Wednesday, December 31, 2025

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें










नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें-2026
बाबा बैधनाथ (बैद्यनाथ धाम) भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। इसे बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है।
स्थान: देवघर, झारखंड
मान्यता: यहाँ भगवान शिव वैद्य (चिकित्सक) रूप में पूजे जाते हैं, इसलिए “बैधनाथ/वैद्यनाथ”
विश्वास: रोग, कष्ट और मानसिक पीड़ा से मुक्ति की कामना के लिए भक्त यहाँ जलाभिषेक करते हैं
श्रावण मेला: श्रावण मास में लाखों कांवड़िए सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा पर चढ़ाते हैं
पौराणिक कथा (संक्षेप में):
कहा जाता है कि रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था। शिव ने शर्त रखी कि जहाँ लिंग रखोगे, वहीं स्थापित हो जाएगा। देवताओं की लीला से रावण ने यहाँ लिंग रख दिया और वही बैद्यनाथ धाम बना।

अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का आरोहण


देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 दिसम्बर 2025 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला के विराजमान होने के द्वितीय वार्षिकोत्सव-प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह में सम्मिलित होकर माँ अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का आरोहण किया। इसके पूर्व, रक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने श्री हनुमानगढ़ी मंदिर, श्रीराम मंदिर, सप्त मंदिर, शेषावतार मंदिर एवं कुबेर टीला में दर्शन-पूजन किया।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में अयोध्या अभूतपूर्व प्रगति की साक्षी बन रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप आस्था, संस्कृति तथा इतिहास को संजोते हुए यहां विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण हो रहा है। प्रभु श्रीराम मंदिर  निर्माण के पश्चात करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन ने अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन का केन्द्र बना दिया है।

सड़क, आवास, हरित क्षेत्र, हाई-वे तथा रेलवे के विकास से आधुनिक, सुरक्षित व समृद्ध शहर के रूप में हम सबके समक्ष है। यह विकास सम्पूर्ण भारत के गौरव का प्रतीक है। इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री जी विशेष बधाई के पात्र हैं। आज से दो वर्ष पूर्व प्रभू श्रीराम अपने दिव्य मंदिर  में विराजमान हुए थे। आज का समारोह सदियों की प्रतीक्षा पूर्ण होने का उत्सव है। दो वर्ष पूर्व केवल श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं थी, बल्कि लम्बे समय के पश्चात भारत के जनमानस में पुनः हुई आध्यात्मिक प्राण-प्रतिष्ठा थी। प्रभु श्रीराम अपनी अद्भुत एवं तेजस्वी छवि के साथ आज केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को कीर्ति प्रदान कर रहे हैं। आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दर्शन कर सर्वस्व की प्राप्ति हो चुकी है। आज का दिन जीवन के सौभाग्यशाली दिनों में से एक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि आज इस देश में जो कुछ हो रहा है तथा आने वाले वर्षों में जो कुछ होगा, वह भविष्य के हजार वर्षों की नींव रखेगा। श्रीराम मंदिर का स्थापत्व तथा भावना उनके कथन को चरितार्थ करते हैं। यह मंदिर आगामी हजारों वर्षों तक प्रभु श्रीराम के चरित्र का गुणगान विश्व के सम्मुख करता रहेगा। हम अपनी अनेक पीढ़ियों में अत्यन्त सौभाग्यशाली है, क्योंकि यह दृश्य हम अपनी आंखों से प्रत्यक्ष देख रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश आगमन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी का स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए भी श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में प्रत्यक्ष भूमिका का निर्वहन किया है। 500 वर्षों के पश्चात श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य स्वरूप तथा उसमें प्रभु श्रीरामलला के विराजमान होने पर वह अत्यन्त अभिभूत हैं। उन्हें आज प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर माता अन्नपूर्णा के मंदिर में सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण करते हुए अत्यन्त भावुक होते देखा।

