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Wednesday, July 29, 2026
साहित्य में मनभावन सावन
डॉ. सौरभ मालवीय
वर्षा ऋतु कवियों की प्रिय ऋतु मानी जाती है। इस ऋतु में सावन मास का महत्व सर्वाधिक है। ज्येष्ठ एवं आषाढ़ की भयंकर ग्रीष्म ऋतु के पश्चात सावन का आगमन होता है। सावन के आते ही नीले आकाश पर काली घटाएं छा जाती हैं। जब वर्षा की बूंदें धरती पर पड़ती हैं, तो संपूर्ण वातावरण मिट्टी की सुगंध से भर जाता है। प्रकृति झूम उठती है। वृक्ष-पौधे झूमने लगते हैं। मनुष्य ही नहीं, अपितु सभी जीव-जंतु प्रसन्न हो जाते हैं। जिसे तन-मन अनुभव करता है, उस ऋतु का शब्दों में उल्लेख करना कोई सरल कार्य नहीं है। किंतु हमारे कवियों ने इस ऋतु को बहुत ही सुंदर शब्दों में बांधकर इसे काव्य के रूप में प्रस्तुत किया है। वेदों की ऋचाओं की अनुभूति सावन के मनोहर भाव को व्यक्त की है ।
कविता का कोई भी काल रहा हो, सभी काल के कवियों ने वर्षा ऋतु पर जमकर लिखा है। भक्तिकाल एवं रीतिकाल के संधि कवि सेनापति वर्षा ऋतु का चित्रण करते हुए कहते हैं कि मेघ बहुत जल बरसाते हैं एवं सारंग की भांति ध्वनि करते हैं। मोर अत्यंत सुंदर लगते हैं तथा वे मेघ के घिर आने पर प्रसन्नचित्त होते हैं। मेघ वर्षा जल देने के कारण जीवन के आधार माने जाते हैं। कवि सेनापति के शब्दों में-
सारंग धुनि सुनावै घन रस बरसावै,
मोर मन हरषावै अति अभिराम है।
जीवन अधार बड़ी गरज करनहार,
तपति हरनहार देत मन काम है।।
सीतल सुभग जाकी छाया जग सेनापति,
पावत अधिक तन मन बिसराम है।
संपै संग लीने सनमुख तेरे बरसाऊ,
आयौ घनस्याम सखि मानौं घनस्याम है।।
रीतिबद्ध काव्य के आचार्य कवि देव अपनी कविता में विरहिणी नायिका की मनोव्यथा का वर्णन करते हैं।
नायिका कह रही है कि मैंने रात्रि में एक स्वप्न देखा, जिसमें मुझे प्रतीत हुआ कि झरझर का शब्द करती हुई झीनी-झीनी बूंदे गिर रही हैं एवं गर्जना के साथ आकाश में घटाएं घिरी हुई हैं। उस वातावरण में श्रीकृष्ण ने आकर मुझसे कहा है कि चलो आज झूला झूलते हैं। प्रियतम का यह प्रस्ताव सुनकर मैं अत्यधिक प्रसन्न हो गई। कवि देव कहते हैं-
झहरि-झहरि झीनी बूंद है परति मानो,
घहरि-घहरि घटा घिरी है गगन में।
आनि कह्यो स्याम मो सों, चलो झूलिबे को आजु,
फूली ना समानी, भयी ऐसी हौं मगन मैं।।
चाहति उठ्योई, उड़ि गयी सो निगोड़ी नींद,
सोय गये भाग मेरे जागि वा जगन में।
आंखि खोलि देखौं तो मैं घन हैं न घनस्याम,
वेई छायी बूंदें मेरे आंसू ह्वै दृगन में।।
अयोध्या नरेश एवं रीतिकाल की स्वच्छंद काव्य-धारा के अंतिम कवि द्विजदेव ने भी वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। वे कहते हैं-
कारी नभ कारी निसि कारियै डरारी घटा,
झूकन बहत पौन आनंद को कंद री।
'द्विजदेव' सांवरी सलोनी सजी स्याम जू पै,
कीन्हौं अभिसार लखि पावस अनंद री।
नागरी गुनागरी सु कैसें डरै रैनि डर,
जाके संग सोहैं ए सहायक अमंद री।
बाहन मनोरथ उमाहिं संगवारी सखी,
मैन मद सुभट मसाल मुख चंद री।।
सितारगढ़ के नरेश शंभुनाथ सिंह सोलंकी 'नृप शंभु ने सावन का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है। इन्हें शंभु कवि एवं नाथ कवि के नाम से भी जाना जाता है। वे मनभावान सावन का उल्लेख करते हुए कहते हैं-
सावन के मास मनभावन के संग प्यारी,
अटा पर ठाढ़ी भई घटा अंधियारी में।
दामिनी के धोखे चक चौंझे दृग कवि नाथ,
छबिन सों मुरि दुरै पिय अंग वारी में।।
कोटि रति वारों ऐसी राधाजू के रूप पर,
