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Sunday, June 21, 2026

विश्व को भारत की देन है योग

 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर विशेष
-डॉ. सौरभ मालवीय
भारतीय संस्कृति में योग का महत्त्वपूर्ण स्थान है। योग शब्द संस्कृत के युज से बना है। युज का अर्थ है शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों को एकत्रित करना। योग साधक को उसकी आत्मा से जोड़ता है। योग के द्वारा साधक अपनी मानसिक एवं शारीरिक शक्तियों को एकत्रित कर लेता है। योग का संबंध शरीर एवं मन दोनों से है। यह अध्यात्म से भी जुड़ा है। योग के आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि। योग एक कला, साधना एवं विद्या है। योग की चार विधियां हैं, जिनमें कर्म योग, भक्ति योग, राज योग एवं ज्ञान योग सम्मिलित हैं।  
 
योग अति प्राचीन है। मान्यता है कि जब सभ्यता ने जन्म लिया, तब योग का भी जन्म हुआ। योग एक प्राचीन विद्या है। कैलाश पर निवास करने वाले भगवान शिव को आदि योगी एवं आदि गुरु माना जाता है। भगवान शिव के पश्चात वैदिक काल के ऋषि-मुनियों ने योग को अपनाया। उन्होंने इसका संरक्षण किया था तथा इसके साथ-साथ इसका प्रचार-प्रसार भी किया। भगवान श्रीकृष्ण योगराज माने जाते हैं। वेदों, उपनिषदों, महाभारत एवं भगवद्‌गीता में भी योग का उल्लेख है। श्रीमद् भगवद्गीता में कहा गया है-
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
अर्थात हे धनंजय ! आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समभाव होकर योग में स्थित होकर तुम कर्म करो। यह समभाव ही योग कहलाता है।
 
मध्य युग में पतंजलि ने योग को सुव्यवस्थित रूप प्रदान करके इसका प्रचार- प्रसार किया। इसके पश्चात विभिन्न पंथों ने योग का विस्तार किया तथा इसका प्रचार- प्रसार करते हुए इसे लोकप्रिय बनाया। इनमें सिद्धपंथ, शैवपंथ, नाथपंथ, वैष्णव एवं शाक्त पंथ आदि सम्मिलित हैं।
गीतोपदेश में भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र अर्जुन को विस्तार से योग का महत्व बताया। उन्होंने कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग का वर्णन करते हुए अर्जुन से कहा-
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्।।
अर्थात् हे अर्जुन! मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।
इस श्लोक से योग की महत्ता का पता चलता है।
सिन्धु घाटी की सभ्यता से प्राप्त वस्तुओं से पता चलता है कि उस समय भी लोग योग करते थे। हड़प्पा एवं  मोहनजोदड़ो में खुदाई में योग मुद्राओं वाली वस्तुएं प्राप्त हुईं। इसका अर्थ है कि भारत में हजारों वर्षों से लोग योग करते आ रहे हैं।

योग के प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
योग प्राचीन काल की वह विद्या है, जो आज भी अत्यधिक लोकप्रिय है तथा दिन प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है कि प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने एवं योग को वैश्विक पहचान देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्ती भूमिका है। उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के पश्चात अनेक ऐसे सरहानीय कार्य किए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की एक नई पहचान स्थापित हुई है। इनमें योग भी सम्मिलित है।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का विचार प्रथम बार 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान प्रस्तुत किया था। योग को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकतात्मकता, विचार और कार्य, संयम और सम्‍पूर्णता, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य, स्वास्थ्य एवं  कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, अपितु अपने आपको, दुनिया और प्रकृति के साथ एकता की भावना की खोज करने के लिए है। हमारी जीवन शैली को बदलकर और चेतना जागृत कर कल्‍याण में सहायता कर सकता है। आइए हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में कार्य करें।
 
इस प्रारंभिक प्रस्ताव के पश्चात संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 अक्टूबर 2014 को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पांडुलिपि’ प्रस्ताव पर अनौपचारिक परामर्श किया। इस परामर्श का आयोजन भारत के प्रतिनिधिमंडल द्वारा किया गया था। इसके पश्चात 11 दिसंबर 2014 को भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पांडुलिपि प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसे विश्व के 177 सदस्य देशों से समर्थन प्राप्त हुआ। यह सुखद एवं सराहनीय था कि इस पहल को वैश्विक नेताओं का भारी समर्थन प्राप्त हुआ। विश्व के कुल 177 देशों ने प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया, जो इस प्रकार के किसी भी संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव के लिए सह-प्रायोजकों की सर्वाधिक संख्या है। यह देश के लिए गौरव का विषय रहा। इसके पश्चात भारत के नेतृत्व में 21 जून 2015 को प्रथम ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस अवसर पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में 84 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दिवस पर हजारों लोगों ने दिल्ली के राजपथ पर योगासन किया था। इस कार्यक्रम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में संग्रहित किया गया था। तब से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
 
वास्तव में योग भारत की अमूल्य धरोहर है, जो उसने विश्व को प्रदान की है। योग मनुष्य के तन एवं मन दोनों को स्वस्थ रखता है। योग करने से जहां मन- मस्तिष्क को शान्ति प्राप्त होती है, वहीं इससे शरीर भी स्वस्थ रहता है। देश के महापुरुषों ने योग को अति आवश्यक बताते हुए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला है।    
 
दुखों को समाप्त करता है योग                                                                                       
स्वामी विवेकानन्द के अनुसार- अभ्यास चीजों को आसान बना देता है। योग के माध्यम से ज्ञान, ज्ञान के माध्यम से प्रेम आता है, और प्रेम से परमानंद। वह कहते हैं कि प्रत्येक आत्मा संभावित रूप से दिव्य है। बाहरी और आंतरिक प्रकृति को नियंत्रित करके इस देवत्व को प्रकट करना लक्ष्य है। वह कहते हैं कि योग सिखाता है कि आत्मा है और इस आत्मा के अंदर सारी शक्ति है। यह पहले से ही मौजूद है और अगर हम इस शरीर पर अधिकार हासिल कर सकते हैं, तो सारी शक्ति सामने आ जाएगी। सारा ज्ञान आत्मा में है। लोग संघर्ष क्यों कर रहे हैं ? दुख को कम करने के लिए। सारे दुख हमारे शरीर पर अधिकार न होने के कारण होते हैं। इस प्रकार आप अपने शरीर पर अधिकार करें तो दुनिया के सभी दुख दूर हो जाएंगे। संसार के सारे दुख इन्द्रियों में हैं। दुख और सुख केवल इन्द्रियपरायण व्यक्ति के ही हो सकते हैं। योग इन्द्रियों, इच्छा और मन को नियंत्रित करके सापेक्ष ज्ञान से परे जाना है। वह कहते हैं कि काश ईश्वर की कृपा से ऐसा होता कि सभी मनुष्य इतने गठित होते कि उनके मन में दर्शन, रहस्यवाद, भावना और कार्य के सभी तत्व समान रूप से पूर्ण रूप से मौजूद रहते। यही आदर्श है, मेरे पूर्ण मनुष्य का आदर्श। इन चारों दिशाओं में सामंजस्य बिठाना मेरा धर्म का आदर्श है। और यह धर्म उसी से प्राप्त होता है, जिसे हम भारत में योग- ‘ईश्वर से मिलन’ कहते हैं।                      
वास्तव में योग हमारे मन- मस्तिष्क को स्थिरता प्रदान करता है, शान्ति प्रदान करता है, धैर्य प्रदान करता है। योग मनुष्य के आत्मबल में वृद्धि करता है, उसका आत्मविश्वास बढ़ाता है। आज के तनाव के युग में योग और भी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी हो जाता है। हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय योग के लिए भी अवश्य निकालना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026



Saturday, July 12, 2025

भारत पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी शुरू करने वाला पहला देश: डब्ल्यूएचओ


