Sunday, April 26, 2026

भारत की ज्ञान परंपरा एवं ऋषि परंपरा को बाल मन में संजोना : डॉ. सौरभ मालवीय




सुल्तानपुर। सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्द नगर, सुल्तानपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव, वैदिक गणित एवं विज्ञान मेला कार्ययोजना बैठक का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि हमें वर्ष भर की योजनाएं मनोयोगपूर्वक बनाकर उस पर प्रभावी ढंग से कार्य करना चाहिए, जिससे हम अखिल भारतीय स्तर पर सार्थक उपलब्धियां प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि विज्ञान मेला, वैदिक गणित एवं संस्कृति बोध परियोजनाओं का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, श्रुति परंपरा एवं ऋषि परंपरा के पुनरुद्धार के माध्यम से बालकों के मन में संस्कारों का संचार करना है। उन्होंने बताया कि विदेशी आक्रमणों के दौरान भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपराओं को क्षति पहुंचाने के प्रयास हुए, जिन्हें पुनर्जीवित करना आज की आवश्यकता है। वंदना सत्र, भोजन मंत्र एवं चित्र प्रदर्शनी जैसे माध्यमों से विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव विकसित किया जा रहा है।

कार्यक्रम को अखिल भारतीय वैदिक गणित संयोजक देवेन्द्र राव देशमुख, सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. राममनोहर एवं काशी प्रांत के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी सहित अनेक लोग विशेष रूप से उपस्थित रहें.

इससे पूर्व क्षेत्रीय विज्ञान मेला प्रमुख बांके बिहारी पाण्डेय, संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख राजकुमार सिंह एवं वैदिक गणित परियोजना प्रमुख संतोष सिंह ने सत्र 2026-27 की कार्ययोजना का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

