Friday, March 13, 2020

बकरियों का संसार

 


मेरे गाँव में बकरियों का भी अपना संसार है।
 श्रीन्द्र मालवीय

Tuesday, February 11, 2020

पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन


भोपाल। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अध्येता डॉ. सौरभ मालवीय एवं लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान समारोह में हुआ। भोपाल स्थित गाँधी भवन में पुस्तक विमोचन के लिए मंच पर प्रख्यात समाजवादी चिन्तक रघु ठाकुर, वरिष्ठ संपादक प्रो. कमल दीक्षित, सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह, व्यंग्यकार श्री गिरीश पंकज, संपादक कमलनयन पाण्डेय, मीडिया आचार्य प्रो. संजय द्विवेदी, डॉ. बीके रीना और साहित्यकार पूनम माटिया उपस्थित रहे।

इस अवसर पर समाजवादी विचारक एवं लेखक रघु ठाकुर ने कहा कि एक सच्चा राष्ट्रवाद वही होगा जो सच्चा विश्ववादी होगा। अगर सभी देश अपनी सीमाओं को छोड़ने के लिए तैयार हो जाए तभी असली राष्ट्रवाद की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया और राष्ट्रवाद के बीच संघर्ष की स्थिति नहीं होनी चाहिए। वहीं, प्रख्यात साहित्यकार एवं व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने पुस्तक के संबंध में कहा कि आज भारत माता की जय बोलने पर और राष्ट्रवादी शब्द का प्रयोग करने पर लोग घूरने लगते हैं। ये लोग अविलम्ब आपको दक्षिणपंथी बोल देंगे और सर्टिफिकेट दे देंगे। ऐसे समय में जब सब ओर राष्ट्रवाद की चर्चा है और कुछ मीडिया घरानों पर भी राष्ट्रवादी होने के ठप्पे लगाये जा रहे हैं, तब इस पुस्तक का प्रकाशित होकर आना अत्यधिक प्रासंगिक हो जाता है।

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उमेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक सनातन राष्ट्र है। यहाँ दृष्टि रही है, दर्शन रहा है लेकिन कभी वाद नहीं रह है। उन्होंने कहा कि कोई एक वाद इस राष्ट्र का पर्याय नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद पाश्चात्य दृष्टि का शब्द है। उन्होंने कहा कि लेखकों ने पुस्तक में भारतीय राष्ट्रवाद को सही अर्थों में परिभाषित करने का प्रयास किया है। उन्होंने राष्ट्रवाद की जगह ‘राष्ट्रत्व’ या ‘राष्ट्रीय विचार’ शब्द का उपयोग करने पर जोर दिया है।

पुस्तक में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रवाद, राष्ट्रवाद एवं मीडिया के सम्बन्ध, मीडिया की भूमिका जैसे विषयों पर मीडिया विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ स्तम्भकारों के महत्वपूर्ण आलेख इस पुस्तक में शामिल किये गए हैं। इस पुस्तक में प्रो. संजय द्विवेदी, संतोष कुमार पाठक, डॉ. मयंक चतुर्वेदी, डॉ. शशि प्रकाश राय, डॉ. साधना श्रीवास्तव, डॉ. मंजरी शुक्ला, डॉ. मनोज कुमार तिवारी, डॉ. मीता उज्जैन, डॉ. सीमा वर्मा, उमेश चतुर्वेदी, अमरेंद्र आर्य, अनिल पांडेय आदि के लेख शामिल हैं। यश प्रकाशन, नईदिल्ली ने पुस्तक का प्रकाशन किया है।

Sunday, January 26, 2020

भारत की दृष्टि से भारतीय राष्ट्रवाद






भारत विश्व मनुष्यता का स्वर्णिम अतीत है और भारत ही विश्व मनुष्यता का इन्द्रधनुषी सपना है। भारत उदास होता है तो विश्व मनुष्यता का कोई भविष्य नहीं है। भारत के भाग्य के साथ समूची विश्व मानवता का भाग्य नत्थी है, ज्ञान,भक्ति,योग और ध्यान से विश्वमानवता को स्थापित किया।
गणतंत्र दिवस पर भारतमाता मंदिर परिसर में राष्ट्रीय परिसंवाद.. राष्ट्रवाद क्या और क्यों.?
साथ में है..भारत अध्ययन केंद्र बीएचयू के चेयर प्रोफेसर राकेश उपाध्याय, लोकसंस्कृति के प्राख्यात आध्येता डा. चंद्रिका चंद्र, वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल...!

Saturday, January 25, 2020

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

 





गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय-रीवा परिसर

Saturday, January 18, 2020

राष्ट्रीय परिसंवाद


राष्ट्रवाद का मूल संस्कृति है। राष्ट्रवाद का आधार हमारी युगों पुरानी संस्कृति है यह प्राचीन अवधारणा है। भारत की संस्कृति भारत की धरती की उपज है। उससे राष्ट्र जीवन प्रेरित हुआ है। भरतीय संस्कृती की नींव गंगा, गीता, गायत्री, गौ, तुलसी पर खड़ी है। उसकी एकता, एकात्मता, विशालता और समन्वय इस मिट्टी की खुशबू है।
आइये इसे समझने का प्रयास करे।

Friday, January 10, 2020

अटल संवाद






अटल संवाद
महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी-मोतिहारी- बिहार

Saturday, January 4, 2020

राष्ट्रवाद और मीडिया


मित्रवर डॉ. सौरभ मालवीय के संपादन में आ रही महत्वपूर्ण किताब 'राष्ट्रवाद और मीडिया' का स्वागत। उम्मीद है किताब पाठकों का प्यार पाएगी। श्री लोकेंद्र सिंह इस पुस्तक के सह संपादक हैं। 
प्रो. संजय द्विवेदी 

अंधेरे पर प्रकाश की जीत का पर्व है दीपावली

डॊ. सौरभ मालवीय असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अर्थात् असत्य से सत्य की...