Sunday, February 27, 2022

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भूमि पूर्वांचल तय करेगा उत्तर प्रदेश का विजय मुकुट

 

 


डॉ. सौरभ मालवीय

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का पांचवां चरण 27 फरवरी को संपन्न हुआ। चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंचा है। पूर्वांचल से तय होगा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की कुर्सी किसके हिस्से में रहेगी। पूर्वांचल सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का गढ़ है। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि है, तो गोरखपुर गुरु गोरखनाथ की भूमि है। इसी प्रकार कुशीनगर भगवान बुद्ध की भूमि है, तो काशी मुक्ति और ज्ञान नगरी है साथ ही प्रयाग पवित्र नदियों के संगम की भूमि है। यह क्षेत्र सांस्कृतिक चेतना के साथ-साथ राजनीतिक रूप से बहुत उर्वरक है। विशेषकर हिंदुत्व का गढ़ है, प्रयोगशाला है जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का रंग बहुत ही गाढ़ा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्वांचल का विकास हो रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस से सांसद हैं. इसलिए यह चुनाव और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है। वहीं अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री काल में किए गये पूर्वांचल के विकास के दावे आज चुनाव के मुद्दे बने हुए हैं। पूर्वांचल की माटी क्षेत्रीय दलों से, क्षेत्रीय नेताओं से उर्वरक है। यहां की जनता जागरूक है। ऐसे में देखना यह होगा कि पूर्वांचल से कौन विजयी होता है और कौन सत्ता का मुकुट पहनता है, क्योंकि जीत का रास्ता यहीं से निकलेगा। पूर्वांचल में राज्य के दस जिले आते हैं, जिनमें 61 विधानसभा क्षेत्र हैं। बलिया की सात सीटों पर छठे चरण में तीन मार्च को मतदान होगा,जबकि बनारस समेत चंदौली, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, जौनपुर, आजमगढ़ और सोनभद्र की 54 सीटों पर सात मार्च को मतदान होगा।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री कार्यकाल में पूर्वांचल के लिए बहुत से विकास कार्य हुए हैं। राज्य के पूर्वी क्षेत्र को पूरे देश से जोड़कर विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए लगभग 341 किलोमीटर लम्बे और छह लेन चौड़े पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया गया। एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश व निकासी के लिए 11 इंटरचेंज का प्रावधान किया गया। लड़ाकू विमानों की लैंडिंग व टेकऑफ के लिए सुल्तानपुर में 3.2 किलोमीटर लम्बी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को गोरखपुर से जोड़ने के लिए लगभग 92 किलोमीटर लम्बे गोरखपुर एक्सप्रेस-वे का निर्माण करवाया जा रहा है। इसका कार्य प्रगति पर है। 14 हजार करोड़ रुपये से लगभग 297 किलोमीटर लम्बे बुन्देलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जा रहा है। इससे बुन्देलखंड क्षेत्र आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के माध्यम से दिल्ली से जोड़ा जा सकेगा। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लम्बे गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है।



पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए पांच हजार एक सौ करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए 93 प्रतिशत भूमि के अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो चुका है। यह उत्तर भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। इससे 594 किलोमीटर की यात्रा साढ़े छह घंटे में पूर्ण की जा सकेगी। अभी तक इतनी दूरी तय करने के लिए कम से कम 11 से 12 घंटे का समय लगता है। मेरठ से लखनऊ पहुंचने में केवल पांच घंटे लगेंगे। गंगा एक्सप्रेस-वे से मेरठ-प्रयागराज तक के 519 गांव जुड़ेंगे। एक्सप्रेस-वे छह लेन का होगा। इसे आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस पर 51 हजार करोड़ रुपये व्यय होंगे। इसे 26 महीनों में पूरा करने की योजना है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण का प्रथम चरण 596 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें मेरठ, ज्योतिभा फुले नगर, हापुड़, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा प्रयागराज जिले सम्मिलित होंगे। गंगा एक्सप्रेस-वे पर चलने वाले वाहनों की टॉप स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित रहेगी। प्रस्ताव के अनुसार गंगा एक्सप्रेस-वे में 14 बड़े और 126 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त आठ रोड ओवरब्रिज और 18 फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। एक्सप्रेस-वे के रूट में पड़ने वाली गंगा नदी पर एक किलोमीटर का पुल और रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया जाएगा। इस एक्स प्रेस-वे पर नौ जन सुविधा परिसर, दो मेन टोल प्लााजा और 12 रैंप टोल प्लापजा बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे के पास कई प्रकार के उद्योग खोलने की भी तैयारी है। इसके अतिरिक्त इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तथा मेडिकल इंस्टीट्यूट की स्थापना भी होगी। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए 1107 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बुन्देलखंड एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए 1492 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए 860 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के भूमि ग्रहण के लिए 7200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई।    

