सहज, सरल, आत्मिक और कलमकार रत्नेश्वर जी एक चर्चित कथाकार हैं. पटना प्रवास में मिलने की इच्छा व्यक्त की. फिर क्या था इन्होंने मुझे घर आमंत्रित किया और मेरे आने की प्रतीक्षा करने लगे. प्रवेश द्वार पर रस्सी से बंधी एक घण्टी और अंदर पहुंचते ही विशाल पुस्तकालय ज्ञान यज्ञ जैसा घर का वातावरण. तमाम चर्चाओं के साथ कब दो घंटा बीत गया पता ही नहीं चला. एक दिन पहले ही 50 साल पूरे किए थे. मेरे हिस्से का केक, मिठाई थी ही. जम कर खाने का सुख, मुझे लगा कि एक लेखक का समय कीमती होता है, इसलिए नमस्कार नमस्कार के साथ पटना से प्रस्थान.
Saturday, October 22, 2016
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बैठक
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