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Tuesday, February 3, 2026

सुखद भेंट


लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. सौरभ मालवीय से सुखद भेंट। पत्रकारिता, मीडिया और समसामयिक विषयों पर सार्थक संवाद का अवसर प्राप्त हुआ।
केबी पंत 

Tuesday, September 16, 2025

मातृ‑मन्दिर का समर्पित दीप मैं


मातृ‑मन्दिर का समर्पित दीप मैं
चाह मेरी यह कि मैं जलता रहूँ
कर्म पथ पर मुस्कुराऊँ सदा
आपदाओं को समझ वरदान मैं
जग सुने झूमे सदा अनुराग में
उल्लसित हो नित्य गाऊँ गान मैं
चीर तम‑दल अज्ञानता निज तेज से
बन अजय निश्ंक मैं चलता रहूँ.........

Sunday, May 27, 2018

खुद से वादा


जीतू मै, खुद से वादा करों,
जितना सोचते हो,
कोशिश उससे ज्यादा करों,
तकदीर भी रूठे पर हिम्मत न टूटे,
मजबूत इतना अपना इरादा करो.

Tuesday, March 20, 2018

ज्ञान के प्रकाश की ले मशाल हाथ में




ज्ञान के प्रकाश की ले मशाल हाथ में
शील की पवित्रता है हमारे साथ में
एकता के स्वर उठे छूने को ये आसमाँ

Tuesday, January 12, 2016

हम सब वंदन करते है


जिस विवेक की शुभ वाणी ने, धरती को आनंद दिया
हिन्दू धर्म हुंकार उठा, पाखंडवाद को बंद किया
युवा संत के जनम पर्व पर, हम सब वंदन करते है
भारत माता दिग्विजयी हो यह अभिनन्दन करते है
-डॊ. सौरभ मालवीय

Sunday, March 15, 2015

जिन दीपों ने हमें जलाया था आज उन्ही के गुण गाते है


जिन दीपों ने हमें जलाया था आज उन्ही के गुण गाते है
और उन्ही के पद चिन्हों पर चल कर के चलते जाते है
अंधकार का वक्ष चिर कर नूतन पथ दर्शन करते है 
अरे विश्व तू भूल न जाना दीप नहीं जीवन जलते है

Friday, September 11, 2009

पूज्य भागवत जी के जन्म दिवस पर समर्पित


जग प्रपंच से मोह नहीं है तभी कहलाते हो मोहन
भारत चिन्मय आदि शक्ति है परम भागवत त्वं स्वोहम

केशव माधव मधुकर रज्जू दिब्य सुदर्शन की माला
राष्ट्र देवी के सुभ्र चरणों में शोभित मोहन मणि माला

अमिय पियो शत् शरद जियो वैभव का पावन शिखर चढो
भारत को जगत गुरु करने हम साथ तुम्हारे तीव्र बढो

Friday, November 7, 2008

श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को समर्पित

 

श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के जन्मदिन पर आप सभी पाठको को समर्पित
भारत को अभिमान तुम्हीं पर
भारतीय संस्कृति तव प्राण।

