Wednesday, September 9, 2026

श्रमिक कल्याण की योजनाएं : श्रमिक लाभान्वित होंगे


केंद्र सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। सरकार का श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय प्रत्येक श्रमिक को नौकरी की सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के प्रति कृतसंकल्प है। श्रम कानूनों का अनुपालन कराने में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के साथ-साथ श्रम मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा एवं रोज़गार की गुणवत्ता को बढ़ाने वाले प्रावधानों के जरिए प्रत्येक श्रमिक के सम्मान को बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार देश के विकास रणनीति के केन्द्र में रोजगार को लाने, मेक इन इंडिया के माध्यम से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, कौशल विकास के माध्यम से रोजगार को बढ़ाने और स्टार्ट अप इंडिया के जरिए नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।

सरकार को सफलता भी मिली है और सरकार की कई उपलब्धियां भी उल्लेखनीय हैं। भुगतानशुदा मातृत्व अवकाश को 12 हफ्तों से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने के लिए 1 अप्रैल, 2017 से मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम-2017 को लागू किया जा चुका है। इस अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि 50 अथवा उससे अधिक कर्मचारी वाले संस्थानों में अनिवार्य रूप से क्रेच की सुविधा अथवा घर पर रहकर काम करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पहली बार इस अधिनियम में कमिशनिंग मां और दत्तक मां दोनों के लिए 12 सप्ताह तक भुगतानशुदा मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम से लगभग 18 लाख महिला कर्मचारी लाभान्वित हो चुकी हैं।

बाल श्रम (निषेध और नियमन) संशोधन अधिनियम-2016 को 1 सितंबर, 2016 को लागू किया गया था। यह संशोधन 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर रखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ 30 अगस्त, 2017 को अधिसूचित खतरनाक कारोबार और व्यवसाय की अनुसूची के अनुसार खतरनाक कारोबार एवं व्यवसाय में किशोरों अर्थात 14 से 18 आयु वर्ग के बच्चे को रोजगार पर रखने पर भी प्रतिबंध लगाता है। श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने इस अधिनियम में कई संशोधन कर बाल श्रम (निषेध और नियमन) संशोधन नियम-2017 को 2 जून, 2017 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया है। अतः अब भारत ने बाल श्रम पर दो महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) सम्मेलन 138 और 182 को अंगीकार कर लिया है।
बाल मजदूर मुक्त भारत के उद्देश्य को हासिल करने के क्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम-1986 के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मानक परिचालन तंत्र (एसओपी) तैयार किया है। पेंसिलः संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम-1986 और राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) योजना के प्रावधानों के प्रभावशाली तरीके से कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के क्रम में इनकी बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणाली के लिए 26 सितंबर, 2017 को एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया। अब तक देश के कुल 710 ज़िलों में से 431 ज़िलों के जिला नोडल अधिकारी इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। बाल एवं किशोर श्रमिकों के शैक्षणिक पुनर्वास के उद्देश्य से जारी एनसीएलपी योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए एनसीएलपी की सभी चालू परियोजना सोसायटियों को इस पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है।

बीड़ी, चलचित्र और गैर कोयला खान श्रमिकों के लिए गृह अनुदान को 40 हजार से बढ़ाकर डेढ लाख रुपये किया जा चुका है। वर्ष 2017 में 25.5 करोड़ रुपये की लागत से 15,705 मकानों को स्वीकृति दी जा चुकी है। पुनर्निर्मित बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना के अंतर्गत 6413 बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए 15 दिसंबर, 2017 तक 664.50 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। इसके अतिरिक्त सर्वेक्षण करने, जागरूकता निर्माण और मूल्यांकन अध्ययन करने के उद्देश्य से वर्ष 2017-18 में 107.25 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है।

केन्द्रीय स्तर पर कृषि, गैर कृषि, निर्माण सहित लगभग सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गैर कृषि क्षेत्र श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी सी श्रेणी के क्षेत्रों में 250 रुपये से बढ़कर 350 रुपये, बी श्रेणी में 437 रुपये और ए श्रेणी में 523 रुपये हो गई है। इस संबंध में 27 फरवरी, 2017 को एक अधिसूचना (संशोधित) जारी की जा चुकी है।

