Saturday, August 22, 2026

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना : युवा कुशल होंगे


जीवनयापन के लिए रोजगार होना आवश्यक है. रोजगार प्राप्त करने के लिए कुशल होना अति आवश्यक है. किसी भी कार्य के लिए उसकी जानकारी होनी चाहिए. युवाओं के समक्ष बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. इसके साथ अकुशलता भी एक चुनौती है. जो युवा कुशल हैं, उन्हें कहीं न कहीं कार्य मिल ही जाता है,  किन्तु जो अकुशल हैं, उन्हें काम पाने के लिए बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है.  ऐसे ही युवाओं को कुशल करने के लिए केन्द्र सरकार दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना चला रही है। इसका उद्देश्य गरीब ग्रामीण युवाओं को नौकरियों में नियमित रूप से न्यूनतम पारिश्रमिक के समान या उससे अधिक मासिक पारिश्रमिक प्रदान करना है। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की क्रियान्वित की जा रही है। आजीविका गरीबी कम करने के लिए एक मिशन है, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक भाग है। इस योजना से 550 लाख से अधिक ऐसे गरीब ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा, जो कुशल होना चाहते हैं। इस योजना के द्वारा गरीबी को कम करने का भी प्रयास किया जा रहा है। इसकी संरचना प्रधानमंत्री के अभियान 'मेक इन इंडिया' के लिए एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में की गई है।

परिवारों को नियमित रूप से काम मिलेगा, उनका रोजगार स्थायी होगा, तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। इससे गरीबी कम करने में मदद मिलेगी। गरीबों को आर्थिक अवसरों की बहुत आवश्यकता है। इसलिए उनके कार्य क्षमताओं को विकसित करने के संबंध में भी अपार अवसर हैं। देश के जनसांख्यिकीय अधिशेष को एक लाभांश में विकसित करने के लिए सामाजिक एकजुटता के साथ ही मजबूत संस्थानों के एक नेटवर्क का होना अति आवश्यक है। भारतीय और वैश्विक नियोक्ता के लिए ग्रामीण गरीबों को वांछनीय बनाने के लिए कौशल्य के वितरण के लिए गुणवत्ता और मानक सर्वोपरि हैं। इस योजना के अंतर्गत कई कार्य किए जाते हैं, जिनमें  कौशल्य एवं नियोजन, अवसर पर समुदाय के भीतर जागरूकता पैदा करना, गरीब ग्रामीण युवाओं की पहचान करना, परिक्षण व कार्य में रुचि रखने वाले ग्रामीण युवाओं को इकट्ठा करना, युवाओं और उनके माता-पिता की काउंसिलिंग तथा योग्यता के आधार पर उनका चयन करना, रोजगार के अवसर को बढ़ाने के लिए ज्ञान, उद्योगों से जुड़े कौशल और मनोदृष्टि प्रदान करना, ऐसी नौकरियां प्रदान करना, जिनका सत्यापन स्वतंत्र जांच करने के तरीकों से किया जा सके और जो न्यूनतम पारिश्रमिक से अधिक भुगतान करती हों आदि सम्मिलित है। यह नियुक्ति के बाद कार्यरत व्यक्ति को स्थिरता के लिए सहायक भे है। 

