घर किसी भी व्यक्ति का आश्रय स्थल होता है, जहां वह शांति से रहता है. किन्तु ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनका अपना मकान नहीं है. इनमें ऐसे लोग भी सम्मिलित हैं, जो किराये के मकानों में रहते हैं. ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो झुग्गी-झोपड़ियों में जीवन व्यतीत कर देते हैं. जनगणना-2011 के अनुसार देश में लगभग 17.72 लाख लोग बेघर हैं. वर्ष 2001 में हुई जनगणना में यह संख्या लगभग 19.43 लाख थी. इसके अनुसार एक दशक में इस संख्या में कमी आई है. किन्तु इसी समयावधि में शहरी क्षेत्रों में बेघरों की संख्या बढ़ गई, जो चिंता का विषय है. शहरों में बेघरों की संख्या में 1.6 लाख की बढ़ोतरी हुई है. देश के 14 प्रतिशत बेघर लोग देश के शीर्ष पांच महानगरों में रहते हैं. इनकी कुल संख्या 245,490 है. इनमें से ग्रेटर मुंबई में सबसे अधिक बेघर हैं. यहां लगभग 95,755 लोगों के घर नहीं है. दूसरे स्थान पर कोलकाता है, जहां 69,798 लोग बेघर हैं. दिल्ली में 46,724 लोगों के सर पर छत नहीं है. इसी प्रकार चेन्नई में 16,882 और बेंगलुरु में 16,531 लोग बेघर हैं. राज्य की बात करें, तो उत्तर प्रदेश में बेघरों की संख्या सबसे अधिक हैं. यहां पर बेघर लोगों की संख्या 3.19 लाख है. दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है, जहां 2.13 लाख लोग बेघर हैं. इसके बाद राजस्थान में 1.78 लाख, मध्य प्रदेश में 1.45 लाख और गुजरात में 1.45 लाख लोगों के पास अपना घर नहीं है. इन बेघर लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे ही लोगों के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ की है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश के आगरा से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का शुभारंभ किया था। इस योजना का लक्ष्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना केन्द्र शासित दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू की गई है।
इस योजना के अंतर्गत अगले तीन वर्ष में कुल एक करोड़ पक्के मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार ने अगले तीन वर्ष के लिए 1,30,075 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जो योजना को वर्ष 2016-17 से लेकर 2018-19 तक लागू करने में काम आएगा। पहले सरकार ने कुल लक्ष्य तीन करोड़ मकानों का रखा था, जिसे बाद में बढ़ाकर चार करोड़ कर दिया गया। इसे वर्ष 2022 तक पूरा किया जाना है। वर्ष 2018-19 तक व्यय होने वाली कुल लागत में केन्द्रीय अंश 81,975 करोड़ रुपये का होगा। इसमें से 60 हजार करोड़ रुपये की पूर्ति बजटीय सहायता द्वारा तथा शेष 20 हजार करोड़ रुपये की पूर्ति कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से ऋण लेकर की जाएगी। मकान के निर्माण में आने वाली लागत को 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकार के बीच बांटा जाएगा. उत्तर– पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों में इसे 90:10 के अनुपात में विभाजित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन वर्ष 2011 के सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना में दर्शाये गए विभिन्न बिंदुओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसमें राज्य सरकारों की भी सहायता ली जाएगी। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के दायरे में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) सूची के स्थान पर एसईसीसी-2011 के आंकड़ों के अनुसार सभी बेघर परिवार, अनुबंध–1 में दर्शायी गई बहिर्वेशन प्रक्रिया के अधीन शून्य, एक या दो कमरों की कच्ची दीवार या कच्ची छत युक्त मकानों में रहने वाले परिवार सम्मिलित होंगे। लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा द्वारा किया जाएगा। ग्राम सभा उन तथ्यों का सत्यापन करेगी, जिनके आधार पर किसी भी परिवार को योजना के लिए लाभार्थी स्वीकार किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत सभी लाभार्थियों को मकान बनाने के लिए 1.20 लाख और पहाड़ी