Saturday, August 29, 2026

आयुष्मान भारत : अब महंगा उपचार भी संभव हुआ


देश में एक बड़ी जनसंख्या निवास करती है। जनसंख्या के अनुपात में अभी देश में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। लोगों को समय पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं न मिल पाने के समाचार अकसर मिलते रहते हैं। रोगियों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना अति आवश्यक है। इसके अभाव में उनका जीवन संकट में भी पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी उतनी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पाई हैं, जितनी होनी चाहिए। गंभीर रोग होने की स्थिति में गरीब लोग उपचार नहीं करा पाते। उपचार के अभाव में रोगी की मृत्यु तक हो जाती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य आश्वासन कार्यक्रम आयुष्मान भारत प्रारंभ किया है। सरकार सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

डॊ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में स्वास्थ्य आश्वासन कार्यक्रम आयुष्मान भारत शुभारंभ किया और स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना सामाजिक असंतुलन को समाप्त करने एवं देश में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में काफी प्रभावी साबित होगी। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत का अगला लक्ष्य चिकित्सकीय इलाज के लिए गरीबों को पांच लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

केंद्र सरकर ने 1 फरवरी,  2018  को आयुष्मान कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2018-19 प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से समग्र रूप से निपटना हैं। इसके अंतर्गत प्राथमिक, द्वितीय और तृतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

पहले कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में देश की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है। ये डेढ़ लाख स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को लोगों के घरों के पास लाएंगे। ये स्वास्थ्य केंद्र असंचारी रोगों और मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। ये केंद्र आवश्यक दवाओं और नैदानिक सेवा भी नि:शुल्क उपलब्ध कराएंगे। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों को अपनाने के लिए सीएसआर और लोकोपकारी संस्थाओं के माध्यम से निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया गया है।

दूसरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के अंतर्गत इन दूरगामी पहलों के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब एवं कमजोर परिवारों अर्थात लगभग 50 करोड़ लोगों को दायरे में लाने के लिए एक फ्लेगशिप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत द्वितीय और तृतीय देखरेख अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार पांच लाख रुपये प्रति वर्ष तक का कवरेज प्रदान किया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम के सूचारू कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

वित्त मंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत के अंतर्गत ये दो स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलें नये भारत वर्ष 2022 का निर्माण करेंगी और उनसे संवर्धित उत्पादकता, कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानि और गरीबी से बचा जा सकेगा। इन योजनाओं से विशेष कर महिलाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सृजित होंगे। गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखरेख की पहुंच में वृद्धि करने के उद्देश्य से देश में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके 24 नये सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना की जाएगी। इस कदम से सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक तीन संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कॉलेज और देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी चिकित्सा कॉलेज उपलब्ध हो।

उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत केवल वही लोग लाभ ले सकते हैं, जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक एवं जाति पर आधारित जनगणना एसईसीसी-2011 के अंतर्गत पंजीकृत हो। इस योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड का होना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आधार कार्ड का बैंक खाते से लिंक होना भी आवश्यक है। इस बात का प्रमाण पत्र भी होना चाहिए कि इच्छुक व्यक्ति इस योजना का लाभ लेने का पात्र है। इसके साथ ही फोटो, पहचान पत्र, परिवार प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र,  आयु के लिए प्रमाण पत्र और पते का प्रमाण पत्र आदि जमा करना भी अनिवार्य होगा।

इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को बीमारी की स्थिति में वित्तीय सहायता की जाएगी। यह एक प्रकार की बीमा योजना है। इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को इसके अंतर्गत पंजीकरण करवाना होगा। इसके साथ ही उसे 1100 से 1200 रुपये तक की प्रीमियम राशि जमा करनी होगी।  यह प्रीमियम राशि प्रत्येक वर्ष भरनी होगी। इस राशि को भरने के पश्चात ही योजना का लाभ लिया जा सकेगा।

नि:संदेह यह योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत लाभदायक साबित होगी। इसके कारण वे लोग भी अपना उपचार कराने में सक्षम होंगे, जो गंभीर रोगों से पीड़ित हैं और उनके उपचार में बहुत धनराशि खर्च होती है।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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