फसल उगाने से लेकर उसे बेचने तक किसानों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। फसल काटने के बाद किसानों को चिंता होती है कि उन्हें उनकी फसल के सही दाम मिलेंगे भी या नहीं। ऐसे समाचार सुनने को मिलते रहते हैं कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए व्यापारी नहीं मिले। फसल न बिकने पर क्रोधित किसानों ने स्वयं अपनी फसल नष्ट कर दी या फिर उसे सड़क पर फेंक दिया, जो पशुओं का भोजन बन गई। अच्छी फसल के लिए लगातार पांचवीं बार ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ जीतने वाले मध्यप्रदेश के किसानों को भी फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। सब्जी, फलों, अनाज एवं दलहनों की अच्छी उपज होने के बाद भी उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिला। लागत से बहुत कम दाम मिलने के कारण किसानों ने विरोध प्रकट करते हुए प्याज, टमाटर, दूध एवं पपीते की फसल को सड़कों पर फेंक दिया। किसानों को दुख है कि अरहर, उड़द एवं मसूर के साथ-साथ गेहूं को बाजार में बेचने पर लागत से कम मूल्य मिला। उन्होंने विरोधस्वरूप राज्यव्यापी आंदोलन चलाया। मध्य प्रदेश के मंदसौर में 6 जून वर्ष 2017 को पुलिस की गोलीबारी में छह किसानों की मौत हो गई। इसके अतिरिक्त कर्ज एवं फसल खराब होने से परेशान 160 से अधिक किसानों की कथित आत्महत्या की खबरें भी छाई रहीं। जनवरी 2018 में आलू के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में किसानों ने उत्पाद का उचित दाम न मिलने पर सड़कों पर आलू फेंक दिया। कुछ समय पहले पंजाब के किसानों ने भी सड़कों पर आलू फेंक दिया था। उनका कहना था कि मंडी तक आलू ले जाने में जितनी लागत आ रही है, उन्हें उपज के उससे भी कम दाम मिल रहे हैं। ऐसे में बोरियां बचाने के लिए उन्होंने आलू फेंक दिया।
किसानों को इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम की परियोजना शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर की जयंती 14 अप्रैल, 2016 को राष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ‘ई-नाम’ की प्रायोगिक परियोजना का शुभारंभ किया। प्रारंभिक काल से ही आठ राज्यों की 21 मंडियां ‘ई-नाम’ से जुड़ गई हैं। पांच माह के भीतर 200 मंडियों को और मार्च, 2018 तक 585 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस पहल से पारदर्शिता आएगी, जिससे किसान काफी हद तक लाभान्वित होंगे। यह कृषि समुदाय के लिए एक बड़ा बदलाव है। कृषि क्षेत्र को समग्र रूप में देखना होगा और इसके बाद ही किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है, जो कृषि से संबंधित उपजो के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने के लिए मौजूदा कृषि उपज बाजार समिति मंडी का एक प्रसार है। ई-नाम पोर्टल सभी एपीएमसी से संबंधित सूचना और सेवाओं के लिए एक ही स्थान पर सेवा प्रदान करता है। इसमें अन्य सेवाओं के बीच उपज के आगमन और कीमतों, व्यापार प्रस्तावों को खरीदने और बेचने, व्यापार प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया के लिए प्रावधान शामिल हैं। जब कृषि उपज लेन देन मंडी के माध्यम से होना आरंभ होता है, तो ऑनलाइन बाजार से लेन-देन संबंधित व्यय और जानकारी असममिति कम होती है। कृषि बाजार को राज्यों द्वारा उनके कृषि-व्यवसाय विनिमय द्वारा संचालित किया जाता है। इसके अंतर्गत राज्य को विभिन्न बाजार क्षेत्रों में बांटा जाता है, जिसमें से प्रत्येक का संचालन अलग-अलग कृषि उपज बाजार समिति द्वारा किया जाता है। यह समिति शुल्क के साथ अपने व्यवसाय विनिमय को लागू करती है। बाजारों के इस विखंडन के कारण राज्य के भीतर, एक बाजार से दूसरे बाजार में कृषि उपजो के आवागमन तथा कृषि-उत्पाद के अलग-अलग तरह से निपटान में बाधा पहुंचाता है और मंडी शुल्कों के अलग-अलग स्तर किसानों के अनुरूप लाभ के बिना उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ती जाती है।
ई-नाम राज्य एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तर पर ऑनलाइन व्यापार मंच का निर्माण करके इन चुनौतियों को ध्यान दिलाता है। संपूर्ण एकीकृत बाजारों की प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए एकरूपता को प्रोत्साहित करता है। खरीददारों और विक्रेताओं के बीच की विषम जानकारी को हटाता है तथा वास्तविक मांग एवं आपूर्ति पर आधारित वास्तविक समय मूल्य की खोज को बढ़ावा देता है। नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है और अपनी उपज की गुणवत्ता वाले अनुरूप मूल्यों एवं ऑनलाइन भुगतान तथा बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद की उपलब्धता के माध्यम से किसान को राष्ट्रव्यापी बाजार की पहुंच प्राप्त करवाता है। साथ ही उपभोक्ता को अधिक उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध करवाता है।
