समाज अपने छोटे छोटे प्रयोगों से कितना श्रेष्ठ बन जाता है। इसका एक उदाहरण पुना की सड़कों पे चलते दिखा,२० साल पहले रामबाग मुहल्ले के लोगों ने सार्वजानिक स्थान का चयन किया और अनेक प्रकार के समाचार पत्र /पत्रिकाएं सुबह ७ बजे से रात्रि १० बजे तक मुफ्त में सभी पाठकों के लिए उपलब्ध रहता है। साथ ही कुछ ध्येय वाक्य भी लिखा मिलता और स्वक्षता के लिए कूड़ा पात्र भी रखा गया है। अनुकरणीय कार्य।
Friday, January 16, 2015
अनुकरणीय कार्य
समाज अपने छोटे छोटे प्रयोगों से कितना श्रेष्ठ बन जाता है। इसका एक उदाहरण पुना की सड़कों पे चलते दिखा,२० साल पहले रामबाग मुहल्ले के लोगों ने सार्वजानिक स्थान का चयन किया और अनेक प्रकार के समाचार पत्र /पत्रिकाएं सुबह ७ बजे से रात्रि १० बजे तक मुफ्त में सभी पाठकों के लिए उपलब्ध रहता है। साथ ही कुछ ध्येय वाक्य भी लिखा मिलता और स्वक्षता के लिए कूड़ा पात्र भी रखा गया है। अनुकरणीय कार्य।
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