Sunday, October 11, 2026

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लोकतंत्र में विपक्ष को धरना-प्रदर्शन करने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह विरोध सदन, संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति विश्वास बनाए रखते हुए होना चाहिए।

सड़क पर दबाव बनाकर राजनीति करने के बजाय सदन में तथ्यों, तर्कों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखना अधिक प्रभावी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। विरोध के ऐसे तरीकों से बचना चाहिए, जिनसे आमजन का जनजीवन प्रभावित हो, यातायात बाधित हो और नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े।

लोकतंत्र में असहमति का सम्मान आवश्यक है, लेकिन जनहित और जनसुविधा की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

विरोध का उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए।

सदन में संवाद, संविधान में विश्वास और जनहित को सर्वोपरि रखना ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।

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