कभी-कभी अपने ही पुराने चित्र को देखना एक तरह से खुद से मुलाक़ात करने जैसा होता है।
लंबे अंतराल के बाद जब हम खुद को देखते हैं, तो सिर्फ चेहरे का बदलाव नहीं दिखता, बल्कि सोच, अनुभव और समय की छाप भी नजर आती है। वही तस्वीर हमें याद दिलाती है कि हम कितनी दूर आ चुके हैं—कठिनाइयों से, सीखों से और छोटे-छोटे बदलावों से।
ऐसे पल मन को सुकून इसलिए देते हैं क्योंकि वे हमें ठहरकर अपने सफ़र को महसूस करने का अवसर देते हैं। साथ ही यह भी सिखाते हैं कि परिवर्तन स्वाभाविक है, और हर बदलाव अपने भीतर एक नई कहानी लेकर आता है।
16 अप्रैल 2022






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