Tuesday, April 28, 2026

महादेव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रभु श्रीराम के इष्ट देवावाधिदेव महादेव शिव शम्भू थे। लंका में जाने से पूर्व प्रभु श्रीराम ने रामेश्वरम् में भगवान शिव की अराधना की थी। भगवान शिव माता पार्वती को प्रभु श्रीराम की कथा सुनाते हैं और प्रभु श्रीराम अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए भगवान शिव की अराधना कर रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आराध्य भगवान शिव के इस भव्य मंदिर में आज सनातन धर्म का पताका फहर रहा है। यह भारत के गौरव को आगे बढ़ाने वाला पताका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  29 अप्रैल, 2026 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या परिसर स्थित श्री शम्भू महादेव मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण करने के उपरांत आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इससे पूर्व, उन्होंने ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, श्री हनुमानगढ़ी मंदिर तथा श्री शम्भू महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। 

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान रहा है। दुनिया में कहीं भी इस प्रकार का आयोजन नहीं हुआ होगा। दुनिया के प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी के मन में एक ही भाव होता था कि हमारे प्रभू श्रीराम का भव्य मंदिर बने। वह शान हमें प्राप्त हो और उस कार्यक्रम को वह अपनी आंखों से देख सकें। आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व, प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को अपवित्र करके एक विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया था, लेकिन बिना किसी रोक-टोक, दबाव तथा बिना भय के भारत के सनातन धर्मावलम्बी लगातार दृढ़ संकल्पित होकर इस आंदोलन से जुड़े रहे। स्वर्गीय अशोक सिंघल जी उस बिखरी हुई ताकत को एक करने के लिए आगे आए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1983 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब इस आंदोलन को अपने हाथों में लिया, तो आंदोलन अपने चरम की ओर बढ़ता गया। जाति, क्षेत्र व भाषा की दीवारें टूट गईं। अरूणाचल प्रदेश, उड़ीसा, नागालैंड, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ सहित देश के किसी भी कोने में जाते हैं, तो हम लोगों को देखते ही सबसे पहले वहां के लोगों के मुख से ‘जय श्रीराम’ शब्द निकलता है। इसी माह पश्चिम बंगाल के चुनाव में वहां के दूरदराज के गांवों में भ्रमण के दौरान वहां के लोग भी मुझे देखते ही ‘जय श्रीराम’ का संबोधन करते थे।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम देश को जोड़ने के माध्यम हैं। त्रेता युग से ही प्रभु श्रीराम उत्तर से दक्षिण, भगवान श्रीकृष्ण पूरब से पश्चिम तथा भगवान शिवशंकर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के माध्यम से पूरे भारत को जोड़ रहे हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया ने भी कहा था कि जब तक प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण और शिव शंकर हैं, तब तक भारत का र्कोइ  बाल-बांका नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि आज हम सभी इस पूरे पड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहे हैं। हम सभी गुलामी का ढांचा हटने के भी साक्षी है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने व्यापक हित, देशहित तथा भारत के सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों एवं प्रमाणों के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर सर्वसम्मत फैसला दिया था। इस फैसले का स्वागत देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया ने किया था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों से 5 अगस्त 2020 को प्रभु श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन तथा 22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था। इसके बाद श्रीराम दरबार की मूर्ति-प्रतिष्ठा, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण तथा 19 मार्च 2026 को श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्य संपन्न हुआ था। यह भारतीय इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाने वाली तिथियां हैं। हम सभी इन तिथियों के साक्षी हैं।

उन्होंने कहा कि जब हम प्रभु की शरण में भक्त व याचक बन कर जाते हैं, तो प्रभु हमारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता भी प्राप्त होती है। इतने बड़े आंदोलन के पश्चात अंततः विजय प्राप्त हुई। ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ अर्थात् जहां धर्म है, वहीं विजय है। जहां अयोध्या तथा प्रभु श्रीराम होंगे, वहां विजय अवश्य होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं, डिगेंगे नहीं तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे, अयोध्या ने इसे पूरी दुनिया को बताया है। आज अयोध्या में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। यहां रेलवे तथा एयर कनेक्टिविटी की बेहतरीन सुविधा है। अयोध्या में चारों तरफ 4-लेन सड़कें बन चुकी हैं। यह नई अयोध्या त्रेता युग की याद दिला रही है।

उन्होंने कहा कि सभी सनातन धर्मावलम्बियों के एक साथ तथा एक स्वर में आवाज उठाने के परिणामस्वरूप ही प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है। हम बंटे थे, तभी विधर्मी उसका लाभ उठा पाये थे। आज हम एकजुट होकर उनका मुकाबला कर रहे हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित है। अपनी विरासत को गौरव के साथ हम आने वाली पीढ़ी को बताने की स्थिति में हैं कि हमारे सामने प्रभु श्रीराम मंदिर पर फैसला,  प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि-पूजन, प्रभु श्रीरामलला व श्रीराम दरबार की प्राण-प्रतिष्ठा, मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा का आरोहण तथा श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था। हम सभी ने इन सभी ऐतिहासिक क्षणों तथा रामनवमी के दिन प्रभु श्रीरामलला को सूर्य तिलक लगते हुए अपनी आखों से देखा है। यह आंदोलन दुनिया के लिए एक अनूठा उदाहरण है। दुनिया इसका अनुसरण करने के लिए लालायित है।

उन्होंने कहा कि आज प्रभु श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भगवान शिव मंदिर में भगवा ध्वज का आहोरण भव्यता के साथ संपन्न हुआ है। माता पार्वती को प्रभु श्रीराम की कथा भगवान शिव ही सुना रहे हैं। काक भुशुंडी उसका वाचन कर रहे हैं। कौन सी योनि है, जो राम कथा की पिपासी न हो। आज हम साक्षात प्रभु श्रीराम मंदिर में दर्शन कर रहे हैं। हम सभी को सनातन धर्म की एकता के माध्यम से भारत की एकता-अखंडता को बनाए रखने में अपना योगदान देना होगा। अपनी विरासत को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित होना होगा। अपने महापुरुषों को जातीयता के दायरे में बांटने वालों से सावधान रहना होगा। आज प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति कर रहा है। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर मजबूती से विश्वास कर आगे बढ़ेंगे, दुनिया की कोई ताकत उनका सामना नहीं कर सकेगी। नये भारत को इसी दिशा में आगे बढ़ाने के लिए हम सभी को संकल्पित होना होगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ न्यास क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय, अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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