दो दिवसीय 24वें प्रांतीय संस्कृति महोत्सव एवं गणित-विज्ञान मेले का भव्य समापन, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता हुए सम्मानित
तिर्वा (कन्नौज)। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिर्वा एवं श्रीमती राम दुलारी गहोई सरस्वती शिशु मंदिर तिर्वा में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 24वें प्रांतीय संस्कृति महोत्सव एवं गणित-विज्ञान मेले का भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष तथा विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज, तिर्वा के प्राचार्य डॉ. पुष्पेंद्र चहर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विद्या भारती कानपुर प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री रजनीश पाठक, प्रदेश निरीक्षक श्री अयोध्या प्रसाद मिश्र, प्रांतीय विज्ञान संयोजक श्री ज्ञानेंद्र जी, सह संयोजक श्री राजीव जी, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधक श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्त तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिर्वा के प्रबंधक श्री त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय के प्रबंधक श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्त, श्री त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी तथा प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार मिश्रा एवं श्री आशीष कुमार दीक्षित ने अतिथियों का अंगवस्त्र एवं मां अन्नपूर्णा का चित्र भेंटकर स्वागत एवं सम्मान किया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि संस्कार से व्यक्ति, व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है। यही विद्या भारती की शिक्षा पद्धति का मूल उद्देश्य और विशिष्ट पहचान है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान और कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, संवेदना, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि 'देश हमें देता है सबकुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें' का भाव विद्या भारती के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का आधार बनता है। मानवता के कष्टों को दूर करने तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए चिंतन करना ही हमारी शिक्षा की विशिष्टता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ना समय की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप सभी भविष्य के वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता हैं। इस विज्ञान मेले में आपकी सहभागिता, सफलता और अनुभव आपकी प्रतिभा को नई दिशा देंगे। यह मंच आपको नए प्रयोग करने, प्रश्न पूछने, जिज्ञासु बनने तथा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
डॉ. मालवीय ने कहा कि विज्ञान मेला एवं वैदिक गणित केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, श्रुति परंपरा और ऋषि परंपरा के पुनरुत्थान के सशक्त माध्यम हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कारों के साथ अंतर्निहित वैज्ञानिक प्रतिभा, तार्किक क्षमता, अनुसंधान कौशल और नवाचार की भावना विकसित करना है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वंदना सत्र, भोजन मंत्र और चित्र प्रदर्शनी जैसे माध्यम विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव तथा अपनी ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान का भाव जागृत करते हैं। भारतीय परंपरा में ज्ञान, विज्ञान और जीवन मूल्यों का अद्भुत समन्वय रहा है। आवश्यकता है कि हम इस विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाएं।
विज्ञान मेले में शिशु, बाल, किशोर एवं तरुण वर्ग के विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्श, प्रश्न मंच, पत्र वाचन, विज्ञान वार्ता एवं विज्ञान प्रयोग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, तार्किक क्षमता और सृजनात्मक सोच का परिचय दिया। विभिन्न विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भैया-बहिनों को अतिथियों द्वारा मेडल एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में संभाग निरीक्षक श्री शिवकरन जी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, मार्गदर्शक आचार्यों एवं आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
दो दिवसीय इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए विचारों को अभिव्यक्त करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रेरणादायी अवसर प्रदान किया।









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