बैठक में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही।


Tuesday, April 21, 2026

अमृत सरोवर योजना : जल संरक्षण से बदलेगी स्थिति


पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष 
-डॉ. सौरभ मालवीय  
पृथ्वी हमारा निवास स्थान है। मनुष्य सहित सभी प्राणी इसी धरती पर जन्म लेते हैं और इसी पर जीवन यापन करते हैं। पृथ्वी हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी से हमें वायु, जल और भोजन प्राप्त होता है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पृथ्वी ने मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को जीवन प्रदान किया है। किन्तु मनुष्य ने पृथ्वी को क्या दिया? इस प्रश्न का उत्तर यही है कि मनुष्य ने पृथ्वी को कुछ नहीं दिया, अपितु उसे दूषित करने का कार्य किया है। वायु प्रदूषित होकर विषैली हो गई है और जल भी दूषित हो रहा है। स्थिति इतनी भयंकर है कि यमुना सहित अनेक नदियों का जल पीने योग्य नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 221 जिलों के कुछ स्थानों का जल आर्सेनिक युक्त पाया गया है। 
दूषित पेयजल के सेवन से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों के लोग दूषित जलजनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भूजल संकट के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को आज भी  स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे दूषित जल पीने को विवश हैं।  देश में लोगों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है। देश में प्रति व्यक्ति पानी की वार्षिक 1700 घन मीटर से कम उपलब्धता है। अंतरिक्ष से लिए गए आंकड़ों के आधार पर  देश में पानी की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन के अध्ययन के आधार पर आशंका व्यक्त की गई है कि वर्ष 2031 के लिए प्रति व्यक्ति पानी की औसत वार्षिक उपलब्धता घटकर 1367 घन मीटर रह जाएगी, जिससे जल संकट और गंभीर हो जाएगा।   
एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वैश्विक जल स्रोत का मात्र 4 प्रतिशत ही उपलब्ध है, जबकि यहां विश्व की कुल वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत भाग निवास करता है। केंद्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में देश में उपलब्ध कुल जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। जल संकट के कारण वर्ष 2050 तक यह दर घटकर लगभग 68 प्रतिशत रह जाएगी। यह शुभ संकेत नहीं है। 
उल्लेखनीय है कि देश के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र के लगभग आधे भाग की सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। इसमें से 63 प्रतिशत क्षेत्र में भूमिगत जल से सिंचाई की जाती है, जबकि 24 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए नहरों के जल का उपयोग किया जाता है। इसमें 2 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई तालाब एवं कुंओं के जल से की जाती है तथा 11 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए अन्य स्रोत का उपयोग किया जाता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषक आज भी सिंचाई के लिए भूमिगत जल पर निर्भर करते हैं। इसलिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है। इससे भूमिगत जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है।   जल प्राणियों के जीवन का आधार है। जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता। सूखे एवं भूमि का जल स्तर नीचे गिरने के कारण अनेक क्षेत्रों में जल संकट व्याप्त हो गया है। इससे निपटने के लिए जल संरक्षण अति आवश्यक है। भीषण गर्मी के समय देश के प्राय: समस्त क्षेत्रों में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। तालाब भी शुष्क हो जाते हैं। कुंओं का जल बहुत नीचे उतर जाता है अथवा वे भी सूख जाते हैं। 
इसके कारण ग्रामीणों को उपयोग के लिए पर्याप्त जल प्राप्त नहीं होता है। इस समस्या के दृष्टिगत केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना प्रारम्भ की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में इसका शुभारंभ किया था। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जल निकायों का विकास एवं कायाकल्प करना है। देशव्यापी इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के प्रयेक जिले में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण करवाना है। 
अमृत सरोवर योजना से राज्यों को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकेंगे। तालाबों का निर्माण होने तथा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होने से क्षेत्रीय लोगों की जल की समस्या का समाधान हो सकेगा। इससे गर्मी के समय भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता प्राप्त हो सकेगी। इन तालाबों के जल का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त पशु पालन में भी इस जल का उपयोग हो पाएगा। आवारा पशुओं एवं पक्षियों को भी पीने के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त तालाबों का निर्माण होने से उस स्थान पर सुंदरीकरण होगा। तालाबों के तट पर पीपल, बरगद, नीम, अशोका, सहजन, महुआ, जामुन एवं कटहल आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इससे जहां पर्यावरण स्वच्छ होगा तथा हरियाली में वृद्धि होगी, वहीं इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी। इन तालाबों का उपयोग मछली पालन, मखाने एवं सिघाड़े की खेती में भी किया जा सकेगा।   
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक तालाब एक एकड़ क्षेत्र में होगा, जिसमें 10 हजार घन मीटर पानी की धारण करने की क्षमता होगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इसमें वर्ष भर जल भरा रहे। इस अमृत सरोवर योजना के माध्यम से ग्रामीण वासियों को मनरेगा योजना के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इससे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध होगा।  
विगत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत विगत 11 माह में लगभग  40 हजार तालाबों को विकसित करने की उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि 'बहुत-बहुत बधाई! जिस तेजी से देशभर में अमृत सरोवरों का निर्माण हो रहा है, वो अमृतकाल के हमारे संकल्पों में नई ऊर्जा भरने वाली है।‘. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक ट्वीट करके जानकारी दी कि देश में अभी तक 40 हजार से अधिक अमृत सरोवर राष्ट्र को समर्पित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2023 तक 50 हजार अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को विश्वभर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पर्यावरणविद जेराल्ड नेल्सन ने 22 अप्रैल 1970 को इसका शुभारम्भ किया था। वह विस्कॉन्सिन के एक अमेरिकी राजनेता थे. उन्होंने संयुक्त राज्य के सीनेटर और गवर्नर के रूप में कार्य किया। वह पृथ्वी दिवस के संस्थापक थे। उन्होंने पर्यावरण सक्रियता के एक नये अभियान का प्रारम्भ किया था। वर्ष 1969 में सैन फ्रांसिस्को में यूनेस्को सम्मेलन के दौरान 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। इसके पश्चात से यह दिवस मनाया जा रहा है। अब इसे विश्व के 192 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इस अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न समस्याओं को उठाया जाता है तथा इनके समाधान के बारे में चर्चा होती है। आज जब पर्यावरण के समक्ष अनेक प्रकार के संकट उत्पन्न हो गए हैं, ऐसी स्थिति में इसका महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है। 
उल्लेख करने योग्य बात यह भी है कि देशभर में पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सरकारी स्तर के कार्यक्रम भी हैं तथा पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यक्रम भी सम्मिलित हैं। 
नि:संदेश केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना जल संरक्षण के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेगी। इससे जल संरक्षण के अभियान को प्रोत्साहन भी मिलेगा। अपनी पृथ्वी को बचाने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा।