वैश्विक स्वास्थ्य सेवा नवाचार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने "पारंपरिक चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग का मापन" शीर्षक से एक तकनीकी संक्षिप्त विवरण जारी किया है। इसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, विशेष रूप से आयुष प्रणालियों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को एकीकृत करने में भारत के अग्रणी प्रयासों की सराहना की गई है। यह विवरण इस विषय पर भारत के प्रस्ताव के बाद जारी किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक चिकित्सा में एआई के अनुप्रयोग हेतु डब्‍ल्‍यूएचओ का पहला रोडमैप विकसित हुआ है।

अपनी आयुष प्रणालियों की क्षमताओं को उन्नत और व्यापक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्षमता का लाभ उठाने के भारत के प्रयास प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो देश को डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण में एक वैश्विक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 2023 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक भागीदारी (जीपीएआई) शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर कहा, "हमने 'सभी के लिए एआई' की भावना से प्रेरित होकर सरकारी नीतियाँ और कार्यक्रम विकसित किए हैं। हमारा प्रयास सामाजिक विकास और समावेशी विकास के लिए एआई की क्षमताओं का पूरा लाभ उठाना है।"

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के तकनीकी विवरण में उल्लिखित भारत की एआई-आधारित पहल, अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "यह मान्यता पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक प्रासंगिकता का विस्तार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी दृष्‍टिकोण के साथ हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। एआई को आयुष प्रणालियों के साथ एकीकृत करके—और आयुर्वेदिक के ऐतिहासिक छाप प्रदर्शन (एसएएचआई) पोर्टल, राष्‍ट्रीय आयुष रुगणता और मानकीकृत इलेक्‍ट्रानिक शब्‍दावली (नमस्‍ते) पोर्टल और आयुष अनुसंधान पोर्टल जैसे अग्रणी डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से—भारत न केवल अपने सदियों पुराने चिकित्सा ज्ञान की रक्षा कर रहा है, बल्कि व्यक्तिगत, साक्ष्य-आधारित और विश्व स्तर पर सुलभ स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।"

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, "डब्ल्यूएचओ दस्तावेज़ में भारत की ओर से किए गए कई अग्रणी एआई-संचालित नवाचारों पर प्रकाश डाला गया है - जिसमें प्रकृति-आधारित मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करके पूर्वानुमानित निदान से लेकर आयुर्वेद ज्ञान और आधुनिक जीनोमिक्स को एक साथ लाने वाली अभूतपूर्व आयुर्जेनोमिक्स परियोजना शामिल है। इस डिजिटल परिवर्तन का मूल आधार आयुष ग्रिड है। यह 2018 में शुरू किया गया एक व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म है जो कई नागरिक-केंद्रित पहलों जैसे कि एसएएचआई पोर्टल, नमस्‍ते पोर्टल और आयुष अनुसंधान पोर्टल की नींव का काम करता है। ये एआई-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म न केवल भारत की पारंपरिक ज्ञान चिकित्सा प्रणालियों को संरक्षित और मान्य कर रहे हैं, बल्कि साक्ष्य-आधारित, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा ढाँचों के भीतर उनके वैश्विक एकीकरण को भी आगे बढ़ा रहे हैं।"
विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह प्रकाशन न केवल वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा परिदृश्य में भारत के बढ़ते प्रभाव को मान्यता देता है, बल्कि एआई और आयुष क्षेत्र में कई प्रमुख भारतीय नवाचारों को भी मान्यता देता है।

यह दस्तावेज़ आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी में एआई-संचालित अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करता है, जिसमें निदान सहायता प्रणालियाँ भी शामिल हैं जो नाड़ी मापन, जीभ परीक्षण और प्रकृति मूल्यांकन जैसी पारंपरिक विधियों को मशीनों के अनुप्रयोग और गहन तांत्रिका नेटवर्क के साथ एकीकृत करती हैं। ये प्रयास निदान सटीकता को बढ़ा रहे हैं और व्यक्तिगत निवारक देखभाल को सक्षम बना रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के संक्षिप्त विवरण में एक उल्लेखनीय विशेषता आयुर्जेनोमिक्स का उल्लेख है। यह वैज्ञानिक उपलब्धि जीनोमिक्स को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के साथ जोड़ती है। इस पहल का उद्देश्य आयुर्वेदिक संरचना प्रकारों के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-आधारित विश्लेषण का उपयोग कर रोगों के पूर्वानुमानित संकेतों की पहचान करना और स्वास्थ्य संबंधी सुझावों को व्यक्तिगत बनाना है। यह दस्तावेज़ आधुनिक रोग स्थितियों में पुनर्प्रयोजन हेतु हर्बल विधियों के जीनोमिक और आणविक आधार को समझने के प्रयासों पर भी प्रकाश डालता है जो पारंपरिक ज्ञान को समकालीन विज्ञान के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्‍धि  है।

पारंपरिक ज्ञान को डिजिटल बनाने की भारत की पहल, जैसे पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल), को स्वदेशी चिकित्सा विरासत के संरक्षण और ज़िम्मेदारी से उपयोग के वैश्विक मॉडल के रूप में सराहा जाता है। इसके अलावा, प्राचीन ग्रंथों के सूचीकरण और अर्थ विश्लेषण के लिए एआई-संचालित उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे समय-परीक्षित चिकित्सीय ज्ञान तक आसान पहुँच संभव हो रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू औषधि की कार्यप्रणाली की पहचान, आयुर्वेद, पारंपरिक चीनी चिकित्सा और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के बीच तुलनात्मक अध्ययन, और रस, गुण और वीर्य जैसे पारंपरिक मापदंडों का आकलन करने के लिए कृत्रिम रासायनिक सेंसरों के विकास हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग है। ये तकनीकी समाधान पारंपरिक औषधियों को मान्य और आधुनिक बनाने में मदद कर रहे हैं।

दस्तावेज़ में ऑनलाइन परामर्श के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों को शामिल करने, आयुष चिकित्सकों के बीच डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकृत करने के लिए अंतर-प्रचालनीय प्रणालियों के विकास में भारत के व्यापक प्रयासों की भी सराहना की गई है।
आयुष मंत्रालय इस मान्यता का स्वागत करता है और इसे पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक मज़बूत वैज्ञानिक तंत्र बनाने में भारत के नेतृत्व का प्रमाण मानता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारंपरिक चिकित्सा के व्यापक ढांचे के अंतर्गत परिकल्पित वैश्विक सहयोग और ज़िम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देश की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करता है।

Friday, June 20, 2025

योग दिवस




अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएँ
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ

Thursday, June 19, 2025

विश्व को भारत की देन है योग : करे योग रहे निरोग

 

डॉ. सौरभ मालवीय 
भारतीय संस्कृति में योग का महत्त्वपूर्ण स्थान है। योग शब्द संस्कृत के युज से बना है। युज का अर्थ है शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों को एकत्रित करना। योग साधक को उसकी आत्मा से जोड़ता है। योग के द्वारा साधक अपनी मानसिक एवं शारीरिक शक्तियों को एकत्रित कर लेता है। योग का संबंध शरीर एवं मन दोनों से है। यह अध्यात्म से भी जुड़ा है। योग के आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि। योग एक कला, साधना एवं विद्या है। योग की चार विधियां हैं, जिनमें कर्म योग, भक्ति योग, राज योग एवं ज्ञान योग सम्मिलित हैं।  

