भारत विश्व मनुष्यता का स्वर्णिम अतीत है और भारत ही विश्व मनुष्यता का इन्द्रधनुषी सपना है। भारत उदास होता है तो विश्व मनुष्यता का कोई भविष्य नहीं है। भारत के भाग्य के साथ समूची विश्व मानवता का भाग्य नत्थी है, ज्ञान,भक्ति,योग और ध्यान से विश्वमानवता को स्थापित किया।
गणतंत्र दिवस पर भारतमाता मंदिर परिसर में राष्ट्रीय परिसंवाद.. राष्ट्रवाद क्या और क्यों.?
साथ में है..भारत अध्ययन केंद्र बीएचयू के चेयर प्रोफेसर राकेश उपाध्याय, लोकसंस्कृति के प्राख्यात आध्येता डा. चंद्रिका चंद्र, वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल...!





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