काशी, 25 अक्टूबर। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूटीसीई) एवं अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परम्परा की पुनर्प्रतिष्ठा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का समापन हुआ। 24 एवं 25 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से आए 70 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। सात सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयामों, उसकी समकालीन प्रासंगिकता तथा शिक्षा व्यवस्था में उसके समुचित समावेश को लेकर व्यापक विचार-विमर्श एवं मंथन किया गया।
कार्यशाला में गोविन्द चरण महंत, अवनीश भटनागर, रविन्द्र कान्हेरे, डी. रामकृष्ण, डॉ. प्रदीप जायसवाल, हेमचंद्र, पवन तिवारी तथा डॉ. सौरभ मालवीय सहित विभिन्न विद्वानों एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत को समकालीन संदर्भों में पुनर्स्थापित करना तथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को देश की सांस्कृतिक चेतना, जीवन-दृष्टि, दर्शन और ज्ञान-संपदा से जोड़ना रहा। विभिन्न सत्रों में भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की आवश्यकता पर विचार किया गया।
दो दिवसीय कार्यशाला ने भारतीय ज्ञान परम्परा को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करने तथा भारतीय दृष्टि पर आधारित ज्ञान-विमर्श को व्यापक बनाने की दिशा में सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।












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