क्षेत्रों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। लाभार्थी को स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के माध्यम से मकान में शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है। मकान के क्षेत्रफल को 20 से 25 वर्ग मीटर कर दिया जाएगा, जिसमें की स्वच्छ खाना पकाने के लिए अलग से स्थान भी सम्मिलित होगा। इससे महिलाओं को अपना रसोईघर भी मिल जाएगा। परियोजना से जुड़े सभी लोगों के लिए गहन क्षमता सर्जक प्रक्रिया रखी जाएगी। ज़िला एवं ब्लॉक स्तर पर आवासों के निर्माण हेतु तकनीकी सुविधाएं प्रदान करने के लिए मदद मुहैया कराई जाएगी।
लाभान्वितों की वार्षिक सूची की पहचान ग्राम सभा द्वारा सहभागिता पूर्वक की जाएगी। मूल सूची की प्राथमिकता में परिवर्तन के लिए ग्राम सभा को लिखित में न्यायसंगत ठहराना होगा।
वित्तीय सहायता की राशि सीधा लाभार्थी के बैंक या डाकघर के बचत खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी। किन्तु यह याद रहे की लाभार्थी के खाते में लाभार्थी की सहमति से उसके आधार संख्या की संबद्धता कर दी गई हो। ऋण राशि को 70 हजार रुपये से बढ़ाकर अब दो लाख रुपये कर दिया गया है, नई ऋण योजना के अंतर्गत अब प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थी दो लाख रुपये तक का ऋण ले सकते हैं और उनको इस गृह ऋण पर ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी, बशर्ते ये ऋण नया मकान बनाने अथवा मकान के विस्तार के लिए लिया गया हो।
इस योजना के अंतर्गत बनाए जाने वाले मकानों में शौचालय, पेयजल, बिजली, स्वच्छ एवं कुशल ईंधन, तरल अपशिष्ट के शोधन आदि मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाएगा। सरकार ने एक तकनीकी सहायता एजेंसी का भी गठन किया है, जो लाभार्थी को वित्तीय सहायता के अतिरिक्त मकान के निर्माण में तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों द्वारा स्थानीय सामग्रियों का उपयोग करते हुए सुंदर मकान बनाना जाएगा। मकानों की संरचना ऐसी होगी, जो क्षेत्रीय आधार पर उपयुक्त हों, मकानों की रचना में ऐसी विशेषताएं रखी जाएंगी जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से बचा सकें।
सरकार पहले से ही शहरी क्षेत्रों के लिए आवास योजना चला रही है. इसके अंतर्गत अब तक लगभग कई लाख मकानों के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 तक दो करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रख गया है।
इस योजना से उन लोगों को लाभ होगा, जिनका अपना मकान नहीं है। महंगाई के कारण लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. दो समय का भोजन जुटाने में ही उन्हें बहुत सी समस्याओं को सामना करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में अपने घर का सपना देखना भी उनके लिए असंभव हो गया है. ऐसे ही लोगों के सपनों को पूरा करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना लेकर आई है.
मकान एक आर्थिक सम्पत्ति है एवं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालने के साथ ही सामाजिक उन्नति में योगदान देता है। किसी परिवार के लिए रहने का स्थाई मकान होने के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष फायदे अमूल्य एवं ढेरों हैं। निर्माण क्षेत्र भारत में दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता है। इस क्षेत्र का 250 से भी अधिक अधीनस्थ उद्योगों से संबंध है। ग्रामीण आवास योजना के विकास से ग्रामीण समाज में रोजगारों का सृजन होता है और इससे गांवों के अर्थतंत्र का विकास होता है। रहने के लिए वातावरण बेहतर होने के अप्रत्यक्ष लाभ श्रम उत्पादकता एवं स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में होते हैं। पोषण, स्वच्छता, माता एवं बच्चे के स्वास्थ्य समेत मानव विकास के मापदंडों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जीवन स्तर बेहतर होता है। इस योजना से जहां बेघरों को अपने घर मिलेंगे, वहीं रोजगार को बढ़ावा देने में भी यह सहायक सिद्ध होगी।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)


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