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Showing posts from August, 2018

यह किताब अभिनंदनीय है, सराहनीय है

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फ़िरदौस ख़ान
डॊ. सौरभ मालवीय जी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सहाफ़ी ज़िन्दगी पर ऐसी किताब लिखी है, जिसमें उनकी सहाफ़ी ज़िन्दगी पर रौशनी डालने के साथ-साथ उनके विचारों और लेखों को भी संजोया गया है. सौरभ जी समर्पित प्राध्यापक हैं, ओजस्वी वक्ता हैं. अध्ययन से उनका गहरा नाता है. उनका इंद्रधनुषी व्यक्तित्व इस किताब में साफ़ झलकता है. बेशक उनका यह काम क़ाबिले-तारीफ़ है, इसके लिए सौरभ जी मुबारकबाद के मुस्तहक़ हैं.

सौरभ जी ने हमें किताब पर एक तहरीर लिखने की ज़िम्मेदारी सौंपी है, जो कोई आसान काम नहीं है. क्योंकि  बहुत मुश्किल होता है किसी ऐसी शख़्सियत के बारे में लिखना, जो ख़ुद अपनी ही एक मिसाल हुआ करती है. श्री अटल बिहारी वाजपेयी भी एक ऐसी ही शख़्सियत हैं. वे मन से कवि, विचारों से लेखक, कर्म से राजनेता हैं. बहुआयामी प्रतिभा के धनी अटलजी ने कविताएं भी लिखीं, पत्रकारिता भी की, भाषण भी दिए, विपक्ष में रहकर सियासत भी ख़ूब की, सत्ता का सुख भी भोगा. इस सबके बावजूद वे मन से हमेशा कवि ही रहे. सियासत में मसरूफ़ होने की वजह से कविताओं से उनकी कुछ दूरी बन गई या यूं कहें कि वे कविता को उतना वक़्त नहीं दे पा…

शुभसंसन

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लाल जी टंडन
अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व किसी एक दिशा में नहीं देखा जा सकता। वे एक राजनीतिज्ञ, संसदीय परंपराओं के ज्ञाता, लोकमर्यादा के आदर्श और देश की विभिन्न समस्याओं की धरातल तक की जानकारी रखने वाले नेता हैं। अटलजी को साहित्यकार कहा जाए, कवि कहा जाए या पत्रकार, समझ नहीं आता। वे विविध विधाओं से संपन्न व्यक्तित्व हैं अटल बिहारी वाजपेयी। वे एक ओजस्वी वक्ता हैं। उनकी भाषा शैली प्रभावशाली है, जिसे सुनकर, पढ़कर लोग उनके मुरीद हो जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी साहित्यिक भाषा अपने में एक अलग विधा है। उनके संपादकीय राष्ट्रवाद से ओतप्रोत हैं, जिनमें देश के ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए समाधान भी होता है। यह एक अनूठा उदहारण है। वीर अर्जुन, स्वदेश, राष्ट्रधर्म, पांचजन्य आदि में अटलजी ने कार्य किया। अटलजी की सक्रिय पत्रकारिता से समाज लाभान्वित हुआ है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि अटलजी के साथ काम करने अवसर मिला। उनके साथ एक लम्बा समय व्यतीत किया है। अटलजी ने विषम परिस्थितियों में पत्रकारिता शुरू की थी।  उन्होंने राष्ट्रधर्म के प्रारंभिक दौर में छपाई की मशीन को खुद अपने हाथों से चलाने से ले…

