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Friday, August 7, 2026

पुस्तक भेंट



प्रख्यात खिस्सागो एवं लखनऊ की तहज़ीब और ज़ुबान के सशक्त संवाहक श्री हिमांशु वाजपेयी से आत्मीय भेंट हुआ। 
हिमांशु जी लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतिनिधि हैं। अपनी विशिष्ट लखनवी शैली, अद्भुत खिस्सागोई और दास्तानगोई के माध्यम से वे देश-दुनिया को अवध की संस्कृति, भाषा और संवेदनाओं से परिचित करा रहे हैं। पत्रकारिता में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद उन्होंने स्वयं को पूर्णतः खिस्सागोई की साधना के लिए समर्पित कर दिया है।
उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी मन की बात कार्यक्रम में की है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हिमांशु जी आज अपनी कला से देश-विदेश में लखनऊ का गौरव बढ़ा रहे हैं।
कल लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित मेरे कार्यालय में उनका आगमन हुआ। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं मीडिया से जुड़े विषयों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। यह आत्मीय संवाद लंबे समय तक स्मृतियों में संजोए रखने योग्य रहेगा।
इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तक 'भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप' भेंट की। 
सप्रेम शुभकामनाएँ, हिमांशु जी।

Tuesday, August 4, 2026

पुस्तक भेंट

 

आज का दिन शुभ रहा।
लखनऊ में तीन सुन्दर मंदिरों में जाने का अवसर मिला- हनुमत धाम, हनुमान सेतु और लखनऊ विश्वविद्यालय।
लखनऊ विश्वविद्यालय में अपनी पत्रकारिता की दुनिया के पहले गुरु, विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय सर से मिलने का मौका बना। बैचलर्स की पढ़ाई पूरी होने के इतने लंबे समय बाद यह पहली मुलाकात थी।
बातों-बातों में सर ने याद दिलाया कि समय का चक्र कैसे घूमता है। जीवन हमें कई बार उन्हीं लोगों और उन्हीं परिस्थितियों के सामने फिर से लाकर खड़ा कर देता है, बस किरदार और समय बदल जाते हैं।
सर के मार्गदर्शन में नोएडा कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। फिर सर भोपाल चले गए। कुछ समय बाद मेरा सफर भी भोपाल तक पहुंचा। अब नियति दोनों को लखनऊ ले आई है।
सर ने अपनी सुंदर कृति 'भारतीय पत्रकारिता के स्वर्णिम हस्ताक्षर' भेंट की। यह पुस्तक मेरे लिए गुरु के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है।
अब लखनऊ में समय-समय पर सर का सानिध्य और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। गुरु का साथ जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है।
-गौरव तिवारी 

Wednesday, May 13, 2026

पुस्तक भेंट


आज लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पत्रकारिता एवम जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष (HOD),मंत्री विद्या भारती (पूर्वी उत्तर प्रदेश) एवम राजनीतिक विश्लेशक प्रोफेसर डॉक्टर श्री सौरभ मालवीय जी से सौभाग्यवश मिलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ.
इस अवसर पर प्रोफेसर साहब ने स्वलिखित पुस्तक 'भारतीय संत परंपरा: धर्मदीप से राष्ट्रदीप' पुस्तक उपहार स्वरूप भेंट की एवम विभिन्न विषयों पर प्रेरक सुझाव देकर उत्साहवर्धन तथा मार्गदर्शन प्रदान किया
आपके व्यक्तित्व एवं सरल स्वभाव तथा विद्वता से हम अत्यंत प्रभावित हैं .
-ज्ञान प्रकाश सैनी 

Saturday, March 21, 2026

पुस्तक भेंट


लखनऊ स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय सर से सुखद भेंट हुई. आदरणीय सर ने अपनी लिखित पुस्तक "अन्तोदय को साकार करता उत्तरप्रदेश" भेंट की. यह पुस्तक उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न क्षेत्रों में विकासकार्य जैसे कृषि, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं का एक विस्तृत सार है.इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के पहले कार्यकाल के कार्यों तथा केंद्र सरकार की योजनाओं का शोधपरक और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, यह पुस्तक योगी सरकार की भावी योजनाओं और उनके उद्देश्यों को स्पष्ट दृष्टि प्रदान करती है, जिनका क्रियान्वयन हम आज 2026 में धरातल पर होते हुए देख रहे हैं।

