देवरिया गंगा की साकार अनुभूति
कल शिवेश प्रताप के स्नेहिल आमंत्रण पर उनके गांव देवरिया गंगा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह यात्रा केवल एक स्थान विशेष तक पहुंचना नहीं था, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और प्रकृति के समीप जाने का आत्मिक अवसर था।
गांव की पावन माटी, खेत-खलिहान, आम्र-वाटिकाएँ, स्वच्छ आकाश और शीतल समीर—सब मिलकर मानो जीवन का वास्तविक स्वरूप दिखा रहे थे। प्रकृति से संवाद सहज हो जाता है; न कृत्रिमता, न आडंबर—सिर्फ अपनापन और सरलता।
शिवेश प्रताप और उनके परिवार का आत्मीय स्वागत, बड़ों का आशीर्वाद और बच्चों की निष्कलुष मुस्कान ने मन को भाव-विभोर कर दिया। वास्तव में गांव संस्कारों का तीर्थ है—जहां रिश्ते औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मिक होते हैं।
देवरिया गंगा की यह यात्रा स्मरण दिलाती है कि गांव हमारी पहचान है, हमारी जड़ है, और सच अर्थों में हमारा तीर्थ है।


































