Friday, September 4, 2026

हज नीति : महिलाएं अकेले हज करेंगी


किसी भी धर्म के लोगों की इच्छा होती है कि वे अपने तीर्थों की यात्रा पर जाएं। केन्द्र सरकार सभी की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें तीर्थ यात्रा पर भेजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। ये केन्द्र सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि इस वर्ष 2018 में जहां रिकॉर्ड संख्या में यात्री हज पर जा रहे हैं, वहीं महिलाएं भी बिना पुरुष साथी के हज पर जा रही हैं। भारत से प्रति वर्ष लगभग 1।70 लाख लोग हज यात्रा पर जाते हैं। सऊदी अरब ने पांच हज़ार और यात्रियों की अनुमति दे दी है। इसलिए इस साल यह संख्या 1.75 लाख हो गई है। 

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार आजादी के बाद पहली बार इस वर्ष भारत से रिकॉर्ड 1,75,025 मुस्लिम तीर्थयात्री हज पर जाएंगे और वह भी बिना किसी अनुदान के। केन्द्र  सरकार भारत का हज कोटा लगातार दूसरे वर्ष बढ़ा पाने में कामयाब हो पाई है।
हज के लिए कुल 3,55,604 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 1,89,217 पुरुष एवं 1,66,387 महिला आवेदक शामिल थे। इस वर्ष कुल 1,28,002 मुस्लिम तीर्थयात्री भारत की हज समिति के माध्यम से हज पर जाएंगे, जिनमें 47 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। 47,023 हज तीर्थयात्री निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जाएंगे।
इसके अतिरिक्त भारत से पहली बार, मुस्लिम महिलाएं बिना ‘मेहराम‘ (पति, पिता या भाई) के हज यात्रा पर जाएंगी। कुल 1308 महिलाओं ने बिना मेहराम के हज यात्रा के लिए आवेदन किया है और इनमें से सभी महिलाओं को लॉटरी स्स्टिम से छूट दे दी गई है और हज पर जाने की अनुमति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि अब किसी मुस्लिम महिला को बिना किसी मेहरम (पति, पिता या भाई) के स्वतंत्र रूप से हज यात्रा की अनुमति होगी। सऊदी अरब 45 और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को हज के लिए प्रवेश की अनुमति देता है। 45 साल की उम्र पार चुकी 4 या उससे अधिक मुस्लिम महिलाएं एक साथ हज यात्रा पर जा सकती हैं। इससे पहले कोई भी मुस्लिम महिला मेहरम (पति, पिता या भाई) अर्थात अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थी। 

केंद्र सरकार ने हज यात्रा के बारे में नई नीति बनाने के लिए पूर्व सिविल अधिकारी अफजल अमानुल्लाह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। इस छह सदस्यीय हज समिति ने 2018 से 2022 के लिए एक मसौदा तैयार किया है। इसमें कुछ सुझाव दिए गए हैं, जैसे 45 वर्ष की आयु से अधिक महिला को मेहरम के बिना हज यात्रा करने की अनुमति दी जाए और हज सब्सिडी समाप्त की जाए। इन सुझावों को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में इस निर्णय की घोषणा की थी। इससे मुस्लिम महिलाओं में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। 
  
केंद्र सरकार की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता एवं किराये में अनुचित बढ़ोतरी रोकने के लिए एयरलाइंस को दिए गए कठोर आदेश से यह सुनिश्चित हुआ है कि हज 2018 के हवाई जहाज के किराये में इस वर्ष उल्लेखनीय कमी आई है।

हज प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन/डिजिटल बनाए जाने से पूरी हज प्रक्रिया पारदर्शी और हज तीर्थयात्रियों के अनुकूल बन गई है। नई हज नीति के अनुसार यात्रियों को देश में बेहतर सुविधाएं दिए जाने पर बल दिया गया है। इसके लिए हज रवानगी स्थलों की संख्या 21 से घटाकर नौ कर दी गई, जिनमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू और कोच्चि शामिल हैं।

केन्द्र सरकार की नई हज नीति के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अब वे महिलाएं भी हज यात्रा कर सकेंगी, जो अकेली रहती हैं या जिनके परिवार में कोई पुरुष नहीं है।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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