Wednesday, March 30, 2022

भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे की विजय है पांच राज्यों का जनसमर्थन


 

-डॉ. सौरभ मालवीय 

योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. मुख्यमंत्री के रूप में यह उनकी दूसरी पारी है. जब वर्ष 2017 में वह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उनके पास शासन का कोई अनुभव नहीं था, परन्तु इस बार उन्हें पांच वर्ष सत्ता में बने रहने का अनुभव है. वह पांच वर्ष की योजनाएं नहीं बना रहे हैं, अपितु वह डेढ़ दशक तक भाजपा को राज्य एवं केंद्र सत्ता स्थापित रखने की रणनीति पर कार्य कर रहे हैं. योगी-दो कैबिनेट में गुजरात मॉडल की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर यूपी के मंत्रिमंडल को आगामी लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत बनाया गया है. इसलिए भाजपा आगामी पन्द्रह वर्षों की रणनीति बनाकर चल रही है. 

देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव में प्राप्त हुई विजय ने भाजपा में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है. इस विजय ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि यह भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे की विजय है जनता ने भाजपा में विश्वास जताया है तथा भाजपा की नीतियों का समर्थन किया हैवर्ष 2024 के  लोकसभा चुनाव में अब अधिक समय नहीं बचा है. उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, क्योंकि यही चुनाव आगे के लोकसभा चुनाव की दिशा निर्धारित करता है। भाजपा ने सेमीफाइनल तो जीत लिया है, अब फाइनल जीतना शेष है. इसलिए भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.

इसलिए योगी-दो के मंत्रिमंडल में सूझबूझ से काम लिया गया है. योगी के कुल 52 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 16 कैबिनेट, 14 स्वतंत्र प्रभार एवं 20 राज्य मंत्री हैं. पिछली सरकार में मंत्री रहे दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा, सतीश महाना, नीलकंठ तिवारी, सिद्धार्थ नाथ सिंह, जय प्रताप सिंह पटेल, सतीश महाना, मोहसिन रजा एवं आशुतोष टंडन सहित 20 लोगों को इस बार योगी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया गया. 

ओबीसी नेता व एमएलसी केशव मौर्य दूसरी बार उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं, यद्यपि वह सिराथू से चुनाव हार गए थे. उनके साथ ही बृजेश पाठक को भी उप मुख्यमंत्री बनाया गया है. पिछली सरकार में वह कानून मंत्री थे उन्होंने दिनेश शर्मा का स्थान लिया है. सुरेश कुमार खन्ना को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह शाहजहांपुर से नौवीं बार विजयी होकर सदन पहुंचे हैं. पिछली कैबिनेट में वह वित्त मंत्री थे. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह पिछली सरकार में कृषि मंत्री थे. प्रदेश अध्यक्ष व एमएलसी स्वतंत्र देव सिंह को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह पिछली सरकार में भी मंत्री थे. नंद गोपाल नंदी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह पिछली सरकार में भी मंत्री थे. धर्मपाल सिंह को भी कैबिनेट में स्थान मिला है. वह पिछली सरकार में सिंचाई मंत्री थे. उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को भी कैबिनेट में स्थान दिया गया है. जात नेता लक्ष्मी नारायण चौधरी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह बहुजन समाज पार्टी से भाजपा में आए हैं. समाजवादी पार्टी के गढ़ मैनपुरी से विजयी हुए जयवीर सिंह को भी कैबिनेट में स्थान दिया गया है. अनिल राजभर को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, वह पिछली सरकार में भी मंत्री थे. वह सपा सरकार में भे रह चुके हैं. राकेश सचान को भी कैबिनेट में स्थान दिया गया है. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा को भी योगी कैबिनेट में स्थान दिया गया है. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास माने जाते हैं. वह आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे. तीसरी बार वियाधक बने योगेंद्र उपाध्याय को भी कैबिनेट में स्थान दिया गया है.

एमएलसी भूपेन्द्र चौधरी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वह पिछली सरकार में पंचायती राज मंत्री थे.एमएलसी जितिन प्रसाद को भी कबिनेट में स्थान दिया गया है. वह कांग्रेस से भाजपा में आए हैं. एमएलसी आशीष पटेल को भी कैबिनेट में स्थान दिया गया है. वह अपना दल एस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. एमएलसी संजय निषाद को भी कैबिनेट में स्थान मिला है. वह निषाद पार्टी के अध्यक्ष हैं.

