Saturday, August 22, 2026

दीनदयाल अंत्योदय योजना : रोजगार से दूर होगी गरीबी


देश की एक बड़ी जनसंख्या गरीबी में जीवन व्यतीत कर रही है। ऐसे लाखों लोग हैं, जिन्हें दो समय का भरपेट भोजन भी नहीं मिल पा रहा है। भूख से मौत होने के समाचार भी सुनने को मिलते रहते हैं। गरीबी का एक प्रमुख कारण लगातार बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी है। वर्तमान में 29.8 प्रतिशत भारतीय जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे रहती है। गरीब की श्रेणी में वह लोग आते हैं जिनकी दैनिक आय शहरों में 28.65 रुपये और गांवों में 22.24 रुपये से कम है। शहरों में रहने वाले जनजातीय लोग, दलितों और मजदूर वर्ग, जैसे खेतिहर मजदूर और सामान्य मजदूर अब भी बहुत गरीब हैं। इनमें 60 प्रतिशत लोग बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यों में रहते हैं। इन राज्यों के सबसे गरीब राज्य होने का कारण यह है कि 85 प्रतिशत जनजातीय यहां निवास करती है। इनमें से अधिकतर क्षेत्र बाढ़ या फिर सूखे से प्रभावित हैं। ऐसी स्थिति में कृषि बुरी तरह प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर रोजगार पर पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ है। संगठन के महानिदेशक गाइ राइडर के अनुसार इस समय हम लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण उत्पन्न क्षति एवं सामाजिक संकट में सुधार लाने और हर साल श्रम बाजार में आने वाले लाखों नवआगंतुकों के लिए गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के निर्माण की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। वरिष्ठ अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के मुख्य लेखक स्टीवेन टॉबिन के अनुसार उभरते देशों में हर दो श्रमिकों में से एक जबकि विकासशील देशों में हर पांच में से चार श्रमिकों को रोजगार की बेहतर स्थितियों की आवश्यकता है। 

सरकार ने गरीबी दूर करने के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना आरंभ की है। इसका उद्देश्य कौशल विकास और अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि करना है। मेक इन इंडिया, कार्यक्रम के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सामाजिक तथा आर्थिक बेहतरी के लिए कौशल विकास आवश्यक है। दीनदयाल अंत्योदय योजना को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के तहत शुरू किया गया था। भारत सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एकीकरण है।
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को दीन दयाल अंत्योदय योजना नाम दिया गया है। इस योजना में शहरी क्षेत्रों के लिए दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना के अंतर्गत सभी 4041 शहरों और कस्बों को कवर कर पूरे शहरी आबादी को लगभग कवर किया जाएगा। वर्तमान में सभी शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में केवल 790 कस्बों और शहरों को कवर किया गया है।

दीन दयाल अंत्योदय योजना तथा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का लक्ष्य शहरी गरीब परिवारों की गरीबी और जोखिम को कम करने के लिए उन्हें लाभकारी स्वरोजगार और कुशल मजदूरी रोजगार के अवसर का उपयोग करने में सक्षम करना है. इसके परिणामस्वरूप मजबूत जमीनी स्तर के निर्माण से उनकी आजीविका में स्थायी आधार पर सराहनीय सुधार हो सके। इस योजना का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से शहरी बेघर लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं से युक्त आश्रय प्रदान करना भी होगा। योजना शहरी सड़क विक्रेताओं की आजीविका संबंधी समस्याओं को देखते हुए उनकी उभरते बाजार के अवसरों तक पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त स्थान, संस्थागत ऋण, और सामाजिक सुरक्षा और कौशल के साथ इसे सुविधाजनक बनाने से भी संबंधित है।

इस योजना में दो घटक हैं, एक ग्रामीण भारत के लिए तथा दूसरा शहरी भारत के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना के रूप में नामित शहरी घटक को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा। दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के रूप में नामित ग्रामीण घटक को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।

इस मिशन के तहत शहरी गरीबों को प्रशिक्षित कर कुशल बनाने के लिए 15 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रति व्यक्ति 18 हजार रुपये है। इसके अलावा शहर आजीविका केंद्रों के माध्यम से शहरी नागरिकों द्वारा शहरी गरीबों को बाजारोन्मुख कौशल में प्रशिक्षित करने की बड़ी मांग को पूरा किया जाएगा। इसे सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए स्वयं सहायता समूह के गठन के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह को 10 हजर रुपये का प्रारंभिक समर्थन दिया जाता है। पंजीकृत क्षेत्रों के स्तर महासंघों को 50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। सूक्ष्म उद्यमों और समूह उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए दो लाख रुपयों का ब्याज अनुदान औऱ समूह उद्यमों पर 10 लाख रुपयों का ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा। शहरी बेघर लोगों के लिए आश्रयों के निर्माण की लागत योजना के तहत पूरी तरह से वित्त पोषित है। मूलभूत ढांचे की स्थापना के माध्यम से विक्रेताओं के लिए विक्रेता बाजार का विकास और कौशल को बढ़ावा और कूड़ा उठाने वालों और विकलांगजनों आदि के लिए विशेष परियोजनाएं हैं।

