जैसे मैंने उसको कहा था कि तुम न आओगे तो मैं प्रवक्ता का समारोह मन मजबूत कर कैसे कर पाऊंगा।
वैसे ही, इस बार वह बोला कि संजीव, तुमको तो आना ही पड़ेगा, संयोजन का भार है मेरे ऊपर, आकर बताओ, कैसी योजना है मेरी।
मैं बीमार था। बिस्तर पर लेटे-लेटे मालवीय से बात हो रही थी।
टिकट कन्फर्म नहीं था। याराना ऐसा है कि जैसे-तैसे ट्रेन में सवार होना पड़ा। भोपाल एक्सप्रेस में। ट्रेन में सहर, प्रथक, प्रकाश, पश्यंतीजी और अमरनाथजी साथ थे। खूब बहसें होती रहीं। सुबह ही हबीबगंज पहुंच गया।
डॉ. मालवीय और आ. संजय द्विवेदीजी स्टेशन पर उपस्थित थे। दो लंबी गाडि़यों में सवार होकर हमें सीधे नर्मदा घाटी प्राधिकरण के गेस्ट हाऊस में ले जाया गया। सुंदर इंतजाम। सादा मगर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था। नियंत्रक की तरह मालवीय बताते, आपलोग नहा धोकर तैयार हो जाइए। ठीक 10 बजे झील घूमने जाएंगे। आपलोग 12.20 पर यहां एकत्र होंगे। 1 भोजनालय में मिलेंगे। 2 बजे कार्यक्रम के लिए रवाना होंगे।
सुबह से हमलोग के साथ था मालवीय। सहर ने पूछा, ''आप सुबह से हमारे साथ हैं तो शाम में कार्यक्रम कैसे संपन्न होगा।'' ''कार्यक्रम के दिन कार्य नहीं करना, यदि कार्यक्रम के दिन भी कार्य करना पड़े तो समझो कार्यक्रम की योजना में त्रुटि है'', मालवीय ने झट से जवाब दिया।
कार्यक्रम दो सत्रों में था। सब योजनापूर्वक चला। एक का विषय 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सोशल मीडिया' था तो दूसरे का 'युवा, राजनीति और सोशल मीडिया'। पांचजन्य के संपादक हितेशजी, प्राध्यापक श्री संजय द्विवेदी, युवा भाजपा नेता श्री मनोरंजन मिश्रजी सहित दर्जन भर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मुझे दूसरे सत्र में बोलना था। मैंने कहा कि आजकल साजिशपूर्वक युवकों को अराजनीतिक बनाने की कोशिशें हो रही हैं, क्योंकि युवक परिवर्तन के संवाहक होते हैं। कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। मैंने यह भी कहा कि वैश्वीकरण के चलते युवाओं के सामने उपभोक्तवाद और बेरोजगारी की चुनौतियां बढ़ रही है, युवाओं को अपनी लड़ाई लड़नी होगी। सोशल मीडिया को लेकर यह विचार रखा कि यह राजनीतिक परिवर्तन और लोकतांत्रीकरण की प्रक्रिया को तेज कर रहा है।
सभागार खचाखच भरा था। कोई कार्यकर्ता तस्वीर उतार रहा था तो कोई प्रेस नोट लिख रहा था। कोई नास्ते के प्रबंध में जुटा था तो कोई आतिथ्य सत्कार।
फिर वापसी के समय मालवीय हमें हबीबगंज विदा करने भी पहुंचा। बहुत भावुकता का क्षण था वह।
सच में, 'पूर्व योजना-पूर्ण योजना' का अद्भुत नजारा दिखाया मालवीय तुमने हमें।
-संजीव सिन्हा





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