योग अति प्राचीन है। मान्यता है कि जब सभ्यता ने जन्म लिया, तब योग का भी जन्म हुआ। योग एक प्राचीन विद्या है। कैलाश पर निवास करने वाले भगवान शिव को आदि योगी एवं आदि गुरु माना जाता है। भगवान शिव के पश्चात वैदिक काल के ऋषि-मुनियों ने योग को अपनाया। उन्होंने इसका संरक्षण किया था तथा इसके साथ-साथ इसका प्रचार-प्रसार भी किया। भगवान श्रीकृष्ण योगराज माने जाते हैं। वेदों, उपनिषदों, महाभारत एवं भगवद्‌गीता में भी योग का उल्लेख है। श्रीमद् भगवद्गीता में कहा गया है-
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
अर्थात हे धनंजय ! आसक्ति को त्याग कर तथा सिद्धि और असिद्धि में समभाव होकर योग में स्थित होकर तुम कर्म करो। यह समभाव ही योग कहलाता है।
मध्य युग में पतंजलि ने योग को सुव्यवस्थित रूप प्रदान करके इसका प्रचार- प्रसार किया। इसके पश्चात विभिन्न पंथों ने योग का विस्तार किया तथा इसका प्रचार- प्रसार करते हुए इसे लोकप्रिय बनाया। इनमें सिद्धपंथ, शैवपंथ, नाथपंथ, वैष्णव एवं शाक्त पंथ आदि सम्मिलित हैं।
गीतोपदेश में भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र अर्जुन को विस्तार से योग का महत्व बताया। उन्होंने कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग का वर्णन करते हुए अर्जुन से कहा-
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्।।
अर्थात् हे अर्जुन! मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा। 
इस श्लोक से योग की महत्ता का पता चलता है। 
सिन्धु घाटी की सभ्यता से प्राप्त वस्तुओं से पता चलता है कि उस समय भी लोग योग करते थे। हड़प्पा एवं  मोहनजोदड़ो में खुदाई में योग मुद्राओं वाली वस्तुएं प्राप्त हुईं। इसका अर्थ है कि भारत में हजारों वर्षों से लोग योग करते आ रहे हैं। 

योग के प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका 
योग प्राचीन काल की वह विद्या है, जो आज भी अत्यधिक लोकप्रिय है तथा दिन प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता में वृद्धि हो रही है। इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है कि प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने एवं योग को वैश्विक पहचान देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्ती भूमिका है। उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के पश्चात अनेक ऐसे सरहानीय कार्य किए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की एक नई पहचान स्थापित हुई है। इनमें योग भी सम्मिलित है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का विचार प्रथम बार 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान प्रस्तुत किया था। योग को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकतात्मकता, विचार और कार्य, संयम और सम्‍पूर्णता, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य, स्वास्थ्य एवं  कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, अपितु अपने आपको, दुनिया और प्रकृति के साथ एकता की भावना की खोज करने के लिए है। हमारी जीवन शैली को बदलकर और चेतना जागृत कर कल्‍याण में सहायता कर सकता है। आइए हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में कार्य करें।

इस प्रारंभिक प्रस्ताव के पश्चात संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 अक्टूबर 2014 को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पांडुलिपि’ प्रस्ताव पर अनौपचारिक परामर्श किया। इस परामर्श का आयोजन भारत के प्रतिनिधिमंडल द्वारा किया गया था। इसके पश्चात 11 दिसंबर 2014 को भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पांडुलिपि प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसे विश्व के 177 सदस्य देशों से समर्थन प्राप्त हुआ। यह सुखद एवं सराहनीय था कि इस पहल को वैश्विक नेताओं का भारी समर्थन प्राप्त हुआ। विश्व के कुल 177 देशों ने प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया, जो इस प्रकार के किसी भी संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव के लिए सह-प्रायोजकों की सर्वाधिक संख्या है। यह देश के लिए गौरव का विषय रहा। इसके पश्चात भारत के नेतृत्व में 21 जून 2015 को प्रथम ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस अवसर पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में 84 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दिवस पर हजारों लोगों ने दिल्ली के राजपथ पर योगासन किया था। इस कार्यक्रम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में संग्रहित किया गया था। तब से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।

वास्तव में योग भारत की अमूल्य धरोहर है, जो उसने विश्व को प्रदान की है। योग मनुष्य के तन एवं मन दोनों को स्वस्थ रखता है। योग करने से जहां मन- मस्तिष्क को शान्ति प्राप्त होती है, वहीं इससे शरीर भी स्वस्थ रहता है। देश के महापुरुषों ने योग को अति आवश्यक बताते हुए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला है।   
  
दुखों को समाप्त करता है योग                                                                                       
स्वामी विवेकानन्द के अनुसार- अभ्यास चीजों को आसान बना देता है। योग के माध्यम से ज्ञान, ज्ञान के माध्यम से प्रेम आता है, और प्रेम से परमानंद। वह कहते हैं कि प्रत्येक आत्मा संभावित रूप से दिव्य है। बाहरी और आंतरिक प्रकृति को नियंत्रित करके इस देवत्व को प्रकट करना लक्ष्य है। वह कहते हैं कि योग सिखाता है कि आत्मा है और इस आत्मा के अंदर सारी शक्ति है। यह पहले से ही मौजूद है और अगर हम इस शरीर पर अधिकार हासिल कर सकते हैं, तो सारी शक्ति सामने आ जाएगी। सारा ज्ञान आत्मा में है। लोग संघर्ष क्यों कर रहे हैं ? दुख को कम करने के लिए। सारे दुख हमारे शरीर पर अधिकार न होने के कारण होते हैं। इस प्रकार आप अपने शरीर पर अधिकार करें तो दुनिया के सभी दुख दूर हो जाएंगे। संसार के सारे दुख इन्द्रियों में हैं। दुख और सुख केवल इन्द्रियपरायण व्यक्ति के ही हो सकते हैं। योग इन्द्रियों, इच्छा और मन को नियंत्रित करके सापेक्ष ज्ञान से परे जाना है। वह कहते हैं कि काश ईश्वर की कृपा से ऐसा होता कि सभी मनुष्य इतने गठित होते कि उनके मन में दर्शन, रहस्यवाद, भावना और कार्य के सभी तत्व समान रूप से पूर्ण रूप से मौजूद रहते। यही आदर्श है, मेरे पूर्ण मनुष्य का आदर्श। इन चारों दिशाओं में सामंजस्य बिठाना मेरा धर्म का आदर्श है। और यह धर्म उसी से प्राप्त होता है, जिसे हम भारत में योग- ‘ईश्वर से मिलन’ कहते हैं।   
                  
वास्तव में योग हमारे मन- मस्तिष्क को स्थिरता प्रदान करता है, शान्ति प्रदान करता है, धैर्य प्रदान करता है। योग मनुष्य के आत्मबल में वृद्धि करता है, उसका आत्मविश्वास बढ़ाता है। आज के तनाव के युग में योग और भी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी हो जाता है। हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय योग के लिए भी अवश्य निकालना चाहिए। 24 घंटे में एक घंटा स्वयं के लिए अर्थात शरीर के लिए देना चाहिए। करे योग रहे निरोग। 

Wednesday, June 26, 2024

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रतिबद्ध है योगी सरकार


डॉ. सौरभ मालवीय  
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य के प्रति अत्यंत गंभीर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ रहे। इसलिए सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को निरंतर बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की योजनाओं के लिए 27,086 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। प्रदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के साथ-साथ स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाएंगे। इसके साथ ही राज्य में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं भी खोली जाएंगी। ये विभिन्न संचारी एवं गैर-संचारी रोगों के लिए नैदानिक सुविधाएं भी प्रदान करेंगी। इनमें शय रोग, एचआईवी, मलेरिया, जल जनित रोग एवं हेपेटाइटिस आदि के लिए विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अंतर्गत परिकल्पित परीक्षण सम्मिलित हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को बहुत लाभ होगा। उन्हें जांच आदि के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन 
प्राय: देखा जाता है कि गांवों की अपेक्षा शहरों में पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। इसलिए योगी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दे रही है। इसके दृष्टिगत   योगी सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 7350 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। प्रधानमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं पर 952 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में समुचित उपचार उपलब्ध होगा। आपातकाल की स्थिति में उन्हें रोगी को लेकर शहर की ओर दौड़ना नहीं पड़ेगा। रोगी को समय पर उपचार उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही उनका समय एवं धनराशि की भी बचत होगी। 

मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना
योगी सरकार ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत में वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इस योजना में उन परिवारों को सम्मिलित किया जाता है, जो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्राप्त करने से वंचित रह गए हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के नागरिकों को पांच लाख रूपए तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा। इसके माध्यम से वे नि:शुल्क अपना उपचार सरकारी या निजी अस्पताल में करवा सकेंगे। इस योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 1 मार्च 2019 को किया गया था। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 10 करोड़ परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 में प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 322 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
वास्तव में महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर तनिक भी ध्यान नहीं देती हैं। इसलिए स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। गर्भावस्था एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पौष्टिक आहार की अत्यधिक आवश्यकता होती है। महिला के साथ-साथ उसके गर्भस्थ एवं जन्मे शिशु के लिए भी पौष्टिक आहार आवश्यक है। यदि माँ स्वस्थ होगी, तो उसका शिशु भी स्वस्थ होगा। एक कुपोषित महिला का शिशु भी कुपोषण का शिकार हो जाता है। इस कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से ही आरंभ हो जाता है। इसका दुष्प्रभाव महिला के साथ-साथ उसके बच्चे पर भी पड़ता है। आर्थिक एवं सामाजिक दबाव के कारण बहुत सी महिलालाएं गर्भावस्था के अंतिम समय तक परिवार के लिए परिश्रम करती हैं। वे घर में ही नहीं, अपितु घर से बाहर जाकर भी परिशम करती हैं। अत्यधिक परिश्रम के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सरकार ने ऐसी महिलाओं के लिए यह योजना प्रारंभ की है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना
योगी सरकार सेवानिवृत कर्माचारियों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना संचालित कर रही है। वित्तीय वर्ष 2024-2025 में इस योजना के लिए 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह योजना योगी सरकार द्वारा 21 जुलाई 2022 को प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य राज्य के सभी कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के कर्मचारियों को सरकार द्वारा एक स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है। इसके माध्यम से वे अपना एवं अपने परिवार का अस्पताल में नि:शुल्क उपचार करवा सकते हैं। उपचार का सारा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि योगी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार ने यहां नए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना पांडेयपुर स्थित मानसिक अस्पताल के परिसर में की जाएगी। लगभग 17 एकड़ भूमि में बनने वाले इस महाविद्यालय के निर्माण पर 12 सौ करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। इसके लिए सरकार ने अभी 400 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। इसमें एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी, जिन्हें बाद में बढ़ाया भी जा सकता है।    
योगी सरकार ने असाध्य रोगों के नि:शुल्क उपचार के लिए 125 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। वित्तीय वर्ष 2023-2024 के लिए 100 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए थे। राजकीय महाविद्यालयों के ट्रामा सेंटरों को अपग्रेड किया जाएगा। इसमें 100 बेड के साथ-साथ 200 बेड के एपेक्स ट्रामा सेंटर भी सम्मिलित होंगे। इसके अतिरिक्त वाराणसी में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय तथा अयोध्या में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है।   

प्रधानमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य योजना
प्रधानमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत प्रदेश में 1600 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोले जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1035 राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों को स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में परिवर्तित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के 21675 उपकेंद्रों को प्रधानमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में परिवर्तित किया जाएगा। इन सबको टेली मेडिसिन से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से रोगियों को उपचार संबंधी सुझाव दिए जाएंगे। जिन गंभीर रोगों का उपचार स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र पर उपलब्ध नहीं होगा, उन रोगियों को टेली मेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों के सुझाव उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्हें नि:शुल्क दवाएं भी प्रदान की जाएंगी। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार प्रदेश के 18 हजार स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की नियुक्ति की गई है। शेष केन्द्रों में भी शीघ्र ही नियुक्तियां की जाएंगी। 

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पांच करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी करने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार योगी सरकार ने 50,017,920 आयुष्मान कार्ड जारी किए हैं तथा 74,382,304 लोगों को लाभान्वित किया है। इस योजना में प्रदेश के 3716 अस्पताल सम्मिलित हैं। इस योजना के अंतर्गत कुल 3,481,252 स्वास्थ्य दावे दायर किए गए थे। इनमें से प्रदेश में 92।48 प्रतिशत की निपटान दर के साथ 3,275,737 दावों का निपटान कर दिया गया है।
नि:संदेह योगी सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

Thursday, March 3, 2022

उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा के लिए स्वास्थ्य सेवाएं बनीं संजीवनी


डॉ. सौरभ मालवीय
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को भी अपने लिए संजीवनी मान रही है। योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का जितना विकास हुआ है, उतना विकास न तो मायावती के शासनकाल में हुआ और न अखिलेश यादव के शासनकाल में ही हुआ।

कोरोना महामारी के दौरान जब प्राय: सभी राज्यों ने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूर्ण तालाबंदी लगाकर सामान्य गतिविधियों को ठप कर दिया, जिससे साधारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया, जबकि उत्तर प्रदेश ने कोरोना कर्फ्यू की नीति को लागू किया। उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शिता के कारण जीवन और जीविका दोनों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखा गया। सरकार द्वारा लागू इस अभिनव व्यवस्था में चिकित्सा जैसी अति आवश्यक गतिविधियों के साथ-साथ किराना की दुकानों, दुग्ध डेयरियों, फल-सब्जी, औद्योगिक इकाइयों, शीतगृहों, कृषि कार्य, निर्माण कार्य, खाद-बीज की दुकानों, खेतबाड़ी से जुड़े कार्य, गेहूं-धान व अन्य कृषि उत्पादों के क्रय केंद्रों आदि का संचालन जारी रखा गया। कोरोना कर्फ्यू के बीच गेहूं खरीद में तो रिकॉर्ड भी बना। लोगों के आवश्यक आवागमन पर भी कोई रोक नहीं थी। विशेष परिस्थितियों के लिए ई-पास की सुविधा दी गई। राज्य के भीतर राज्य परिवहन निगम की बसें भी संचालित होती रहीं, ताकि नागरिकों को आवश्यकता पर आवागमन में समस्या न हो। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश का रिकवरी दर देश में सबसे अच्छा है। यह प्रदेश सबसे कम पॉजिटिविटी दर वाले राज्यों में सम्मिलित है।
नि:संदेह उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी है। राज्य में सभी चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आयुष चिकित्सा प्रणाली पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले वर्ष गोरखपुर के भटहट ब्लॉक के पिपरी तलकुलहा में आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था। इस विश्वविद्यालय का नामकरण महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय रखा गया है। यह उत्तर प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय होगा। इस विश्वविद्यालय परिसर में आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा का एक उत्कृष्ट श्रेणी का शोध संस्थान भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें अन्तर्विभागीय चिकित्सा पद्धतियों का पारस्परिक समन्वय करते हुए शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। 52 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आयुष विश्वविद्यालय का वास्तुशिल्प भारतीय संस्कृति के अनुरूप मनोहारी होगा। इसके परिसर में एकेडमिक भवन, प्रशासनिक भवन, आवासीय भवन, छात्रावास, अतिथि गृह के अतिरिक्त ऑडिटोरियम और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक भी बनाया जाएगा।