मजदूरी का भुगतान (संशोधन) अधिनियम-2017 वर्तमान में प्रभावी अधिनियम नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को नकद अथवा चेक अथवा सीधे कर्मचारी के खाते में मजदूरी का भुगतान करने में सक्षम बनाता है। इसके साथ ही अधिनियम में प्रावधान है कि उपयुक्त सरकारें अधिकृत राजपत्र में अधिसूचना जारी कर यह अनिवार्य कर सकती हैं कि कोई भी उद्योग अथवा अन्य संस्थान अपने कर्मचारियों को केवल चेक अथवा बैंक खाते में सीधे भुगतान के माध्यम से ही वेतन देगा। इस संबंध में केन्द्र के अंतर्गत आने वाले रेलवे, वायु परिवहन सेवाएं, खनन और तेल क्षेत्रों के लिए 25 अप्रैल, 2017 को अधिसूचना जारी की जा चुकी है। इससे श्रमिकों के औपचारिकीकरण की दिशा में आने वाले बदलाव में सहायता मिलेगी।

मजदूरी भुगतान अधिनियम-1936 अधिनियम के खंड 1 के उपखंड (6) में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए केन्द्र सरकार ने 29 अगस्त, 2017 को जारी राजपत्रित अधिसूचना के माध्यम से मजदूरी की सीमा को 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 24 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है।
नकदरहित मजदूरी सुनिश्चित करने के लिए श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने नवंबर 2016 से अप्रैल 2017 तक श्रमिकों के बैंक खाते खुलवाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। देशभर में 1,50,803 शिविर लगाए गए, जिनमें नकद रहित मजदूरी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 49,66,489 श्रमिकों के बैंक खाते खोले गए।

ईपीएफओ द्वारा भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार ने पंजीकरण से छूट गए कर्मचारियों को पंजीकृत करने के लिए जनवरी 2017 में कर्मचारी पंजीकरण अभियान (ईईसी)की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत नियोक्ताओं को प्रशासनिक शुल्क में छूट, नाममात्र क्षति एक रुपया प्रति वर्ष और यदि कर्मचारी का अंश जमा नहीं किया गया है तो उस पर छूट आदि दी गई थी। इस अभियान के अंतर्गत जनवरी 2017 से जून 2017 के बीच करीब 1.01 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारियों को ईपीएफओ के साथ पंजीकृत किया गया।
12 दिसंबर, 2017 तक ईपीएफ खाते को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की सुविधा देने वाला संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को जारी किया गया यूनिवर्सल खाता संख्या (यूएएन) 12,26,13,675 कर्मचारियों को लाभांवित कर रहा है। इसके अतिरिक्त 2,56,59,988 कर्मचारियों के खातों को आधार से जोड़ने का कार्य पूरा कर लिया गया है। इन खातों के संबंध में कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन और मोबाइल सेवाएं भी उपलब्ध हैं। ईपीएफओ के सदस्यों की आवास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से ईपीएफओ ने 12 अप्रैल, 2017 को एक आवास योजना भी अधिसूचित की, जिसके तहत सदस्यों को अपनी भविष्य निधि से धन निकालने की अनुमति है।
 
मल्टिपल बैंकिंग प्रणाली के अंतर्गत केवल भारतीय स्टेट बैंक के बजाय संस्थानों के पास अब 13 अलग-अलग बैंकों के माध्यम से प्रत्यक्ष भुगतान करने का विकल्प उपलब्ध है। इनमें एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक, पीएनबी, यूबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, कोटेक महिन्द्रा बैंक, इंडियन ओवरसीज़ बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हैं।
नियोक्ता बिना किसी झंझट के अपने अंशदान का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। अंशदान सदस्य के खाते में चार दिन के भीतर जमा कर दिया जाता है। नाम, जन्म तिथि और लिंग परिवर्तन आदि के लिए भी ऑनलाइन सुविधा शुरू की गई है। पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की शुरुआत की गई। छूट वाले प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने की सुविधा है।
ई-कोर्ट मैनेजमेंट प्रणाली के माध्यम से श्रमिकों एवं संस्थानों से जुड़े मामलों के लिए ऑनलाइन प्रोसेसिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। सभी 120 ईपीएफओ कार्यालयों को देशभर में सहज इंटरफेस के लिए राष्ट्रीय डेटा केन्द्र पर समेकित डेटाबेस में तब्दील कर दिया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारियों के हित का भी ध्यान रखा गया है। विदेशों में भारतीय पेशेवरों, कौशल कर्मियों आदि के हितों की रक्षा करने के लिए 19 देशों के साथ द्विपक्षीय सामाजिक सुरक्षा समझौता (एसएसए) किया गया है, ईपीएफओ इसकी नोडल कार्यान्वयन एजेंसी है। कवरेज प्रमाणपत्र बनाने के लिए ऑनलाइन सेवा शुरू की जा चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारियों के दावों का निपटान भारत में कार्य के अंतिम दिन ही किया जा रहा है। वर्ष 2017 में ही भारत ब्राजील के बीच बातचीत के लिए प्रशासनिक प्रबंधों को अंतिम रूप दे दिया गया।

