Sunday, December 27, 2020
Saturday, December 26, 2020
Wednesday, December 23, 2020
Saturday, December 19, 2020
Monday, December 7, 2020
Monday, November 30, 2020
Saturday, November 28, 2020
सुखद स्मृति
'भारतीय फुटबॉल के लिए भगवान का उपहार' के रूप में मशहूर श्री बाईचुंग भूटिया और तत्कालीन भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक श्री के.जी. सुरेश के साथ चर्चा एवं रात्रि-भोजन का अवसर। लोकसभाटीवी के कार्यकारी निदेशक श्री सुमित सिंह का साथ।
प्रो. सुरेश जी वर्तमान में माननीय कुलपति माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय-भोपाल को गौरवान्वित कर रहे हैं।
Wednesday, November 11, 2020
सुखद सानिध्य
आज शाम हरदोई में भाजपा के प्रदेश महामंत्री आदरणीय श्री अमर पाल मौर्य जी, प्रदेश मंत्री आदरणीय श्री त्रयम्बक नाथ त्रिपाठी जी, अपर महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश सरकार आदरणीय श्री कुलदीप पति त्रिपाठी जी, प्रदेश प्रवक्ता आदरणीय श्री राकेश त्रिपाठी जी, आदरणीय धनंजय जी व लेखक व चिंतक आदरणीय श्री सौरभ जी मालवीय भाईसाहब का सुखद सानिध्य प्राप्त हुआ।
-प्रीतेश दीक्षित
Wednesday, September 16, 2020
Sunday, September 13, 2020
Friday, September 11, 2020
Sunday, August 16, 2020
Monday, July 20, 2020
Saturday, July 11, 2020
Sunday, July 5, 2020
Saturday, June 20, 2020
Tuesday, June 2, 2020
विकास के पथ पर भारत
लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक की भूमिका में रहे बड़े भाई सौरभ मालवीय जी वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम संचार विश्वविद्यालय,भोपाल परिसर में सहायक प्राध्यापक के पद पर सेवा दे रहे है, के लखनऊ आवास पर मिलना हुआ वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में युवाओ की क्या और कैसे भूमिका तय हो इस संदर्भ में व्यापक विमर्श हुआ, आपकी "विकास के पथ पर भारत" पुस्तिका अभी हाल में ही प्रकाशित हुई.
आपका स्नेह सानिध्य सदैव मिलता रहे.
-राजन द्विवेदी
Wednesday, May 27, 2020
Friday, March 13, 2020
Tuesday, February 11, 2020
पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन
भोपाल। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अध्येता डॉ. सौरभ मालवीय एवं लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान समारोह में हुआ। भोपाल स्थित गाँधी भवन में पुस्तक विमोचन के लिए मंच पर प्रख्यात समाजवादी चिन्तक रघु ठाकुर, वरिष्ठ संपादक प्रो. कमल दीक्षित, सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह, व्यंग्यकार श्री गिरीश पंकज, संपादक कमलनयन पाण्डेय, मीडिया आचार्य प्रो. संजय द्विवेदी, डॉ. बीके रीना और साहित्यकार पूनम माटिया उपस्थित रहे।
इस अवसर पर समाजवादी विचारक एवं लेखक रघु ठाकुर ने कहा कि एक सच्चा राष्ट्रवाद वही होगा जो सच्चा विश्ववादी होगा। अगर सभी देश अपनी सीमाओं को छोड़ने के लिए तैयार हो जाए तभी असली राष्ट्रवाद की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया और राष्ट्रवाद के बीच संघर्ष की स्थिति नहीं होनी चाहिए। वहीं, प्रख्यात साहित्यकार एवं व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने पुस्तक के संबंध में कहा कि आज भारत माता की जय बोलने पर और राष्ट्रवादी शब्द का प्रयोग करने पर लोग घूरने लगते हैं। ये लोग अविलम्ब आपको दक्षिणपंथी बोल देंगे और सर्टिफिकेट दे देंगे। ऐसे समय में जब सब ओर राष्ट्रवाद की चर्चा है और कुछ मीडिया घरानों पर भी राष्ट्रवादी होने के ठप्पे लगाये जा रहे हैं, तब इस पुस्तक का प्रकाशित होकर आना अत्यधिक प्रासंगिक हो जाता है।
मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उमेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक सनातन राष्ट्र है। यहाँ दृष्टि रही है, दर्शन रहा है लेकिन कभी वाद नहीं रह है। उन्होंने कहा कि कोई एक वाद इस राष्ट्र का पर्याय नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद पाश्चात्य दृष्टि का शब्द है। उन्होंने कहा कि लेखकों ने पुस्तक में भारतीय राष्ट्रवाद को सही अर्थों में परिभाषित करने का प्रयास किया है। उन्होंने राष्ट्रवाद की जगह ‘राष्ट्रत्व’ या ‘राष्ट्रीय विचार’ शब्द का उपयोग करने पर जोर दिया है।
पुस्तक में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद, राष्ट्रवाद एवं मीडिया के सम्बन्ध, मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर मीडिया विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ स्तम्भकारों के महत्वपूर्ण आलेख इस पुस्तक में शामिल किये गए हैं। इस पुस्तक में प्रो. संजय द्विवेदी, संतोष कुमार पाठक, डॉ. मयंक चतुर्वेदी, डॉ. शशि प्रकाश राय, डॉ. साधना श्रीवास्तव, डॉ. मंजरी शुक्ला, डॉ. मनोज कुमार तिवारी, डॉ. मीता उज्जैन, डॉ. सीमा वर्मा, उमेश चतुर्वेदी, अमरेंद्र आर्य, अनिल पांडेय आदि के लेख शामिल हैं। यश प्रकाशन, नईदिल्ली ने पुस्तक का प्रकाशन किया है।
Sunday, January 26, 2020
भारत की दृष्टि से भारतीय राष्ट्रवाद
भारत विश्व मनुष्यता का स्वर्णिम अतीत है और भारत ही विश्व मनुष्यता का इन्द्रधनुषी सपना है। भारत उदास होता है तो विश्व मनुष्यता का कोई भविष्य नहीं है। भारत के भाग्य के साथ समूची विश्व मानवता का भाग्य नत्थी है, ज्ञान,भक्ति,योग और ध्यान से विश्वमानवता को स्थापित किया।
गणतंत्र दिवस पर भारतमाता मंदिर परिसर में राष्ट्रीय परिसंवाद.. राष्ट्रवाद क्या और क्यों.?
साथ में है..भारत अध्ययन केंद्र बीएचयू के चेयर प्रोफेसर राकेश उपाध्याय, लोकसंस्कृति के प्राख्यात आध्येता डा. चंद्रिका चंद्र, वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल...!
Saturday, January 25, 2020
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सकारात्मक सोच
सुप्रभात! सकारात्मक सोच वास्तव में जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है। जब व्यक्ति सकारात्मक रहता है, तो उसके भीतर ऊर्जा का प्रवाह निरंतर...
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डॉ. सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान...
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डॉ. सौरभ मालवीय किसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संव...
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डॉ. सौरभ मालवीय मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं क...




















































