Sunday, October 11, 2026

पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण






लखनऊ। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रबोध के विचारों को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ के लेखक डॉ. सौरभ मालवीय हैं। यह पुस्तक आत्मचिंतन से राष्ट्रचिंतन की ओर अग्रसर होने तथा व्यक्ति के भीतर राष्ट्रीय चेतना का विकास करने के विचार को प्रमुखता देती है।

पुस्तक का शीर्षक ‘आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ इस विचार को अभिव्यक्त करता है कि राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध की शुरुआत व्यक्ति के स्वयं के बोध, सांस्कृतिक जड़ों की पहचान और सामाजिक उत्तरदायित्व से होती है। भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय दृष्टिकोण के संदर्भ में यह विषय समकालीन विमर्श के लिए महत्वपूर्ण है।

लेखक डॉ. सौरभ मालवीय लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। पत्रकारिता, लेखन और वैचारिक विमर्श के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. मालवीय की यह पुस्तक भारत की सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय अस्मिता और समाज के प्रति नागरिकों के दायित्वों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती है।

‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का मूल भाव व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है। यह कृति आत्मचेतना, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने की वैचारिक पहल के रूप में प्रस्तुत है।

इस पुस्तक का प्रकाशन - शिल्पायन पब्लिशर्स नयी दिल्ली ने लिया हैं.

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पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण

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