रंभा रंक कहा शंक शची के निहारी में।
पागि रही रस जागि रही ज्योति लाजनि में,
नेह भीजो वेह मेह भीजो श्वेत सारी में।।
रीतिकाल के कवि घनश्याम शुक्ल सावन में उमड़-उमड़ कर आ रही घटाओं के सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं-
उमड़ि घुमड़ि घन आवत अटान चोट,
घन-घन जोति छटा छटकि-छटकि जात।
सोर करें चातक चकोर पिक चहवार
मोर ग्रीव मोरि-मोरि मटकि-मटकि जात।।
सावन लौं आवन सुनो है घनश्याम जू को,
आंगन लौ आय-पांय पटकि-पटकि जात।
हिये बिरहानल की तपनि अपार उर,
हार गज मोतिन को चटकि-चटकि जात।।
रीतिकालीन कवि श्रीपति जल से भरे मेघों का वर्णन करते हैं कि किस प्रकार वे दसों दिशाओं से दामिनी साथ लाते हैं। वे कहते हैं-
जलभरे झूमैं मानो भूमै परसत आय,
दसहू दिसान घूमैं दामिनी लए लए।
धूरिधार धूमरे से, धूमसे धुंधारेकारे,
धुरवान धारे धावैं छबिसों छए छए।।
श्रीपति सुकवि कहै घेरि घेरि घहराहिं,
तकत अतन तन ताव तैं तए तए।
लाल बिनु केसे लाज चादर रहैगी आज,
कादर करत मोहिं बादर नए नए।।
अंबिकादत्त व्यास भी मेघों का अति चित्रण करते हुए कहते हैं-
मेघ देस-देस नट खट आसा पूरि आये,
कान्हर लै गूजरी हिंडोर छबि छाकी है।
दीप-दीप भैरव भये हैं नारि बृंदन सों,
ललित सुहाई लीला सारंग छटा की है।
श्यामल तमाल कोस कोस लौं कुमोद कीनों,
अंबादत्त सोहनी त्यों छाया बदरा की है।
कोऊ सुघरई सों श्रीकृष्ण को जु पाऔं तब,
आली या कल्यान की बहार बरसा की है।।
कवि कवींद्र 'उदयनाथ' सावन में ग्राम के वातावरण का उल्लेख करते हुए कहते हैं-
लाग्यो यह सावन सनेह सरसावन,
सलिल बरसावन पटाधर ठटान को।
गोरी गांव गांवन लगी हैं गीत गावन,
हिंडोरो झूम लावन उठान छ्वै अटान को।।
भनत कबिंद्र बिरहीजन सतावन सो,
देखो चमकावनरी बिज्जुल छटान को।
प्यारे परौ पांवन लला को लीजै नावन सो,
देखो आजु आवन सुहावन घटान को।।
सुमित्रानंदन पंत सावन के अनुपम सौन्दर्य का चित्रण करते हुए कहते हैं-
झम झम झम झम मेघ बरसते हैं सावन के
छम छम छम गिरतीं बूंदें तरुओं से छन के।
चम चम बिजली चमक रही रे उर में घन के,
थम थम दिन के तम में सपने जगते मन के।
ऐसे पागल बादल बरसे नहीं धरा पर,
जल फुहार बौछारें धारें गिरतीं झर झर।
आंधी हर हर करती, दल मर्मर तरु चर् चर्
दिन रजनी औ पाख बिना तारे शशि दिनकर।
सुप्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ सावन के आगमन का उल्लेख करते हुए कहते हैं-
जेठ नहीं, यह जलन हृदय की,
उठकर जरा देख तो ले;
जगती में सावन आया है,
मायाविन! सपने धो ले।
जलना तो था बदा भाग्य में
कविते! बारह मास तुझे;
आज विश्व की हरियाली पी
कुछ तो प्रिये, हरी हो ले।
जयशंकर प्रसाद सावन की रात्रि के सौन्दर्य को अपने शब्दों में बांधते हुए कहते हैं-
नव तमाल श्यामल नीरद माला भली
श्रावण की राका रजनी में घिर चुकी,
अब उसके कुछ बचे अंश आकाश में
भूले भटके पथिक सदृश हैं घूमते।
अर्ध रात्रि में खिली हुई थी मालती,
उस पर से जो विछल पड़ा था, वह चपल
मलयानिल भी अस्त व्यस्त हैं घूमता
उसे स्थान ही कहीं ठहरने को नहीं।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना अपनी प्रेमिका को संबोधित करते हुए कहते हैं-
मेरी सांसों पर मेघ उतरने लगे हैं,
आकाश पलकों पर झुक आया है,
क्षितिज मेरी भुजाओं से टकराता है,
आज रात वर्षा होगी।
कहां हो तुम?
कवयित्री महादेवी वर्मा कहती हैं-
लाए कौन संदेश नए घन!
अम्बर गर्वित,
हो आया नत,
चिर निस्पंद हृदय में उसके
उमड़े री पुलकों के सावन!
लाए कौन संदेश नए घन!