यह पुस्तक केवल सामाजिक हित और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डॉ. मालवीय सर द्वारा शैक्षणिक जगत के विद्यार्थियों के लिए एक अमूल्य और प्रेरणादायक उपहार के रूप में प्रस्तुत है। यह पुस्तक विद्यार्थियों के ज्ञान-वर्धन में सहायक तो है ही साथ ही , सरकारी योजनाओं पर शोध के लिए एक सशक्त और विश्वसनीय संदर्भ सामग्री भी है।

इस पुस्तक का आपके द्वारा मुझे प्रदान किया जाना मेरे लिए एक अमूल्य बौद्धिक प्रसाद है। आपके स्नेह और मार्गदर्शन हेतु सादर आभार
गुंजन पंडित 

Thursday, March 19, 2026

पुस्तक भेंट



आज हिंदू नव वर्ष का पहला दिन है। चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी है।
इस शुभ अवसर पर लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के HOD डॉ. सौरभ मालवीय सर से मुलाकात हुई। उनका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा सकारात्मक ऊर्जा देता है। हर मुलाकात कुछ नया सिखाती है। और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक 'अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश' भेंट की। 
संदीप सिंह 

Monday, March 9, 2026

पुस्तक भेंट





लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय जी (अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रभारी तथा क्षेत्रीय मंत्री, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विद्या भारती) से आत्मीय भेंट का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आपने स्वलिखित पुस्तक  📚 “विकास के पथ पर भारत” सप्रेम भेंट की।
भेंट के दौरान विद्या भारती से जुड़े अनेक विषयों पर आपका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। विशेष रूप से प्रचार विभाग द्वारा मीडिया समन्वय किस प्रकार किया जाता है, इस विषय पर भी सार्थक चर्चा हुई। साथ ही आगामी केंद्रीय कार्यालय उद्घाटन तथा अखिल भारतीय साधारण सभा के संदर्भ में प्रचार-प्रसार विभाग के अपेक्षित कार्यों पर भी संवाद हुआ।
उनकी सरलता, आत्मीयता और स्नेहिल व्यवहार से मन अत्यंत अभिभूत है। 
दिल्ली प्रांत के प्रचार विभाग की ओर से आपका हार्दिक धन्यवाद। 🙏
डॉ. शैलेश भारद्वाज
प्रचार प्रमुख, दिल्ली प्रांत

Saturday, January 10, 2026

पुस्तक भेंट










एक मुलाकात...
अग्रज एवं मित्र डॉ. सौरभ मालवीय जी (क्षेत्रीय मंत्री, विद्या भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र)
आप हिंदी पत्रकारिता एवम् साहित्य के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं।
आप का जन्म उत्तर-प्रदेश के देवरिया जनपद के ग्राम पटनेजी में हुआ। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से आपने प्रयारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर एवं "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर पीएचडी शोध उपाधि प्राप्त किया ।
आपका वैचारिक घरातल सुस्पष्ट है। आप देश भर की विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं एवं अन्तर्जाल पर समसामयिक मुद्दों पर तार्किक लेखन करते हैं। ज्वलंत एवं राजनीतिक विषयों पर आप प्रायः टीवी चर्चाओं में अपने विचार रखते हुए देखे जाते हैं।
आपकी प्रकाशित पुस्तकेंः राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी, विकास के पथ पर भारत, राष्ट्रवाद और मीडिया, भारत बोध, अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश है।
आपको उत्कृष्ट पत्रकारिता एवं लेखन हेतु अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें विष्णु प्रभाकर पत्रकारिता सम्मान, प्रवक्ता डॉट कॉम लेखक सम्मान, लखनऊ रत्न सम्मान, अटल बिहारी वाजपेयी संवाद सम्मान, अटल श्री सम्मान, सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षक सम्मान, पंडित प्रताप नारायण मिश्र युवा साहित्यकार सम्मान आदि सम्मिलित है। सम्प्रति : एसोसिएट प्रोफेसर, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग - लखनऊ।
डॉ. शैलेश सिंह

पुस्तक भेंट


आज लखनऊ विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय जी से सुखद मुलाकात. इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक 'अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश' भेंट की. 
Suraj Mani

Thursday, December 4, 2025

पुस्तकें भेंट


अभी हाल ही में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय जी का भोपाल आगमन हुआ। इस अवसर पर मुलाकात में उन्होंने अपनी दो नवीन पुस्तकें भेंट की। 
1. भारतीय राजनीति के महानायक 'नरेंद्र मोदी' 
2. भारतीय संत परंपरा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप
लोकेन्द्र सिंह 

Saturday, November 8, 2025

पुस्तक भेंट



एलएनसीटी यूनिवर्सिटी - भोपाल 
कुलपति,  प्रो.नरेंद्र कुमार थापक जी 
पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनु श्रीवास्तव जी 
शोध छात्रा अंकिता द्विवेदी

इस अवसर पर अपनी पुस्तक 'भारतीय राजनीति के महानायक नरेन्द्र मोदी' भेंट की. 

