Saturday, September 19, 2026

विश्वकर्मा सृष्टि के, तो मोदी नए भारत के रचयिता


-डॉ. सौरभ मालवीय 
इस वर्ष भगवान विश्वकर्मा एवं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस एक ही तिथि अर्थात 17 सितंबर को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी उपलक्ष्य में 17 सितंबर 2026 को जनपद गोरखपुर के श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में श्री श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव का आयोजन किया गया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए कहा कि भारत की परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के शिल्पी और शिल्प के देवता के रूप में पूजित किया जाता है। आज का दिन प्रत्येक उस हस्तशिल्पी और कारीगर के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपनी विशिष्ट कला, कारीगरी और हस्तशिल्प के माध्यम से समाज और देश के निर्माण में योगदान दे रहा है। सभी आर्टिजन्स आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए उनका पूजन करते हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी एवं दीर्घ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। एक ओर सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती है, वहीं दूसरी ओर नए भारत के शिल्पी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी का पावन जन्मदिन है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 140 करोड़ भारतवासी नए भारत और विकसित भारत की उनकी संकल्पना को साकार होते हुए देखेंगे। इस संकल्प को साकार करने में देश की कार्यकारी शक्ति, हस्तशिल्पी, युवा शक्ति और आधी आबादी की नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें प्रत्येक वर्ष श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आने का अवसर प्राप्त होता है। मंदिर समिति के सभी पदाधिकारियों द्वारा दशकों पूर्व जिस भावना के साथ मंदिर की व्यवस्था और इस अभियान को आगे बढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया गया था, प्रत्येक कारीगर और हस्तशिल्पी बिना किसी भेदभाव के उस अभियान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि नए भारत में प्रधानमंत्री जी ने देश के हस्तशिल्पियों और कारीगरों को ‘पीएम विश्वकर्मा’ के रूप में एक सशक्त मंच उपलब्ध कराया है। उनका स्पष्ट मानना है कि जो देश अपने हस्तशिल्पियों, कारीगरों और आर्टिजन्स का सम्मान करता है, वही आगे बढ़ता है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से राजमिस्त्री, लकड़ी का कार्य करने वाले बढ़ई, हलवाई, सुनार तथा समाज की विभिन्न पारंपरिक कारीगरी से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण, टूलकिट एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कारीगरों को प्रशिक्षण की सुविधा देने के साथ ही बैंकों के माध्यम से सस्ता ऋण उपलब्ध कराने का कार्य भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक समाज की स्वावलंबन की आधार रही इन पारंपरिक कारीगरियों और कारीगरों की उपेक्षा हुई, लेकिन पहली बार डबल इंजन सरकार ने इनके बारे में गंभीरता से सोचा, उनकी चिंता की और उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ाने का कार्य किया। सरकार द्वारा कारीगरों और हस्तशिल्पियों को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में सरकार बनने के पश्चात इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य प्रारंभ किया गया। आज प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक लोग अलग-अलग प्रकार की कारीगरी एवं हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और स्वावलंबन का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यह भगवान विश्वकर्मा की कृपा और प्रदेश के कारीगरों के परिश्रम का परिणाम है। आधुनिक भारत में भगवान विश्वकर्मा की इस शिल्प परंपरा और कारीगरी को आधुनिक तकनीक, नए बाजार, बेहतर पैकेज और डिजाइन के साथ जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। 

विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने भगवान विश्वकर्मा जयंती पर लखनऊ में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत आयोजित ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ का शुभारंभ किया तथा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक और टूलकिट वितरित किए। कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। कार्यक्रम में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने अपनी अद्भुत शिल्पकला के माध्यम से समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भगवान शिव के त्रिशूल, इंद्र के वज्र और भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा हैं। भगवान श्रीराम की लंका विजय के लिए समुद्र पर सेतु बंध के निर्माण में भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र नल-नील का योगदान था, जिन्होंने समुद्र पर सेतु निर्माण में अपनी अद्भुत शिल्पकला का परिचय दिया। यहां 100 योजन तक समुद्र में पुल का निर्माण किया गया था। आज देश और प्रदेश के प्रत्येक उद्योग, व्यवसाय एवं कारीगरी से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए विश्वकर्मा पूजन करते हैं। हमारे कारीगर एवं हस्तशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की उसी महान शिल्प परंपरा के प्रतिनिधि हैं। इनकी कला, परिश्रम और कौशल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होता है।

उन्होंने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों में प्रदेश में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि कारीगर को प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहयोग, आधुनिक तकनीक, टूलकिट, बाजार और बैंत्र्कग व्यवस्था से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। भारत दुनिया में विकसित तब था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। पिछली सरकारों के समय कारीगरों को बाजार, बैंकिंग व्यवस्था, डिजाइन और आधुनिक तकनीक की सुविधाओं से दूर कर दिया गया। परिणामस्वरूप जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह धीरे-धीरे श्रमिक बनने और पलायन के लिए मजबूर हुआ। वर्ष 2017 में प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रदेश के कारीगरों और हस्तशिल्पियों की स्थिति को करीब से देखा। अनेक कारीगर हताश और निराश थे तथा रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे थे। सरकार ने कारीगरों को सम्मान, सुरक्षा, प्रशिक्षण, पूँजी और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना लागू की गई। इसके बाद वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। परंपरागत 
कारीगर प्रतिदिन काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। ऐसे में केवल प्रशिक्षण देने से उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए सरकार ने प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और इसके बाद बैंक ऋण से जोड़ने की व्यवस्था की।

उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 10 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रशिक्षण अवधि में पांच हजार रुपये का मानदेय तथा प्रशिक्षण के उपरांत 15 हजार रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशिक्षण में कारीगरों की पारंपरिक कला को संरक्षित रखते हुए बाजार और वर्तमान मांग के अनुरूप आधुनिक तकनीक एवं कौशल से भी जोड़ा जा रहा है। उन्होंने योजना के प्रारंभिक चरण में 11 पारंपरिक ट्रेडों को शामिल किया गया था। इनमें बढ़ई, दज , कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी सहित अन्य पारंपरिक कार्य शामिल हैं। सरकार ने इसमें पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा/लाई-भुजा तथा मछुआरा आदि के कार्यों को शामिल किया गया है। जो लोग लंबे समय से दूसरों के लिए रोजगार और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते रहे, सरकार अब उनके साथ खड़ी है और उन्हें आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने कहा कि आज का युवा अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार स्वरोजगार का क्षेत्र चुनना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं एवं कारीगरों को आधुनिक ट्रेडों से जोड़ा गया है। इनमें मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम रिपेयर, विद्युत उपकरणों की मरम्मत, प्लम्बरिंग, कम्प्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर आदि शामिल हैं। कुल 25 ट्रेडों के माध्यम से प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य यही है कि प्रदेश का कारीगर और हस्तशिल्पी केवल श्रमिक बनकर न रहे, बल्कि स्वयं उद्यमी बने और दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम हो। सरकार कारीगरों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर उनके उद्यम को विस्तार देने का कार्य कर रही है। कारीगरों के लिए ऋण की सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। साथ ही, 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की सुविधा भी उपलब्ध है। सरकार का उद्देश्य है कि कारीगर को ऋण प्राप्त करने के लिए अपनी सम्पत्ति या अन्य प्रकार की गारंटी देने की आवश्यकता न पड़े। सरकार उसके साथ खड़ी है और उसे आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश, देश के बड़े राज्यों में होने के बावजूद आर्थिक दृष्टि से पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था। प्रदेश के पास सबसे उर्वर भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद अपेक्षित आर्थिक विकास नहीं हो पा रहा था। कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान एवं सहयोग देने तथा उनके लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है। पहले जिस प्रदेश को बीमारू कहा जाता था, आज देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की समस्या संसाधनों की कमी नहीं थी, बल्कि पिछली व्यवस्था में कारीगरों और उद्यमियों के प्रति सकारात्मक सोच का अभाव था। वर्तमान सरकार ने इस मानसिकता को बदलते हुए कारीगरों को सम्मान, अवसर और बाजार उपलब्ध कराने का काम किया है। 

उन्होंने कहा कि 25 से 29 सितंबर 2026 तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बायर्स के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक एग्जिबिटर्स भाग लेंगे तथा 650 से अधिक विदेशी खरीदार भी इसमें शामिल होंगे। इससे प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध होगा और कारीगरों एवं उद्यमियों के उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलने की संभावना बनेगी। उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि ट्रेड शो में लगभग 12 हजार करोड़ रुपये से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है। इस प्रकार प्राप्त होने वाला व्यापार सीधे प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देगा। आगामी 25 से 29 सितंबर तक प्रत्येक जनपद में टूलकिट वितरण एवं ऋण उपलब्ध कराने का अभियान चलाया जाएगा। कारीगरों को उनकी आवश्यकता के अनुसार बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसी को आठ लाख रुपये, किसी को दो लाख रुपये और किसी को एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। 

सरकार का प्रयास है कि कारीगर को ऋण के लिए गारंटी न देनी पड़े और ब्याज का भार भी उस पर न आए। बैंक कारीगरों को ऋण उपलब्ध कराएं और सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करे। प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां स्थापित हैं। इनमें लगभग तीन करोड़ 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त एवं गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भगवान विश्वकर्मा के प्रति सरकार द्वारा कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक माध्यम हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा को आधुनिक तकनीक, डिजाइन, वित्त और बाजार से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की शिल्प परंपरा से प्रेरणा लेते हुए प्रदेश के प्रत्येक कारीगर, हस्तशिल्पी और उद्यमी को सम्मान, प्रशिक्षण, तकनीक, पूंजी और बाजार उपलब्ध कराने का अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों से आह्वान किया कि वे अपनी परंपरागत कला और कौशल को आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनें और प्रदेश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कारीगरों और हस्तशिल्पियों की मेहनत, कौशल और उद्यमिता के बल पर उत्तर प्रदेश निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

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