देव दर्शन 1 जनवरी 2026
बासुकीनाथ (बासुकीनाथ धाम) झारखंड राज्य के दुमका ज़िले में स्थित भगवान शिव का एक प्रमुख तीर्थ है। इसे बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) का “सहचर/उप-पीठ” भी माना जाता है।
1. बासुकीनाथ का महत्व
भगवान शिव का पवित्र धाम: यहाँ बाबा बासुकीनाथ (शिव) की पूजा होती है।
बैद्यनाथ धाम से संबंध: मान्यता है कि देवघर में जल अर्पण के बाद बासुकीनाथ में दर्शन किए बिना यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।
श्रावणी मेला: सावन महीने में लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। कांवरिये देवघर से जल चढ़ाने के बाद बासुकीनाथ पहुँचते हैं।
मनोकामना पूर्ति: भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर बाबा इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बासुकीनाथ धाम प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा है।
स्थानीय परंपराओं और पुराण-कथाओं के अनुसार यह स्थल नागों के राजा वासुकी से जुड़ा हुआ है।
समय के साथ यहाँ मंदिर का निर्माण और विस्तार हुआ; वर्तमान मंदिर लोक-आस्था और क्षेत्रीय राजाओं/भक्तों के सहयोग से विकसित हुआ।
यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और शैव परंपरा का संगम माना जाता है।
3. बासुकीनाथ की कथा (पौराणिक मान्यता)
वासुकी नाग की कथा: वासुकी नाग, नागों के राजा, भगवान शिव के परम भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ घोर तपस्या की।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें वरदान दिया। उसी स्थान पर शिव बाबा बासुकीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन में प्रयुक्त वासुकी नाग से भी इस धाम का नाम जुड़ा है, जो शिव से अभिन्न संबंध दर्शाता है।
4. पूजा-पद्धति और परंपराएँ
जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग अर्पण किया जाता है।
सावन, महाशिवरात्रि और सोमवारी व्रत के दिनों में विशेष भीड़ रहती है।
देवघर–बासुकीनाथ यात्रा को पूर्ण शैव यात्रा माना जाता है।




No comments:
Post a Comment