Friday, November 7, 2025

पुस्तक भेंट


सुखद भेंट!!
श्री विजय मनोहर तिवारी जी 
कुलगुरु 
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय - भोपाल

इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तक 'भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप' भेंट की. 

Saturday, November 1, 2025

पुस्तक भेंट


दूरदर्शन के प्रसिद्ध टीवी एंकर श्री संतोष चौधरी को अपनी पुस्तक 'भारतीय पत्रकारिता के स्वर्णिम हस्ताक्षर' भेंट की.

Wednesday, October 29, 2025

पुस्तक का लोकार्पण

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी, शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी, सूचना प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर जी, केन्द्रीय मंत्री श्री महेंद्र पांडेय जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्या जी एवं श्री दिनेश शर्मा जी, प्रदेश अध्यक्ष श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी, श्री राधामोहन सिंह जी एवं संगठन महामंत्री श्री सुनील बंसल जी ने मेरी लिखित पुस्तक "अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश" का विमोचन किया. आप सभी का आभार

Wednesday, September 3, 2025

पुस्तक भेंट



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मा. श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज के आवास पर  संगठनात्मक चर्चा के उपरांत अपनी पुस्तक 'भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप'  भेंट की.

Friday, August 22, 2025

पुस्तक भेंट



प्रिय ईशान प्रताप सिंह से सुखद भेंट. इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तक 'भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप' भेंट की. 
ईशान प्रताप सिंह, 
पूर्ति निरीक्षक, खाद्य रसद विभाग जनपद महराजगंज- उत्तर प्रदेश

पुस्तक समीक्षा : भारत को भारतीय दृष्टि से देखने का प्रयास है ‘भारत-बोध’


लोकेन्द्र सिंह
भारत में लेखकों, साहित्यकारों एवं इतिहासकारों का एक ऐसा वर्ग रहा है, जिसने समाज को ‘भारत बोध’ से दूर ले जाने का प्रयास किया. उन्होंने पश्चिम की दृष्टि से भारत को देखा और अपने लेखन में वैसे ही प्रस्तुत किया. उन्होंने इस प्रकार के विमर्श खड़े किए, जिनसे उपजे भ्रम के वातावरण में भारतीय समाज अपने मूल स्वरूप को विस्मृत करने की दिशा में बढ़ गया. अपनी लेखनी एवं मेधा का उपयोग इस वर्ग ने देश को उसकी मूल संस्कृति से काटने के लिए किया. परंतु, भारत की वास्तविक पहचान को मिटा देना इतना आसान कार्य भी नहीं है. अनेक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक आक्रमणों के बाद भी भारत अपनी पहचान के साथ उन्नत हिमालय की तरह खड़ा हुआ है. थोड़ी-बहुत जो धुंध छा गई थी, उसे हटाने का प्रयास भारतीयता से ओतप्रोत लेखक वर्ग कर ही रहा है. पत्रकारिता के प्राध्यापक एवं लेखक डॉ. सौरभ मालवीय की नयी पुस्तक ‘भारत बोध’ भारत को भारतीय दृष्टि से देखने के प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रयास है. डॉ. मालवीय ने अपनी पुस्तक में 41 आलेखों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धारा के कुछ आयामों को प्रस्तुत किया है. भारत की संस्कृति, त्योहार एवं उनकी अवधारणा, रीति-रिवाजों में सामाजिक एवं राष्ट्रीय बोध, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति भारतीय मानस और भारत में राष्ट्र की संकल्पना जैसे समसामयिक विमर्श के अनेक बिन्दुओं पर उनके विचारों का निर्मल प्रवाह दिखाई देता है.

लेखक डॉ. सौरभ मालवीय ने अपनी पीएचडी ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर की है. संभवत: यही कारण रहा होगा कि उनके लेखों से गुजरने पर गहन अध्ययन की अनुभूति होती है. भारतीय वांग्मय से सूत्र और प्रसंग लेकर डॉ. मालवीय ने अपनी बातों को आधार दिया है.

