Thursday, June 18, 2015

लीलावती


ये वीरेंद्र जी है पिछले 25 साल से इस नदी लीलावती पे नाव से लोगों को इस पार और उस पार पहुंचाने के कार्य में लगे हैं। इनके गले मे एक बटुवा है। जब मैं छोटा था तो किराया 50 पैसा हुआ करता था। इन दिनों 5 रुपया तक पहुंचा है। इस नदी के तट पर मेरा गाँव है।

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