शहरी गरीबों का स्वामित्व और लाभकारी भागीदारी और सभी प्रक्रियाओं में उनकी सहभागिता
संस्था निर्माण और क्षमता को मजबूत बनाने सहित कार्यक्रम के डिजाइन और कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाई जाएगी। सरकारी पदाधिकारियों और समुदाय की जवाबदेही रहेगी। उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ भागीदारी पर बल दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त सामुदायिक आत्मनिर्भरता, आत्म-निर्भरता, स्वयं सहायता और आपसी सहायता बढ़ावा दिया जाएगा।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का मूल विश्वास यह है कि गरीब लोग उद्यमी होते हैं और वे गरीबी से निकलने चाहते हैं। इसक लिए आवशय्क है कि उनकी क्षमताओं का उपयोग करके उनके लिए सार्थक और सुस्थिर जीविका के साधन पैदा किए जाएं। मिशन का यह विश्वास है कि किसी भी आजीविका कार्यक्रम को केवल समयबद्ध तरीके से ही आगे बढाया जा सकता है, बशर्ते कि इसे गरीबों और उनके संस्थानों द्वारा संचालित किया जाए। ऐसे सुदृढ़ संस्थागत ढांचे गरीबों के लिए उनके निजी मानव, सामाजिक, वित्तीय और अन्य संपतियों को निर्मित करने में सहायक होते हैं। इस प्रकार ये उन्हें सरकारी और निजी क्षेत्रों से अधिकारों, पात्रों, अवसरों और सेवाओं को प्राप्त करने में समर्थ बनाते हैं और साथ ही उनकी एकता सुगठित करते हैं, अभिव्यक्ति और लेन-देन की शक्ति को भी बढाते हैं।
संविधान (74वां संशोधन) अधिनियम, 1992 के अनुसार शहरी गरीबी उपशमन, शहरी स्थानीय निकायों का विधिक कार्य है। इसलिए शहरी स्थानीय निकायों को शहरों/कस्बों में रह रहे शहरी गरीबों से संबंधित उनके कौशल और जीविका सहित उनसे संबंधित समस्त मुद्दों और कार्यक्रमों के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

इस योजना का उद्देश्य कौशल विकास और ॠण की सुविधाओं के लिए शहरी गरीबों को व्यापक रूप से सम्मिलित करना है। यह बाजार-आधारित कार्यों और स्वरोजगार के लिए शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने तथा सुगमता से ॠण प्राप्त करने की दिशा में प्रयास करेगा। सड़क विक्रेता शहरी जनसंख्या का महत्वपूर्ण अंग हैं, जो पिरामिड के धरातल पर हैं। सड़क विक्रय स्व-रोजगार का एक स्रोत प्रदान करता है और इस प्रकार यह बिना प्रमुख सरकारी हस्तक्षेप के शहरी गरीबी उपशमन के एक उपाय के रूप में कार्य करता है। शहरी आपूर्ति श्रृंखला में उनका प्रमुख स्थान होता है और ये शहरी क्षेत्रों के भीतर आर्थिक विकास की प्रक्रिया के अभिन्न अंग होते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें अपने कार्य के लिए उपयुक्त स्थल प्रदान करना, संस्थागत ॠण सुलभ कराना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और बाजार के उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए उनका कौशल बढ़ाना होगा। चरण बद्ध तरीके से शहरी बेघर लोगों को अनिवार्य सुविधाओं से युक्त आश्रय प्रदान करना होगा।

यह योजना मंत्रालयों/विभागों से संबद्ध योजनाओं/कार्यक्रमों और कौशल, आजीविकाओं, उद्यमिता विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सहायता आदि के कार्य निष्पादित करने वाले राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के साथ समाभिरूपता पर अत्यधिक बल देगा। ग्रामीण और शहरी गरीब लोगों की आजीविका के बीच एक सेतु के रूप में ग्रामीण-शहरी प्रवासियों के कौशल प्रशिक्षण को बढावा देने के लिए सभी संबंधित विभागों से एक संयुक्त कार्यनीति बनाए जाने का समर्थन करने का अनुरोध किया जाएगा।
इसका उद्देश्य शहरी बेघर लोगों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आश्रय के प्रचालन में सहायता प्रदान करने में निजी क्षेत्र की भागीदारी प्राप्त करना है। यह शहरी बेघर लोगों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आश्रय प्रदान करने तथा साथ ही ऐसे शहरी गरीब उद्यमियों को जो कि स्व-रोजगार प्राप्त करना तथा अपने निजी लघु व्यावसायिक अथवा विनिर्माण यूनिट स्थापित करना चाहते है, प्रौद्योगिकीय, विपणन और एकजुट सहयोग देने में सहायता प्रदान करने में निजी और सिविल समाज के क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी के लिए प्रयास करेगा। मंत्रालय ने वास्तविक समय में और नियमित रूप से योजना की प्रगति की निगरानी के उद्देश्य से ऑनलाइन वेब आधारित प्रबंधन सूचना प्रणाली विकसित की थी। 
एमआईएस को 20 जनवरी 2015 को शुरू किया गया था। एमआईएस प्रशिक्षण प्रदाताओं, प्रमाणन एजेंसियों, बैंकों और संसाधन संगठनों जैसे हितधारकों को भी सीधे आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है, जिसे निगरानी और अन्य उद्देश्यों और योजना की प्रगति को ट्रैक करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों, राज्यों और आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय द्वारा भी संचालित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना के क्रियान्वयन की प्रभावी निगरानी के लिए निदेशालय राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित रूप से समीक्षा बैठकों और वीडियो सम्मेलनों का आयोजन करेगा।

यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। युवक कुशल होंगे, उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और देश से गरीबी दूर होगी।


(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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