डॉ. मालवीय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी जॉयफुल लर्निंग (आनंदमय शिक्षण) पर विशेष बल दिया गया है। खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया बच्चों में सृजनात्मकता, आत्मविश्वास, सामाजिकता तथा संस्कारों का विकास करती है। बाल्यावस्था में प्राप्त संस्कार और शिक्षा ही उनके भावी जीवन-निर्माण की मजबूत आधारशिला बनते हैं।
उन्होंने कहा कि शिशु वाटिका शिक्षा का उद्देश्य केवल अक्षरज्ञान देना नहीं, बल्कि बालक के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास को सुनिश्चित करना है। भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से युक्त शिक्षा ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकती है।
इस अवसर पर प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी, प्रधानाचार्य अनुज सिंह सहित अनेक शिक्षाविद्, शिक्षिका एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
21 जून 2026






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