इस विश्वविद्यालय से राज्य में संचालित समस्त आयुष, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग व प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान और महाविद्यालयों एवं शिक्षा संस्थानों को जोड़ा जाएगा। आयुष महाविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया, सत्र-नियमन, परीक्षा-संचालन व परिणाम में एकरूपता स्थापित होगी। इस विश्वविद्यालय में पैरामेडिकल, नर्सिंग, फॉर्मेसी एवं आरोग्यता से जुड़े सभी पाठ्यक्रमों के निर्माण एवं अध्ययन, अध्यापन, शोध की व्यवस्था होगी। इस विश्वविद्यालय द्वारा योग, आयुर्वेद, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि शिक्षा, कौशल विकास, उच्चस्तरीय शोध आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त इसके परिसर में आधुनिक चिकित्सा पद्धति एलोपैथी की सभी विधाओं से आरोग्यता प्राप्त करने हेतु जांच, परामर्श एवं उपचार तथा अध्ययन, अध्यापन व शोध के लिए उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान स्थापित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि हठयोग, राजयोग या मंत्रयोग समेत योग की जितनी भी विशिष्ट विधाएं हैं, उन सभी अलग-अलग व्यवहारिक स्वरूपों के जनक महायोगी गुरु गोरखनाथ ही माने जाते हैं। आयुर्वेद में 'रस शास्त्र' और धातु सिद्धांत में 'इमरजेंसी मेडिसिन' के जनक भी गुरु गोरखनाथ ही माने जाते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी है। पिछले चार वर्षों की समयावधि में राज्य में एक करोड़ 18 लाख गरीब परिवारों को छह करोड़ 47 लाख लोगों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा कोष का गठन किया गया। राज्य के 47 जनपदों में नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई गई। साथ ही 56 जनपद चिकित्सालयों में नि:शुल्क सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। राज्य में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा संचालित हैं। एसजीपीजीआई लखनऊ में स्टेम सेल रिसर्च सेंटर, बॉन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर, लीवर ट्रांसप्लांट सेंटर एवं 60 बेड का ट्रामा सेंटर क्रियाशील है। रोबोटिक सर्जरी प्रारंभ हो गई है। इमरजेंसी मेडिसिन एवं रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर निर्माणाधीन है। एसजीपीजीआई लखनऊ में इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एवं इंडोक्राइनॉलोजी विभाग के नाम से एक नये भवन की स्थापना का निर्णय लिया गया है। राज्य के 45 जनपदों के राजकीय मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों व चिकित्सा विश्वविद्यालयों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की स्थापना की जाएगी। केजीएमयू में राज्य का प्रथम इंटीग्रेटेड स्पाइन सेंटर एवं मेडिसिन विभाग में आर्थोप्लास्टी यूनिट एवं पीड्रिक विभाग तथा राज्य के प्रथम ह्यूमन मिल्क बैंक की स्थापना की गई। केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अंतर्गत बर्न एवं रिकंस रिकंस्ट्रक्टिव यूनिट की स्थापना की गई। केजीएमयू में रोबोट सर्जरी यूनिट की स्थापना की जाएगी।

राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में कोरोना की रोकथाम हेतु टीकाकरण के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 5395 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना के लिए 1300 करोड़ की व्यवस्था की गई। आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 142 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के लिए 320 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। डायग्नोस्टिक मूलभूत ढांचा सृजित करने के लिए 1073 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। शहरी स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों के लिए 425 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। राज्य औषधि नियंत्रण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए 54 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। राज्य के 12 मंडलों में खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं एवं मंडलीय कार्यालयों के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। ब्लॉक स्तर पर लोक स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना के लिए 77 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
 
राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है। बिजनौर, कुशीनगर, सुलतानपुर, गोंडा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, चंदौली, बुलंदशहर, सोनभद्र, पीलीभीत, औरैया, कानपुर देहात तथा कौशाम्बी में निर्माणाधीन नये मेडिकल कॉलेजों के लिए 1950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। राज्य के 16 असेवित जनपदों में पीपीसी मोड में मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए 48 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के लिए 23 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई।  एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, गाजीपुर एवं मिर्जापुर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में जुलाई 2021 से शिक्षण सत्र प्रारंभ किए जाने के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। 

अमेठी एवं बलरामपुर में नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए 175 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। लखनऊ में माननीय अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। असाध्य रोगों की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराए जाने के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। लखनऊ में इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एंड इंफेक्शस डिजीजेज के अंतर्गत बायोसेफ्टी लेवल-4 लैब की स्थापना का लक्ष्य रखा गया। एसजीपीजीआई लखनऊ में उन्नत मधुमेह केंद्र की स्थापना कराए जाने का निर्णय लिया गया। राज्य में दो राजकीय औषधि निर्माणशालाओं लखनऊ एवं पीलीभीत सुदृढ़ीकरण एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि किए जाने का लक्ष्य रखा गया। 
कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश जब ऑक्सीजन के संकट से जूझ रहा था, तब उत्तर प्रदेश ने वह कदम उठाया जिसकी सर्वत्र सराहना हुई। ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया। इस पर स्वयं नीति आयोग ने मुहर भी लगाई है। उत्तर प्रदेश में 'ऑक्सीजन मॉनीटरिंग सिस्टम फार उत्तर प्रदेश' का शुभारंभ हुआ। परिणामस्वरूप मात्र 10 दिनों से प्रतिदिन एक हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन की रिकॉर्ड आपूर्ति संभव हो सकी, जबकि कुछ दिनों पूर्व तक यह आपूर्ति मात्र 250 मीट्रिक टन थी। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लागू करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य था।

विदित रहे कि इससे पूर्व उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

 
 

Monday, November 19, 2018

स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत


डॊ. सौरभ मालवीय
जिस प्रकार स्वच्छ तन में स्वच्छ मन रहता है, ठीक उसी प्रकार स्वच्छ स्थान पर स्वस्थ लोग रहते हैं। स्वच्छता और स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। गंदगी के कारण अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। कई बार ये रोग महामारी का कारण भी बन जाते हैं। रोगों के कारण मनुष्य दुर्बल तो होता ही है, साथ ही धन और समय की भी हानि होती है। राष्ट्र की उन्नति के लिए उसके जन का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार देशव्यापी स्वच्छ भारत अभियान चला रही है। इस अभियान के माध्यम से सरकार ने एक ऐसा रचनात्मक और सहयोगात्मक मंच प्रदान किया है, जिसका उद्देश्य गली-मुहल्लों, सड़कों, सार्वजनिक स्थलों तथा अपने आसपास के स्थानों को स्वच्छ रखना है। यह अभियान प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों और संगठनों के अभियान संबंधी प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। कोई भी व्यक्ति, सरकारी संस्था या निजी संगठन इसमें भागीदार बन सकते हैं। वे अपने दैनिक कार्यों में से कुछ समय निकालकर देश में स्वच्छता संबंधी कार्यों में योगदान दे सकते हैं।


उल्लेखनीय है कि आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल 1999 से केंद्र सरकार ने व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन कर पूर्ण स्वच्छता अभियान आरंभ किया था। इसके पश्चात 1 अप्रैल 2012 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा इसे निर्मल भारत अभियान का नाम दिया गया। स्वच्छ भारत अभियान के रूप में 24 सितंबर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति से निर्मल भारत अभियान का पुनर्गठन किया गया था। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस अभियान के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी की 145वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2014 को दिल्ली के राजघाट से स्वच्छ भारत अभियान का प्रारंभ किया था। केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 1.96 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौच मुक्त भारत को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि गांधीजी के दो सपनों भारत छोड़ो और स्वच्छ भारत में से एक को साकार करने में लोगों ने सहायता की। अपितु स्वच्छ भारत का दूसरा सपना अब भी पूरा होना शेष है। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते यह हमारा सामाजिक दायित्व है कि हम उनके स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करें। प्रधानमंत्री ने देश की सभी पिछली सरकारों और सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा स्वच्छता को लेकर किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत को स्वच्छ बनाने का काम किसी एक व्यक्ति या अकेले सरकार का नहीं है, यह काम तो देश के 125 करोड़ लोगों द्वारा किया जाना है जो भारत माता के पुत्र-पुत्रियां हैं। स्वच्छ भारत अभियान को एक जन आंदोलन में परिवर्तित करना चाहिए। लोगों को ठान लेना चाहिए कि वह न तो गंदगी करेंगे और न ही करने देंगे। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार साफ-सफाई न होने के कारण भारत में प्रति व्यक्ति औसतन 6500 रुपये व्यर्थ हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके दृष्टिगत सवच्छ भारत जन स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव डालेगा और इसके साथ ही गरीबों की गाढ़ी कमाई की बचत भी होगी, जिससे अंतत: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने लोगों से साफ-सफाई के सपने को साकार करने के लिए इसमें हर वर्ष 100 घंटे योगदान करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने शौचालय बनाने की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देशभक्ति और जन स्वास्थ्य के प्रति कटिबद्धता से जोड़ कर देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री द्वारा मृदला सिन्हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अम्बानी, कमल हसन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा जैसी नौ हस्तियों को आमंत्रित किया गया कि वे भी स्वच्छ भारत अभियान में अपना सहयोग प्रदान करें, इसके चित्र सोशल मीडिया पर साझा करें और अन्य नौ लोगों को भी अपने साथ जोड़ें, ताकि यह एक श्रृंखला बन जाएं। आम जनता को भी सोशल मीडिया पर हैश टैग #MyCleanIndia लिखकर अपने सहयोग को साझा करने के लिए कहा गया।