अटल जी की यह अमूल्य धरोहर

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हृदयनारायण दीक्षित
पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी पर ढेर सारी पुस्तकें हैं। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन उनके पत्रकारीय जीवन पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन अनूठा है। श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी प्रखर राष्ट्रवादी नेता, श्रेष्ठ वक्ता, सर्वश्रेष्ठ सांसद और सफल प्रधानमंत्री रहे हैं। उनका राजनीतिक जीवन सभी के लिए प्रशंसनीय व अनुकरणीय है। उनका जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्र प्रेम से ओत प्रोत हैं। उनके जीवन का एक-एक क्षण भारत माता को समर्पित हैं। उनका व्यक्तित्व कृतित्व आनंदवर्द्धन है। श्री अटल जी का शिष्ट, सौम्य, अजातशत्रु स्वरूप बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। मुझे उनके निकट रहने का सौभाग्य मिला है। उनके चिंतन की गहनता, वैचारिक विविधता, प्रशासक की दृढ़ता सहज आकर्षण रही है। जनसंघ के संस्थापक से लेकर भारतीय जनता पार्टी को शिखर तक पहुंचाने में उनका योगदान प्रशंसनीय है। उनकी कविताओं में संवेदनशीलता है। उनकी लेखनी झकझोर कर रख देने वाली है। उनके विचार स्पष्ट हैं। भाषा तरल सरल विरल है। वे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और सीधे पत्रक…

पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है

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मेरी पुस्तक ’राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी’ अमेज़न पर उपलब्ध है.
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सत्यम शिवम सुंदरम

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डॊ. सौरभ मालवीय
सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है. भगवान शिव को देवों का देव महादेव भी कहा जाता है। भगवान शिव को आदि गुरु माना जाता है। भगवान शिव की आराधना का मूल मंत्र तो ऊं नम: शिवाय ही है, परंतु इस मंत्र के अतिरिक्त भी कुछ मंत्र हैं, जिनके जाप से भोले शंकर प्रसन्न हो जाते हैं। शिवरात्रि हिन्दुओं विशेषकर शिव भक्तों का प्रमुख त्योहार है। शिव रात्रि भगवान शिव को अतिप्रिय है। शिव पुराण के ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे-
फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥
मानयता यह भी है कि इसी दिन प्रलय आएगा, जब प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से नष्ट कर देंगे। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि भी कहा जाता है।

वर्ष में 12 शिवरात्रियां आती हैं। इनमें महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। महाशिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार अग्निलिंग के उदय के साथ इसी दिन…

विदेश नीति : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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आप मित्र बदल सकते हैं, पर पड़ोसी नहीं. नेपाल हमारा पड़ोसी देश है. दुनिया के कोई देश इतने निकट नहीं हो सकते, जितने भारत और नेपाल हैं.जो लोग हमें यह पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान के साथ वार्ता करेंगे, वे शायद इस तथ्य से वाकिफ नहीं हैं कि पिछले  वर्षों में पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए हर बार पहल भारत ने ही किया है.भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वह आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता.सबके साथ दोस्ती करें, लेकिन राष्ट्र की शक्ति पर विश्वास रखें. राष्ट्र का हित इसी में है कि हम आर्थिक दृष्टि से सबल हों, सैन्य दृष्टि से स्वावलम्बी हों.पाकिस्तान कश्मीर, कश्मीरियों के लिए नहीं चाहता. वह कश्मीर चाहता है पाकिस्तान के लिए. वह कश्मीरियों को बलि का बकरा बनाना चाहता है.मैं पाकिस्तान से दोस्ती करने के खिलाफ नहीं हूं. सारा देश पाकिस्तान से संबंधों को सुधारना चाहता है, लेकिन जब तक कश्मीर पर पाकिस्तान का दावा कायम है, तब तक शांति नहीं हो सकती.पाकिस्तान हमें बार-बार उलझन में डाल रहा है, पर वह स्वयं उलझ जा…

कृषि : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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खेती भारत का बुनियादी उद्योग है.अन्न उत्पादन द्वारा आत्मनिर्भरता के बिना हम न तो औद्योगिक विकास का सुदृढ़ ढांचा ही तैयार कर सकते है और न विदेशों पर अपनी खतरनाक निर्भरता ही समाप्त कर सकते हैं.हमारा कृषि-विकास संतुलित नहीं है और न उसे स्थायी ही माना जा सकता है.कृषि-विकास का एक चिंताजनक पहलू यह है कि पैदावार बढ़ते ही दामों में गिरावट आने लगती है.

