लखनऊ। शिक्षा के साथ संस्कार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्या भारती निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। इसी क्रम में आज सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-क्यू, अलीगंज, लखनऊ में भाऊराव देवरस कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने किया।
विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने, उनकी प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें विभिन्न कौशलों में दक्ष बनाने के उद्देश्य से विद्या भारती ने अपने विद्यालयों में कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करने का संकल्प लिया है। इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय, संभाग निरीक्षक, कोषाध्यक्ष श्री के. आर. कनौजिया तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार सिंह ने फीता काटकर केंद्र का उद्घाटन किया। इसके उपरांत मां सरस्वती एवं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर डॉ. मालवीय ने विद्यालय की एआई लैब का भी निरीक्षण किया और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा के प्रयासों का अवलोकन किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने ध्यान, योग और प्रार्थना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और वंदना हमारी भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों से जुड़ने का माध्यम हैं। विद्यार्थियों को अपनी भारतीय पहचान, संस्कृति और ज्ञान परंपरा पर गर्व करना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, कौशल और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कारों का समन्वय विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएगा। कौशल विकास केंद्र जैसी पहल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार सिंह ने अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सदस्य एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
विद्या भारती का यह प्रयास शिक्षा, संस्कार और कौशल के समन्वय से आत्मनिर्भर, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।













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