देश के सामने अस्वच्छता एक बड़ी समस्या है। खुले में शौच के कारण महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें रात की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके कारण उन्हें शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। वे कई रोगों की चपेट में आ जाती हैं। खुले में शौच के कारण महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं भी होती रहती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रथम 2014 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में शौचालयों की आवश्यकता पर बल दिया था। उन्होंने कहा था- क्या हमें कभी दर्द हुआ है कि हमारी मां और बहनों को खुले में शौच करना पड़ता है? गांव की गरीब महिलाएं रात की प्रतीक्षा करती हैं। जब तक अंधेरा नहीं उतरता है, तब तक वे शौच को बाहर नहीं जा सकती हैं। उन्हें किस प्रकार की शारीरिक यातना होती होगी, क्या हम अपनी मां और बहनों की गरिमा के लिए शौचालयों की व्यवस्था नहीं कर सकते हैं?
इसी प्रकार उन्होंने 2014 के जम्मू और कश्मीर राज्य चुनाव अभियान के दौरान स्कूलों में शौचालयों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था- विद्यालयों में शौचालयों की कमी के कारण छात्राओं को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ देनी पड़ती है। वे अशिक्षित रहती हैं। हमारी बेटियों को गुणवत्ता की शिक्षा का समान अवसर भी मिलना चाहिए।


उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य व्यक्ति, क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से खुले में शौच की समस्या को समाप्त करना है। यह अभियान शहरों और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्षित करते हुए 2.5 लाख समुदायिक शौचालय और 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराना है। इसके साथ ही प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आवासीय क्षेत्रों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना है, जहां व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण करना कठिन है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, पर्यटन स्थल आदि पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करना है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया। इसका उद्देश्य लोगों को स्वच्छता का महत्व बताते हुए खुले में शौच की समस्या को समाप्त करना है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे से जैव उर्वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करना है। इसे स्वच्छता के साथ-साथ धन उपार्जन भी होगा।
स्कूलों में भी स्वच्छ्ता के लिए अभियान चलाया गया। स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान भारत का प्रारंभ तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने किया था। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों और छात्रों के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान में भाग भी लिया था।


स्वच्छता अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण भी कराया गया और विजेता शहरों को पुरस्कार भी दिए गए। स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) के तत्वाधान में केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 का आयोजन किया था। इसमें 4203 शहरी स्थानीय निकायों का मूल्यांकन किया गया। इसके अंतर्गत 2700 मूल्यांकन कर्मियों ने पूरे देश के 40 करोड़ लोगों से संबंधित स्थानीय निकायों का सर्वेक्षण किया। इसके लिए 53.58 लाख स्वच्छता ऐप डाउनलोड किए गए तथा 37.66 लाख नागरिकों के फीडबैक का संग्रह किया गया। नागरिकों के फीडबैक तथा सेवा स्तर में हुई प्रगति में से प्रत्येक को 35 प्रतिशत की भारिता दी गई है, जबकि प्रत्यक्ष निरीक्षण को 30 प्रतिशत की भारिता दी गई है। यह कार्यक्रम 4 जनवरी 2018 से 10 मार्च 2018 तक जारी रहा। सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश के इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ नगर होने का सम्मान मिला। इसी राज्य के भोपाल को दूसरा स्थान मिला। चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर रहा। राज्यों में सबसे अधिक स्वच्छ रहने वालों में झारखंड पहले स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र को दूसरा और छत्तीसगढ़ को तीसरा स्थान मिला। राष्ट्रीय स्तर के कुल 23 और जोनल स्तर के 20 पुरस्कार घोषित किए गए। उल्लेखनीय है कि इसी प्रकार इससे पूर्व भी इस प्रकार के सर्वेक्षण किए गए थे। वर्ष 2017 में 434 नगरों में स्वच्छता सर्वेक्षण किया गया था तथा इंदौर को सर्वाधिक स्वच्छ शहर का पुरस्कार दिया गया था। वर्ष 2016 में 73 नगरों में स्वच्छता सर्वेक्षण किया गया था। इसमें मैसूर को सर्वाधिक स्वच्छ नगर होने का श्रेय प्राप्त हुआ था।


देश में स्वच्छ भारत अभियान के सुखद परिणाम देखने को मिल रहे हैं। सुलभ और सुरक्षित शौचालयों के कारण महिलाओं के जीवन में परिवर्तन आया है। लोग भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं। लोग यहां-वहां कूड़ा कचरा फेंकने की बजाय कूड़ेदान का प्रयोग करने लगे हैं। बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी अब सच्छता दिखाई देने लगी है। स्कूली बच्चे और कॊलेज के छात्र भी इस अभियान में भाग ले रहे हैं। वे रैलियों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।


विदेशों में भी स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा होने लगी है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार जापान के प्रधानमंत्री शिन्जो आबे ने स्वच्छ भारत अभियान को अपनी सरकार का समर्थन देने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि साफ पानी को सुरक्षित रखना और स्वच्छता की स्थिति में सुधार करना पूरी दुनिया के सामने आम चुनौती है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए हर देश प्रयास करेगा।
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने भारत में स्वच्छता अभियान चलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है. उन्होंने ट्वीट किया- नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत सरकार ने स्वच्छता में सुधार की दिशा में अहम भूमिका निभाई है. अब स्वच्छ भारत को सफल बनाने का समय है।

निसंदेह, स्वच्छ भारत अभियान शीघ्र अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लोगों के जीवन को सुखद और समृद्ध बनाएगा।

Thursday, November 15, 2018

प्रदूषण से त्राहिमाम

डॊ. सौरभ मालवीय
हमारे देश में वायु प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण घातक स्तर तक पहुंच गया है। हाल में शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 दर्ज किया गया। इसी प्रकार वायु में घुले हुए अतिसूक्ष्म प्रदूषक कण पीएम 2.5 को 215 दर्ज किया गया, जो कि स्वास्थ्य के लिए अति हानिकारक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2016 में प्रदूषण के कारण पांच वर्ष से कम आयु के एक लाख से अधिक बच्चों की मृत्यु हुई। इनमें भारत के 60,987, नाइजीरिया के 47,674, पाकिस्तान के 21,136 और कांगों के 12,890 बच्चे सम्मिलित हैं। रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण 2016 में पांच से 14 साल के 4,360 बच्चों की मत्यु हुई। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 प्रतिशत बच्चों पर वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ा, जबकि उच्च आय वाले देशों में 52 प्रतिशत बच्चे प्रभावित हुए। वायु प्रदूषण के कारण विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख लोगों की अकाल मृत्यु होती है। संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) के अनुसार भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण वर्षा को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण लंबे समय तक मानसून कम हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वायु में मौजूद पीएम 2.5 कणों के कारण कुछ स्थानों बहुत अधिक वर्षा हो सकती है, तो कुछ स्थानों पर बहुत कम होने की संभावना है।

दि एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार शीतकाल में 36 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली में ही उत्पन्न होता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से 34 प्रतिशत प्रदूषण यहां आता है। शेष 30 प्रतिशत प्रदूषण एनसीआर और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से यहां आता है। रिपोर्ट में प्रदूषण के कारणों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदूषण के लिए वाहनों का योगदान लगभग 28 प्रतिशत है। इसमें भी भारी वाहन सबसे अधिक 9 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इसके पश्चात दो पहिया वाहनों का नंबर आता है, जो 7 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। तीन पहिया वाहनों से 5 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। चार पहिया वाहन और बसें 3-3 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न करती हैं। अन्य वाहन एक प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं।
धूल से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण का योगदान 18 प्रतिशत है। इसमें सड़क पर धूल से प्रदूषण 3 प्रतिशत प्रदूषण होता है। निर्माण कार्यों से एक प्रतिशत व अन्य कारणों से 13 प्रतिशत प्रदूषण है। औद्योगों के कारण भी वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। शहर के प्रदूषण में 30 प्रतिशत योगदान इनका भी है। इसमें पावर प्लांट 6 प्रतिशत तथा ईंट भट्ठे 8 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। इसी प्रकार स्टोन क्रशर के कारण 2 प्रतिशत तथा अन्य उद्योगों से 14 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न होता है। आवासीय क्षेत्रों के कारण 10 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।
शीतकाल में पीएम 10 के स्तर पर पहुंचने के कई कारण हैं। इस मौसम में उद्योगों से 27 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न होता है, जबकि वाहनों से 24 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। इसी प्रकार धूल से 25 प्रतिशत तथा आवासीय क्षेत्रों से 9 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। उल्लेखनीय है कि पराली जलाने के कारण और बायोमास से केवल 4 प्रदूषण उत्पन्न होता है, जबकि दिल्ली के प्रदूषण के लिए समीपवर्ती राज्यों पंजाब और हरियाणा को दोषी ठहराया जाता है। कहा जाता है कि पंजाब और हरियाणा के किसान अपने खेतों में पराली जलाते हैं, जिसका धुआं दिल्ली में प्रदूषण का कारण बनता है।