राज्य में हवाई सेवाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। ग्रेटर नोएडा में 1381 हेक्टेयर में अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की गई। इसका कार्य जारी है। कुशीनगर हवाई अड्डा उड़ान के लिए तैयार है। वर्ष 2017 तक केवल चार हवाई अड्डे लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर व आगरा थे। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रयागराज, कानपुर, हिंडन एवं बरेली हवाई अड्डे संचालित किए गए। इसके अतिरिक्त 13 अन्य हवाई अड्डे एवं एक हवाई पट्टी का विकास जारी है। इनमें अलीगढ़, आजमगढ़, श्रावस्ती, मुरादाबाद, चित्रकूट एवं म्योरपुर हवाई अड्डे शीघ्र पूर्ण होंगे। आगामी कुछ वर्षों में राज्य में 21 हवाई अड्डे संचालित होंगे। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में अयोध्या के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डे के लिए 101 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जेवर हवाई अड्डे में पट्टियों की संख्या दो से बढ़ाकर छह करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना के लिए दो हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।     

राज्य के अनेक शहरों में लोगों को मेट्रो की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में मेट्रो का संचालन जारी है। आगरा में 3380 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो के निर्माण का कार्य जारी है। मेरठ में भी मेट्रो का कार्य प्रगति पर है। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज एवं झांसी में भी शीघ्र ही लाइट मेट्रो आरंभ की जाएगी। लखनऊ में आगे चरण में चारबाग से बसंत कुंज तक कुल 11.165 किलोमीटर मेट्रो मार्ग के निर्माण के लिए कार्यवाही प्रगति पर है। 11076 करोड़ रुपये की लागत से कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के 32.4 किलोमीटर लम्बे कॉरिडोर का निर्माण कार्य आरंभ हो चुका है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के लिए 597 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आगरा मेट्रो रेल परियोजना के लिए 478 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरएसटीएस कॉरिडोर के निर्माण के लिए 1326 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।    

राज्य में परिवहन सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वाराणसी से हल्दिया तक 1500 किलोमीटर राष्ट्रीय जलमार्ग क्रियाशील है। नेपाल के लिए बस सेवा संचालित है। इसके अतिरिक्त 19 हजार 494 असेवित गांव परिवहन सुविधा से जोड़े गए। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संकल्प बस सेवा का संचालन किया गया। राज्य में ई-पेमेंट से जुर्माना भुगतान के लिए ई-चालान व्यवस्था लागू की गई। ई-चालान की व्यवस्था व्यवस्था वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राजय बन गया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में राज्य के 23 प्रमुख बस अड्डों को पीपीपी पद्धति पर विकसित करने का निर्णय लिया है।  

इसमें दो मत नहीं कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी को अनेकों उपहार दिए हैं, उससे पूर्वांचल के लोगों की आस बढ़ गई है। केंद्र और राज्य सरकार विकास के साथ हिन्दुत्व और सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण के लिए अपने किए हुए कार्यों को जनता के बीच मे रख रही है। देखना यह दिलचस्प होगा की आगामी 10 मार्च को उत्तर प्रदेश का विजय मुकुट किसके माथे की शोभा बढ़ाती है।