भाजपा पिछड़ा मोर्चा के अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप एवं पूर्व आइपीएस असीम अरुण को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. एमएलसी धर्मवीर प्रजापति, संदीप सिंह लोधी, अजीत पाल, रवीन्द्र जायसवाल को भी स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. ये पिछली सरकार में भी मंत्री थे. कपिलदेव अग्रवाल, गुलाब देवी, गिरीश चंद्र यादव, जयंत राठौर, दयाशंकर सिंह, अरुण कुमार सक्सेना, कांग्रेस से भाजपा में आए दया शंकर दयालु, सपा से भाजपा में आए नितिन अग्रवाल एवं एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को भी स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है.

संजीव कुमार गौड़ को राज्य मंत्री बनाया गया है. वह पिछली सरकार में भी मंत्री थे. पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष जसवंत सैनी, मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटीक, बलदेव सिंह औलख, मनोहर लाल पंथ, राकेश निषाद, संजय गंगवार, बृजेश सिंह,  कृष्ण पाल मलिक, अनूप प्रधान वाल्मीकी, सोमेंद्र तोमर, सुरेश राही, राकेश राठौर, सतीश शर्मा, प्रतिभा शुक्ला, विजय लक्ष्मी गौतम एवं रजनी तिवारी को भी राज्य मंत्री बनाया गया है. एबीवीपी नेता दानिश आजाद अंसारी को भी राज्य मंत्री बनाया गया है. विशेष बात यह है कि वह न विधायक हैं और न एमएलसी. वह योगी मंत्रिमंडल का एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं.

इस मंत्रिमंडल की विशेष बात यह है कि योगी ने वर्ष 2024 के लोकसभा को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण को साधने का प्रयास किया है. मंत्रिमंडल में सबसे अधिक 18 मंत्री ओबीसी, 10 ठाकुर, आठ ब्राह्मण, सात दलित, तीन जाट, तीन बनिया, दो पंजाबी और एक मुस्लिम चेहरा सम्मिलित है. दानिश आजाद अंसारी ऐसे समाज से आते हैं, जिनकी यूपी में बड़ी जनसंख्या है. पूर्वांचल अंसारियों का गढ़ है. भाजपा को इस चुनाव में मुसलमानों के आठ प्रतिशत वोट मिले हैं, जो कांग्रेस और बसपा को मिले मतों से भी अधिक हैं. इतना ही नहीं, भाजपा को मुस्लिम महिलाओं का भी समर्थन मिल रहा है. पिछले चुनाव में तीन तलाकके मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा का खुलकर समर्थन किया था. इस बार हिजाब प्रकरणके पश्चात भी भाजपा को मुस्लिम महिलाओं का भारी समर्थन मिला. आज मुस्लिम महिलाएं कुप्रथाओं की बेड़ियां तोड़कर आगे बढ़ रही हैं. वे देश की मुख्यधारा में सम्मिलित होना चाहती हैं. ऐसी स्थिति में वे उसी पार्टी का समर्थन करेंगी, जो उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करे.   

योगी सरकार अपनी जनहितैषी योजनाओं पर गंभीरता से कार्य कर रही है. योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के अगले ही दिन कोरोना काल में आरंभ की गई नि:शुल्क राशन वितरण योजना को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है, जिससे राज्य के 15 करोड़ लोगों को लाभ होगा.

( लेखक- मीडिया प्राध्यापक एवं राजनीतिक विश्लेषक है। )

 

Sunday, March 20, 2022


 

हिजाब प्रकरण : अलग दिखने की जिद क्यों ?

-डॉ. सौरभ मालवीय

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. यहां सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं. सभी को अपने-अपने धर्म के अनुसार धार्मिक कार्य करने एवं जीवन यापन करने का अधिकार प्राप्त है. परन्तु कुछ अलगाववादी शक्तियों के कारण देश में किसी न किसी बात को लेकर प्राय: विवाद होते रहते हैं. इन विवादों के कारण जहां शान्ति का वातावरण अशांत हो जाता है, वहीं लोगों में मनमुटाव भी बढ़ जाता है. ताजा उदाहरण है हिजाब प्रकरण. कर्नाटक के उडुपी से प्रारंभ हुआ हिजाब प्रकरण थमने का नाम ही नहीं ले रहा है.

मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिए जाने के पश्चात यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है. कर्नाटक उच्च न्यायालय का कहना है कि छात्रों को स्कूलों में हिजाब नहीं, यूनिफॉर्म पहननी होगी. न्यायालय का कहना है कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है. हिजाब मामले में राज्य के एडवोकेट जनरल प्रभुलिंग नवादगी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है और इसके उपयोग पर रोक लगाना संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने कहा कि हिजाब धर्म के पालन के अधिकार के अंतर्गत दिखावे का भाग है. पूर्ण पीठ में न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी, न्यायाधीश जेएम काजी एवं न्यायाधीश कृष्णा एम दीक्षित सम्मिलित हैं. एडवोकेट जनरल ने कहा कि सरकार का आदेश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन भी नहीं करता. यह अनुच्छेद भारतीय नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है. उन्होंने यह भी कहा कि यूनिफॉर्म के बारे में सरकार का आदेश पूरी तरह शिक्षा के अधिकार कानून के अनुरूप है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि उडुपी के सरकारी प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में यूनिफॉर्म का नियम वर्ष 2018 से लागू है, परन्तु समस्या तब प्रारंभ हुई जब विगत दिसंबर में कुछ छात्राओं ने प्राचार्य से हिजाब पहनकर कक्षा में जाने की अनुमति मांगी. इस पर उनके अभिभावकों को कॉलेज में बुलाया गया और यूनिफॉर्म लागू होने की बात कही गई, परन्तु छात्राएं नहीं मानीं और उन्होंने विरोध आरंभ कर दिया. जब मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो उसने मामले को तूल न देने की अपील करते हुए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की बात कही. किन्तु छात्राओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ. जब मामला बढ़ गया, तो सरकार ने 5 फरवरी को आदेश देकर ऐसे किसी भी वस्त्र को पहनने से मना कर दिया, जिससे शांति, सौहार्द्र एवं कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही हो.

विशेष बात यह भी है कि उच्च न्यायालय ने पर्दा प्रथा पर भीमराव आंबेडकर की टिप्पणी का भी का उल्लेख करते हुए कहा- "पर्दा, हिजाब जैसी चीजें किसी भी समुदाय में हों तो उस पर बहस हो सकती है। इससे महिलाओं की आजादी प्रभावित होती है। यह संविधान की उस भावना के विरुद्ध है, जो सभी को समान अवसर प्रदान करने, सार्वजनिक जीवन में हिस्सा लेने और पॉजिटिव सेक्युलरिज्म की बात करती है।“

भारत में व्याप्त अनेक कुप्रथाओं ने महिलाओं को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा है. पर्दा प्रथा भी उनमें से एक है. इस प्रथा के कारण महिलाओं को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ा. उन्हें घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया गया. पुनर्जागरण के युग में समाज सुधारकों ने इन कुप्रथाओं के विरोध में जनजागरण आन्दोलन चलाया. इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले. समय के साथ-साथ समाज में परिवर्तन आया. हिन्दू व अन्य समुदायों के साथ-साथ मुसलमान भी अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने लगे, परन्तु उनका अनुपात अन्य समुदायों की तुलना में बहुत ही कम है, जो चिंता का विषय है. देश में सबको समान रूप से अधिकार दिए गए हैं. शिक्षण संस्थानों में भी सबके साथ समानता का व्यवहार किया जाता है. प्रश्न यह है कि कुछ लोग स्वयं को दूसरों से पृथक क्यों रखना चाहते हैं?   

वास्तव में हिजाब प्रकरण मुस्लिम समाज की लड़कियों को शिक्षा से दूर रखने का एक षड्यंत्र है. चूंकि शिक्षा ही मनुष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकाल कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है, इसलिए रूढ़िवादी मानसिकता के लोग महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखने के लिए ऐसे षड्यंत्र रचते रहते हैं, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज न उठा सकें. मुस्लिम समाज में महिलाओं की जो स्थिति है, वह किसी से छिपी नहीं है. जब मुस्लिम बहन-बेटियों के हक में भाजपा सरकार ‘तीन तलाक’ पर रोक लगाने का कानून लाई थी, तो शिक्षित और जागरूक मुस्लिम महिलाओं ने इसका खुले दिल से स्वागत किया था. उस समय भी रूढ़िवादी लोगों ने जमकर इसका विरोध किया था, परन्तु उनकी एक न चली. इस कानून ने मुस्लिम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने का कार्य किया. अब कोई भी व्यक्ति ‘तीन तलाक’ कहकर अपनी पत्नी को घर से नहीं निकाल सकता. ऐसा करने पर उसे दंड दिए जाने का प्रावधान है.

