Monday, April 13, 2026

आया बैसाखी का पावन पर्व


डॊं. सौरभ मालवीय
बैसाखी ऋतु आधारित पर्व है. बैसाखी को वैसाखी भी कहा जाता है. पंजाबी में इसे विसाखी कहते हैं. बैसाखी कृषि आधारित पर्व है. जब फ़सल पक कर तैयार हो जाती है और उसकी कटाई का काम शुरू हो जाता है, तब यह पर्व मनाया जाता है. यह पूरी देश में मनाया जाता है, परंतु पंजाब और हरियाणा में इसकी धूम अधिक होती है. बैसाखी प्रायः प्रति वर्ष 13 अप्रैल को मनाई जाती है, किन्तु कभी-कभी यह पर्व 14 अप्रैल को भी मनाया जाता है.

यह सिखों का प्रसिद्ध पर्व है. जब मुगल शासक औरंगजेब ने अन्याय एवं अत्याचार की सभी सीमाएं तोड़कर  श्री गुरु तेग बहादुरजी को दिल्ली में चांदनी चौक पर शहीद किया था, तब इस तरह 13 अप्रैल,1699 को श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने अनुयायियों को संगठित कर खालसा पंथ की स्थापना की थी. सिखो के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव का जन्म इसी महीने में हुआ था. सिख इसे सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं. गोविंद सिंह जी ने निम्न जाति के समझे जाने वाले लोगों को एक ही पात्र से अमृत छकाकर पांच प्यारे सजाए, जिन्हें पंज प्यारे भी कहा जाता है. ये पांच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे. सब अलग-अलग जाति, कुल एवं अलग स्थानों के थे. अमृत छकाने के बाद इनके नाम के साथ सिंह शब्द लगा दिया गया.
इस दिन श्रद्धालु अरदास के लिए गुरुद्वारों में जाते हैं. आनंदपुर साहिब में मुख्य समारोह का आयोजन किया जाता है. प्रात: चार बजे गुरु ग्रंथ साहिब को समारोहपूर्वक कक्ष से बाहर लाया जाता है. फिर दूध और जल से प्रतीकात्मक स्नान करवाया जाता है. इसके पश्चात गुरु ग्रंथ साहिब को तख्त पर बिठाया जाता है. इस अवसर पर पंज प्यारे पंजबानी गाते हैं. दिन में अरदास के बाद गुरु को कड़ा प्रसाद का भोग लगाया जाता है. प्रसाद लेने के बाद श्रद्धालु गुरु के लंगर में सम्मिलत होते हैं. इस दिन श्रद्धालु कारसेवा करते हैं. दिनभर गुरु गोविंदसिंह और पंज प्यारों के सम्मान में शबद और कीर्तन गाए जाते हैं.
शाम को आग के आसपास इकट्ठे होकर लोग नई फ़सल की की खुशियां मनाते हैं और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है.

बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है. हिन्दुओं के लिए भी बैसाखी का बहुत महत्व है. पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना इसी दिन की थी.  इसी दिन अयोध्या में श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था. राजा विक्रमादित्य ने विक्रमी संवत का प्रारंभ इसी दिन से किया था, इसलिए इसे विक्रमी संवत कहा जाता है. बैसाखी के पावन पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. महादेव और दुर्गा देवी की पूजा की जाती है. इस दिन लोग नये कपड़े पहनते हैं. वे घर में मिष्ठान बनाते हैं. बैसाखी के पर्व पर लगने वाला बैसाखी मेला बहुत प्रसिद्ध है. जगह-जगह विशेषकर नदी किनारे बैसाखी के दिन मेले लगते हैं. हिंदुओं के लिए यह पर्व नववर्ष की शुरुआत है. हिन्दू इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं.

Sunday, April 12, 2026

हिंदी पत्रकारिता ने ही स्वाभिमान का भाव जगाया : प्रो. सौरभ मालवीय









वाराणसी, बीएचयू।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : ऐतिहासिकता, परिवर्तन और चुनौतियां” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. सौरभ मालवीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को नमन करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने ही हमारे भीतर स्वाभिमान का भाव उत्पन्न किया है। जो समाज अपनी सभ्यता और संस्कृति से कट जाता है, वह अंततः नष्ट हो जाता है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस देश की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति पर गर्व करती है, वह देश कभी अस्थिर या कमजोर नहीं हो सकता।
हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसने भारत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, महामना मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी, विष्णु पराड़कर और भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे महान पत्रकारों और विचारकों ने पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण किया और स्वतंत्रता आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार हिंदी पत्रकारिता थी, जिसने समाज के सभी वर्गों में चेतना जागृत कर कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई और देश को स्वतंत्रता के लिए तैयार किया।
काशी की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काशी घराना हमेशा से समृद्ध और प्रभावशाली रहा है। भारतीय चिंतन की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा कि “जहां सत्य है, सुंदर है, वहीं भारत है।” उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना भारत की पहचान है।
वर्तमान पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज भारत में दो प्रकार की पत्रकारिता देखने को मिल रही है, एक ‘भारत’ की पत्रकारिता और दूसरी ‘इंडिया’ की पत्रकारिता। उन्होंने इसे दृष्टिकोण और विचारधारा के स्तर पर उभरती हुई दो अलग धाराएं बताया।