भारतीय जनता की आशा
राष्ट्र भाव का कर दो त्राण।।

झुलेलाल कृपा पूरित तुम
सिद्ध भारती तेरे द्वार।

अनुपम वाक्, लेखनी, चिन्तन,
या, चाल, चलन, आचार।। 2।।

विद्या, वाणिज केंद्र कराची
पश्चिम के भारत की शान।

सहस्रािब्द तक गर्वित भारत
जिसके कारण बना महान।। 3।।

उसी कराची से पाई थी
तुमने भारत का परिचय।

संस्कृत, संस्कृति, राष्ट्र चिरंतन
अटक-कटक है एक दय।। 4।।

मूढ़ नेतृ के दुरभिसंधि ने
तुमसे छिनी कराची थी।

दोनों हाथ कटे भारत के
घोर दर्द उपजाती थी।। 5।।

चार लाख जन के हत्या की
आंखें तेरी साक्षी हैं।

उनके परिजन के आंसू को
तुमने उर में राखी है।। 6।।

हे जसुमति के लालकृष्ण अब
मांग रहा भारत वरदान।

हमें दिला दो सिंध, कराची
हिगुलाज, लाहौर महान।। 7।।

तक्षशिला चाणक्य षिका,
हिन्दुकुश, खैबर, गंधार।

कुभा, सिंधु का समागान तट,
रेशम पथ, पाणिनि आगार ।। 8।।

तेरे माथे दिव्य कीर्ति बन
यह उपलब्धि आएगी।

सावधान! संघर्ष दोहरा
कुंदन सा चमकाएगी।। 9।।

मल्टीनेशनल, सेकुलर,
माक्र्स, मीडिया पाखंडी।

मुल्ला, माओ, मैकालों को
लाल दिखाओ अब झंडी।।10।।

दििग्वजयी अभियान में तेरे
घर के भेदिये घातक हैं।

इन्हें ठिकाने शीघ्र लगा दो।
बाह्य शत्रु शरणागत हैं।। 11।।

लालकृष्ण के यश सौरभ से
भारत मां हरषाएगी।

पुष्टिकरी नवनीत खिलाकर
नव इतिहास बनाएगी।। 12।।

Saturday, May 12, 2007

श्री चिरंजीव सौरभ के मंगल परिणय पर सस्नेह समर्पित

 

ब्रजेन्द्र कुमार मालवीय
अयि सुमन: सुमन: सुमन: सुमन: सुमनोहर कान्तियुते,
श्रित रजनीरज-नीरज-नीरजनी-रजनीकर वक्त्रयुते।
सुनयन विभ्रम-रभ्र-मर-भ्रमर-भ्रम-रभ्रमराधिपते,
जय जय हे महिषासुर मार्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते॥
- जगद्गुरू श्रीशंकराचार्य

काशी गौरीशंकर पद में
हैं दुर्बलसुत वन्दन करते।
हम हैं राम भरोसे के तो
राम रक्ष में रत रहते॥1॥
हे देव तुम्हारी अमित कृपा से
सुमनों को सौरभ मिलता।
शंकर चरणों में चढ़ने पर
भक्तों का जीवन खिलता॥2॥

सुमन जीव, सौरभ शिव हैं
यह जगत् ब्रह्म का नाता है।
जब तक देही देह सहित है
तब तक ही जग भाता है॥3॥

सुमन तुम्हारी सार्थकता है
सौरभ साथ निभाने में।
बिन सौरभ तुम प्राणहीन हो
हो बिनमोल जमाने में॥4॥

सौरभ भी तो हैं अनंद
रति सुमन संग उसका परिचय।
उससे ही वह चर्चित होते
अन्यथा लुप्त होते निश्चय॥5॥

जब भी सुमन देखता कोई
कहता कहां सुरभि इसकी।
सुरक्षित पवन देव को पाकर
सुमन खोजती मति सबकी॥6॥

यद्यपि चन्दन सौरभयुत है।
देव शीश पर चढ़ता है।
फिर भी सुमन हीन होने की
पीड़ा में ही रहता है॥7॥

स्वर्ण सुमन की यही वेदना
उसको सौरभ नहीं मिला।
कनक चाहता जग जी भर
पर उसे ब्रह्म से यही मिला॥8॥

सौरभ सुमन साथ रहकर ही
करते हैं जग को सन्दर।
छोटा-बड़ा नहीं है कोई
एक से एक उभय बढ़कर॥9॥

सुमन युक्त होवें सौरभ से
सौरभ भी होवें सुमन।
श्रीश ब्रजेन्द्र पीयूष कृपा से
करें सृजित सुन्दर जीवन॥10॥

ऋषि परम्परा की तपोस्थली नैमिष दर्शन

नैमिषारण्य केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि ऋषि परम्परा, तप, ज्ञान और भारतीय आध्यात्मिक चेतना की पवित्र भूमि है।  मान्यता है कि इसी पावन धरती पर ऋष...