देश के दस शहरों में स्मार्ट गंगा सिटी योजना शुरू की गई है। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडु ने 13 अगस्त, 2016 को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से देश के दस प्रमुख शहरों में स्मार्ट गंगा सिटी परियोजना का प्रारंभ किया। इस योजना के लिए उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा पांच शहरों मथुरा, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी को चुना गया है. इसके साथ ही उत्तराखंड से ऋषिकेश और हरिद्वार, बिहार से पटना, झारखंड से साहिबगंज और पश्चिम बंगाल से बैरकपुर भी इस योजना में शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने सीवेज उपचार के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए हाइब्रिड एन्यूटी आधारित सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी मॉडल पर कार्य के लिए प्रथम चरण में इन शहरों का चयन किया है। नमामि गंगा अभियान के अंतर्गत चलने वाली इस परियोजना का उद्देश्य इन सभी शहरों में गंगा में गिरने वाले सीवर एवं अन्य प्रदूषित जल को रोकना है। सीवर का पानी गंगा में न जाए इसके लिए एसटीपी के निर्माण पर बल दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सीवेज उपचार के बुनियादी ढांचे का हाइब्रिड एन्यूटी आधार पर सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी के माध्यम से निर्माण किया जाएगा और इन शहरों में गंदे पानी का शोधन करके उसे छोड़ा जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने उज्जैन से समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि गंगा कार्य योजना की असफलता से सबक लेकर अब हमारा मंत्रालय हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर जा रहा है। पहले इस काम का खर्चा केंद्र और राज्य सरकार 70:30 के अनुपात में उठाते थे, लेकिन इस बार इस पूरे कार्यक्रम का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। कार्यक्रम के सुचारू कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर भी निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा। देश की कई बड़ी कंपनियों के अलावा कई विदेशी कंपनियों ने भी हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर हमारे साथ काम करने की इच्छा जताई है। पहले चरण में दस शहरों को शामिल किया गया है, लेकिन धीरे-धीरे इसमें बाकी के शहर भी शामिल किए जाएंगे। इन शहरों में यह कार्यक्रम करते समय इन शहरों की नदियों की जैव विविधता और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद से संबोधित करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडु ने स्थानीय निकायों से कहा कि वे इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अपना भरपूर सहयोग दें। उनका मंत्रालय नमामि गंगे कार्यक्रम से बहुत घनिष्ठता से जुड़ा हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर यह कार्यक्रम तेजी से सफलता हासिल करेगा। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जन भागीदारी उतनी ही जरूरी है, जितना सरकारी प्रयास। इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन के विशेष सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि गंगा में गिरने वाले 7300 एमएलडी अपशिष्ट में से 4200 एमएलडी के उपचार के बारे में कार्रवाई शुरू हो गई है। बाकी के 3100 एमएलडी के बारे में सर्वेक्षण का काम चल रहा है।
इस योजना से प्रदूषित पानी को गंगा में गिरने से रोका जा सकेगा। इससे गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने में सहायता मिलेगी।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)


No comments:
Post a Comment