व लेखकों को प्रेरणा मिलेगी।

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