हरिवंशराय बच्चन वर्ष ऋतु में चलने वाली हवा को अनुभव करते हुए कहते हैं-
बरसात की आती हवा।
वर्षा-धुले आकाश से,
या चन्द्रमा के पास से,
या बादलों की सांस से;
मघुसिक्त, मदमाती हवा,
बरसात की आती हवा।
यह खेलती है ढाल से,
ऊंचे शिखर के भाल से,
अस्काश से, पाताल से,
झकझोर-लहराती हवा;
बरसात की आती हवा।
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' कहते हैं-
सखी ! बादल थे नभ में छाये
बदला था रंग समय का
थी प्रकृति भरी करूणा में
कर उपचय मेघ निश्चय का।
वे विविध रूप धारण कर
नभ–तल में घूम रहे थे
गिरि के ऊंचे शिखरों को
गौरव से चूम रहे थे।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला सावन में कृषकों का उल्लेख करते हुए कहते हैं-
सावन बरसा जोर से, प्रमुदित हुआ किसान।
लगा रोपने खेत में, आशाओं के धान।।
आशाओं के धान, मधुर स्वर कोयल बोले।
लिये प्रेम-संदेश, मेघ सावन के डोले।
‘ठकुरेला’ कविराय, लगा सबको मनभावन।
मन में भरे उमंग, झूमता गाता सावन।।
दुष्यंत कुमार कहते हैं-
दिन भर वर्षा हुई
कल न उजाला दिखा
अकेला रहा
तुम्हें ताकता अपलक।
आती रही याद
इंद्रधनुषों की वे सतरंगी छवियां
खिंची रहीं जो
मानस-पट पर भरसक।
कलम हाथ में लेकर
बूंदों से बचने की चेष्टा की-
इधर-उधर को भागा
भींग गया पर मस्तक
(लेखक – स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
Thursday, July 23, 2026
Thursday, June 4, 2026
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
आपके नेतृत्व में प्रदेश विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रहा है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा राष्ट्रसेवा की निरंतर शक्ति प्रदान करें।
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Sunday, May 24, 2026
Wednesday, May 20, 2026
नानी के घर की सुखद स्मृति
-डॉ. सौरभ मालवीय
ग्रीष्मकाल के अवकाश में बच्चे अपनी नानी के घर जाते हैं। बाल्यकाल के ये सुंदर संस्मरण जीवनपर्यंत स्मृति में रहते हैं। हमारे देश भारत में बच्चों का अपनी नानी के घर जाना केवल एक यात्रा नहीं है, अपितु एक भावनात्मक परंपरा है, जो उन्हें परिवार से जोड़े रखती है।
शिक्षण संस्थाओं में ग्रीष्म कालीन अवकाश ग्रीष्म ऋतु के मध्य में आता है। इस समयावधि में भीषण गर्मी पड़ती है। प्राय: ग्रीष्म कालीन अवकाश मई के अंतिम सप्ताह से लेकर संपूर्ण जून तक रहता है। इस समयावधि में उच्च तापमान के कारण सभी विद्यालय एवं महाविद्यालय बंद रहते हैं। बच्चे वर्षभर ग्रीष्म कालीन अवकाश की प्रतीक्षा करते हैं, क्योंकि इसमें उन्हें सबसे अधिक दिनों का अवकाश प्राप्त होता है। बच्चों के लिए ग्रीष्म कालीन अवकाश किसी पर्व से कम नहीं होता। इस समयावधि में उन्हें कोई चिंता नहीं होती अर्थात उन्हें न तो प्रात:काल में शीघ्र उठकर विद्यालय जाने की चिंता होती है और न ही गृहकार्य करने की कोई चिंता होती है। प्राय: ग्रीष्म कालीन अवकाश में बच्चे अपने माता- पिता के साथ अपनी नानी के घर जाते हैं। वहां वे अपने ननिहाल के लोगों से मिलते हैं। सब उन्हें बहुत लाड़-प्यार करते हैं। नानी के घर की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि उन पर कोई रोक-टोक नहीं होती। यहां माता-पिता का कड़ा अनुशासन नहीं होता। माता-पिता के रोकने-टोकने पर नानी उन्हें ही डांट देती हैं कि बच्चे हैं। यदि अब नहीं खेलेंगे, तो कब खेलेंगे। वर्षभर उन्हें पढ़ाई ही करनी है, अब तो उन्हें खेलने दो। नानी के घर बच्चे अपने मामा और मौसी के बच्चों के साथ मिलकर खेलते हैं। वृक्षों पर चढ़ना और फल तोड़ना भी बहुत ही रोमांचकारी होता है। ये अवकाश का मुख्य आकर्षण होता है। कभी वृक्ष से गिरकर चोटिल होना और परिजनों की डांट खाना भी इसमें सम्मिलित हो जाता है।
रात्रि में नानी बच्चों को बहुत सी रोचक कथाएं सुनाती हैं। ये कथाएं केवल परियों या राजा- महाराजाओं की नहीं होतीं, अपितु परिवार के इतिहास और पूर्वजों की भी होती हैं, जो बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होती हैं। इनके कारण बच्चे अपने पूर्वजों के विषय में जान पाते हैं। इन कथाओं के माध्यम से वे बच्चों में संस्कार पोषित करती हैं, जो उनके चरित्र का निर्माण करते हैं। यही संस्कार जीवन में उनका मार्गदर्शन करते हैं। अपने पैतृक गांव अथवा नगरों में जाने से वे वहां की संस्कृति से जुड़ते हैं। अपने सगे-संबंधियों से मिलते हैं। इससे उन्हें अपने संबंधों का पता चलता है। उनमें अपने संबंधियों के प्रति स्नेह का भाव उत्पन्न होता है। वे अपने संबंधियों के प्रति अपने दायित्व को भी समझते हैं। समय पड़ने पर वे अपने दायित्वों को निभाने से पीछे भी नहीं रहते। वास्तव में बच्चों को बाल्यकाल से ही उन्हें परिवार और परिवार के प्रति उनके दायित्वों के विषय में बताना चाहिए।
बच्चे नानी के हाथ का बना स्वादिष्ट भोजन करते हैं। वे अपनी माता के मुख से नानी के हाथ से बने भोजन की बातें सुनते रहते हैं और जब उन्हें अपनी नानी के हाथ का बना भोजन खाने को मिलता है, तो उनके आनंद का ठिकाना नहीं रहता। उन्हें नानी के हाथ का बना अचार, मुरब्बा एवं पापड़ आदि अत्यंत प्रिय होते हैं। वापसी में नानी बच्चों के लिए अपने हाथ से बने स्वादिष्ट व्यंजन देती हैं।
ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चे अपने माता पिता एवं ननिहाल के सदस्यों के साथ पर्यटन स्थलों पर भी जाते हैं। अधिकतर लोग ऐसे स्थानों पर जाते हैं, जहां तापमान कम रहता है। ये पहाड़ी क्षेत्र होते हैं। इससे वे वहां की संस्कृति एवं रीति- रिवाजों के बारे में जान पाते हैं। इसके अतिरिक्त वे धार्मिक स्थलों एवं ऐतिहासिक महत्त्व के स्थलों पर भी घूमने जाते हैं। घूमने का अर्थ केवल सैर सपाटा और मनोरंजन करना नहीं है, अपितु पर्यटन से बहुत सी शिक्षाएं मिलती हैं। धार्मिक स्थलों पर जाने से मन को शांति प्राप्त होती है तथा बच्चे अपने गौरवशाली संस्कृति से जुड़ पाते हैं। उन्हें अपने ईष्ट देवी-देवताओं के बारे में जानने का अवसर मिलता है। उनमें आस्था का संचार होता है। उनका आत्मबल एवं आत्म विश्वास बढ़ता है। ऐतिहासिक स्थलों पर जाने से उन्हें अपने इतिहास को जानने का अवसर प्राप्त होता है। ये व्यवहारिक ज्ञान है, जो उन्हें आने- जाने से प्राप्त होता है। यह उनके लिए आवश्यक भी है। वे जिन चीजों के बारे में पुस्तकों में पढ़ते उनके बारे में उन्हें सहज जानकारी प्राप्त होती है। इसका उनके मन- मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
शिक्षकों द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए भी विद्यार्थियों को गृहकार्य दिया जाता है। इस दौरान विद्यालय अवश्य बंद रहते हैं, किन्तु ट्यूशन सेंटर खुले रहते हैं। बच्चे ट्यूशन के लिए जाते हैं और अपना गृहकार्य भी करते हैं। इसके अतिरिक ग्रीष्म कालीन अवकाश के दौरान बहुत से संस्थान अनेक प्रकार के कम समयावधि वाले कोर्स प्रारंभ करते हैं, उदाहरण के लिए चित्रकला, संगीत, गायन, नृत्य, मिट्टी के खिलौने बनाने, सजावटी सामान बनाना आदि। इस समयावधि में बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार कार्य करने एवं नई- नई चीजें सीखने का अवसर प्राप्त होता है। बहुत से बच्चे खेलों की ओर रुझान करते हैं। समय अभाव के कारण वे खेल नहीं पाते थे, किन्तु अवकाश में उन्हें अपनी पसंद के खेल खेलने का अवसर मिल जाता है। क्षेत्र के बच्चे अपनी-अपनी टीमें बना लेते हैं और आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं. इससे उनमें खेल भावना का विकास होता है। किसी भी खिलाड़ी के खेल का प्रारंभ इसी प्रकार होता है। पहले वे अपने मित्रों के साथ खेलता है. फिर इसी प्रकार वह खेल स्पर्धाओं में खेलने लगता है। इस प्रकार एक दिन वह देश के लिए पदक जीतने वाला खिलाड़ी बन जाता है। वास्तव में यह समय बच्चों के नैसर्गिक गुणों को निखारने का कार्य करता है।
यह दुखद एवं चिंतनीय है कि आज के डिजिटल युग में बच्चे मोबाइल में लगे रहते हैं। इससे उनके नेत्रों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। तकनीक का आवश्यकता से अधिक उपयोग करना हानिकारक होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को प्रकृति के निकट लेकर जाएं अर्थात ग्रीष्मकालीन अवकाश में ननिहाल अवश्य लेकर जाएं।
Monday, April 13, 2026
सामाजिक सुधार के मनीषी थे डॉ. भीमराव अम्बेडकर : सौरभ मालवीय
लखीमपुर खीरी। सामाजिक समरसता मंच द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर जिला पंचायत सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सौरभ मालवीय ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर केवल एक महान विधिवेत्ता ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार के मनीषी भी थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज के “स्व” को जागृत करने का कार्य किया और समानता, न्याय तथा बंधुत्व जैसे मूल्यों को स्थापित करने हेतु आजीवन प्रयासरत रहे। उनका जीवन संघर्ष और उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
सौरभ मालवीय ने आगे कहा कि डॉ. अम्बेडकर के प्रयासों से वंचित एवं उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में आने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे सामाजिक समरसता को बल मिला।
इस अवसर पर कार्यक्रम में अवध प्रान्त के मा. संघचालक, संघ के वरिष्ठ प्रचारक राजेंद्र जी, नरेंद्र जी, रामनरेश जी, नगर विधायक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Saturday, February 28, 2026
Sunday, February 22, 2026
Friday, February 13, 2026
आत्मीय भेंट
बैठक में सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याण एवं लोकमंगल से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। संत स्वरूप आशीष गौतम जी ने दिव्य सेवा प्रेम मिशन द्वारा संचालित सेवा परियोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने आगामी आयोजनों एवं जनजागरण अभियानों की जानकारी भी साझा की।
विधायक पी एन पाठक जी ने संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए ऐसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर शहर के अनेक प्रमुख नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने दिव्य सेवा संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
Sunday, January 25, 2026
गणतंत्र दिवस समारोह
देवरिया।
सरस्वती वरिष्ठ माध्यमिक विद्या मंदिर, देवरिया खास के प्रांगण में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा रहा और विद्यार्थियों, आचार्यों व अभिभावकों में राष्ट्रप्रेम का उत्साह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री प्रो. सौरभ मालवीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में भारतीय संविधान के मूल्यों, राष्ट्र की एकता-अखंडता तथा युवाओं की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. मालवीय ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्यों का स्मरण कराने वाला अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संस्कार, शिक्षा और सेवा के माध्यम से एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं प्रेरक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अनुशासन, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
इस अवसर पर प्रदेश मंत्री डॉ. डॉ. शैलेश सिंह जी और प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी का विशेष मार्गदर्शन मिला.
अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा सभी अतिथियों, आचार्यों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
Thursday, December 25, 2025
राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर 25 दिसम्बर 2025 को लखनऊ के सेक्टर-जे में 230 करोड़ रुपये की लागत से 65 एकड़ क्षेत्रफल में निर्मित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर केंदीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति रही।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण किया। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल में म्यूजियम का लोकार्पण तथा इसका अवलोकन किया और भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल के विकास पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री ने सभी को राष्ट्र प्रेरणा स्थल की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज लखनऊ की भूमि एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। आज उन्हें राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला है। यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस सोच का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं जितनी ऊंची हैं, इनसे मिलने वाली प्रेरणा उससे भी अधिक ऊंची है। अटलजी ने लिखा था “नीरवता से मुखरित मधुबन, परहित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में जलना होगा, गलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।“ यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल हमें संदेश देता है कि हमारा हर कदम, हर प्रयास राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित हो। सबका प्रयास ही विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि प्रदान करेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी पूरी टीम तथा राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रोजेक्ट से जुड़े सभी श्रमिकों, कारीगरों व योजनाकारों को बधाई देते हुए कहा कि जिस जमीन पर यह प्रेरणा स्थल बना है, उसकी 30 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कई दशकों से कूड़े-कचरे का पहाड़ जमा था। पिछले तीन वर्षों में इसे पूरी तरह समाप्त किया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी, इन तीन महापुरुषों की प्रेरणा और उनके विजनरी कार्य तथा राष्ट्र प्रेरणा स्थल में स्थापित विशाल प्रतिमाएं विकसित भारत का बड़ा आधार हैं। इनकी प्रतिमाएं हमें नई ऊर्जा से भर रही हैं।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का बहुत अधिक फायदा उत्तर प्रदेश को हो रहा है। उत्तर प्रदेश 21वीं सदी के भारत में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। यह उनका सौभाग्य है कि वह उत्तर प्रदेश से सांसद हैं। उत्तर प्रदेश के मेहनतकश लोग एक नया भविष्य लिख रहे हैं। कभी उत्तर प्रदेश की चर्चा खराब कानून-व्यवस्था के लिए
होती थी, आज इसकी चर्चा विकास के लिए होती है। आज उत्तर प्रदेश, देश के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर तथा काशी विश्वनाथ धाम, यह दुनिया में उत्तर प्रदेश की नई पहचान के प्रतीक बन रहे हैं। राष्ट्र प्रेरणा स्थल जैसे आधुनिक निर्माण उत्तर प्रदेश की नई छवि को और अधिक रोशन बनाते हैं।
उन्होंने कामना की कि उत्तर प्रदेश सुशासन, समृद्धि और सच्चे सामाजिक न्याय के मॉडल के रूप में और बुलंदी हासिल करे। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश को दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाई। डॉ. मुखर्जी ने भारत में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान की व्यवस्था को खारिज किया था। आजादी के बाद भी जम्मू-कश्मीर में यह व्यवस्था भारत की अखंडता के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। हमें गर्व है कि हमारी सरकार को अनुच्छेद-370 की दीवार गिराने का अवसर मिला। आज भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में भी पूरी तरह लागू है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने देश में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी थी। उन्होंने देश को पहली औद्योगिक नीति दी और भारत में औद्योगीकरण की बुनियाद रखी। आज आत्मनिर्भरता के उसी मंत्र को हम नई बुलंदी दे रहे हैं। मेड इन इंडिया सामान आज दुनिया भर में पहुंच रहा है। उत्तर प्रदेश में ही एक ओर ‘एक जनपद एक उत्पाद’ का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है तथा छोटे-छोटे उद्योगों व छोटी-छोटी इकाइयों का सामर्थ्य बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में ही बहुत बड़ा डिफेन्स कॉरिडोर बन रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने जिस ब्रह्मोस मिसाइल का जलवा देखा, वह अब लखनऊ में बन रही है। वह दिन दूर नहीं है, जब उत्तर प्रदेश का डिफेन्स कॉरिडोर दुनिया भर में डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाएगा।
उन्होंने कहा कि दशकों पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अन्त्योदय का स्वप्न देखा था। वह मानते थे कि भारत की प्रगति का पैमाना अन्तिम पंक्ति में खड़े अन्तिम व्यक्ति के चेहरे की मुस्कान से मापा जाएगा। दीनदयाल जी ने एकात्म मानववाद का दर्शन भी दिया। शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा सबका विकास होना चाहिए।
दीनदयाल जी के सपने को हमने अपना संकल्प बनाया है। हमने अन्त्योदय को सैचुरेशन अर्थात संतुष्टीकरण का नया विस्तार दिया है। सैचुरेशन अर्थात हर जरूरतमंद और हर लाभार्थी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में लाने का प्रयास करना। जब सैचुरेशन की भावना होती है, तो भेदभाव नहीं होता है। यही सुशासन, सच्चा सामाजिक न्याय और सेकुलरिज्म भी है।