( लेखक- मीडिया प्राध्यापक एवं राजनीतिक विश्लेषक है। )

Thursday, February 24, 2022

विकास की राजनीति के नायक योगी आदित्यनाथ

 


डॉ. सौरभ मालवीय

 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहा है। राजनीति की दृष्टि से देश के सबसे महत्त्वपूर्ण राज्य के विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी विचारधारा और मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में हैं। कहीं जातिवाद हावी है] तो कहीं पिछड़ेपन की बात की जा रही है। परन्तु भारतीय जनता पार्टी योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में किए गये विकास कार्यों को लेकर चुनाव लड़ रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के निवासियों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए हर संभव प्रयास किया। योगी श्री आदित्य नाथ ने मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के पश्चात राज्य की जनता की सेवा के लिए विकास कार्यों को अपना मंत्र बनाया। राज्य में बेघरों को आवास देने के लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास योजना प्रारम्भ की गई। निर्धन परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना आरम्भ की गई।

प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान प्रारम्भ किया गया। बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना आरम्भ की गई। बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन तथा मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना प्रारम्भ की गई। राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना प्रारम्भ की गई। बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश बेरोजगारी भत्ता नामक योजना आरम्भ की गई। योगी सरकार चाहती है कि राज्य के सभी श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का पूरा-पूरा लाभ प्राप्त हो। इसलिए सरकार ने श्रमिक पंजीकरण योजना प्रारम्भ की है।

श्रमिकों के भरण पोषण के लिए राज्य में श्रमिक भरण पोषण योजना आरम्भ की गई है] जिसमें श्रमिकों को धन एवं अन्न दोनों ही उपलब्ध कराया जाता है। कोरोना काल में दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों को वापस लाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रवासी मजदूर घर वापसी पंजीकरण योजना आरम्भ की गई। इसके साथ ही राज्य की समृद्धि के लिए उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया है। राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए परम्परागत खेती विकास योजना चलाई जा रही है। खेतों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश नि%शुल्क बोरिंग योजना तथा उत्तर प्रदेश किसान उदय योजना संचालित की जा रही है। इनके अतिरिक्त बीज ग्राम योजना के अंतर्गत किसानों को धान एवं गेहूं के बीज पर विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

पारदर्शी किसान सेवा योजना के अंतर्गत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को समुचित उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। किसानों को ऋण के बोझ से मुक्त करने के लिए किसान ऋण मोचन योजना प्रारम्भ की गई। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य में अनाथ बच्चों को आसरा देने के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना प्रारम्भ की गई। महिला सशक्तिकरण के लिए भी सरकार अनेक योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत निर्धन परिवारों की पुत्रियों को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश भाग्यलक्ष्मी योजना के अंतर्गत पुत्री की शिक्षा और विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

इसके अतिरिक्त लोगों को घर बैठे बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बैंकिंग संवाददाता सखी योजना प्रारम्भ की गई है। इससे जहां लोगों को घर पर बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं] वहीं महिलाओं को भी रोजगार प्राप्त हुआ है। राज्य में अनेक पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही हैं] जिनमें उत्तर प्रदेश पेंशन योजना] विधवा पेंशन योजना तथा उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन पेंशन योजना सम्मिलित हैं। सरकार लड़कियों और दिव्यांगों के विवाह के लिए अनुदान प्रदान कर रही है। उत्तर प्रदेश विवाह अनुदान योजना के अंतर्गत लड़कियों के विवाह के लिए सरकार द्वारा अनुदान प्रदान किया जाता है।

दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत दिव्यांगजनों के विवाह लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है। राज्य में विद्यालयों] महाविद्यालयों एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्रों एवं उनके नये भवनों की स्थापना की जा रही है। गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण किय जा रहा है। उत्तर प्रदेश छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। सरकार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर है। महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सेफ सिटी योजना प्रारम्भ की गई है। विद्युत क्षेत्र में भी योगी सरकार उत्कृष्ट कार्य किया है। परिणामस्वरूप शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर-घर प्रकाश फैला है। परिवहन के क्षेत्र में भी सरकार ने सराहनीय कार्य किए हैं। राज्य ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी बहुत उन्नति की है। कोविड महामारी से गांवों को सुरक्षित रखने के लिए योगी सरकार द्वारा अपनाई गई नीति को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा है।

सरकार नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल करने पर विशेष बल दे रही है। गंगा का प्रदूषण कम करने के लिए स्मार्ट गंगा सिटी परियोजना पर कार्य जारी है। योगी सरकार राज्य में पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है। राज्य धर्म] संस्कृति एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना प्रारम्भ की गई है। योगी आदित्यनाथ दावा करते हैं कि पिछले साढ़े चार वर्षों में राज्य में रोजगार के अवसर तीव्रगति से बढ़े हैं। स्टार्टअप नीति के अंतर्गत पांच लाख युवाओं को रोजगार मिला है] जबकि मनरेगा के माध्यम से डेढ़ करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार 10 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक करोड़ महिलाओं को रोजगार मिला है। इतना ही नहीं साढ़े चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई] जबकि साढ़े तीन लाख युवाओं की संविदा पर नियुक्ति हुई है। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम को 2-16 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। योगी आदित्यनाथ का दावा है कि जनता उनके विकास कार्यों के आधार पर भाजपा को पुनः सत्ता सौंपेगी।

 

( लेखक- मीडिया शिक्षक एवं राजनीतिक विश्लेषक है)

Saturday, February 12, 2022


विकास का मंत्र योगी का संकल्प

डॉ. सौरभ मालवीय 

 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में जुट गई हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। यूपी का विधानसभा चुनाव आम चुनाव का सेमीफाइनल मना जा रहा है, क्योंकि यही चुनाव आगे के लोकसभा चुनाव की दिशा निर्धारित करेगा। यह चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। उनका दावा है कि राज्य की जनता उनके विकास कार्यों को देखते हुए उन्हें दोबारा सत्ता का बागडोर सौंपेगी।

चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नितिन गडकरी और योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अनेक योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, धर्मेन्द्र प्रधान, अनुराग ठाकुर और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा केंद्रीय एवं राज्य कैबिनेट मंत्री चुनाव की तैयारियों में जुटे रहे हैं।

उल्लेखनीय यह भी है कि योगी आदित्य नाथ ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालते समय राज्य के निवासियों से जो वादा किया था, उसे पूर्ण करने में उन्होंने तनिक भी कमी नहीं छोड़ी है। यह योगी जी के ही अथक प्रयास का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में देशभर में अपनी पृथक पहचान स्थापित की है। कृषि उत्पादों में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी रहा है। गन्ना एवं चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश लगातार देश में प्रथम स्थान पर रहा। एक करोड़ 26 लाख रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान कर उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी रहा। खाद्यान्न गेहूं, आलू, हरी मटर, आम, आंवला एवं दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम रहा। तिलहन उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा। किसानों को देय अनुदान को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है। उत्तर प्रदेश किसानों के लिए बाजार को व्यापक बनाने हेतु मंडी अधिनियम में संशोधन करने वाला देश का प्रथम राज्य है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा।

इसके साथ ही सौभाग्य योजना के अंतर्गत एक करोड़ 38 लाख घरों को नि:शुल्क विद्युत कनेक्शन देकर उत्तर प्रदेश देश में प्रथम रहा। इसी प्रकार उज्ज्वला योजना के अंतर्गत एक करोड़ 47 लाख परिवारों को नि:शुल्क गैस कनेक्शन देकर उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी रहा। उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत 62 लाख 83 हजार लोगों को लाभान्वित कर देश में द्वितीय स्थान पर रहा।

