Saturday, May 20, 2017
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय पत्रकारिता सेमिनार
देश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अस्मिता को जगाने के व्यापक एवं उच्चादर्श से जुड़ा है भारतीय पत्रकारिता।इसे समझने के लिए भारतीय मन का बोध होना जरुरी है, रहते भारत में है और सोचते पश्चिम की दृष्टि से ना ना अब वक्त के हिसाब से अपनी सोच बदलिए (लाल चश्मा) और भारत माता की जय घोष कीजिये। वन्दे मातरम
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सुखद भेंट
लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय जी से पहली बार मुलाकात हुई। उनका स्नेह, सहजता और सकारात्म...
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डॉ. सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान...
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डॉ. सौरभ मालवीय किसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संव...
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डॉ. सौरभ मालवीय मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं क...

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