उल्लेखनीय है कि यूरोप के अनेक देशों ने हिजाब अर्थात बुर्का पहनने पर आंशिक या पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिसमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड एवं स्विट्जरलैंड आदि सम्मिलित हैं। इटली और श्रीलंका में भी बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है. इन सभी देशों में आदेश का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक दंड दिए जाने का प्रावधान है.

कुछ लोग हिजाब के मामले में कुरआन की दुहाई देते हुए कहते हैं कि इसमें कई स्थान पर हिजाब का उल्लेख किया गया है, परन्तु वे इस बात पर चुप्पी साध लेते हैं कि ड्रेस कोड के संदर्भ में ऐसा कुछ नहीं कहा गया. इस्लाम के पांच मूलभूत सिद्धांतों में भी हिजाब सम्मिलित नहीं है. वास्तव में धर्म का संबंध आस्था एवं विश्वास से होता है, जबकि वस्त्रों का संबंध क्षेत्र विशेष एवं आवश्यकताओं से होता है. उदाहरण के लिए किसी भी ठंडे स्थान पर रहने वाले लोग जो भारी भरकम गर्म वस्त्र पहनते हैं, वे किसी गर्म क्षेत्र में रहने वाले लोग नहीं पहन सकते. ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि भारत में कहीं भी हिजाब अथवा बुर्का पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, परन्तु जिन संस्थानों में ड्रेस कोड लागू है, वहां हिजाब पहनने की जिद क्यों की जा रही है ?

Saturday, March 19, 2022

डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक छाई उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में


योगी सरकार की नीतियों पर लिखी पुस्तक ‘अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश’ छाई रही

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी ने विजय प्राप्त की है। इस चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों पर लिखी पुस्तक ‘अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश’ छाई रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले साल 29 अक्टूबर को लखनऊ में डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश’ का विमोचन किया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, संगठन मंत्री सुनील बंसल सहित शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर , केन्द्रीय मंत्री महेंद्र पांडेय, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या एवं दिनेश शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

लेखक डॉ. सौरभ मालवीय का कहना है कि इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों को सरकार की उन योजनाओं से अवगत कराना है, जो उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही हैं ताकि वे उनका लाभ उठा सकें। प्राय: देखने में आया है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें नागरिकों के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। प्रत्येक योजना का यही उद्देश्य होता है कि उसका लाभ सभी पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे। जब योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचता है, तो वह योजना सफल हो जाती है। इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं। इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं, जिनके नाम परिवर्तित कर दिए गए हैं। इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं, जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें पुन : प्रारम्भ किया गया है। इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं। देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं। पहली योजनाएं वे हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में संचालित की जाती हैं। दूसरी योजनाएं वे हैं, जो राज्य सरकारें चलाती हैं। राज्य में संचालित अधिक योजनाएं केंद्र द्वारा ही चलाई जाती हैं। इनके कार्यान्वयन पर व्यय होने वाली राशि का एक बड़ा भाग केंद्र सरकार वहन करती है और एक भाग राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।   

 पुस्तक में भाजपा-नीत सरकार के संकल्प तथा उस संकल्प को पूर्ण करने के अथक प्रयास को दर्शाया है। योगी आदित्य नाथ के मुख्यमंत्रित्व काल में उत्तर प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक के जीवन को सुखी एवं समृद्ध करने के सपने को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। भाजपा शासन के पांच वर्ष की समयावधि में उत्तर प्रदेश ने लगभग सभी क्षेत्रों में उन्नति की है। कृषि, उद्योग, रोजगार, आवास, परिवहन, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा व्यवस्था, धर्म, संस्कृति, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में योगी सरकार ने सराहनीय कार्य किए हैं। विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांगजन को पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अनाथ बच्चों के भरण-पोषण की भी व्यवस्था की गई है। जिन परिवारों में कोई कमाने वाला व्यक्ति नहीं है, सरकार उन्हें भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। निर्धन परिवार की लड़कियों एवं दिव्यांगजन के विवाह लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है। निराश्रित गौवंश के संरक्षण पर भी योगी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सरकार की इन्हीं जन हितैषी योजनाओं के कारण लोगों ने उन्हें पुन: सत्ता सौंपी है। इस पुस्तक में जन साधारण के हित को सर्वोपरि रखा है।

डॉ. सौरभ मालवीय

( लेखक- मीडिया प्राध्यापक एवं राजनीतिक विश्लेषक है। )