Sunday, July 19, 2026

परमात्मा भी आकर कहे

  


पटना में एक बड़ी घटना हुई है. मैं उसका उल्लेख करना चाहता हूं. हमारे डॊ. कर्णसिंह पटना गए थे. मैं उनके भाषण के लिए उन्हें बधाई देना चाहता हूं. लेकिन मुझे दुख है कि वहां यह बात कही गई कि ’छुआछूत हिंदू धर्म का हिस्सा है.’ हम इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. छुआछूत एक पाप है, एक अभिशाप है, अस्पृश्यता एक कलंक है. जब तक यह कलंक हमारे माथे से नहीं मिटेगा, हम दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़े नहीं हो सकते. और मैं नहीं समझता ’हिंदू शास्त्र कहते हैं कि अस्पृश्यता चलनी चाहिए.’  अगर शास्त्रों की कोई ऐसी व्याख्या हुई है, तो वह गलत व्याख्या हुई है और हम उसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं. मैं एक कदम और आगे जाकर यह भी कहने के लिए तैयार हूं कि कल अगर परमात्मा भी आ जाए और कहे कि छुआछूत मानो, तो मैं ऐसे परमात्मा को भी मानने के लिए तैयार नहीं हूं. मगर परमात्मा ऐसा नहीं कर सकता और जो परमात्मा के भक्त बनते हैं, उनको भी ऐसी बात नहीं करनी चाहिए.

समाज के इस वर्ग को हमें विश्वास दिलाना होगा, आचरण और कृति से कि हम उन्हें बराबर का हकदार समझते हैं और उन्हें बराबर का स्थान देने के लिए तैयार हैं. इसके लिए अगर हमें अंधविश्वास से लड़ना होगा, तो हम लड़ेंगे. इसके लिए यदि रूढ़ियों के ऊपर वज्रपात करना आवश्यक होगा, तो हम करेंगे. यह तर्क का युग है, विज्ञान का युग है. आध्यात्मिकता की रक्षा करते हुए मानव और मानव के बीच में जो भेद की दीवारें खड़ी हुई हैं, उनको ढहाना होगा, और इसके लिए एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है और इस अभियान का प्रारंभ गृहमंत्री के द्वारा होना चाहिए. मगर गृहमंत्री चतुराई से चुप रहते हैं, बोलते हैं, तो बहुत थोड़ा बोलते हैं, और जब देश उनसे इनीशियेटिव की आशा करता है, पहल की आशा करता है, तो वह थोड़ा-सा झिझकते हैं. यह झिझक छोड़ देनी चाहिए और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का पालन करना चाहिए. जो राष्ट्रीय प्रश्न है, उन प्रश्नों पर उन्हें सारे दलों का समर्थन मिलेगा. कम से कम हमारा समर्थन मिलेगा, यह हम विश्वास दिलाते हैं.
-डॉ. सौरभ मालवीय

(पुस्तक- 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी' से)

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