देश में ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांगजन हैं। सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सशक्तिकरण और आर्थिक समावेश के लिए निरंतर कार्यरत है। केंद्र सरकार ने दिव्यांग जनों के कल्याण के लिए कई उपयोगी योजनाएं प्रारंभ की हैं।
केंद्र सरकार ने पुराने दिव्यांग जन अधिनियम-1995 को निरस्त करते हुए दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम-2016 पारित किया है, जो 19 अप्रैल, 2017 से लागू हो चुका है। नये अधिनियम में दिव्यांगों को बहुत सारे अधिकार दिए गए है। नया अधिनियम राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों पर यह जिम्मेदारी देता है कि वे ऐसी व्यवस्था करें कि दिव्यांग दूसरे नागरिकों के समान ही अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें। यह अधिनियम राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश को यह जिम्मेदारी देता है कि वे ऐसी योजनाएं/कार्यक्रम बनाए तथा ऐसी अवसंरचना विकसित करें कि दिव्यांगों का सशक्तिकरण और समावेश सुनिश्चित हो सके। केन्द्र सरकार अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को नए तरीके से निर्मित करने की प्रक्रिया में संलग्न है और राज्य सरकारों व केन्द्र शासित प्रदेशों से यह आशा की जाती है कि वे भी अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में तदनुसार परिवर्तन करें। इसी परिप्रेक्ष्य में पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में हुआ।
इस अधिनियम में दिव्यांगता को गतिशील और व्यापक अर्थ में पारिभाषित किया गया है। दिव्यांगता के प्रकारों की संख्या सात से बढ़ाकर 21 कर दी गई है। इनमें नेत्रहीनता,दृष्टिहीनता, कुष्ठ उपचारित जन, श्रवण दुर्बलता (बहरापन और सुनने में परेशानी), गतिहीनता, बौनापन, बौद्धिक दुर्बलता, मानसिक रूग्णता,स्वलीनता, मस्तिष्क पक्षाघात, मांसपेशीय दुर्विकास,दीर्घकालिक मानसिक स्थितियां, विशेष अध्ययन दुर्बलता, विविध स्लोरोसिस, बोलने और भाषा की दुर्बलता, थैलेसीमिया, होमो फीलिया, लाल रक्त कोशिका रोग, बहरेपन और नेत्रहीनता से जुड़ी विविध दिव्यांगता, एसिड हमले का पीड़ित और पारकिंसन रोग सम्मिलित हैं।
सरकार दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत और उच्च शिक्षा में पांच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। पिछले तीन वर्षों में उन्हें छह हजार से ज्यादा कैंप लगाकर, नौ लाख से अधिक आवश्यक उपकरण भी प्रदान किए गए हैं। केंद्र सरकार गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के 30 मिलियन से अधिक बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को प्रत्यक्ष हस्तांतरण के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत अभावों से जूझ रहे परिवारों तक नकद हस्तांतरण की सुविधा खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा समेत समग्र सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है।
वर्ष 2016 में एनएसएपी योजना को सर्वाधिक महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत लाने का जबसे रणनीतिक निर्णय लिया गया, तब से केन्द्र सरकार योजना की शत-प्रतिशत जरूरतें पूरी करने के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता को लगातार बढ़ा रही है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए एनएसएपी योजना को 9975 करोड़ रुपये आवंटित किए गए,जो वर्ष 2014-15 के दौरान 7241 करोड़ रुपये के आवंटित बजट से 38 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान एनएसएपी के तहत राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को 8696 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जो वर्ष 2014-15 के दौरान जारी राशि से 23 प्रतिशत अधिक है।
योजना में पारदर्शिता बढ़ाने और कमियां हटाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एनएसएपी के अंतर्गत लाभार्थियों के आंकडें एनएसएपी-पीपीएस पर डिजिटल फार्म में रखे गए हैं। योजना के अंतर्गत 173 लाख लाभार्थियों के आधार नंबर उनकी सहमति से जोड़े गए हैं। इस दिशा में तेजी लाते हुए डिजिटल लेन-देन की सुविधा बढ़ाने के लिए लाभार्थियों की सहमति से आधार आधारित भुगतान व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य है, ताकि किसी भी तरह की संभावित कमियों को पूरी तरह से दूर किया जा सके। आधार आधारित व्यवस्था से बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों को बैंक/डाकघर के माध्यम से उनके गांव तक भुगतान पहुंचाया जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2017-2018 के प्रारंभ में केवल छह राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों गुजरात, लक्षद्वीप, बिहार, दादर एवं नगर हवेली, दमन एवं द्वीप, झारखंड और महाराष्ट्र में ही डिजिटल लेन-देन के माध्यम से एनएसएपी सहायता पहुंचायी गई और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए एक 1.73 करोड़ लेन-देन दर्ज किए गए। 