निर्माण कार्यों में भी उत्तर प्रदेश किसी से पीछे नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 40 लाख से अधिक निर्माण एवं निर्माण कार्यों को स्वीकृति देकर उत्तर प्रदेश अग्रणी रहा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश पांच एक्सप्रेस वे का एक साथ निर्माण कर अग्रणी रहा। साथ ही 30 नये मेडिकल कॉलेजों का निर्माण करके भी उत्तर प्रदेश अग्रणी रहा है। उत्तर प्रदेश आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के आधार कार्ड सीडिंग, आवास चयन, प्रथम द्वितीय, तृतीय किस्त जारी करने और आवास निर्माण आदि के प्रदर्शन में भी अग्रणी रहा। उत्तर प्रदेश दो करोड़ 61 लाख व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण करके भी देश में प्रथम स्थान पर रहा है।

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य है। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक कोरोना जांच एवं टीकाकरण करने वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश कोरोना काल में सर्वाधिक नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित करने वाला राज्य रहा। उत्तर प्रदेश कोरोना काल में दूसरे राज्यों से घर वापस आने वाले कामगारों तथा असंगठित श्रमिकों, फेरी वालों, रिक्शा चालकों, कुलियों, पल्लेदारों आदि को नि:शुल्क खाद्यान्न एवं भरण पोषण भत्ता देने वाला अग्रणी राज्य है। नोएडा में उत्तर भारत के प्रथम डेटा सेंटर की स्थापना हुई।

औद्योगीकरण के लिए भूमि उपलब्धता एवं आवंटन में भी उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में सम्मिलित है। साथ ही उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना में देश में अग्रणी रहा। सैनिटाइजर और मास्क उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी रहा। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक सरकारी नौकरियां और रोजगार देने वाला राज्य है।

उत्तर प्रदेश ने ‘एक जनपद-एक योजना’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उत्तर प्रदेश सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना करने वाला उत्तर भारत का प्रथम राज्य है। उत्तर प्रदेश ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 101 करोड़ से अधिक मानव दिवस सृजित कर डेढ़ करोड़ श्रमिकों को रोजगार दिया। उत्तर प्रदेश कौशल विकास नीति को लागू करने वाला प्रथम राज्य है।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत सर्वाधिक सात करोड़ दो लाख खाते खोले गए। उत्तर प्रदेश अटल पेंशन योजना के अंतर्गत 36 लाख 60 हजार 615 लोगों को लाभान्वित कर देश में अग्रणी रहा। उत्तर प्रदेश ई-मार्केट प्लेस जेम के माध्यम से सर्वाधिक सरकारी खरीददारी करने में अग्रणी रहा। उत्तर प्रदेश ई-चालान व्यवस्था लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य है। ई-प्रोसिसक्यूशन प्रणाली लागू करने में भी यह राज्य अग्रणी है। उत्तर प्रदेश ने 39 करोड़ 42 लाख पौधारोपण करके रिकॉर्ड स्थापित किया। उत्तर प्रदेश मानव वन्य जीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला प्रथम राज्य है। उत्तर प्रदेश सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं पारदर्शिता में भी अग्रणी है।

उत्कृष्ट कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश को देश में सर्वाधिक प्रदर्शन का पुरस्कार प्राप्त हुआ। भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को दो करोड़ रुपये का कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ। उत्तर प्रदेश को पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ई-टेंडरिंग प्रणाली में उत्तर प्रदेश ने सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए अवार्ड प्राप्त किया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी बसों में पैनिक बटन एवं सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य बना। उत्तर प्रदेश में अविरल और निर्मल गंगा के प्रति जन जागरूकता के लिए प्रथम बार गंगा यात्रा का आयोजन किया गया। अयोध्या दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश ने विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। भाजपा अपने घोषणा-पत्र में जनता से किए वादों को पूर्ण करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

यूपी की जनता इस बार किसे चुनती है, यह तो चुनाव परिणाम आने के पश्चात् ही पता चलेगा, परन्तु इतना निश्चित है कि भाजपा को उसके कार्यों का फल अवश्य मिलेगा।

लेखक-(मीडिया शिक्षक एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं )