बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर का बयान किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक संत के भाव, आस्था और सामाजिक सरोकारों के रूप में समझा जाना चाहिए। संतों की वाणी में समाज के प्रति चिंता और अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं को व्यक्त करने का भाव होता है।
इसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उसके मूल भाव और संदर्भ को समझना चाहिए। किसी बयान के एक अंश को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।




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