केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। एक्ट ईस्ट की नीति को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार लगातार पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में लगी है। इससे जहां क्षेत्र का विकास हो रहा है, वहीं लोगों को नये अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि वे पूर्वोत्तर क्षेत्रों को दक्षिण-पश्चिम एशिया का गेटवे मानते हैं।
एक अभूतपूर्व निर्णय के अंतर्गत राष्ट्रपति ने नवंबर में भारतीय वन (संशोधन) विधेयक को लागू किया, जिसके तहत ‘वृक्ष’ की परिभाषा के दायरे से गैर वन क्षेत्रों में बांस को अलग कर दिया गया है। इस निर्णय से आर्थिक इस्तेमाल के लिए बांस को काटने संबंधी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सम्पन्न होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति दी गई। इसे एक ऐतिहासिक निर्णय कहा गया, क्योंकि पहले भारतीय वन अधिनियम-1927 के अंतर्गत बांस को वैधानिक रूप से ‘वृक्ष’ के रूप में परिभाषित किया गया था। इसके कारण गैर किसानों द्वारा गैर वन भूमि पर बांस की खेती में बाधा आती थी।
अक्टूबर 2017 में सरकार ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में पूर्वोत्तर क्षेत्र में जल प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगस्त 2017 में पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ के हालात और राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए गुवाहाटी गए थे। उनके दौरे की पृष्ठभूमि में इस समिति का गठन किया गया था। समिति पन बिजली, कृषि, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ से होने वाले मिट्टी के क्षरण में कमी लाने, अंतर्देशीय जल यातायात, वन, मछली पालन और ईको-पर्यटन के रूप में जल प्रंबधन के लाभों को बढ़ाने का काम करेगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इसका समन्वय करेगा। इसके साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने चार पूर्वोत्तर राज्यों असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। इस वर्ष क्षेत्र में अभूतपूर्व बाढ़ आई थी और बहुत अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। यह पिछली अवधि के दौरान होने वाली वर्षा से 100 प्रतिशत अधिक थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगस्त में जब बाढ़ का जायजा लेने के लिए पूर्वोत्तर गए थे, तब उन्होंने 2000 करोड़ रुपये का बाढ़ राहत पैकेज घोषित किया था।
उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर के विकास को और बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2018 में वर्तमान परियोजनाओं को मार्च 2020 तक करने समेत उत्तर पूर्व परिषद की योजनाओं को दी स्वीकृति दी। महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय सड़कों के विकास सहित पूर्वोत्तर की विकास परियोजनाओं के लिए 4500 करोड़ रुपये प्रदान किए। इस धनराशि को मार्च 2020 तक खर्च किया जाएगा। इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़कों के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को लर्निंग आउटकम केंद्रित बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने एक अप्रैल से पूरे देश में स्कूली शिक्षा के लिए एक समेकित व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके अंतर्गत सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और टीचर एजुकेशन को एक साथ जोड़कर एक योजना बनाई गई है।
मार्च 2020 तक इस समेकित योजना पर 75 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जो पिछली बार इन योजनाओं को मिले बजट से 20 प्रतिशत अधिक है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न 'सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा' को पूरा किया जा सकेगा, तो साथ ही इससे नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। अगले तीन वर्ष के लिए मंत्रिमंडल ने शिक्षा ऋण के लिए भी 6600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। साथ ही ऋण की औसतन सीमा चार लाख रुपये थी, उसको बढ़ाकर साढ़े सात लाख रुपये किया गया है। उत्तर पूर्व परिषद द्वारा चलाई जा रही परियोजनाएं जारी रहेंगी। क्षेत्र के लिए विशेष विकास योजना में 100 प्रतिशत केंद्र का पैसा लगाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त मंत्रिमंडल ने सरसों तेल को छोड़कर शेष खाद्य तेलों के थोक में निर्यात को अपनी स्वीकृति दी है, तो देश में रोजगार के प्रोत्साहन के लिए प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसके साथ खाद पर पोषक त्तव आधारित अनुदान को भी वर्ष 2020 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिस पर अगले तीन वर्ष में लगभग 62 