उन्होंने कहा कि आज देश के करोड़ों नागरिकों को बिना किसी भेदभाव पक्का घर, शौचालय, नल से जल, बिजली और गैस कनेक्शन मिल रहा है। करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज और मुफ्त इलाज मिल रहा है। पंक्ति में खड़े अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास हो रहा है। यही पंडित दीनदयाल जी का विजन था। करोड़ों भारतीयों ने गरीबी को परास्त किया है। यह इसलिए सम्भव हुआ, क्योंकि हमारी सरकार ने पीछे छूट गए और अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि आज देश के करोड़ों नागरिकों को बिना किसी भेदभाव पक्का घर, शौचालय, नल से जल, बिजली और गैस कनेक्शन मिल रहा है। करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज और मुफ्त इलाज मिल रहा है। पंक्ति में खड़े अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास हो रहा है। यही पंडित दीनदयाल जी का विजन था। करोड़ों भारतीयों ने गरीबी को परास्त किया है। यह इसलिए सम्भव हुआ, क्योंकि हमारी सरकार ने पीछे छूट गए और अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले करीब 25 करोड़ देशवासी सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे। आज करीब 95 करोड़ भारतवासी इस सुरक्षा कवच के दायरे में है। उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में लोगों को इसका लाभ मिला है। बीमा की सुविधा पहले कुछ लोगों तक सीमित थी। हमारी सरकार ने अन्तिम व्यक्ति तक बीमा सुरक्षा पहुंचाने का बीड़ा उठाया। इसके लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना बनाई गई। इसमें मामूली प्रीमियम पर दो \लाख रुपये का बीमा कवर सुनिश्चित हुआ। आज इस योजना से 25 करोड़ से ज्यादा गरीब जुड़े हैं। इसी प्रकार दुर्घटना बीमा के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना चल रही है। इससे भी लगभग 55 करोड़ लोग जुड़े हैं। इन योजनाओं से लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का क्लेम छोटे-छोटे परिवार के सामान्य गरीब
लोगों को मिला है। संकट के समय यह पैसा गरीब परिवारों के काम आया है।
उन्होंने कहा कि आज अटलजी की जयंती का यह दिन, सुशासन के उत्सव का भी दिन है। लम्बे समय तक देश में गरीबी हटाओ जैसे नारों को ही गवर्नेंस मान लिया गया था। अटलजी ने सही मायने में सुशासन को जमीन पर उतारा। आज डिजिटल पहचान की बहुत चर्चा होती है, इसकी नींव रखने का काम अटलजी की सरकार ने ही किया था। उस समय जिस विशेष काम के लिए इसकी शुरुआत की गई थी, वह आज आधार के रूप में विश्वविख्यात हो चुकी है। भारत में टेलीकॉम क्रान्ति को गति देने का श्रेय भी अटलजी को ही जाता है। उनकी सरकार द्वारा बनाई गई टेलीकॉम नीति से घर-घर तक फोन और इंटरनेट पहुंचना आसान हो गया। आज भारत दुनिया में सबसे अधिक मोबाइल और इंटरनेट यूजर वाले देशों में से एक है।
उन्होंने कहा कि विगत 11 वर्षों में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है। जिस प्रदेश से अटलजी सांसद रहे, वह उत्तर प्रदेश आज भारत का नम्बर एक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग वाला राज्य बन गया है। कनेक्टिविटी के सम्बन्ध में अटलजी के विजन ने 21वीं सदी के भारत को मजबूती प्रदान की। अटलजी के
समय ही गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाने का अभियान शुरू किया गया था। उसी समय स्वर्णिम चतुर्भुज हाईवे के विस्तार पर काम शुरू हुआ। वर्ष 2000 के \ बाद से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक करीब आठ लाख किलोमीटर सड़कें बनी हैं। इनमें से करीब चार लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें विगत 10 से 11 वर्षों में बनी हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमारे देश में तीव्र गति से एक्सप्रेस-वे बनाने का काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश भी एक्सप्रेस-वे स्टेट के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। अटलजी ने ही दिल्ली में मेट्रो की शुरुआत की थी। आज देश के 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो नेटवर्क लाखों लोगों का जीवन आसान बना रहा है। अटलजी की सरकार ने सुशासन की जो विरासत स्थापित की, उसे आज हमारी केंद्र और राज्य की सरकारें नया आयाम दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत में हुए हर अच्छे काम को एक ही परिवार से जोड़ने की प्रवृत्ति रही है। हमने देश को इस पुरानी प्रवृत्ति से बाहर निकाला है। हमारी सरकार माँ भारती की सेवा करने वाली हर अमर विभूति और हर किसी के योगदान को सम्मान दे रही है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा दिल्ली के कर्तव्य पथ पर स्थापित की गई है। अंडमान निकोबार में जिस द्वीप पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने तिरंगा फहराया, उसका नामकरण उनके नाम पर किया गया है।
बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की विरासत को मिटाने का प्रयास भी किया गया था। हमारी सरकार ने बाबा साहब की विरासत को मिटने नहीं दिया। आज दिल्ली से लेकर लंदन तक बाबा साहब से जुड़े पंच तीर्थ उनकी विरासत का जयघोष कर रहे हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सैकड़ों रियासतों में बंटे हमारे देश को एक किया, लेकिन आजादी के बाद उनके काम और उनके कद दोनों को छोटा करने का प्रयास किया गया। हमारी सरकार ने सरदार पटेल जी को वह मान और सम्मान दिया, जिसके वह हकदार थे। हमने सरदार पटेल जी की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित कराई और एकता नगर के रूप में एक प्रेरणास्थली का निर्माण किया।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां दशकों तक आदिवासियों के योगदान को उचित स्थान नहीं दिया गया। हमने भगवान बिरसा मुण्डा तथा उत्तर प्रदेश में महाराजा सुहेलदेव का स्मारक बनवाया। उत्तर प्रदेश में ही निषादराज और प्रभु श्रीराम की मिलन स्थली को अब जाकर मान-सम्मान मिला। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह से लेकर चौरी-चौरा के शहीदों तक माँ भारती के सपूतों के योगदान को हमारी सरकार ने ही पूरी श्रद्धा और विनम्रता से याद किया है।
