Tuesday, March 17, 2026

सकारात्मक सोच



सुप्रभात! 
सकारात्मक सोच वास्तव में जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है।
जब व्यक्ति सकारात्मक रहता है, तो उसके भीतर ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहता है। इससे कार्य करने की गति भी बनी रहती है, मन प्रसन्न रहता है और स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है। यही सकारात्मकता आगे चलकर लोकमंगल की भावना को भी प्रबल बनाती है, जिससे व्यक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी बनता है।
सकारात्मक सोच ही सफलता, स्वास्थ्य और समाजसेवा का मूल आधार है।

Monday, March 16, 2026

क्षेत्रीय शिशु वाटिका समीक्षा एवं योजना बैठक













दिनांक-14-03-2026 से 15-03-2026 तक
सरस्वती बालिका विद्यालय सूर्यकुंड गोरखपुर में संपन्न हुई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश),  माननीय विजय उपाध्याय (संयोजक शिशु वाटिका), माननीय शैलेश सिंह जी (प्रांत मंत्री गोरक्ष प्रांत), श्री राम सिंह जी (शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक), श्रीमती हीरा सिंह (सह क्षेत्रीय शिशु वाटिका प्रमुख) डाॅ. नीना अस्थाना (मंत्री,सरस्‍वती  बालिका विद्यालय सूर्यकुण्‍ड गोरखपुर) तथा विभिन्न क्षेत्रों की शिशु वाटिका प्रमुख उपस्थिति रहीं।
मुख्य अतिथि सौरभ मालवीय जी ने शिशु वाटिका प्रांत प्रमुख एवं सह प्रांत प्रमुख बहनों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनके क्षेत्रीय प्रांतीय एवं विद्यालय की  शिशु वाटिका में उनके  दायित्वों के क्रियान्वयन, बच्चों की गतिविधियों के विवरणों पर विस्तृत समीक्षा की तथा उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शिशु वाटिका में कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने नवीन सत्र के लिए शिशु वाटिका के विभिन्न दायित्वों एवं कार्य बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में शैलेश सिंह जी ने कहा कि शिशु वाटिका का आधार वाल्मीकि आश्रम शिक्षा पद्धति होना चाहिए तथा भरत, लव-कुश जैसे श्रेष्ठ बालकों का निर्माण होना चाहिए ,जिससे श्रेष्ठ समाज का निर्माण हो.
कार्यक्रम का समापन आभारज्ञापन एवं शांति मंत्र से हुआ।
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टीवी पर लाइव





राहुल गाँधी का कांशीराम जी के प्रति अचानक प्रेम दिखाना एक राजनीतिक बयान है।
बहुजन आंदोलन के महान नेता कांशीराम का जीवन और संघर्ष सामाजिक न्याय समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उनके विचारों और कार्यों का सम्मान केवल बयान देने से नहीं बल्कि उनके सिद्धांतों को व्यवहार में लाने से माना जाता है।
नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार और योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में कांशीराम जी के नाम पर योजनाएँ, स्मारक और सम्मान के कार्य हुए, तब विपक्ष की ओर से उतनी सक्रियता नहीं दिखाई गई। 
कांशीराम जी जैसे महान सामाजिक नेता का सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए।

Sunday, March 15, 2026

गोरखनाथ मंदिर




गोरखनाथ मंदिर में दर्शन करना वास्तव में एक आध्यात्मिक सौभाग्य है। 
यह मंदिर नाथ संप्रदाय के महान योगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि है और यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
यह स्थान योग, तप और साधना की पवित्र भूमि माना जाता है।
नाथ परंपरा की गुरु-शिष्य परंपरा का यह प्रमुख केंद्र है।
यहाँ की आरती, धूना और अखंड ज्योति विशेष आस्था का केंद्र हैं।
“आज गोरखनाथ मंदिर में दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
नाथ योगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि में उपस्थित होकर मन को अद्भुत शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव हुआ।
गुरु की कृपा से जीवन में सेवा, साधना और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली।”