साधारण सभा





लखीमपुर खीरी | दिनांक: 12 अप्रैल 2026
पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (सीबीएसई ), लखीमपुर खीरी में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की साधारण सभा बैठक शुरू हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मा. यतींद्र शर्मा (अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिव्यकांत शुक्ल (क्षेत्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री,पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने अपने विचार व्यक्त किए। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री हेमचंद जी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री) एवं डॉ. राम मनोहर जी (क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। मंचासीन अतिथियों का परिचय प्रदेश निरीक्षक अवध प्रांत श्री रामजी सिंह द्वारा कराया गया।
अपने संबोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने विद्या भारती की गौरवशाली शैक्षिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए संगठन की स्थापना से लेकर वर्तमान तक के विकास क्रम का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने संस्थापकों एवं महान विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान सभी दिवंगत महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।
इसके पश्चात क्षेत्रीय सह मंत्री श्री रामनाथ गुप्त द्वारा गत साधारण सभा बैठक की कार्यवाही का वाचन एवं पुष्टि की गई। तत्पश्चात डॉ. सौरभ मालवीय द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर उसकी पुष्टि कराई गई।
बैठक में साधारण सभा के सभी सदस्य, प्रांतीय समितियों के पदाधिकारी तथा विद्यालय के प्रबंधक विमल अग्रवाल और उपाध्यक्ष रवि भूषण साहनी उपस्थित रहें.

समाचार पत्र में

 



Saturday, April 11, 2026

काशी विश्वनाथ



सुप्रभात!
काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा भगवान शिव के दर्शन का सौभाग्य मिला—यह वास्तव में अत्यंत पवित्र और आनंददायक क्षण है।
काशी की महिमा ही ऐसी है कि यहाँ हर दर्शन आत्मा को शांति और ऊर्जा से भर देता है।
“हर हर महादेव! जय काशी विश्वनाथ!” 🕉️
बाबा से यही प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें।
हर हर महादेव

Friday, April 10, 2026

टीवी पर लाइव





ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों का लगातार हनन हो रहा है।  राज्य सरकार चुनाव के दौरान Election Commission of India के साथ पूर्ण सहयोग नहीं करती, जिससे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव प्रभावित होते हैं।

 तृणमूल कांग्रेस सरकार “वोट बैंक की राजनीति” कर रही है और सत्ता में बने रहने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।  कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनाव के समय कमजोर हो जाती है, जिससे विपक्षी कार्यकर्ताओं को नुकसान उठाना पड़ता है।

 जनता अब बदलाव चाहती है और इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन निश्चित है। 

 “4 मई को दीदी की विदाई तय है”,   तृणमूल कांग्रेस की हार होगी और राज्य में नई सरकार बनेगी। बंगाल में कमल खिलेगा नया सवेरा होगा.

Tuesday, April 7, 2026

टीवी पर लाइव



सीजफायर (विशेषकर ईरान–इजराइल–अमेरिका जैसे संवेदनशील मुद्दों) पर भारत का रुख शांति और स्थिरता का समर्थन है. 
किसी भी संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। सीजफायर को क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए आवश्यक है.भारत, विशेषकर नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, विश्व मंच पर एक “विश्वसनीय मध्यस्थ” (credible mediator) के रूप में उभरा है।
भारत सभी पक्षों (इजराइल, ईरान, अमेरिका) से संवाद बनाए रखता है.
“सबके साथ संतुलित संबंध” भारत की ताकत है
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत की ऊर्जा सुरक्षा (oil supply)
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
व्यापार और रणनीतिक हित
इन सबको ध्यान में रखकर ही भारत सीजफायर का समर्थन करता है।
 भारत शांति, संवाद और कूटनीति का समर्थक है
भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई है
राष्ट्रीय हित और सुरक्षा सर्वोपरि हैं
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

आया बैसाखी का पावन पर्व

डॊं. सौरभ मालवीय बैसाखी ऋतु आधारित पर्व है. बैसाखी को वैसाखी भी कहा जाता है. पंजाबी में इसे विसाखी कहते हैं. बैसाखी कृषि आधारित पर्व है....