प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाते हुए, केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री को ही स्वाकृति दी है। इतना ही नहीं, पटाखे फोड़ने के लिए भी कोर्ट ने समयसारिणी जारी कर चुका है। इसके अनुसार दीपावली पर लोग रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जला पाएंगे। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य में सुबह साढ़े चार बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक भी पटाखे फोड़ने की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि दीपावली के उत्सव को लेकर हर राज्य की अपनी अलग-अलग परंपराएं और संस्कृति हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध लोगों के धार्मिक अधिकारों को खारिज करता है, परंतु कोर्ट ने प्रतिबंध को हटाने से इनकार करते हुए कहा कि ग्रीन पटाखे बनाने का उनका आदेश पूरे देश के लिए है। अर्थात अब देश मे कहीं भी सामान्य पटाखे नहीं बनेंगे। केवल कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे ही बनेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रदूषण करने वाले जो पटाखे पहले बन चुके है, उन्हें भी दिल्ली-एनसीआर मे बेचे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अपितु दिल्ली एनसीआर के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर सामान्य पटाखे चलाए जा सकते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) भी प्रदूषण को लेकर कठोर कदम उठा रहा है। बोर्ड ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के राज्य प्रदूषण नियंत्रण निकायों को वायु प्रदूषण की जांच के लिए निर्देशों का पालन नहीं करने वाले लोगों या एजेंसियों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने एक नवंबर से निर्माण कार्य जैसी कई गतिविधियों को प्रतिबंध दिया है। इसके अतिरिक्त लोगों से अगले 10 दिनों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए आग्रह किया गया है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में कुल 35 लाख निजी वाहन हैं। वर्ष 2016 में भी ऑड-ईवन योजना को दो बार 1 से 15 जनवरी और 15 से 30 अप्रैल के बीच लागू किया गया था। जीआरपी वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक कारगर योजना है। इसे 15 अक्टूबर से लागू किया गया था। दिल्ली मेट्रो ने भी बुधवार से अपने नेटवर्क पर 21 अतिरिक्त ट्रेनें आरंभ की हैं।

चिकित्सकों के अनुसार वायु में मिले अति सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से शरीर के भीतर चले जाते हैं, जिसके कारण अनेक शारीरिक और मानसिक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। ये कण गर्भ में पल रहे शिशु को भी अपनी चपेट में ले लेते हैं, जिससे जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ वातावरण नितांत आवश्यक है। इसके लिए प्रदूषण पर अंकुश लगाना होगा। इस अभियान में लोगों को भी आगे आना चाहिए।

दिल्ली की विषैली हवा


डॊ. सौरभ मालवीय
हमारे देश में वायु प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण घातक स्तर तक पहुंच गया है। हाल में शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 दर्ज किया गया। इसी प्रकार वायु में घुले हुए अतिसूक्ष्म प्रदूषक कण पीएम 2.5 को 215 दर्ज किया गया, जो कि स्वास्थ्य के लिए अति हानिकारक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2016 में प्रदूषण के कारण पांच वर्ष से कम आयु के एक लाख से अधिक बच्चों की मृत्यु हुई। इनमें भारत के 60,987, नाइजीरिया के 47,674, पाकिस्तान के 21,136 और कांगों के 12,890 बच्चे सम्मिलित हैं। रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण 2016 में पांच से 14 साल के 4,360 बच्चों की मत्यु हुई। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 प्रतिशत बच्चों पर वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ा, जबकि उच्च आय वाले देशों में 52 प्रतिशत बच्चे प्रभावित हुए। वायु प्रदूषण के कारण विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख लोगों की अकाल मृत्यु होती है। संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) के अनुसार भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण वर्षा को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण लंबे समय तक मानसून कम हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वायु में मौजूद पीएम 2.5 कणों के कारण कुछ स्थानों बहुत अधिक वर्षा हो सकती है, तो कुछ स्थानों पर बहुत कम होने की संभावना है।
दि एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार शीतकाल में 36 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली में ही उत्पन्न होता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से 34 प्रतिशत प्रदूषण यहां आता है। शेष 30 प्रतिशत प्रदूषण एनसीआर और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से यहां आता है। रिपोर्ट में प्रदूषण के कारणों पर विस्तृत जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदूषण के लिए वाहनों का योगदान लगभग 28 प्रतिशत है। इसमें भी भारी वाहन सबसे अधिक 9 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इसके पश्चात दो पहिया वाहनों का नंबर आता है, जो 7 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। तीन पहिया वाहनों से 5 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। चार पहिया वाहन और बसें 3-3 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न करती हैं। अन्य वाहन एक प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं।
धूल से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण का योगदान 18 प्रतिशत है। इसमें सड़क पर धूल से प्रदूषण 3 प्रतिशत प्रदूषण होता है। निर्माण कार्यों से एक प्रतिशत व अन्य कारणों से 13 प्रतिशत प्रदूषण है। औद्योगों के कारण भी वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। शहर के प्रदूषण में 30 प्रतिशत योगदान इनका भी है। इसमें पावर प्लांट 6 प्रतिशत तथा ईंट भट्ठे 8 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। इसी प्रकार स्टोन क्रशर के कारण 2 प्रतिशत तथा अन्य उद्योगों से 14 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न होता है। आवासीय क्षेत्रों के कारण 10 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।
शीतकाल में पीएम 10 के स्तर पर पहुंचने के कई कारण हैं। इस मौसम में उद्योगों से 27 प्रतिशत प्रदूषण उत्पन्न होता है, जबकि वाहनों से 24 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। इसी प्रकार धूल से 25 प्रतिशत तथा आवासीय क्षेत्रों से 9 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। उल्लेखनीय है कि पराली जलाने के कारण और बायोमास से केवल 4 प्रदूषण उत्पन्न होता है, जबकि दिल्ली के प्रदूषण के लिए समीपवर्ती राज्यों पंजाब और हरियाणा को दोषी ठहराया जाता है। कहा जाता है कि पंजाब और हरियाणा के किसान अपने खेतों में पराली जलाते हैं, जिसका धुआं दिल्ली में प्रदूषण का कारण बनता है।
प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाते हुए, केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री को ही स्वाकृति दी है। इतना ही नहीं, पटाखे फोड़ने के लिए भी कोर्ट ने समयसारिणी जारी कर चुका है। इसके अनुसार दीपावली पर लोग रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जला पाएंगे। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य में सुबह साढ़े चार बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक भी पटाखे फोड़ने की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि दीपावली के उत्सव को लेकर हर राज्य की अपनी अलग-अलग परंपराएं और संस्कृति हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध लोगों के धार्मिक अधिकारों को खारिज करता है, परंतु कोर्ट ने प्रतिबंध को हटाने से इनकार करते हुए कहा कि ग्रीन पटाखे बनाने का उनका आदेश पूरे देश के लिए है। अर्थात अब देश मे कहीं भी सामान्य पटाखे नहीं बनेंगे। केवल कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे ही बनेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रदूषण करने वाले जो पटाखे पहले बन चुके है, उन्हें भी दिल्ली-एनसीआर मे बेचे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अपितु दिल्ली एनसीआर के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर सामान्य पटाखे चलाए जा सकते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) भी प्रदूषण को लेकर कठोर कदम उठा रहा है। बोर्ड ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के राज्य प्रदूषण नियंत्रण निकायों को वायु प्रदूषण की जांच के लिए निर्देशों का पालन नहीं करने वाले लोगों या एजेंसियों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने एक नवंबर से निर्माण कार्य जैसी कई गतिविधियों को प्रतिबंध दिया है। इसके अतिरिक्त लोगों से अगले 10 दिनों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए आग्रह किया गया है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में कुल 35 लाख निजी वाहन हैं। वर्ष 2016 में भी ऑड-ईवन योजना को दो बार 1 से 15 जनवरी और 15 से 30 अप्रैल के बीच लागू किया गया था। जीआरपी वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक कारगर योजना है। इसे 15 अक्टूबर से लागू किया गया था। दिल्ली मेट्रो ने भी बुधवार से अपने नेटवर्क पर 21 अतिरिक्त ट्रेनें आरंभ की हैं।
चिकित्सकों के अनुसार वायु में मिले अति सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से शरीर के भीतर चले जाते हैं, जिसके कारण अनेक शारीरिक और मानसिक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। ये कण गर्भ में पल रहे शिशु को भी अपनी चपेट में ले लेते हैं, जिससे जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ वातावरण नितांत आवश्यक है। इसके लिए प्रदूषण पर अंकुश लगाना होगा। इस अभियान में लोगों को भी आगे आना चाहिए।