Monday, April 20, 2026

साधारण सभा की बैठक












लखनऊ। विद्या भारती, भारती शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश की साधारण सभा की बैठक का आयोजन लखनऊ में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न शैक्षिक, संगठनात्मक एवं भावी योजनाओं पर व्यापक चर्चा की गई।

बैठक में प्रदेश भर से आए पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भाग लिया तथा शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं गुणवत्ता वृद्धि के विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2027 में विद्या भारती अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण करेगा। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए संगठन द्वारा पूरे वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

उन्होंने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कारयुक्त शिक्षा का प्रसार करना है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक गांव में विद्यालय स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे, ताकि देश का हर बालक संस्कार और गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त कर सके। विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभाव, चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास का निर्माण करना है। उन्होंने आगामी कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया।

डॉ. मालवीय ने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यसनमुक्त समाज का निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विद्या भारती इन दोनों विषयों पर समाज में व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगी।

उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने विद्यालयों के माध्यम से इन लक्ष्यों को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

अंत में उन्होंने कहा कि विद्या भारती संस्कारयुक्त, राष्ट्रनिष्ठ और समर्पित पीढ़ी के निर्माण के लिए पूर्णतः कृतसंकल्पित है।

बैठक में संगठन के विस्तार, विद्यालयों की गुणवत्ता उन्नयन तथा नवीन शैक्षिक पहल को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।

Saturday, April 18, 2026

नानी के घर की सुखद स्मृति



गर्मी की छुट्टियाँ आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। स्कूलों की घंटियों की जगह अब सुबह की ठंडी हवा, आम के पेड़ों की छांव और खेलकूद की मस्ती ले लेती है। यह समय केवल पढ़ाई से विराम का नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से जीने का भी होता है।
नाना-नानी के घर जाने का उत्साह तो अलग ही होता है—वहाँ की कहानियाँ, प्यार भरा दुलार, और बिना किसी रोक-टोक के खेलने की आज़ादी बच्चों के मन को एक अलग ही आनंद देती है। पुराने आंगन, मिट्टी की खुशबू और पारिवारिक अपनापन मिलकर ऐसी यादें बनाते हैं, जो जीवन भर साथ रहती हैं।
सच में, गर्मी की छुट्टियाँ सिर्फ समय का एक हिस्सा नहीं, बल्कि बचपन की सबसे खूबसूरत अनुभूतियों का खज़ाना होती हैं।
पढ़े मेरा लेख 🙏

Friday, April 17, 2026

स्वयं से भेंट







कभी-कभी अपने ही पुराने चित्र को देखना एक तरह से खुद से मुलाक़ात करने जैसा होता है।
लंबे अंतराल के बाद जब हम खुद को देखते हैं, तो सिर्फ चेहरे का बदलाव नहीं दिखता, बल्कि सोच, अनुभव और समय की छाप भी नजर आती है। वही तस्वीर हमें याद दिलाती है कि हम कितनी दूर आ चुके हैं—कठिनाइयों से, सीखों से और छोटे-छोटे बदलावों से।
ऐसे पल मन को सुकून इसलिए देते हैं क्योंकि वे हमें ठहरकर अपने सफ़र को महसूस करने का अवसर देते हैं। साथ ही यह भी सिखाते हैं कि परिवर्तन स्वाभाविक है, और हर बदलाव अपने भीतर एक नई कहानी लेकर आता है।

16 अप्रैल 2022

Thursday, April 16, 2026

संस्कारयुक्त शिक्षा के केन्द्र हैं विद्या भारती के विद्यालय : सौरभ मालवीय













बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में आज शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक सम्पन्न हुई।