राष्ट्र, संस्कृति, पर्यावरण और मीडिया जैसे विषयों पर भी जब उन्होंने लेखन किया है, तो उनको समझने एवं समझाने के लिए लेखक ने भारतीय वांग्मय के पृष्ठ ही पलट कर देखे हैं. संस्कृति, राष्ट्र और राष्ट्रवाद को समझने के लिए उन्होंने पाश्चात्य विद्वानों एवं पाश्चात्य दृष्टि की अपेक्षा भारतीय मनीषियों के चिंतन को श्रेष्ठ माना है. यही सही भी है. भारत के संदर्भ में जब बात आए, तब हमें अपने पुरखों को अवश्य पढऩा चाहिए कि आखिर उन्होंने भारत की व्याख्या किस तरह की है? उनका भारत बोध क्या था? ‘भारत की अवधारणा’ को समझाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह एवं विचारक डॉ. मनमोहन वैद्य कहते हैं कि “भारत को समझने के लिए चार बिन्दुओं पर ध्यान देने की जरूरत है. सबसे पहले भारत को मानो, फिर भारत को जानो, उसके बाद भारत के बनो और सबसे आखिर में भारत को बनाओ”. लेखक डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘भारत बोध’ इन चार चरणों से होकर गुजरती है. इसलिए यह पुस्तक हमें भारत की वास्तविक पहचान के निकट ले जाने के प्रयास में सफल होती दिखती है.

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अरुण कुमार भगत ने ठीक ही लिखा है कि “डॉ. मालवीय ने इस पुस्तक हेतु अपने जिन निबंधों का चयन किया है, वे सभी भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत की पहचान को सुनिश्चित और संस्थापित करने वाले हैं”. पुस्तक के संदर्भ में एक और बात महत्वपूर्ण है कि इसमें शामिल लेखों की भाषा सहज, सरल और सरस है. भाषा की सरलता के कारण आज की युवा पीढ़ी भी पुस्तक में शामिल विषयों की गहराई में उतर पाएगी. आलेखों में प्रस्तुत विचारों में भी एक प्रवाह है, जो पाठकों को बांधे रखने में सफल रहेगा.

‘भारत बोध’ का प्रकाशन यश पब्लिकेशंस, दिल्ली ने किया है. पुस्तक में 176 पृष्ठ हैं. पुस्तक के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बिहार क्षेत्र के प्रचारक सूबेदार जी और वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अरुण कुमार भगत ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जिन्हें पुस्तक में शामिल किया गया है. ‘भारत बोध’ की प्रस्तावना भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने लिखी है, जिन्होंने स्वयं भी ‘भारत बोध’ के संदर्भ में विपुल लेखन किया है. बहरहाल, डॉ. सौरभ मालवीय की यह पुस्तक भारत को भारतीय दृष्टि से देखने का महत्वपूर्ण प्रयास है. उनका यह प्रयास भारत की वास्तविक संकल्पना को समाज तक पहुँचाने में सफल हो, ऐसी कामना है. इसके साथ ही यह पुस्तक इस दिशा में चल रहे विमर्श में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है.
पुस्तक : भारत बोध
लेखक : डॉ. सौरभ मालवीय
पृष्ठ : 176
मूल्य : 220 रुपये (पेपरबैक)
प्रकाशक : यश पब्लिकेशंस,
1/10753, गली नं. 3, सुभाष पार्क,
नवीन शाहदरा, दिल्ली-32


Saturday, August 16, 2025

पुस्तक भेंट

आज मेरे विप्रधाम निवास पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री मान दीपक जी व जिला संघचालक माननीय डाक्टर मकसुदन मिश्रा जी व अर्जुन जी  का आगमन हुआ। आप सब को विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डाक्टर सौरभ मालवीय द्वारा लिखित पुस्तक 'भारतीय राजनीति के महानायक नरेंद्र मोदी' सप्रेम भेंट किया।




Friday, July 25, 2025

पुस्तक भेंट





आज लखनव विश्व विद्यालय में पत्रकारिता विभाग के प्रमुख मेरे छात्र जीवन के बड़े भाई सौरभ मालवीय जी से मुलाकात हुई। अंग वस्त्र के साथ अपनी लिखी पुस्तक 'भारतीय पत्रकारिता के स्वर्णिम हस्ताक्षर' भेंट की। आप इसी तरह आगे बढ़े और क्षेत्र , लार का नाम रोशन करे। सौरभ जी देश के माने जाने पत्रकारों में गिने जाते है, और भाजपा मीडिया सेल के प्रभारी भी रह चुके है। बहुत सारी बीती बाते हुई।
-संतोष सिंह लारी 