शिक्षा : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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शिक्षा आज व्यापार बन गई है. ऐसी दशा में उसमें प्राणवत्ता कहां रहेगी? उपनिषदों या अन्य प्राचीन ग्रंथों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता. आज विद्यालयों में छात्र थोक में आते हैं. शिक्षा के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है. व्यक्तित्व के उत्तम विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप आदर्शों से युक्त होना चाहिए. हमारी माटी में आदर्शों की कमी नहीं है. शिक्षा द्वारा ही हम नवयुवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जाग्रत कर सकते हैं.मुझे शिक्षकों का मान-सम्मान करने में गर्व की अनुभूति होती है. अध्यापकों को शासन द्वारा प्रोत्साहन मिलना चाहिए. प्राचीनकाल में अध्यापक का बहत सम्मान था. आज तो अध्यापक पिस रहा है.किशोरों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है. आरक्षण के कारण योग्यता व्यर्थ हो गई है. छात्रों का प्रवेश विद्यालयों में नहीं हो पा रहा है. किसी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता. यह मौलिक अधिकार है.निरक्षरता का और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है.वर्तमान शिक्षा-पद्धति की विकृतियों से, उसके दोषों से, कमियों से सारा देश परिचित है. मगर नई शिक्षा-नीति कहां है? शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए. ऊंची-से-…

दरिद्रता : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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गरीबी बहुआयामी है. यह पैसे की आय से परे शिक्षा, स्वास्थ्य की देखरेख, राजनीतिक भागीदारी और व्यक्ति की अपनी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति तक फैली हुई है.दरिद्र में जिन्होंने पूर्ण नारायण के दर्शन किए और उन नारायण की उपासना का उपदेश दिया, उनका अंतःकरण करुणा से भरा हुआ था. गरीबी, बेकारी, भुखमरी ईश्वर का विधान नहीं, मानवीय व्यवस्था की विफलता का परिणाम है.नर को नारायण का रूप देने वाले भारत ने दरिद्र और लक्ष्मीवान, दोनों में एक ही परम तत्व का दर्शन किया है.दरिद्रता का सर्वथा उन्मूलन कर हमें प्रत्येक व्यक्ति से उसकी क्षमता के अनुसार कार्य लेना चाहिए और उसकी आवश्यकता के अनुसार उसे देना चाहिए.

जातिवाद : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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मनुष्य-मनुष्य के संबंध अच्छे रहें, सांप्रदायिक सद्भाव रहे, मजहब का शोषण न किया जाए, जाति के आधार पर लोगों की हीन भावना को उत्तेजित न किया जाए, इसमें कोई मतभेद नहीं है.जातिवाद का जहर समाज के हर वर्ग में पहुंच रहा है. यह स्थिति सबके लिए चिंताजनक है. हमें सामाजिक समता भी चाहिए और सामाजिक समरसता भी चाहिए.समता के साथ ममता, अधिकार के साथ आत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन आधार स्तंभ हैं. इन्हीं स्तम्भों पर हमें भावी भारत का भवन खड़ा करना है.अगर परमात्मा भी आ जाए और कहे कि छुआछूत मानो, तो मैं ऐसे परमात्मा को भी मानने को तैयार नहीं हूं किंतु परमात्मा ऐसा कह ही नहीं सकता.मानव और मानव के बीच में जो भेद की दीवारें खड़ी हैं, उनको ढहाना होगा, और इसके लिए एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है.अस्पृश्यता कानून के विरुद्ध ही नहीं, वह परमात्मा तथा मानवता के विरुद्ध भी एक गंभीर अपराध है.मनुष्य-मनुष्य के बीच में भेदभाव का व्यवहार चल रहा है. इस समस्या को हल करने के लिए हमें एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है.हरिजनों के कल्याण के साथ गिरिजनों तथा अन्य कबीलों की दशा सुधारने का प्रश्न भी जुड़ा हुआ ह…