उन्होंने कहा कि परिवारवाद की राजनीति की एक विशिष्ट पहचान होती है। यह असुरक्षा से भरी हुई होती है। आजाद भारत में अनेक प्रधानमंत्री हुए, लेकिन राजधानी दिल्ली में स्थित म्यूजियम में अनेक पूर्व प्रधानमंत्रियों को नजरअंदाज किया गया। इस स्थिति को भी हमारी सरकार ने ही बदला है। आज इस संग्रहालय में आजाद भारत के हर प्रधानमंत्री को उचित सम्मान और स्थान दिया गया है। हमारे संस्कार हमें सभी का सम्मान करना सिखाते हैं। विगत 11 वर्षों में हमारी सरकार के दौरान श्री पी.वी. नरसिम्हा राव और श्री प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिया गया। हमारी सरकार ने ही श्री मुलायम सिंह यादव जैसे अनेक नेताओं को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि 25 दिसम्बर का यह दिन देश की दो महान विभूतियों के जन्म का अद्भुत संयोग लेकर आता है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी तथा भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी, इन दोनों महापुरुषों ने भारत की अस्मिता, एकता और गौरव की रक्षा की तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 25 दिसम्बर को ही महाराजा बिजली पासी जी की भी जन्म जयन्ती है। लखनऊ में प्रसिद्ध बिजली पासी किला स्थित है। महाराजा बिजली पासी ने वीरता, सुशासन और समावेश की जो विरासत छोड़ी, उसे हमारे पासी समाज ने गौरव के साथ आगे बढ़ाया है। अटलजी ने ही वर्ष 2000 में महाराजा बिजली पासी के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।
केंदीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। भारत विकास की बुलंदियों की ओर तेजी से अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी एक ऐसे राजनेता हैं, जिन्हें दुनिया के 29 देशों का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ है। पिछले एक दशक में हमारा देश बहुत आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री जी के पंच प्रण के मंत्र से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ में एक शानदार राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण कराया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के प्रदेश आगमन पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाने तथा उनकी स्मृतियों को नमन करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निर्माण किया गया है। इस राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों से हुआ है। यहां इन महापुरुषों की भव्य प्रतिमाओं के साथ-साथ म्यूजियम का निर्माण किया गया है। आज इस म्यूजियम का भी लोकार्पण हुआ है। यह भारत माता के महान सपूतों को नमन करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि इन सभी महापुरुषों ने भारत को नयी दृष्टि व प्रेरणा प्रदान की। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत में ‘एक देश, एक विधान, एक निशान तथा एक प्रधान’ का उद्घोष किया था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार होते देख आज प्रत्येक देशवासी प्रफुल्लित दिखाई दे रहा है। भारत माता के महान सपूत व विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों के भारत में अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में नया परिवर्तन होता हुआ दिखाई दे रहा है। विगत 11 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर सामान्य जीवनयापन योग्य बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि आज महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद् तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की पावन जयंती है। प्रधानमंत्री जी ने देश के प्रति उनके द्वारा की गई सेवाओं को सम्मान देते हुए उन्हें भारतरत्न से विभूषित किया। आज लखनऊ के महान योद्धा महाराजा बिजली पासी की भी पावन जयन्ती है। प्रत्येक भारतवासी के मन में उनके प्रति अटूट श्रद्धाभाव है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी, अन्त्योदय के स्वप्न को साकार करने तथा सुशासन को मूर्तरूप प्रदान करने वाले इन तीनों महापुरुषों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लक्ष्य के साथ आधुनिक भारत के शिल्पकार तथा एक भारत व श्रेष्ठ भारत के स्वप्नदृष्टा हैं। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से आज हम आत्मनिर्भर भारत का वर्तमान स्वरूप देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह वर्ष श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मशताब्दी महोत्सव का वर्ष है। अटलजी कहते थे कि “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”
यह केवल आशा मात्र नहीं, बल्कि भारत राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर उनके अडिग विश्वास, दूरदृष्टि तथा दृढ़ संकल्प का उद्घोष था। अटलजी ने एक कवि, पत्रकार, राष्ट्रवादी विचारक तथा भारत के सच्चे सपूत के रूप में भारत को जो विजन व नेतृत्व दिया, उसे हम वर्तमान भारत में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में साकार होते हुए देख रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में विरासत और विकास का अद्भुत समन्वय दिखाई दे रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
25 दिसम्बर 2025
Saturday, December 13, 2025
कवि प्रियांशु गजेंद्र से खास मुलाकात
प्रियांशु गजेंद्र एक युवा कवि के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी कविताओं में समकालीन जीवन की बेचैनी, युवा मन के प्रश्न और संवेदनशील भावनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उनकी लेखनी सरल भाषा में गहरी बात कहने का प्रयास करती है, जिससे पाठक सहज ही जुड़ाव महसूस करता है। प्रेम, सामाजिक असमानता, आत्मसंघर्ष और उम्मीद—ये सब उनकी कविताओं के प्रमुख सरोकार माने जाते हैं।
काव्य पाठ के समय श्रोता झूम उठते है. स्वर मधुर और मोहक है.