Monday, August 1, 2016

कैंसर के कारण और निदान

डॉ. सौरभ मालवीय
आधुनिक जीवन शैली और दोषपूर्ण खान-पान के चलते विश्वभर में हर साल लाखों लोग केंसर जैसे बीमारी की चपेट में आ रहे है और असमय ही काल कवलित हो जाते है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बाकी देशों के मुक़ाबले भारत में केंसर रोग से प्रभावितों की दर कम होने के बावजूद यहाँ 15 प्रतिशत लोग केंसर के शिकार होकर अपनी जान गवा देते है. डब्लू एच्चों की ताज़ा सूची के मुताबिक 172 देशों की सूची में भारत का स्थान 155वां हैं. सूची के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां केंसर से होने वाली मौत की दरें सर्वाधिक कम है. फिलहाल भारत में यह प्रतिलाख 70.23 व्यक्ति है. डेन्मार्क जैसे यूरोपीय देशों में यह संख्या दुनिया में सर्वाधिक है यहाँ केंसर प्रभावितों  की दर प्रतिलाख 338.1 व्यक्ति है. भारत में हर साल केंसर के 11 लाख नए मामले सामने आरहे है वर्तमान में कुल 24 लाख लोग इस बीमारी के शिकार है. राष्ट्रीय केंसर संस्थान के एक प्रतिवेदन के अनुसार देश मे हर साल इस बीमारी से 70 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है इनमें से 80 प्रतिशत लोगो के मौत का कारण बीमारी के प्रति उदासीन रवैया है. उन्हें इलाज़ के लिए डॉक्टर के पास तब लेजाते है जब स्थिति लगभग नियंत्रण से बेकाबू हो जाती है, केंसर संस्थान की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल सामने आरहे साढ़े बारह लाख नए रोगियों में से लगभग सात लाख महिलाएं होती है. प्रतिवर्ष लगभग इनमें से आधी लगभग साढ़े तीन लाख महिलावों की, यानि आधी की मौत हो जाती है जो आधी आबादी के हिसाब से काफी चिंता जनक है . इनमें से भी 90 प्रतिशत की मृत्यु का कारण रोग के प्रति बरते जाने वाली अगंभीरता है ये महिलाएं डॉक्टर के पास तभी जाती है जब बीमारी अनियंत्रण की स्थिति में पहुच जाती है या बेहद गंभीर स्थिति में पहुच जाती है. ऐसी स्थिति में यह बीमारी लगभग लाइलाज हो चुकी होती है.

भारतवासियों के लिए यह बात सकून देने वाली हो सकती है की जागरूकता के अभाव के बावजूद भारत में यूरोपीय देशों के मुक़ाबले केंसर नमक इस बीमारी के विस्तार की दर धीमी है देश और दुनिया मे नित्य प्रतिदिन तकनीकी के विकास के बाद भी दुनिया में केंसर से मरने वालों की संख्या में कोई कमी नही आरही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्राप्त आकड़ों के अनुसार सन 2007 में केंसर से विश्व भर में 79 लाख लोग मौत के शिकार हुये थे इस दर मे वर्ष 2030 तक 45 प्रतिशत बढ़ोतरी हो कर लगभग एक करोण 15 लाख हो जाने का अनुमान है वही इस दौरान केंसर के नए मामले वर्ष 2007 तक एक करोण तेरह लाख सामने आए थे जिसके वर्ष 2030 तक बढ़ कर एक करोड़ पचपन लाख हो जाने का अनुमान है.

केंसर जैसी जानलेवा बीमारी के अधिकाधिक विस्तार के पीछे मनुष्य की आधुनिक जीवन शैली और खान-पान की बुरी लत का विशेष योगदान है. आधुनिक जीवन शैली का आदमी पूरी तरह से आराम पसंद है, व्यायाम उसकी दिनचर्या से लगभग बाहर हो चुका है. वह किसी न किसी मादक पदार्थ के सेवन का आदि है जो व्यक्ति किसी प्रकार का धूम्रपान नहीं करता वह कम से कम चाय या काफी या दोनों के सेवन का आदि जरूर है. एक कप काफी या चाय में लगभग चार हजार से अधिक घातक तत्व पाये जाते है तंबाकू,शराब और सिगरेट सरीखे मादक पदार्थों के सेवन से केंसर नामक इस महामारी का तेजी से विस्तार होता है. इसके अलावा मोटापा को चलते भी इस बीमारी का तेजी से विस्तार हो रहा है. वैसे तो मोटापा को सारी बीमारियों की जड़ कहा जाता है, आकड़ों पर गौर करे तो केंसर से होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत मौत के मामले तंबाकू के सेवन के कारण हो रहे है जबकि शराब के सेवन के कारण 33 लाख लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे है वही मोटापा के चलते 2 लाख 74 हजार लोग केंसर की चपेट में आ रहे है इसके अलावा खराब खान पान के चलते इसके चपेट में आने वालों का प्रतिशत 30 है .

ये सभी आकड़े वर्ष 2012 के आधार पर संकलित किए गए है वर्ष 2016 के आधार पर इसका विश्लेषण किया जाएगा तो संभव है यह स्थिति और भयावह हो इसके अलावा इस बीमारी के बढ्ने के कारणों में केमिकल युक्त और मिलावटी खाद्य पदार्थों की कम घातक भूमिका नही है खान पान की वस्तुओं में रासायनिक तत्वों का उपयोग आज एक वृहद समस्या का रूप ले चुका है, एक अनुमान के मुताबिक भारत में 42 प्रतिशत पुरुष और 18 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण केंसर का शिकार हो कर अपनी जान गवा चुके है. वही पूर्व के आकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो वर्ष 1990 के मुक़ाबले वर्तमान में प्रोस्टेड केंसर के मामले में 22 प्रतिशत और महिलावों में सरवाईकाल केंसर के मामले में 2प्रतिशत और वेस्ट केंसर के मामले में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

ऐसा नही है की इस बीमारी से बचा नही जासके आधुनिक जीवन शैली और खान-पान में मामूली सुधार कर आसानी से इसकी चपेट में आने से बचा जा सकता है . बीमारी का शुरू में पता चल जाए और समय रहते लोग इसका उपचार शुरू करा दे तो आसानी से बचाव संभव है.

मध्य प्रदेश नलकूप खनन योजना : सिंचित होंगे खेत

खेतों के लिए सिंचाई जल अति आवश्यक है। जहां नहरें नहीं हैं, वहां नलकूप के माध्यम से सिंचाई की जाती है। किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराने के ल...