लोकतंत्र : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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हमारा लोकतंत्र संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. लोकतंत्र की परंपरा हमारे यहां बड़ी प्राचीन है.. चालीस साल से ऊपर का मेरा संसद का अनुभव कभी-कभी मुझे बहुत पीड़ित कर देता है. हम किधर जा रहे हैं?भारत के लोग जिस संविधान को आत्म समर्पित कर चुके हैं, उसे विकृत करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता.लोकतंत्र बड़ा नाजुक पौधा है. लोकतंत्र को धीरे- धीरे विकसित करना होगा. केन्द्र को सबको साथ लेकर चलने की भावना से आगे बढ़ना होगा.अगर किसी को दल बदलना है, तो उसे जनता की नजर के सामने दल बदलना चाहिए. उसमें जनता का सामना करने का साहस होना चाहिए. हमारे लोकतंत्र को तभी शक्ति मिलेगी, जब हम दल बदलने वालों को जनता का सामना करने का साहस जुटाने की सलाह देंगे.हमें अपनी स्वाधीनता को अमर बनाना है, राष्ट्रीय अखंडता को अक्षुण्ण रखना है और विश्व में स्वाभिमान और सम्मान के साथ जीवित रहना है.लोकतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें बिना घृणा जगाए विरोध किया जा सकता है और बिना हिंसा का आश्रय लिए शासन बदला जा सकता है.राजनीति सर्वांग जीवन नहीं है. उसका एक पहलू है. यही शिक्षा हमने पाई है, यही संस्कार हमने पाए हैं.कोई भी दल हो, पूजा क…

हिन्दी : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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भारत की जितनी भी भाषाएं हैं, वे हमारी भाषाएं हैं, वे हमारी अपनी हैं, उनमें हमारी आत्मा का प्रतिबिम्ब है, वे हमारी आत्माभिव्यक्ति का साधन हैं. उनमें कोई छोटी-बड़ी नहीं है.भारतीय भाषाओं को लाने का निर्णय एक क्रांतिकारी निर्णय है, लेकिन अगर उससे देश की एकता खतरे में पड़ती है, तो अहिन्दी प्रांत वाले अंग्रेजी चलाएं, मगर हम पटना में, जयपुर में, लखनऊ में अंग्रेजी नहीं चलने देंगे.राष्ट्र की सच्ची एकता तब पैदा होगी, जब भारतीय भाषाएं अपना स्थान ग्रहण करेंगी.हिन्दी का किसी भारतीय भाषा से झगड़ा नहीं है. हिन्दी सभी भारतीय भाषाओं को विकसित देखना चाहती है, लेकिन यह निर्णय संविधान सभा का है कि हिन्दी केन्द्र की भाषा बने.अंग्रेजी केवल हिन्दी की दुश्मन नहीं है, अंग्रेजी हर एक भारतीय भाषा के विकास के मार्ग में, हमारी संस्कृति की उन्नति के मार्ग में रोड़ा है. जो लोग अंग्रेजी के द्वारा राष्ट्रीय एकता की रक्षा करना चाहते हैं वे राष्ट्र की एकता का मतलब नहीं समझते.हिन्दी की कितनी दयनीय स्थिति है, यह उस दिन भली-भांति पता लग गया, जब भारत-पाक समझौते की हिन्दी प्रति न तो संसद सदस्यों को और न हिन्दी पत्रकारों को उपलब…

