Sunday, May 17, 2026

अंगारों पर सिकती मकई





इन आँखों में भारत बोलता और भारतबोध स्वतः होता है।
मिट्टी की सौंधी खुशबू, जंगल की हरियाली और अंगारों पर सिकती मकई — यह सब मिलकर लोकजीवन के सहज आनंद को साकार कर देते हैं।
यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भारतीय ग्राम्य संस्कृति, प्रकृति से जुड़ाव और आत्मिक तृप्ति का उत्सव है।
 प्रकृति का सान्निध्य और आत्मीय संग — यही जीवन का वास्तविक सुख है।”
इन देशज स्वादों के पीछे अनेक श्रमशील हाथों का जीवन जुड़ा होता है।
जो लोग इसे अपना रोजगार बनाकर यात्रियों और प्रकृति प्रेमियों तक पहुँचाते हैं, उनसे संवाद करना अपने आप में एक अनुभव है।
उनकी सहजता, अपनापन और जीवन दृष्टि में ही सच्चा भारत दिखाई देता है। 

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अंगारों पर सिकती मकई

इन आँखों में भारत बोलता और भारतबोध स्वतः होता है। मिट्टी की सौंधी खुशबू, जंगल की हरियाली और अंगारों पर सिकती मकई — यह सब मिलकर लोकजीवन के सह...