डॉ. मालवीय ने कहा कि भारत का अर्थ है—जो गतिशील, जीवंत और ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो। ज्ञान वह शक्ति है जो मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। भारत पुण्य, धर्म, परोपकार और सहिष्णुता का आधार है। यहाँ की संस्कृति विविधताओं में एकता का संदेश देती है तथा धर्मयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि भारत का चित्त प्रकृति के साथ समरसता में विकसित हुआ है। यही कारण है कि भारतीय जीवन-दृष्टि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का भाव रखती है। “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” के आदर्श को आत्मसात करते हुए भारत सम्पूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाने का संदेश देता है। सत्य, शिव और सुंदर की भावना से ओत-प्रोत भारत विश्व को ज्ञान, संस्कृति और मानवता का मार्ग दिखाने की क्षमता रखता है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व संवाद के युग से गुजर रहा है। आज पूरे विश्व में अधिकारों और कर्तव्यों को लेकर विभिन्न स्तरों पर विमर्श चल रहा है। ऐसे समय में संवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। भारतीय ज्ञान परम्परा संवाद, सह-अस्तित्व और समन्वय की भावना को सुदृढ़ करती है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका परिचय कराया। इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के सहमंत्री श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय, प्रदेश मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह, प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह, सम्भाग निरीक्षक श्री कन्हैया चौबे, निदेशक डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव तथा सरस्वती बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य श्री अनुराग शुक्ल ने किया तथा आभार ज्ञापन श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ एवं समापन सरस्वती वन्दना के साथ हुआ।














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