समाज अपने छोटे छोटे प्रयोगों से कितना श्रेष्ठ बन जाता है। इसका एक उदाहरण पुना की सड़कों पे चलते दिखा,२० साल पहले रामबाग मुहल्ले के लोगों ने सार्वजानिक स्थान का चयन किया और अनेक प्रकार के समाचार पत्र /पत्रिकाएं सुबह ७ बजे से रात्रि १० बजे तक मुफ्त में सभी पाठकों के लिए उपलब्ध रहता है। साथ ही कुछ ध्येय वाक्य भी लिखा मिलता और स्वक्षता के लिए कूड़ा पात्र भी रखा गया है। अनुकरणीय कार्य।
Friday, January 16, 2015
अनुकरणीय कार्य
समाज अपने छोटे छोटे प्रयोगों से कितना श्रेष्ठ बन जाता है। इसका एक उदाहरण पुना की सड़कों पे चलते दिखा,२० साल पहले रामबाग मुहल्ले के लोगों ने सार्वजानिक स्थान का चयन किया और अनेक प्रकार के समाचार पत्र /पत्रिकाएं सुबह ७ बजे से रात्रि १० बजे तक मुफ्त में सभी पाठकों के लिए उपलब्ध रहता है। साथ ही कुछ ध्येय वाक्य भी लिखा मिलता और स्वक्षता के लिए कूड़ा पात्र भी रखा गया है। अनुकरणीय कार्य।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दिव्यांगों के लिए योजनाएं : सशक्तीकरण होगा
देश में ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांगजन हैं। सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सशक्तिकरण और आर्थिक समावेश के लिए निरंतर कार्यरत है। केंद्र सरक...
-
डॉ. सौरभ मालवीय स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय दर्शन से विश्व को परिचित करवाया। वह ज्ञान का अथाह भंडार थे। उनकी शिक्षाएं अनमोल हैं, तभी तो वह...
-
डॉ. सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान...
-
डॉ. सौरभ मालवीय किसी भी देश के लिए एक विधान की आवश्यकता होती है। देश के विधान को संविधान कहा जाता है। यह अधिनियमों का संग्रह है। भारत के संव...

No comments:
Post a Comment