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2020 तक 3000 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन के साथ पूर्वोत्तर विकास योजना (एनईआईडीएस)-2017 को स्वीकृति दे दी है। सरकार मार्च 2020 से पहले मूल्यांकन के बाद शेष अवधि के लिए आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराएगी। एनईआईडीएस अधिक आवंटन के साथ पहले की दो योजनाओं के अंतर्गत कवर किए गये प्रोत्साहनों का समुच्चय है। सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना के माध्यम से मुख्य रूप से एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन दे रही है। सरकार रोजगार सृजन के लिए इस योजना के माध्यम से विशिष्ट प्रोत्साहन दे रही है। सभी पात्र औद्योगिक ईकाइयां जो केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं के एक या उससे अधिक घटकों का लाभ ले रही हैं उनके लिए भी इस योजना के अन्य घटकों के लाभ के लिए विचार किया जाएगा।
15 दिसंबर, 2017 को पूर्वोत्तर विशेष बुनियादी ढांचा विकास योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी। योजना को 2017-18 से शुरू करने के लिए केंद्र सरकार शत प्रतिशत सहायता प्रदान करेगी। इस योजना का उद्देश्य मार्च 2020 तक विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सृजन संबंधित अंतरों को भरना है। योजना के वित्त पोषण की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। इस विकास योजना की स्वीकृति से संबंधित बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। यह योजना व्यापक रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य के सामाजिक क्षेत्रों के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के सृजन का कार्य करेगी। साथ ही जलापूर्ति, विद्युत, संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देने से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास का कार्य भी इस योजना के अंतर्गत आएगा। यह योजना स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देने का कार्य करेगी जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा। आने वाले समय में यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई, 2017 को असम के ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक लोहित नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल का उदघाटन किया। उन्होंने इस पुल का नाम विश्व प्रसिद्ध लोकगायक भूपेन हजारिका सेतु रखने की घोषणा की थी। इस अवसर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुल न केवल असम और अरुणाचल को जोड़ने की कड़ी के रूप में काम करेगा, अपितु यह पूरे पूर्वोत्तर की अर्थक्रांति का आधार बनेगा। असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले 9.15 किलोमीटर लंबे पुल के बन जाने से दोनों प्रदेशों के बीच की यात्रा का समय छह घंटे से कम होकर मात्र एक घंटा रह गया है। इस पुल के चालू होने से असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के लिए संपर्क सुनिश्चित हो गया है। इससे प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये के पेट्रोल और डीजल की बचत होने लगी है। अभी तक यहां ब्रह्मपुत्र नदी को पार करने के लिए केवल दिन के समय नौका का ही उपयोग किया जाता था और बाढ़ के दौरान यह भी संभव नहीं होता था। उन्होंने 27 मई, 2017 को चेरापूंजी में डॉपलर वेदर रडार को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। इस रडार प्रणाली से विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बेहतर मौसम अनुमान जारी करना संभव होगा। इससे खराब मौसम से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने में सहायता मिलेगी, क्योंकि सौंदर्य और रोमांच की इस धरती को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण तमाम प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 दिसंबर, 2017 को मिजोरम में 60 मेगावॉट की ट्युरिअल जल विद्युत परियोजना राष्ट्र को समर्पित किया। 1302 करोड़ रुपये की लागत की यह परियोजना मिजोरम में स्थापित सबसे बड़ी परियोजना है। इससे राज्य का संपूर्ण विकास और केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी और प्रमुख कार्यक्रम "सभी को सातों दिन चौबीसों घंटे किफायती स्वच्छ ऊर्जा" के लक्ष्य को पूर्ण किया जा सकेगा। परियोजना से अतिरिक्त 60 मेगावाट बिजली प्राप्त होने के साथ ही मिजोरम राज्य अब सिक्किम और त्रिपुरा के बाद पूर्वोत्तर भारत का तीसरा बिजली सरप्लस वाला राज्य बन जाएगा।
केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के विकास और पूर्वोत्तर के लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) को दोबारा कारगर बनाने के लिए उसका एक नया स्वरूप तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि उसे पूरे पूर्वोत्तर की उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा था कि इस संबंध में एक प्रस्ताव भेज दिया गया है, जिस पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। एनईसी की स्थापना 1970 के दशक की शुरुआत में की गई थी और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास पर विशेष ध्यान देना था।
3 दिसंबर, 2017 को डॉ. जितेन्द्र सिंह ने ‘पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र विकास’ के लिए 90 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। इस योजना का प्रारंभ पायलेट आधार पर दो वर्ष की अवधि के लिए पहले चरण में तामंगलांग जिले से हुआ। नई दिल्ली में द्वि-साप्ताहिक ‘पूर्वोत्तर हस्तशिल्प-सह-हथकरघा प्रदर्शनी-सह-बिक्री उत्सव’ का उदघाटन करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा था कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने व्यय विभाग के साथ विस्तृत चर्चा की है। चर्चा में यह बात सामने आई थी कि जनकल्याण संबंधी समस्त लक्ष्यों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की पर्वतीय क्षेत्र विकास की मौजूदा योजनाओं में इस संबंध में प्रावधान किया जाना चाहिए।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने 5 जून, 2017 को मणिपुर के इम्फाल में पूर्वोत्तर के लिए ‘पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ की घोषणा की थी। यह घोषणा पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड द्वारा आयोजित निवेशकों और उद्यमियों की बैठक के दौरान की गई थी। इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और मणिपुर सरकार ने भागीदारी की थी। इस योजना से मणिपुर, त्रिपुरा और असम के पर्वतीय क्षेत्रों को लाभ होगा।
16 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने ‘12वां पूर्वोत्तर व्यापार शिखर सम्मेलन’ का उदघाटन किया था। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापार अवसरों की संभावनाओं की पहचान करना था। इसके तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ संरचना और सम्पर्कता, कौशल विकास, वित्तीय समावेश, पर्यटन, सत्कार एवं खाद्य प्रसंस्करण संबंधी सेवा क्षेत्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना है।
पूर्वोत्तर को भारत की पहली ‘एयर डिस्पेंसरी’ मिलना तय है। इसके अंतर्गत हेलीकॉप्टर के माध्यम से चिकित्सा सेवा प्रदान की जाएगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने इस पहल के लिए 25 करोड़ रुपये की आरंभिक धनराशि जारी कर दी है। डॉ. जितेन्द्र सिंह के अनुसार पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय दूरदराज के क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर आधारित चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने संबंधी संभावनाएं देख रहा है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कोई चिकित्सक या चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय ने प्रस्ताव भेज दिया है और इसे स्वीकृत भी कर लिया गया है।
16 अगस्त, 2017 को घोषणा की गई कि दिल्ली में एक पूर्वोत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक एवं सूचना केन्द्र की स्थापना की जाएगी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक एवं सूचना केन्द्र की स्थापना के उद्देश्य से पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) को लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से नई दिल्ली के द्वारका सैक्टर 13 में 1.32 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यह केन्द्र दिल्ली में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक सांस्कृतिक एवं सम्मेलन/सूचना हब के रूप में कार्य करेगा। 24 जुलाई, 2017 को नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में बराक छात्रावास का शिलान्यास किया गया। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि जेएनयू में आठ हजार से अधिक छात्र हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र से बाहर किसी भी अन्य राज्य की तुलना में उत्तर-पूर्व के छात्रों की संख्या यहां सबसे अधिक है। पिछले वर्ष बंगलूरु विश्वविद्यालय में भी विशिष्ट रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र की छात्राओं के लिए एक छात्रावास का शिलान्यास किया गया था।
नई दिल्ली में 4 नवम्बर, 2017 को विख्यात वर्ल्ड फूड इंडिया-2017 के दौरान ‘पूर्वोत्तर भारत: जैविक उत्पादन हब; अवसर जिनका अब तक दोहन नहीं किया गया’ शीर्षक सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। पूर्वोत्तर क्षेत्र में बांस की लगभग 50 प्रजातियां, केले की लगभग 14 किस्में और नींबू वर्गीय फलों की 17 किस्में पाई जाती हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनानास एवं संतरे जैसे फलों का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। असम, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों में तीन मेगा फूड पार्क हैं। सिक्किम राज्य को पहला जैविक राज्य घोषित किया गया है।