यह योजना युवाओं को प्रशिक्षण देगी, जिससे उनके करियर में प्रगति होगी। युवाओं का विकास होगा और गरीब और हाशिये पर खड़े लोग लाभ लेने के लिए सक्षम बनेंगे। बेरोजगारी के कारण होने वाले पलायन में कमी आएगी।  यह राज्यों को कौशल्य परियोजनाओं का पूर्ण स्वामित्व लेने के लिए सक्षम बनाती है। यह निर्णय किया गया है कि अब और किसी बहु राज्यीय परियोजनाओं पर विचार नहीं किया जाएगा। एकल राज्य परियोजना से वार्षिक कार्य योजनाओं के लिए राज्य सरकार मुख्य निर्धारक है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय के सहयोग से उत्तर पूर्व के राज्यों की विशेष आवश्यकताओं और जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएं हैं। परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना भी इसमें सम्मिलित है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के कई विशेष घटक हैं। इसके अंतर्गत सामाजिक रूप से वंचित समूह के अनिवार्य कवरेज द्वारा उम्मीदवारों का पूर्ण सामाजिक समावेश सुनिश्चित किया जाता है। धन का 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए और तीन प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित किया जाएगा। उम्मीदवारों में एक तिहाई संख्या महिलाओं की होनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय युवा उम्मीदवारों को ’हिमायत’ नाम की एक विशेष उप योजना के माध्यम से सक्षम किया गया है, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्य के लिए एडीएसपी के तहत चल रही है एवं इसमें शहरी के साथ ही ग्रामीण युवाओं और गरीबी रेखा से नीचे तथा साथ ही गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को भी सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त आदिवासी क्षेत्रों और महत्वपूर्ण वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों के लिए ’रोशनी’ नामक एक विशेष योजना अलग दिशा निर्देशों के साथ शुरू की गई है। यह योजना चयनित महत्वपूर्ण वामपंथी उग्रवाद जिलों में खास परिस्थितियों के लिए है। विशेष रूप से यह अलग-अलग समय अवधि के लिए प्रशिक्षण प्रदान करती है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के अंतर्गत एक त्रिस्तरीय कार्यान्वयन प्रतिरूप है। नीति निर्माण, तकनीकी सहायता और सरलीकरण एजेंसी के रूप में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना राष्ट्रीय यूनिट ग्रामीण विकास मंत्रालय में काम करती है। यह योजना के राज्य मिशन कार्यान्वयन को समर्थन प्रदान करती है और परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसियां कौशल्य और नियोजन परियोजनाओं के माध्यम से कार्यक्रम को लागू करती हैं।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना बाजार की मांग के समाधान के लिए नियोजन से जुड़ी  कौशल्य परियोजनाओं के लिए 25,696 रुपये से लेकर एक लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो परियोजना की अवधि और परियोजना के आवासीय या गैर आवासीय होने पर निर्भर करता है। योजना तीन महीने से लेकर 12 महीने तक के प्रशिक्षण अवधि की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
इस योजना के अंतर्गत अनुदान के घटक दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 250 से अधिक व्यापार क्षेत्रों जैसे खुदरा, आतिथ्य, स्वास्थ्य, निर्माण, मोटर वाहन, चमड़ा, विद्युत, पाइपलाइन, रत्न और आभूषण आदि को अनुदान प्रदान करता है। इसका एकमात्र अधिदेश है कि कौशल प्रशिक्षण मांग आधारित होना चाहिए और कम से कम 75 प्रतिशत प्रशिक्षुओं की नियुक्ति होनी चाहिए।

परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निर्धारित परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाती है।  इनमें वे परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां या संगठन सम्मिलित हैं, जो आंतरिक मानव संसाधन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कौशल प्रशिक्षण कर रहे हों। इसके अतिरिक्त उद्योग से सह वित्त पोषण के साथ इंटर्नशिप के लिए समर्थन, परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी, जो दो साल की अवधि में 10 हजार प्रशिक्षुओं की एक न्यूनतम संख्या के लिए कौशल प्रशिक्षण और नियोजन का आश्वासन दे सकता हो, उच्च प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जैसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से न्यूनतम 3।5 ग्रेडिंग प्राप्त संस्थान, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से वित्त पोषित सामुदायिक कॉलेज जो डीडीयू-जीकेवाई परियोजनाओं में रुचि रखने वाले भी इसमें सम्मिलित हैं। यह योजना पूरे देश के लिए है। यह योजना वर्तमान में देश के 33 राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के 610 जिलों में 202 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझेदारी में 50 से अधिक क्षेत्रों एवं 250 से अधिक व्यापार क्षेत्रों में लागू की जा रही है। 

बेरोजगार विशेषकर अकुशल युवाओं के लिए बहुत उपयोगी योजना है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष से लेकर 35 वर्ष की आयु के बीच के 5.50 करोड़ संभावित कामगार हैं। विश्व भर में वर्ष 2020 तक 5.70 करोड़ कामगारों की कमी होने का अनुमान है। ऐसे में कुशल युवकों के लिए रोजगार के द्वार खुल जाएंगे. इस योजना का प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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