Wednesday, December 24, 2025

पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण के लिए समझौता


भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम् मिशन तथा उत्तर प्रदेश सरकार संस्कृति विभाग के मध्य देश की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण के लिए 23 दिसम्बर 2025 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सांस्कृतिक दृष्टि के अनुरूप किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य एवं देश की प्राचीन पांडुलिपियों तथा ज्ञान परम्परा का संरक्षण कर उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रखना है। उत्तर प्रदेश वेदों, उपनिषदों, संतों और महापुरुषों की भूमि है, जहां मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों एवं निजी संग्रहों में बड़ी संख्या में बहुमूल्य पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इस समझौते के अंतर्गत इन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, सूचीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण, अनुवाद एवं शोध किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि यह पहल सरकार की ‘विरासत से विकास’ की नीति के अनुरूप है, जिससे शिक्षा, शोध, संस्कृति एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल भंडार से जोड़े जाने से वे देश-विदेश के विद्वानों एवं आम जनमानस के लिए सुलभ होंगी। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शक है। परम्परागत ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर हम इसे सुरक्षित कर रहे हैं। 

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि इस समझौता ज्ञापन से राज्य में पांडुलिपि संरक्षण से जुड़े कार्यों को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक ढांचा प्राप्त होगा। इस समझौते के माध्यम से पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण का कार्य  पारदर्शी और सुनियोजित तरीके से किया जाएगा। इससे विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं छात्रों को राज्य की समृद्ध ज्ञान परम्परा से जुड़ने का अवसर मिलेगा तथा उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस समझौते के क्रियान्वयन हेतु संस्कृति विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
लखनऊ: 24 दिसम्बर 2025

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