ईएसआईसी द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा के दायरे में कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है।
31 मार्च, 2017 के अनुसार ईएसआईसी योजना के अंतर्गत कवर बीमित व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 3.19 करोड़ हो गई है, और इस योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों की संख्या 12.40 करोड़ पहुंच गई है। ईएसआईसी अधिनियम के अंतर्गत 1 जनवरी, 2017 से इस योजना का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों की मजदूरी की अधिकतम सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 21 हजार रुपये किया गया है। 30 नवंबर, 2017 तक ईएसआईसी योजना 325 जिलों में पूर्ण रूप से, 85 जिलों में आंशिक रूप से और 93 जिला मुख्यालयों में लागू हो चुकी है। साथ ही 1,14,352 अतिरिक्त फैक्टरी एवं संस्थानों को इस योजना के दायरे में लाया गया। 31 मार्च, 2017 तक इस योजना के अंतर्गत कवर होने वाली फैक्टरी एवं संस्थानों की कुल संख्या 8,98,138 थी, जबकि पिछले वर्ष मार्च 2016 के अंत तक यह संख्या मात्र 7,83,786 थी।

प्रत्येक कर्मचारी तक इस कवरेज का विस्तार करने के लिए ईएसआईसी ने नियोक्ता के अनुकूल “स्कीम फॉर प्रोमोटिंग रजिस्ट्रेशन ऑफ एम्प्लोयर एंड एम्प्लोयी (एसपीआरईई)” नामक नई योजना की शुरुआत की। इस योजना के अंतर्गत 30 जून, 2017 तक कुल 1,02,013 नियोक्ता और 1,30,78,766 कर्मचारियों को ईएसआईसी के दायरे में लाया गया।

बीमित व्यक्तियों और नियोक्ताओं का सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है। ईएसआईसी केन्द्र सरकार का पहला ऐसा संगठन था, जिसने व्यावसायिक परिदृश्य को सरल बनाने और लेनदेन लागत कम करने को प्रोत्साहित करने के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के ई-बिज़ पोर्टल के माध्यम से अपनी सेवाओं को एकीकृत किया।
आधार संख्या के माध्यम से बीमित व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए उस व्यक्ति की बीमा संख्या से आधार लिंक करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसने विभिन्न प्रकार के लाभों को प्रेषित की दिशा में बीमित व्यक्ति और लाभार्थियों के पहचान की प्रक्रिया को सरल किया। इस प्रक्रिया ने बीमित व्यक्ति और उनके आश्रितों को पहचान कार्ड लेने के लिए ईएसआईसी के कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाया।

इसके अतिरिक्त मजदूरी विधेयक 2017 का मसौदा 10 अगस्त, 2017 को लोकसभा में पेश किया जा चुका है। यह पिछले चार श्रम विधेयकों के प्रासंगिक प्रावधानों को तर्कसंगत, एकीकृत और सरल बनाने का कार्य करता है, जिनमें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम-1948, मजदूरी का भुगतान अधिनियम-1936, बोनस का भुगतान अधिनियम-1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम-1976 सम्मिलित है। 
ईपीएफओ और ईएसआईसी पंजीकरण के लिए एकीकृत पंजीकरण आवेदन फॉर्म की सुविधा शुरू की गई। ईपीएफओ और ईएसआईसी के एकीकृत रिटर्न की सुविधा भी प्रारंभ की गई। 12 दिसंबर, 2017 तक एलआईएन आवंटित संस्थानों की कुल संख्या 22,92,586 है। श्रम कानूनों के लिए 16 हजार से अधिक एकल रिटर्न को भरा गया। 