विनियमित बाजार में पारदर्शी विक्रय सुविधा और मूल्य की खोज के लिए राष्ट्रीय ई-बाजार मंच प्रारंभ से ही है। अपनी राज्य कृषि विपणन बोर्ड/ कृषि उपज बाजार समिति द्वारा ई-व्यापार के विज्ञापन के लिए इच्छुक राज्य अपनी कृषि उपज बाजार समिति अधिनियम में तदनुसार उपयुक्त प्रावधानों को पूरा करते हैं। बाजार यार्ड में भौतिक उपस्थिति या दुकान / परिसर के कब्जे के किसी पूर्व शर्त के बिना राज्य के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों / खरीदारों और कमीशन एजेंटों लिबरल लाइसेंस उपलब्ध कराया जाएगा। व्यापारी का एक लाइसेंस राज्य भर के सभी बाजारों में मान्य रहेगा। इसके अंतर्गत कृषि उपज की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और खरीददारों द्वारा सूचित बोली सक्षम करने के लिए प्रत्येक बाजार में परख करने की क्रिया के लिए (गुणवत्ता परीक्षण) मूलभूत सुविधाओ का प्रावधान किया गया है। सामान्य व्यापार के लिए गुणवतियो को अब तक 69 उपजों के लिए विकसित किया गया है। बाजार शुल्क एकत्र करने के एक स्तर, अर्थात् किसान के पहले थोक खरीद पर। किसानों की सुविधा के लिए मंडी में ही इस सुविधा का उपयोग करने के लिए चयनित मंडी में/ या नजदीक मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं का प्रावधान भी है। नागार्जुन फर्टलाइजर्स और केमिकल्स लिमिटेड रणनीतिक साथी (एस.पी) है, जो विकास, परिचालन और मंच का रखरखान करने के लिए जिम्मेदार है। रणनीतिक साथी की मुख्य भूमिका बहुत ही व्यापक है और इसमें सॉफ्टवेयर बनाना, ई-नाम के साथ एकीकृत होने के इच्छुक राज्यों में मंडियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसे अनुकूल बनाना और मंच पर चलाना सम्मिलित है।
व्यापारियों एवं कमीशन एजेंट के लिए बेहतर निगरानी और पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था है, जो निविदा/नीलामी प्रक्रिया में जाने या अनजाने में हेरफेर की किसी भी संभावना को समाप्त करती है। सभी लेन-देन लेखांकन के माध्यम से बाजार शुल्क संचयन में सुधार जो बाजार में जगह ले रहे हैं। जनशक्ति आवश्यकताओं में कमी क्योंकि निविदा/ नीलामी प्रक्रिया प्रणाली के माध्यम से जगह ले लेता है। आमदनी एवं मूल्यों का विश्लेषण और पूर्वानुमान लगाया जाता है। प्रत्येक कृषि उपज बाजार समिति की गतिविधियों की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह किसानों को ई-नाम उत्पाद को बेचने और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य प्राप्त करने के लिए अधिक विकल्प प्रदान करने का वादा करता है। व्यापारियों के लिए ई-नाम माध्यमिक व्यापार के लिए एक बड़े राष्ट्रीय बाजार का पहुंच प्रदान करेगा। थोक खरीदार, संसाधक और निर्यातक के लिए यह स्थानीय मंडी व्यापार में सीधी भागीदारी को सक्षम करेगा, जिससे वित्तीय मध्यस्थता के खर्च में कमी होगी।
बाजार का एकीकरण और ऑनलाइन व्यापार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है कि राज्यों के संबंध में योजना के तहत सहायता की मांग करने से पहले एक एकल लाइसेंस हो। यह लाइसेंस राज्य भर में मान्य हो और बाजार शुल्क को एक स्तर में एकत्र किया जाए। इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट मूल्य खोज के साधन के रूप में इलेक्ट्रॉनिक नीलामी का प्रावधान होना चाहिए। केवल इन तीन पूर्व-पेक्षाओं को पूर्ण करने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना के अंतर्गत सहयोग के पात्र होंगे। राज्यों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सुधार कृषि उपज बाजार समिति अधिनियमों और कानूनों दोनों में उचित और स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार अक्षरश: पूरा किया गया है। राज्य विपणन बोर्ड/ कृषि उपज बाजार समिति के अलावा ई-नीलामी मंच को सक्षम करना आवश्यक है। राज्यों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पड़ेगी कि जो मंडियां ई-नाम के साथ एकीकृत हैं, वे उत्तम ऑनलाइन संयोजकता, हार्डवेयर और जांचे गए उपकरणों के लिए प्रावधान बनाती है
ई-मंच से जुड़ने के लिए इच्छुक राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में चयनित 585 विनियमित थोक बाजारों में ई-नाम को प्रसारित किया रहा है। छोटे किसानों का कृषि व्यवसाय सहायता संघ ई-नाम का संचालन रणनीतिक साथी से प्राप्त तकनीकी सहायता के साथ कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में हो रहा है। ई-नाम पर व्यापार के लिए वस्तुओं को जांचने की सुविधा के लिए, आम व्यापार योग्य मानकों को 90 उपजो के लिए विकसित किया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह के अनुसार यह परियोजना एक ऑनलाइन पोर्टल द्वारा संचालित हो रही है, जिसे राज्य की मंडियों से जोड़ा जा रहा है। इसका सॉफ्टवेयर सभी इच्छुक राज्यों को नि:शुल्क दिया गया है और कामकाज में मदद के लिए हर भागीदार मंडी में एक वर्ष के लिए एक जानकार व्यक्ति को नियुक्त किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत भारत सरकार, राज्यों की प्रस्तावित कृषि मंडी को 30 लाख रुपये का अनुदान दे रही है। इस पोर्टल से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए किसानों को 24 घंटे किसान हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध होंगी। कृषि मंत्रालय ने अपने लिए एक कृषि विकास वृक्ष की अवधारणा अपनाई है और इसी कृषि वृक्ष के अंदर कृषि मंत्रालय ने किसानों के समग्र विकास के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू की हैं। भारत में पहली बार “एक राष्ट्र – एक बाजार” विकसित हो रहा है और यह कृषि बाजार अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा, इसके लिए सबको मिलकर काम करना होगा।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)


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