श्रेष्ठ शिक्षा के साथ संस्कार एवं राष्ट्रभावना आवश्यक
डॉ. सौरभ मालवीय जी ने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ, सुयोग्य, संस्कारवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। शिक्षा के साथ धर्म, संस्कृति, परंपरा एवं जीवन-मूल्यों का समन्वय ही विद्यार्थी के व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करता है।
उन्होंने दैनिक वंदना के महत्व को बताते हुए कहा कि नियमित वंदना विद्यार्थियों में एकाग्रता, सकारात्मक चिंतन, आत्मअनुशासन एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास करती है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए दैनिक जीवन में इसके व्यावहारिक उपाय अपनाने तथा विभिन्न समस्याओं का सहज एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से समाधान करने के लिए प्रेरित किया।
परीक्षा को अवसर के रूप में देखें विद्यार्थी
क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री दिव्यकांत जी ने बोर्ड परीक्षार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षा केवल अंकों का मूल्यांकन नहीं, बल्कि विद्यार्थी के जीवन की भावी दिशा और दशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध अध्ययन करने, समय का सदुपयोग करने तथा परीक्षा की तैयारी में एकाग्रता और निरंतरता बनाए रखने के व्यावहारिक सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि परीक्षा को तनाव के रूप में न लेकर अपनी प्रतिभा, ज्ञान और परिश्रम को अभिव्यक्त करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
अतिथियों का हुआ भव्य अभिनंदन
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने आगंतुक अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने आगंतुक अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य श्री राम केवल शर्मा ने सभी अतिथियों, आचार्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में अवध प्रांत के कोषाध्यक्ष श्री आर. के. कनौजिया, शिशु शिक्षा समिति के प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह सहित विद्यालय परिवार के समस्त आचार्य-आचार्या, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
शिक्षा में ज्ञान, संस्कार में शक्ति और राष्ट्रभावना में व्यक्तित्व निर्माण—इन्हीं मूल्यों के साथ विद्या भारती भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार कर रही है।







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