सरकार समाज के कमजोर वर्गों, जनजातियों और वन में रहकर जीवन यापन करने वाले खनन गतिविधियों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए सजग है। देश के खनन क्षेत्रों के लोगों को मूलमूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने 17 सितम्बर, 2015 प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के शुभारंभ की घोषणा की। यह एक नया कार्यक्रम है, जिसमें खनन से संबंधित परिचालनों से प्रभावित लोगों तथा क्षेत्रों का कल्याण किया जाएगा। इसमें डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) द्वारा उपलब्ध कराई गई निधि का उपयोग किया जाएगा।
प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना का उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकास तथा कल्याणकारी परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लागू करना है। ये राज्य और केंद्र सरकार की वर्तमान में चल रही योजनाओं एवं परियोजनाओं की सम्पूरक भी होगी। खनन जिलों में लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक- अर्थव्यवस्था, पर्यावरण पर खनन के दौरान और बाद में पड़े प्रतिकूल प्रभाव को कम करना अथवा दूर करना शामिल हैं। खनन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों के लिए दीर्घावधि टिकाऊ जीवन यापन सुनिश्चित करना भी इसमें सम्मिलित है। जीवन की गुणवत्ता में ठोस सुधार सुनिश्चित करते हुए जीवन के सभी पहलुओं को शामिल करने पर ध्यान रखा गया है। पीने के पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास, महिला और बाल विकास, वरिष्ठ तथा विकलांगजनों का कल्याण, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र इस निधि का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करेंगे। हितकर जीवन यापन वातावरण बनाने के लिए निधि की शेष राशि सड़क, ब्रिज, रेलवे, जलमार्ग परियोजनाओं, सिंचाई और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बनाने पर खर्च की जाएगी।
केंद्र सरकार ने एमएमडीआर अधिनियम-1957 की धारा 20-ए के अंतर्गत प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना को लागू करने के लिए दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकारों को निदेश जारी किए हैं और राज्यों को यह निर्देश दिया गया है कि डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन के लिए बनाए गए नियमों में इन्हें शामिल कर लें। डीएमएफ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कार्य प्रणाली में पूरी पारदर्शिता बरतें और उनके द्वारा चलाई विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं के बारे में समय-समय पर रिपोर्ट दें।
खनन और इस्पात मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना को एक क्रांतिकारी और अनोखी योजना बताते हुए कहा है कि इससे खनन क्षेत्र में रहने वाले प्रभावित लोगों का जीवन रूपांतरित होगा। उनका कहना है कि देश में खनन क्षेत्र का नियोजित विकास समय की मांग है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्तमान सरकार नियोजित तरीके से काम कर रही है और पिछले एक वर्ष में खऩन क्षेत्र में बड़े परिवर्तन किए गए हैं। भारत में खनन क्षेत्र की सांख्यिकी पर गौर करें, तो हम यह महसूस करेंगे कि इस क्षेत्र में अपार संभावना हैं। रोजगार सृजन तथा सकल घरेलू उत्पाद में योगदान की दृष्टि से खनन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। खदानों तथा वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय तथा गरीब लोगों की समस्याओं का स्थाई समाधान ढूंढने में प्रधानमंत्री की खनिज क्षेत्र कल्याण योजना तथा जिला खनिज फाउंडेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उनके अनुसार खनन क्षेत्र पुनर्जीवित किया गया है और मई 2014 के बाद से उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र विकास की राह पर चल पड़ा है। इससे खनिज आधारित उद्योगों को सहायता मिलेगी और मैन्यूफैक्चरिंग तथा मेक इन इंडिया को प्रोत्सान मिलेगा। सितम्बर, 2014 में लौह अयस्क उत्पादन 8 मिलियन था, जो 2015 में बढ़कर 12.5 मिलियन टन हो गया। यह सामान्य सुधार नहीं है। हमारे खनन क्षेत्र की एक बड़ी कमी यह है कि हम छोटे स्तर पर खुदाई करते हैं। हमारी तरह का भूगर्भीय प्रोफाइल वाले आस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय खुदाई में 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त की है और भारत में यह काम 10 प्रतिशत हुआ है। इस कमी को दूर करने के लिए हमने राष्ट्रीय खनिज खुदाई ट्रस्ट स्थापित किया है। जीएसआई तथा एमईसीएल के अतिरिक्त अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को भी अधिसूचित करके खुदाई करने के लिए अधिकृत किया गया है। किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सभी हितधारकों को एक साथ काम करना आवश्यक है। यह खन्न क्षेत्र के लिए भी सच है। सतत और समावेशी विकास के समान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, नियोजनकर्ताओं, नीतिनिर्धारकों, खनन उद्योग, टेक्नॉलाजी सप्लाईकर्ता, सेवा प्रदाता तथा समुदायों को एक साथ काम करना होगा।
सरकार की इस योजना से खनन क्षेत्र के निवासियों को जहां मूलभूत सुविधाएं, प्राप्त होंगी, वहीं वे मुख्यधारा में भी आएंगे।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)


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