रोजगार सृजन को सुविधाजनक बनाने के लिए कई प्रमुख कदम उठाए गए। राष्ट्रीय करियर सेवा परियोजना नियोक्ता, प्रशिक्षकों और बेरोजगारों को एक मंच पर लाती है। 31 अक्टूबर, 2017 तक 3.92 करोड़ नौकरी की खोज करने वाले और 14.86 लाख नियोक्ताओं को इसमें पंजीकृत किया जा चुका है और इस पोर्टल के माध्यम से 7.73 लाख नौकरियों को बढ़ावा देने एवं उनको सृजित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। नौकरी ढ़ूंढ़ने वालों के पंजीकरण विस्तार करने के लिए डाक विभाग के साथ मिलकर एनसीएस को आगे बढ़ाया जा रहा है और डाक घरों के माध्यम से भी पंजीकरण किए जा रहे हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की पहुंच बढ़ाने और उन्हें समृद्ध करने के उद्देश्य से अग्रणी जॉब पोर्टल, प्लेसमेंट संगठनों और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ 22 रणनीतिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार ने सरकारी नौकरियों की जानकारी को एनसीएस पोर्टल पर पोस्ट करने को अनिवार्य कर दिया है।
व्यावसायिक मार्गदर्शन एवं परामर्श और कंप्यूटर पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 25 राष्ट्रीय करियर सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान, नवंबर 2017 तक लगभग 1,11,146 उम्मीदवारों को व्यावसायिक मार्गदर्शन, 8,109 उम्मीदवारों को सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस पाठ्यक्रम, 1,300 उम्मीदवारों को विशेष कोचिंग योजना पाठ्यक्रम और 3,000 उम्मीदवारों को कंप्यूटर पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिया गया है। 25 एनसीएस (एनसीएस एससी/एसटी) को एनसीएस परियोजना के साथ एकीकृत किया जा चुका है।
आर्थिक पुनर्वास की प्रक्रिया में दिव्यांगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण, व्यावसायिक मार्गदर्शन, और करियर काउंसलिंग देने के लिए 21 राष्ट्रीय करियर सेवा केन्द्र (एनसीएससीडीए) स्थापित किए जा चुके हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान, 35,415 दिव्यांगों का मूल्यांकन कर उनका रोजगारोन्मुखी कौशल के प्रति मार्गदर्शन किया गया और लगभग 6,440 लोगों को विभिन्न संगठनों में रोजगार दिया गया।
गुणवत्तापरक रोजगार सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने 100 आदर्श करियर केन्द्र स्थापित करने को स्वीकृति दी है। इन केन्द्रों को राज्यों और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है। 762 रोजगार अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त 30 नवंबर, 2017 तक 725 जॉब फेयर का आयोजन किया गया।

प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के अंतर्गत नये रोजगार सृजित करने के क्रम में नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना को लागू कर रही है। 9 अगस्त, 2016 को शुरू हुई योजना के तहत ईपीएफओ में पंजीकरण कराने वाले सभी नए कर्मचारियों को केंद्र सरकार कर्मचारी पेंशन योजना अंशदान के रूप में पहले तीन वर्षों तक 8.33 प्रतिशत का योगदान देगी। यह योजना प्रतिमाह 15 हजार रुपये तक की आय वालों पर लागू है। इस योजना के लिए एकमुश्त 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में नवंबर 2017 तक सभी नए कर्मियों के लिए केंद्र सरकार संपूर्ण 12 प्रतिशत नियोक्ता अंशदान (8.33 फीसदी ईपीएस एवं 3.67 प्रतिशत ईपीएफ) का भुगतान कर रही है। 21,841 संगठन पीएमआरपीवाई योजना के अंतर्गत पंजीकृत हुए और 13,74,626 लाभार्थियों को ईपीएस अंशदान की प्रतिपूर्ति की गई। अब तक इस योजना पर लगभग 178 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।
निसंदेह, श्रमिक कल्याण की इन योजनाओं से श्रमिकों को लाभ होगा।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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