31 मार्च, 2018 को समाप्त वित्तीय वर्ष में विशेष प्रयास के अंतर्गत आन्ध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दमन एवं द्वीप, दादर एवं नगर हवेली, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र. मेघालय, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तरप्रदेश जैसे 20 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए 10.73 करोड़ लेन-देन हुए। अत: 2016-17 में डीबीटी के जरिए डिजिटल लेन-देन की तुलना में 2017-18 में 520 प्रतिशत लेन-देन की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। वर्ष 2017-18 में 6791.70 करोड़ रुपये मूल्य के डिजिटल लेन-देन किए गए जो इस साल जारी धनराशि का लगभग 78 प्रतिशत है।
विभिन्न तरह के अभावों को कम करने की कोशिशों को और अधिक कारगर करने के उद्देश्य से मुद्दे के अभिसरण पर अधिक से अधिक जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के अंतर्गत मासिक सहायता 300 से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति महीना करने के अलावा अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में भी दिव्यांग लोगों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। एमजीएनआरइजीए के तहत कार्यस्थलों पर पेयजल उपलब्ध कराने, पालना घर की व्यवस्था इत्यादि में दिव्यांग लोगों को काम दिलाने को प्राथमिकता दी गई है। दिव्यांग श्रमिकों को अन्य श्रमिकों के बराबर ही मजदूरी दी जाती है। दिव्यांग श्रमिकों को उनके अनुसार उचित काम के चुनाव जैसी कई और छूट दी गई है। वित्त वर्ष 2017-18 में एमजीएनआरइजीए के अंतर्गत लगभग 4.7 लाख दिव्यांग श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।
डीडीयू-ग्रामीण कौशल योजना के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए लोगों के कौशल बढ़ाने के लक्ष्य का कम से कम तीन प्रतिशत कौशल विकास लक्ष्य दिव्यांगों के लिए सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। इस योजना के अंतर्गत दिव्यांग योजनाओं के लिए पृथक प्रशिक्षण केन्द्र हो सकते हैं और नियमित परियोजना से अलग इनकी लागत भी अलग हो सकती है। डीडीयू-ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत देशभर में अभी कुल 243 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिसमें दिव्यांग उम्मीदवारों को भी प्रशिक्षित करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त डीडीयू-जीकेवाई के अंतर्गत पांच विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें 1500 दिव्यांग उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाना है। वित्त वर्ष 2016-17 में 662 उम्मीदवारों की तुलना में डीडीयू-जीकेवाई परियोजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2017-18 (फरवरी 2018 तक) में 912 दिव्यांग उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया।
सरकार दिव्यांगों के लिए आवासीय सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (जी) में भी राज्यों के लिए यह प्रावधान है कि वह कम से कम तीन प्रतिशत दिव्यांग लाभार्थी सुनिश्चित करें। इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगों के लिए 5682 घर स्वीकृत किए गए, जिनमें से 1655 घरों का निर्माण हो चुका है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थॉवरचंद गहलोत के अनुसार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दिव्यांग जनों के लिए सहायता उपकरण वितरित करने, सभी प्रकार के विकास के लिए अभिनव कार्यक्रमों और योजनाओं का शुभारंभ करने तथा समाज में उनके सामाजिक आर्थिक पुनर्वास करने में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह मंत्रालय समाज में दिव्यांग जनों के सम्मानीय जीवन के लिए बेहतर शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा और पुनर्वास के लिए किए गए प्रयासों के कारण महत्वपूर्ण और प्रमुख बन गया है।
निंसंदेह सरकार की इन योजनाओं से दिव्यांग जनों के जीवन में सुधार आएगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिव्यांग जनों को उन सब योजनाओं का लाभ मिले, जो उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही हैं।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)








