युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे अमूल्य धरोहर होते हैं। उनके विचार, ऊर्जा, प्रतिभा और चरित्र ही राष्ट्र के वर्तमान को सशक्त तथा भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं। यदि युवा नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहकर शिक्षा, कौशल, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण में अपनी ऊर्जा लगाएँ, तो विकसित भारत का संकल्प शीघ्र साकार हो सकता है।
नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी प्रभावित करता है। यह युवाओं की प्रतिभा, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को कमजोर कर देता है। इसके विपरीत, नशामुक्त युवा अनुशासित, स्वस्थ, आत्मनिर्भर और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनते हैं।
विकसित भारत का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित और जागरूक नागरिक भी हैं। जब युवा नशे से दूर रहकर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, उद्यमिता और सामाजिक सेवा में योगदान देते हैं, तब राष्ट्र की उत्पादकता और वैश्विक प्रतिष्ठा दोनों बढ़ती हैं।
आज आवश्यकता है कि परिवार, विद्यालय, समाज, मीडिया और शासन मिलकर नशामुक्ति के प्रति जनजागरण करें। युवाओं को सकारात्मक जीवन-मूल्यों, खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों और राष्ट्रसेवा से जोड़ना समय की मांग है।
संकल्प यही हो— "नशा नहीं, शिक्षा चुनें; व्यसन नहीं, विकास चुनें; स्वस्थ युवा, समर्थ भारत; नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सच्ची राष्ट्रधरोहर हैं।"

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