Sunday, November 1, 2026

संस्कार से व्यक्ति, व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण : डॉ. सौरभ मालवीय










दो दिवसीय 24वें प्रांतीय संस्कृति महोत्सव एवं गणित-विज्ञान मेले का भव्य समापन, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता हुए सम्मानित

तिर्वा (कन्नौज)। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिर्वा एवं श्रीमती राम दुलारी गहोई सरस्वती शिशु मंदिर तिर्वा में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 24वें प्रांतीय संस्कृति महोत्सव एवं गणित-विज्ञान मेले का भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष तथा विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज, तिर्वा के प्राचार्य डॉ. पुष्पेंद्र चहर उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर विद्या भारती कानपुर प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री रजनीश पाठक, प्रदेश निरीक्षक श्री अयोध्या प्रसाद मिश्र, प्रांतीय विज्ञान संयोजक श्री ज्ञानेंद्र जी, सह संयोजक श्री राजीव जी, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधक श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्त तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिर्वा के प्रबंधक श्री त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय के प्रबंधक श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्त, श्री त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी तथा प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार मिश्रा एवं श्री आशीष कुमार दीक्षित ने अतिथियों का अंगवस्त्र एवं मां अन्नपूर्णा का चित्र भेंटकर स्वागत एवं सम्मान किया।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि संस्कार से व्यक्ति, व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है। यही विद्या भारती की शिक्षा पद्धति का मूल उद्देश्य और विशिष्ट पहचान है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान और कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, संवेदना, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि 'देश हमें देता है सबकुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें' का भाव विद्या भारती के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का आधार बनता है। मानवता के कष्टों को दूर करने तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए चिंतन करना ही हमारी शिक्षा की विशिष्टता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ना समय की आवश्यकता है।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी भविष्य के वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता हैं। इस विज्ञान मेले में आपकी सहभागिता, सफलता और अनुभव आपकी प्रतिभा को नई दिशा देंगे। यह मंच आपको नए प्रयोग करने, प्रश्न पूछने, जिज्ञासु बनने तथा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करेगा।

डॉ. मालवीय ने कहा कि विज्ञान मेला एवं वैदिक गणित केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, श्रुति परंपरा और ऋषि परंपरा के पुनरुत्थान के सशक्त माध्यम हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कारों के साथ अंतर्निहित वैज्ञानिक प्रतिभा, तार्किक क्षमता, अनुसंधान कौशल और नवाचार की भावना विकसित करना है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वंदना सत्र, भोजन मंत्र और चित्र प्रदर्शनी जैसे माध्यम विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव तथा अपनी ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान का भाव जागृत करते हैं। भारतीय परंपरा में ज्ञान, विज्ञान और जीवन मूल्यों का अद्भुत समन्वय रहा है। आवश्यकता है कि हम इस विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं।

विज्ञान मेले में शिशु, बाल, किशोर एवं तरुण वर्ग के विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्श, प्रश्न मंच, पत्र वाचन, विज्ञान वार्ता एवं विज्ञान प्रयोग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, तार्किक क्षमता और सृजनात्मक सोच का परिचय दिया। विभिन्न विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भैया-बहिनों को अतिथियों द्वारा मेडल एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में संभाग निरीक्षक श्री शिवकरन जी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, मार्गदर्शक आचार्यों एवं आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

दो दिवसीय इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए विचारों को अभिव्यक्त करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रेरणादायी अवसर प्रदान किया।

Saturday, October 31, 2026

प्रांतीय ज्ञान-विज्ञान मेला एवं संस्कृति महोत्सव का भव्य शुभारंभ

 