Sunday, July 6, 2025

मन को तृप्त करने वाली पुस्तक




सचित्र मिश्रा 
विगत दिनों डॉ. सौरभ मालवीय जी की पुस्तक ‘भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप’ पढ़ने का सुअवसर मिला। इस पुस्तक को दिल्ली के शिल्पायन पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ने प्रकाशित किया है। 
पुस्तक पढ़कर मन तृप्त हो गया। भागदौड़ के समय में संतों के विषय में पढ़कर चित्त को शांति प्राप्त हुई। इस पुस्तक ने विचारने पर विवश कर दिया कि हमारे पास संतों की शिक्षाओं एवं उनके उपदेशों के रूप में ज्ञान का अपार भंडार है, किन्तु हम भौतिक वस्तुओं एवं सुख-साधन एकत्रित करने में अपने संपूर्ण जीवन को समाप्त कर रहे हैं। दीन-दुखियों की सेवा के लिए हम क्या कार्य कर रहे हैं? क्या हम ईश्वर के मार्ग पर चल रहे हैं? क्या हम जो कार्य कर रहे हैं, उससे किसी का अहित तो नहीं हो रहा है? क्या हम केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए असत्य के साथ खड़े हैं? क्या यही जीवन का उद्देश्य है? प्रश्न अनेक हैं, परन्तु इनका उत्तर हमें स्वयं खोजना होगा।  
मालवीय जी का यह कथन अक्षरशः सत्य है कि “भारत में अनेक संत हुए हैं, जिन्होंने विश्व को मानवता का संदेश दिया। संतों की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उस समय थीं जब उन्होंने उपदेश दिए थे। आज जब लोग पश्चिमी सभ्यता के पीछे भाग रहे हैं तथा जीवन मूल्यों को भूल रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में संतों की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मैंने यह पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में 15 संतों के जीवन एवं उनके उपदेशों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिनमें रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास, महान कृष्ण भक्त सूरदास, महान भक्त कवि रसखान, कबीर, रैदास, मीराबाई, नामदेव, गोरखनाथ, तुकाराम, मलूकदास, धनी धरमदास, धरनीदास, दूलनदास, भीखा साहब एवं चरणदास सम्मिलित हैं। इन सभी संतों ने देश में भक्ति की गंगा प्रवाहित की। इनकी रचनाओं ने लोगों में भक्ति का संचार किया। इसमें ऐसे भी संत हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन में रहकर ईश्वर की भक्ति की। उन्होंने अपने परिवार एवं परिवारजनों के प्रति अपने सभी दायित्वों का निर्वाह किया। इनमें ऐसे भी संत हैं, जिन्होंने सांसारिक संबंधों से नाता तोड़कर अपना संपूर्ण जीवन प्रभु की भक्ति में व्यतीत कर दिया।“ संतों ने कभी किसी को अपने पारिवारिक कर्तव्यों से विमुख होने के लिए नहीं कहा, अपितु अपने संपूर्ण कर्तव्यों का पालन करते हुए ईश्वर की साधना करने का संदेश दिया।
मालवीयजी ने अपनी पुस्तक में संतों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी संकलित की है। वह लिखते हैं कि        प्रश्न यह है कि संत कौन है? जो सहज भाव से विचार करे तथा सहज आचरण करे, वही संत कहलाने के योग्य है। संत वह होता है, जो मान मिलने पर अभिमान नहीं करता। वह अहंकार नहीं करता। वह अहंकार से दूर रहता है। यदि कोई उसका अपमान करे, तो वह क्रोधित नहीं होता। उसके बुरे की कामना नहीं करता। उसे अपशब्द नहीं कहता। संतों की वाणी मधुर होती है। वह सबका कल्याण चाहते हैं। उनका व्यवहार संयमशील होता है। वे धैर्यवान  होते हैं। उनका चरित्र इतना प्रभावशाली होता है कि जो भी उनके समीप आता है, उनसे प्रभावित हो जाता है। संतों की वाणी ईश्वर की वाणी है। उनकी वाणी में ईश्वर का संदेश होता है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने संतों की चर्चा करते हुए कहा है-
समदुःख सुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः।
तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्य निन्दात्म संस्तुतिः।।