3 अगस्त, 2017 को नई दिल्ली में डोनर के लिए जापान-भारत समन्वय फोरम (जेआईसीएफ) की पहली बैठक आयोजित की गई। डोनर के सचिव नवीन वर्मा ने भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया, जबकि जापानी शिष्टमंडल का नेतृत्व भारत में जापान के राजदूत केन्जी हीरामत्सू ने किया। भारतीय पक्ष द्वारा चिन्हित सहयोग के प्राथमिकता क्षेत्रों में राज्यों के बीच सड़कों तथा बड़ी जिला सड़कों सहित सम्पर्क एवं सड़क नेटवर्क विकास, आपदा प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण एवं पर्यटन शामिल थे।
19 जुलाई, 2017 को पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों एवं उभरते उद्यमियों को एक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘व्यवसाय विचार चुनौती का प्रवर्तन’ विषय पर आयोजित एक समारोह का सह-आयोजन डोनर मंत्रालय एवं पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) द्वारा तेजपुर विश्वविद्यालय में किया गया। यह विश्वविद्यालय के सम्पर्क 2017 का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उद्योगों एवं शिक्षाविदों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देना है। समारोह के दौरान व्यवसाय योजना पर आधारित प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया गया। प्राप्त की गई कुल 60 योजनाओं में से 15 योजनाओं का चयन किया गया और की गई प्रस्तुतियों के आधार पर तीन व्यवसाय योजनाएं पुरस्कृत की गईं।
3 मई, 2017 को नई दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मेघालय के शिलांग स्थित मुख्यालय में पूर्वोत्तर परिषद का एक ई-ऑफिस लांच किया गया। औपचारिक लांचिंग नई दिल्ली के डोनर मंत्री के कार्यालय में एनईसी, शिलांग से एक फाईल प्रस्तुत किए जाने के द्वारा की गई जिसे एनईसी की अगली पूर्ण बैठक के आयोजन के लिए समुचित रूप से अनुमोदित किया गया।
ग्यारहवें उत्तर पूर्व व्यापार सम्मेलन का आयोजन 9 मार्च, 2017 को नई दिल्ली में किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य पूर्वोत्तर में निवेश को बढ़ाना, क्षेत्र की विशेषताओं को रेखांकित करना तथा व्यापार के अवसरों को बढ़ाना था। इस अवसर पर रेल मंत्री ने एक वीडियो संदेश के जरिये कहा कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शीघ्र ही एक ई-वाणिज्य पोर्टल शुरू किया जाएगा, जो पूर्वोत्तर के हथकरघा से बने वस्त्रों तथा हस्तशिल्प वस्तुओं को पूरी दुनिया में विक्रय करेगा। दार्जलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद ने रेल लिंक को दार्जलिंग तक बढ़ाने का भरोसा दिया है। भविष्य में इसे सिक्किम तक बढ़ाया जाएगा।
दो दिवसीय नॉर्थ ईस्ट कॉलिंग उत्सव का उदघाटन 9 दिसंबर, 2017 को नई दिल्ली में हुआ। इस अवसर पर नॉर्थ ईस्ट वेंचर फंड को लांच किया गया। यह कोष डोनर मंत्रालय और उत्तर पूर्व वित्त विकास कॉर्पोरेशन का संयुक्त उद्यम है। इस कोष की स्थापना का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमिता और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देना है। इस पर 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक लागत आई है। इससे पूर्व 6 मार्च, 2017 को चंडीगढ़ में तीन दिसवीय डेटीनेशन नॉर्थ ईस्ट-2017 का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में सटीक प्रौद्योगिकी का विकास करना था। इसका आयोजन डोनर मंत्रालय द्वारा किया गया था।
राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने जीएसटी के विभिन्न आयामों पर पूर्वोत्तर के सांसदों से विस्तृत चर्चा की। पूर्वोत्तर मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की एक बैठक 8 जून, 2017 को नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक में क्षेत्र के सांसदों ने हथकरघा व हस्तशिल्प उत्पादों, झाडू की छड़ियों तथा बांस के उत्पादों पर कर प्रावधानों के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनवाल ने 11 जनवरी को गुवाहाटी में आयोजित डीजी धन मेला का उदघाटन किया। इस अवसर पर सर्बानंद सोनवाल ने कैशलेस अर्थव्यवस्था की पहल के अंतर्गत टोका पैसा ई वॉलेट का उदघाटन किया। इस मेले का आयोजन असम सरकार ने आयकर विभाग और नीति आयोग के सहयोग से किया था।
इनके अतिरिक्त में केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के अच्छे परिणाम दिखाई देने लगे हैं।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)
