Friday, March 13, 2026

संवाद कार्यक्रम आयोजित





चन्दन चौकी, लखीमपुर खीरी। 11 मार्च 2026
जनजातीय क्षेत्र में संस्कारयुक्त शिक्षा और सांस्कृतिक जागरण के उद्देश्य से संचालित जनजातीय संस्कार केंद्र, चन्दन चौकी में बहनों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने केंद्र की बहनों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण आधार है। इनके संस्कार, परिश्रम और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना समाज को नई दिशा देने का कार्य करती है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि संस्कार केंद्रों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्र की बहनों और बच्चों में शिक्षा, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रभाव जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बहनों को शिक्षा के साथ-साथ अपने पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर बहनों ने भी अपने अनुभव साझा किए और संस्कार केंद्र की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम आत्मीय वातावरण में सम्पन्न हुआ तथा सभी ने समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री मिथिलेश अवस्थी जी, प्रदेश निरीक्षक तथा श्री नरोत्तम जी उपस्थित रहें।

संवाद का स्वराज विषय पर राष्ट्रीय व्याख्यान सम्पन्न


इंदौर (मध्य प्रदेश).माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्व विद्यालय भोपाल तथा इंदौर प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आज इंदौर प्रेस क्लब सभागृह में संवाद का स्वराज विषय पर राष्ट्रीय व्याख्यान कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. यह कार्यक्रम केन्द्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश के कुलपति डॉ. कुलदीपचन्द अग्निहोत्री के मुख्य आतिथ्य में तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला की अध्यक्षता में हुआ. इस अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्व विद्यालय भोपाल के कुलाधिपति एवं सचिव श्री लाजपत आहूजा तथा इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री प्रवीण खारीवाल विशेष रूप से मौजूद थे.
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ.कुलदीपचन्द अग्निहोत्री ने कहा कि स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावरण में हुआ संवाद ही स्वराज की पहचान है. संवाद के पीछे षड़यंत्र हो तो गड़बड़ होती है. अंग्रेजों ने भारत में आर्य एवं अनार्य के रूप में विघटन पैदा करने की कोशिश की. भारत की विविधता को नयी अवधारणा से प्रस्तुत किया. इससे भारत के संबंध में विकृत मानसिकता पैदा हुई. उन्होंने हमारे देश की विविधता के आधार पर देश को बांटने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि विकृत मानसिकता वालों से सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि देशहित में चर्चा होना संवाद का स्वराज है. हमें देश को बांटने वाले तथा तोड़ने वालों की हर चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना चाहिए.
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रो. कुठियाला ने कहा कि शब्द ब्रम्ह है. अब शब्द को ब्रम्ह में नहीं भ्रम में बदला जा रहा है. शब्द सर्वशक्तिमान है. शब्द से विचार बनता है और यह विचार व्यवहार रूप में दिखाई देते हैं. उन्होंने कहा कि संवाद, उद्देश्यपरक होना चाहिए. संवाद से सहमति बनना चाहिए. और सहमति के आधार पर परिणाम भी मिलना चाहिए, तभी संवाद की सर्थकता होती है. संवाद को आडम्बर नहीं बनने देना चाहिए. व्यर्थ का संवाद नहीं करना चाहिए. राष्ट्रीय हित में संवाद होना चाहिए. संवाद को विवाद नहीं बनने देना चाहिए. संवाद की प्रकृति विविधता भरी है. जिस तरह प्रकृति में विविधता है, उसी तरह संवाद में भी विविधता होती है. उन्होंने कहा कि विचार से ही अभिव्यक्ति बनती है. अभिव्यक्ति के माध्यम अलग-अलग होते हैं. उन्होंने कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति में दायित्व का बोध होना चाहिए. संवाद जब दायित्वविहीन हो जाते हैं तब समाज टूटने लगता है. सकारात्मक संवाद बढ़ने से नकारात्मक संवाद अपने आप समाप्त हो जाते हैं.
कार्यक्रम में कुलाधिपति एवं सचिव श्री लाजपत आहूजा ने विषय का प्रतिपादन किया. उन्होंने कहा कि संवाद की परम्परा हमारी सदियों पुरानी परंपरा है. संवाद का स्वराज हमारी विशेष पहचान है. सहिष्णुता हमारी प्रकृति में है.
कार्यक्रम में इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार श्री शशीन्द्र जलधारी ने कविता का वाचन किया. कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्व विद्यालय भोपाल द्वारा प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया. कार्यक्रम का संचालन श्री सौरव मालवीय ने किया.

Thursday, March 12, 2026

टीवी पर लाइव



सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की घबराने की आवश्यकता नहीं है। 
सरकार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन भारत ने अपनी संतुलित और दूरदर्शी नीति के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया है।

सकारात्मक सोच

सुप्रभात!  सकारात्मक सोच वास्तव में जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है। जब व्यक्ति सकारात्मक रहता है, तो उसके भीतर ऊर्जा का प्रवाह निरंतर...