धर्म और संस्कृति : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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हिन्दू धर्म तथा संस्कृति की एक बड़ी विशेषता समय के साथ बदलने की उसकी क्षमता रही है.हिन्दू धर्म के प्रति मेरे आकर्षण का सबसे मुख्य कारण है कि यह मानव का सर्वोत्कृष्ट धर्म है.हिन्दू धर्म ऐसा जीवन्त धर्म है, जो धार्मिक अनुभवों की वृद्धि और उसके आचरण की चेतना के साथ निरंतर विकास करता रहता है.हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन का न प्रारंभ है और न अंत ही. यह एक अनंत चक्र है.मुझे अपने हिन्दूत्व पर अभिमान है, किंतु इसका उरर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्तिम-विरोधी हूं. हमें हिन्दू कहलाने में गर्व महसूस करना चाहिए, बशर्ते कि हम भारतीय होने में भी आत्मगौरव महसूस करें. हिन्दू समाज इतना विशाल है, इतना विविध है कि किसी बैंक में नहीं समा सकता.हिन्दू समाज गतिशील है, हिंदू समाज में परिवर्तन हुए हैं, परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है. हिन्दू समाज जड़ समाज नहीं है.भारत के ऋषियों-महर्षियों ने जिस एकात्मक जीवन के ताने-बाने को बुना था, आज वह उपेक्षा तथा उपहास का विषय बनाया जा रहा है.भारतीय संस्कृति कभी किसी एक उपासना पद्धति से बंधी नहीं रही और न उसका आधार प्रादेशिक रहा.उपासना, मत और ईश्वर संबंधी विश्वास की स्वतंत्रता भारत…

राष्ट्र : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

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निराशा की अमावस की गहन निशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊंचा उठाकर देखें. विश्व के गगनमंडल पर हमारी कलित कीर्ति के असंख्य दीपक जल रहे हैं.अमावस के अभेद्य अंधकार का अंतःकरण पूर्णिमा की उज्ज्वलता का स्मरण कर थर्रा उठता है.इतिहास ने, भूगोल ने, परंपरा ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बांधा है.भारतीय जहां जाता है, वहां लक्ष्मी की साधना में लग जाता है. मगर इस देश में उगते ही ऐसा लगता है कि उसकी प्रतिभा कुंठित हो जाती है. भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है. कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. दिल्ली इसका दिल है. विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है. पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं. चांद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं, मलयानिल चंवर घुलता है. यह वन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है. यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है. इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है. हम जिएंगे तो …

मधुश्रावणी पर्व

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संजीव सिन्हा के स्नेह निमंत्रण पर 'मधुश्रावणी पर्व' देखने का अवसर मिला। मिथिला दुनियां भर में अपने विशिष्ट रीतिरिवाज़ों के लिए विख्यात है आज इसकी प्रत्यक्ष अनुभूति हुई।
स्थान- प्रभात झा जी के निवास (सांसद एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा) संजीव सिन्हा

झारखंड के मुख्यमंत्री श्री रघुवरदास से एक मुलाकात

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झारखंड के मुख्यमंत्री श्री रघुवरदास को अपनी पुस्तक ’राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी’ भेंट की

राष्ट्रीय समविमर्श

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राष्ट्रीय समविमर्श
प्रज्ञा प्रवाह
@ IGNOU
डॉ. अरुण भगत,डॉ. सुधीर रिंटेंन, डॉ. विवेक विश्वास

संवाद

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हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज का अलम।
चुप बैठने से हल नहीं होने का मसला।।

अरुण माहेश्वरी से भेंट

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वाणी प्रकाशन के श्री अरुण माहेश्वरी के साथ

कुम्भ समागम

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प्रयागराज में सम्पन्न तीन दिवसीय कुम्भ कॉनक्लेव की योजना और उसे साकार करने के लिए Saurabh Pandey India Think Council को बधाई, शुभकामनाएं। पिछले 6 महीने से श्री सौरभ पांडेय और उनकी टीम ने मेहनत करके इस कार्यक्रम की संरचना की। देश भर से विषयों के विशेषज्ञ बुलाए। सार्क देशों में से 4 देश- अफगानिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों ने भी कुम्भ कॉनक्लेव में आकर साझा सांस्कृतिक विरासत की बात की। सफल आयोजन की शुभकामनाएं।