बाल वैज्ञानिकों की प्रतिभा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार ने अतिथियों को किया प्रभावित
चौखड़िया, मैगलगंज (खीरी), 31 अक्टूबर। जन शिक्षा समिति, अवध प्रांत द्वारा श्रीपाल सिंह सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, चौखड़िया, मैगलगंज, खीरी में आयोजित प्रांतीय ज्ञान-विज्ञान मेला एवं संस्कृति महोत्सव का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। उत्साह, उमंग और उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में आयोजित इस महोत्सव में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा, रचनात्मकता, नवाचार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की आकर्षक झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का उद्घाटन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय, कस्ता विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सौरभ सिंह सोनू तथा जन शिक्षा समिति, अवध प्रांत के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र बहादुर सिंह ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर प्रदेश निरीक्षक अवध प्रांत श्री मिथिलेश कुमार अवस्थी, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री उत्तम कुमार मिश्रा, प्रबंधक श्री राधेश्याम गुप्ता, अध्यक्ष श्री छविनाथ सिंह यादव, कोषाध्यक्ष श्री राम मोहन गुप्ता, श्री शैलेंद्र बाजपेयी एवं संभाग निरीक्षक श्री श्याम मनोहर शुक्ला सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में दोनों विद्यालयों की प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सहभागिता की। मैगलगंज से श्री विपिन गुप्ता, श्री पवन गुप्ता, श्री अमित मिश्रा, श्री शेर सिंह राठौड़ एवं श्री महेंद्र सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अवध प्रांत के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस प्रांतीय आयोजन में जन शिक्षा समिति, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के लगभग 415 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उद्घाटन के उपरांत अतिथियों ने विज्ञान प्रदर्शनी, गणित प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मॉडलों एवं परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए अतिथियों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और नवाचार की सराहना की।
मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन संभाग निरीक्षक श्री कैलाश चंद्र ने किया तथा अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्य जनों का परिचय संभाग निरीक्षक श्री श्याम मनोहर शुक्ला ने कराया।
अपने उद्बोधन में डॉ सौरभ मालवीय ने ज्ञान-विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभा को निखारने तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। विद्यार्थियों को जिज्ञासु बने रहने, निरंतर अध्ययन करने और अपनी प्रतिभा एवं परिश्रम से नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रांतीय ज्ञान-विज्ञान मेला एवं संस्कृति महोत्सव केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय का महत्वपूर्ण प्रयास है। ऐसे आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सार्थक संवाद स्थापित करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
निश्चित रूप से यह महोत्सव प्रतिभागी भैया-बहनों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, एक-दूसरे से सीखने, अनुभव साझा करने और नवाचार की नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। 

Wednesday, October 28, 2026

टीवी पर लाइव

 



बैलेट पेपर से चुनाव, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला!
28 सीटों पर हुए MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलना विपक्ष की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोकतंत्र में जनता और मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करना चाहिए, न कि अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ना चाहिए।
लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों से नहीं, बल्कि जनादेश का सम्मान करने से लोकतंत्र मजबूत होता है।
जनता सब देख रही है, सब समझ रही है। लोकतंत्र में अंततः जनता का विश्वास और मतदाताओं का निर्णय ही सबसे बड़ा प्रमाण है। 

Sunday, October 25, 2026

समाचार पत्रों में







डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण










भारतीय ज्ञान परम्परा के माध्यम से राष्ट्रबोध जागृत करने का सशक्त प्रयास है पुस्तक
वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) एवं अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा कार्यक्रम में डॉ. सौरभ मालवीय द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण किया गया। पुस्तक में भारतीय संस्कृति, पर्यावरण, भारतीय महापुरुषों के जीवन-दर्शन तथा समसामयिक विषयों पर आधारित लेखों का संकलन है।
पुस्तक के माध्यम से लेखक ने भारतीय ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रबोध के विभिन्न आयामों को रेखांकित किया है। पुस्तक का मूल भाव आत्मबोध के माध्यम से राष्ट्रबोध की भावना को सशक्त करना तथा भारतीय जीवन-दृष्टि के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना है।
लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी, विद्या भारती के अध्यक्ष प्रो. रविंद्र कान्हेरे, विद्या भारती के उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह तथा विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद चरण महंत सहित अनेक शिक्षाविद्, विद्वान एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन तथा शिक्षा के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर विशेष बल दिया गया। पुस्तक का लोकार्पण भारतीय चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध से जुड़े साहित्य के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Saturday, October 24, 2026

दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला सम्पन्न.














काशी, 25 अक्टूबर। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) एवं अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परम्परा की पुनर्प्रतिष्ठा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का समापन हुआ। 24 एवं 25 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से आए 70 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। सात सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों, उसकी समकालीन प्रासंगिकता तथा शिक्षा व्यवस्था में उसके समुचित समावेश को लेकर व्यापक विचार-विमर्श एवं मंथन किया गया।

कार्यशाला में गोविन्द चरण महंत, अवनीश भटनागर, रविन्द्र कान्हेरे, डी. रामकृष्ण, डॉ. प्रदीप जायसवाल, हेमचंद्र, पवन तिवारी तथा डॉ. सौरभ मालवीय सहित विभिन्न विद्वानों एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों की सहभागिता रही।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत को समकालीन संदर्भों में पुनर्स्थापित करना तथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को देश की सांस्कृतिक चेतना, जीवन-दृष्टि, दर्शन और ज्ञान-संपदा से जोड़ना रहा। विभिन्न सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की आवश्यकता पर विचार किया गया।

दो दिवसीय कार्यशाला ने भारतीय ज्ञान परम्परा को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने तथा भारतीय दृष्टि पर आधारित ज्ञान-विमर्श को व्यापक बनाने की दिशा में सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।

संस्कार से व्यक्ति, व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण : डॉ. सौरभ मालवीय

दो दिवसीय 24वें प्रांतीय संस्कृति महोत्सव एवं गणित-विज्ञान मेले का भव्य समापन, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता हुए सम्मानित तिर्वा (कन्नौज)।...