  वर्ग के अन्तिम दिन शिशु शिक्षा समिति और जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्याओं की संयुक्त बैठक से प्रारम्भ हुआ। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रान्त के  प्रान्त प्रचारक मा. रमेश जी, गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय सेवा शिक्षा प्रमुख मा. योगेश जी, जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष श्री विनोद कांत मिश्र के साथ जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मंत्री श्री दुर्गा प्रसाद अस्थाना की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह जी द्वारा मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं सम्मान कराया गया। विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।

समापन सत्र में मंच पर विद्या भारती पूर्वी उ. प्र. क्षेत्र के क्षेत्रीय मन्त्री डॉ. सौरभ मालवीय तथा शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मन्त्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह की उपस्थिति रही। प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी ने सम्पूर्ण बैठक का वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया। वन्दना टीम ने एक गीत प्रस्तुत कर माहौल को संगीतमय बना दिया। अपने सम्बोधन में क्षेत्रीय मन्त्री डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि हमारे विद्यालय ऊर्जा के केन्द्र और प्रधानाचार्य केन्द्र बिन्दु होते हैं। विद्यालय के विकास में प्रधानाचार्य का बहुत योगदान है।
 
अमृत महोत्सव की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रत्येक जनपद में शिशु मंदिरों की स्थापना का लक्ष्य है, जो धीरे धीरे पूर्ण हो रहा है। हमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्या भारती के सभी विषयों को लेकर समाज तक जाना है। छोटे छोटे कार्यक्रम करके हमें स्वयं से समाज को जोड़ना है। स्वाध्याय के लिये पुस्तक पढ़ने हेतु हमें लोगों को जागरूक करना होगा। अनुशासन, परीक्षा परिणाम और विद्यालय की गुणवत्ता अच्छे विद्यालय के लक्षण हैं।

कार्यक्रम के अन्त में शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मन्त्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने सभी आगन्तुक प्रधानाचार्य बन्धुओं और अन्य सभी के प्रति आभार प्रदर्शन किया। बैठक का समापन शान्ति मन्त्र के साथ हुआ।

बैठक में प्रांत के सभी विद्यालयों से आए हुए प्रधानाचार्य - प्रधानाचार्या, छात्रावास प्रमुख, शिशु वाटिका प्रमुख आचार्य और आचार्या बहनों ने भाग लिया। बलिया संभाग के संभाग निरीक्षक श्री कन्हैया चौबे, जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक श्री जियालाल जी आदि भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

सृजन समय का मीडिया एवं पत्रकारिता विशेषांक



पत्रकारिता विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष आदरणीय श्री सौरभ मालवीय सर के अतिथि संपादकत्व में सृजन समय पत्रिका का “मीडिया एवं पत्रकारिता विशेषांक” आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। यह विशेषांक न केवल अकादमिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि समकालीन मीडिया परिदृश्य के विविध आयामों को गंभीरता से प्रतिबिंबित करता है। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से अध्येताओं, शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने अपने शोध-पत्र एवं आलेख प्रेषित किए, जिनमें मीडिया के बदलते स्वरूप, पत्रकारिता की चुनौतियों, डिजिटल युग की प्रवृत्तियों तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श शामिल हैं। प्राप्त शोध-पत्रों में से गहन समीक्षा और चयन प्रक्रिया के उपरांत कुल ३१ शोध-पत्रों को इस विशेषांक में स्थान दिया गया है। आप सभी को बहुत बधाई।

इस अंक के प्रकाशन हेतु सृजन समय पत्रिका के संपादकीय मंडल का हार्दिक आभार। आशा है कि यह प्रयास निश्चित ही मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सार्थक संवाद को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
सचित्र मिश्रा 

भारत की ज्ञान परंपरा एवं ऋषि परंपरा को बाल मन में संजोना : डॉ. सौरभ मालवीय

सुल्तानपुर। सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्द नगर, सुल्तानपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उ...