प्रियांशु गजेंद्र की कविताओं की खासियत यह है कि वे बड़े-बड़े शब्दों के बजाय छोटे अनुभवों से बड़ी बात कह देते हैं। उदाहरण के तौर पर उनकी कविताओं में अक्सर अकेलेपन, सपनों और बदलते समय की झलक मिलती है। उनकी एक कविता में युवा मन की दुविधा और आशा को इस तरह उकेरा गया है कि पाठक अपने ही अनुभव उसमें खोज लेता है—
जहाँ सवाल भी अपने लगते हैं और जवाब भी भीतर से उगते हुए प्रतीत होते हैं।
कुल मिलाकर, प्रियांशु गजेंद्र एक ऐसे युवा कवि हैं जिनकी कविताएँ आज की पीढ़ी की आवाज़ बनकर सामने आती हैं और भविष्य में उनके लेखन से और अधिक सशक्त रचनाओं की उम्मीद की जा सकती है।
Sunday, November 2, 2025
कुटुंब का पैगाम -2025
संस्था के निदेशक श्री देश दीपक सिंह की दृष्टि बहुत व्यापक है. समाज, देश और राष्ट्र के वास्ते युवाओं में सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय विचार का कैसे बीजारोपण करें इस वास्ते इस मंच पर आप नुक्कड़ नाटक का आयोजन था.
सामाजिक जागरूकता में नुक्कड़ नाटक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नुक्कड़ नाटक (Street Play) एक ऐसा नाट्य रूप है जो खुले स्थानों — जैसे बाज़ार, स्कूल, चौक, या मोहल्ले में — प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देना होता है।
नुक्कड़ नाटक दर्शकों से सीधे संवाद करता है, जिससे संदेश अधिक प्रभावी और भावनात्मक बन जाता है।
यह किसी भी बड़े मंच या साधन की आवश्यकता नहीं रखता, इसलिए समाज के हर वर्ग तक पहुँच सकता है — ग्रामीण, शहरी, गरीब या अशिक्षित सभी तक।
नाटक सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह, स्वच्छता, भ्रष्टाचार, नशा, लैंगिक समानता आदि पर जनजागृति फैलाता है।
लोग केवल दर्शक नहीं रहते, वे संवाद का हिस्सा बनते हैं। इससे सामाजिक बदलाव की दिशा में सामूहिक सोच विकसित होती है।
नाटक के माध्यम से हँसी, दुःख और भावनाओं का प्रयोग दर्शकों के मन में संदेश को गहराई से बिठा देता है।
नुक्कड़ नाटक समाज के आईने की तरह है — जो लोगों को उनकी वास्तविक स्थिति दिखाता है और उन्हें सोचने, समझने और बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए सामाजिक सुधार और जनजागरूकता के क्षेत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Desh Deepak Singh जी और उनकी पूरी टीम को साधुवाद।
सामाजिक जागरूकता में नुक्कड़ नाटक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नुक्कड़ नाटक (Street Play) एक ऐसा नाट्य रूप है जो खुले स्थानों — जैसे बाज़ार, स्कूल, चौक, या मोहल्ले में — प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देना होता है।
नुक्कड़ नाटक दर्शकों से सीधे संवाद करता है, जिससे संदेश अधिक प्रभावी और भावनात्मक बन जाता है।
यह किसी भी बड़े मंच या साधन की आवश्यकता नहीं रखता, इसलिए समाज के हर वर्ग तक पहुँच सकता है — ग्रामीण, शहरी, गरीब या अशिक्षित सभी तक।
नाटक सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह, स्वच्छता, भ्रष्टाचार, नशा, लैंगिक समानता आदि पर जनजागृति फैलाता है।
लोग केवल दर्शक नहीं रहते, वे संवाद का हिस्सा बनते हैं। इससे सामाजिक बदलाव की दिशा में सामूहिक सोच विकसित होती है।
नाटक के माध्यम से हँसी, दुःख और भावनाओं का प्रयोग दर्शकों के मन में संदेश को गहराई से बिठा देता है।
नुक्कड़ नाटक समाज के आईने की तरह है — जो लोगों को उनकी वास्तविक स्थिति दिखाता है और उन्हें सोचने, समझने और बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए सामाजिक सुधार और जनजागरूकता के क्षेत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Desh Deepak Singh जी और उनकी पूरी टीम को साधुवाद।
Thursday, October 30, 2025
मासिक गोष्ठी
संघ का स्व जागरण
राष्ट्र के नव निर्माण में संगठन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कोई भी राष्ट्र तभी शक्तिशाली और सशक्त बन सकता है जब उसके नागरिकों में आत्मगौरव, अनुशासन, एकता और राष्ट्रनिष्ठा की भावना जागृत हो।
संघ का "स्व जागरण" अर्थात् आत्म-जागृति, आत्म-चेतना और अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता का भाव है।
‘स्व जागरण’ का तात्पर्य है—अपने भीतर निहित शक्तियों, मूल्यों और संस्कारों का जागरण।
अपने राष्ट्र, संस्कृति और इतिहास के गौरव को जानना,
अपने कर्तव्यों का बोध होना,
अपने समाज और मातृभूमि के प्रति निष्ठा विकसित करना.
Wednesday, July 23, 2025
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मध्य प्रदेश नलकूप खनन योजना : सिंचित होंगे खेत
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डॉ. सौरभ मालवीय किसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संव...

















