अर्थात जो सुख एवं दुख दोनों को ही समान मानता है, जिसे अपने मान अथवा अपमान, अपनी स्तुति एवं निन्दा की चिंता नहीं होती, जो धैर्यवान होता है, वही संत है।
महात्मा कबीर ने संत की परिभाषा इस प्रकार व्यक्त की है-
निरबैरी निहकामता, साईं सेती नेह।
विषया सून्यारा रहै, संतन के अंग एह।।
अर्थात जिसका कोई शत्रु नहीं है, जो निष्काम है, जो ईश्वर से प्रेम करता है तथा विषयों से दूर रहता है, वही संत है।
प्रेम से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। मीराबाई का उदाहरण कालजयी है। विक्रमादित्य ने मीराबाई को विष देकर मारने का प्रयास किया। मीराबाई के लिए कांटों की सेज बिछाई गई। पूजा के पुष्पों की डलिया में पुष्पों में छिपाकर सर्प भेजा गया, ताकि वह मीराबाई के प्राण हर ले। उन्हें विष का प्याला दिया गया, परन्तु मीराबाई को कोई हानि नहीं पहुंची। मान्यता है कि विक्रमादित्य द्वारा भेजा गया विष अमृत तथा सर्प पुष्पों की माला बन गया। कांटों की सेज पुष्पों की सेज बन गई। गिरधर गोपाल के भक्तों का मानना था कि यह सब गिरधर गोपाल की भक्ति का ही फल था कि कोई भी मीराबाई का बाल बांका तक न कर सका। मीराबाई कहती हैं-
मीरा मगन भई, हरि के गुण गाय।
सांप पेटारा राणा भेज्या, मीरा हाथ दीयों जाय।
न्हाय धोय देखण लागीं, सालिगराम गई पाय।
जहर का प्याला राणा भेज्या, अमरित दीन्ह बनाय।
न्हाय धोय जब पीवण लागी, हो गई अमर अंचाय।
सूल सेज राणा ने भेजी, दीज्यो मीरा सुवाय।
सांझ भई मीरा सोवण लागी, मानो फूल बिछाय।
मीरा के प्रभु सदा सहाई, राखे बिघन हटाय।
भजन भाव में मस्त डोलती, गिरधर पै बलिजाय।
वास्तव में इन संतों ने समाज में व्याप्त बुराइयों पर प्रहार किया तथा लोगों को आपस में प्रेमभाव से रहने का संदेश दिया। अन्य संतों की भांति संत तुकाराम ने भी समाज में व्याप्त कुरीतियों आदि का विरोध किया। वह जाति-पांत तथा ऊंच-नीच का भेद नहीं मानते थे वह कहते थे कि सभी मनुष्य परमपिता ईश्वर की संतान हैं, इसलिए सभी मनुष्य समान हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर की भक्ति एवं भक्ति-प्रचार के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने गृहस्थ में रहकर ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया। वह कहते थे कि मनुष्य के अपने परिवारजनों के प्रति सभी कर्त्तव्यों का पालन करते हुए ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। वह कहते थे की संसार का सुख तो क्षणिक है, वास्तविक सुख तो ईश्वर की भक्ति में है।      
उनका कहना था कि लोग अपने वस्त्र तो धोकर स्वच्छ कर लेते हैं, परंतु मन में विकारों की जो गंदगी भरी पड़ी है, उसे साफ नहीं करते। वह कहते हैं-
तुका बस्तर बिचारा क्या करे रे,
अन्तर भगवान होय।
भीतर मैला केंव मिटे रे,
मरे उपर धोय।।
अर्थात बेचारे वस्त्र को बार-बार धोने से क्या होगा? भगवान बाहरी वस्त्र में नहीं, अपितु हृदय में निवास करते हैं। आन्तरिक मैल को कब मिटाओगे? केवल बाहरी स्वच्छता से तो हम मर जाएंगे।
आज के समय में संतों की इन शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार की नितांत आवश्यकता है। पुस्तक की भाषा सरल एवं प्रभावशाली है। नि:संदेह यह पुस्तक समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करेगी। आशा है कि मालवीयजी अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त करेंगे। यह पुस्तक उपयोगी एवं संग्रहणीय है।   
       
पुस्तक का नाम : भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप
लेखक : डॉ. सौरभ मालवीय
प्रकाशक : शिल्पायन पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, दिल्ली
पृष्ठ : 239
मूल्य : 400

नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है : सौरभ मालवीय

महानायक श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. पुस्तक चर्चा नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है : सौरभ मालवीय मीडिया...