उन्होंने ने कहा कि देश-दुनिया में निवास करने वाला प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दर्शन कर अभिभूत हो जाता है। विगत पांच वर्षों में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम में आए। पहले यहां केवल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते थे। विगत 11 वर्षों में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में अयोध्या निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। सूर्यवंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हम सभी के सामने है। यहां अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट महर्षि वाल्मीकि के नाम पर संचालित है। अयोध्या धाम रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ चुका है। लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, काशी सहित अन्य शहरों से अयोध्या की बेहतरीन कनेक्टिविटी है। अयोध्या में पहले सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज चारों ओर से फोर-लेन सड़कें बन चुकी हैं। श्रद्धालु किसी भी सीजन में बड़े आराम से अयोध्या आकर प्रभु श्रीराम का दर्शन करते हैं। अयोध्या की दिव्यता और भव्यता को बनाए रखने के लिए प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी को आगे बढ़ना पड़ेगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। अब भारत सरकार की ‘वीबी-जी राम जी’ योजना देश की सबसे बड़ी रोजगार योजना बनने जा रही है। इसके माध्यम से रोजगार के इच्छुक व्यक्तियों को उनकी ग्राम पंचायत में ही वर्ष  में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में घटित तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री जी ने 5 अगस्त 2020 को स्वयं अयोध्या धाम में पधारकर अपने कर-कमलों से 500 वर्षों की प्रतीक्षा को समाप्त करते हुए प्रभु श्रीराम जन्मभूमि में भूमि-पूजन का कार्य सम्पन्न किया। हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल द्वादशी की पवित्र तिथि 22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की। 25 नवम्बर 2025 को विवाह पंचमी के अवसर पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण किया। 

उन्होंने कहा कि हमारी वर्तमान पीढ़ी अत्यन्त सौभाग्यशाली है। सन् 1526 से सन् 1992 तक और सन् 1992 के उपरान्त भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए प्रत्येक 20-25 वर्षों के कालखंड में रामभक्त कोई न कोई बड़ा संघर्ष करते थे। यह आन्दोलन सफलता की ऊंचाइयों पर तब पहुंचा, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नेतृत्व प्रदान किया। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी ने पूज्य संतों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की तथा प्रभु श्रीराम मंदिर का मार्ग प्रशस्त होता हुआ दिखाई दिया। प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज इस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। देश व प्रदेश विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नये प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री जी ने हम सभी को विकसित भारत 2047 की संकल्पना दी है। प्रत्येक भारतवासी को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करते हुए विरासत का संरक्षण करना होगा। अपने देश और सनातन धर्म की ध्वजा पताका ऊपर उठाने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा। यही प्रयास भारत को दुनिया की बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करेगा।

उन्होंने स्वतंत्र भारत में श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के अनेक पड़ाव अयोध्या ने देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही एहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। यहां के शौर्य, वैभव, पराक्रम के सामने कोई भी दुश्मन टिक नहीं पाया। ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे‘, यहां हनुमानगढ़ी में हनुमान जी स्वयं विराजमान हैं। यहां कोई आतंकी कैसे घुस सकता है। जब वर्ष 2005 में आतंकियों ने यहां घुसने का दुस्साहस किया था, तो पीएसी के जवानों ने उन्हें मार गिराया था।
लखनऊ: 31 दिसम्बर 2025

उत्तर प्रदेश बीजेपी मुखपत्र कमल ज्योति में प्रकाशित लेख

 




उत्तर प्रदेश बीजेपी मुखपत्र कमल ज्योति के अंक में प्रकाशित लेख अवलोकनार्थ 

Tuesday, December 30, 2025

आगमन


लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट मेरे आदरणीय प्रोफेसर सौरभ मालवीय जी का गौतम महावीर और भगवान बुद्ध की तपस्थली, प्रथम गणतंत्र की जननी, मेरे गृह ज़िला वैशाली की ऐतिहासिक धरती, हाजीपुर में आगमन हुआ।  
यह आगमन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार और विरासत के मिलन का सजीव क्षण है—जिस पर वैशाली स्वयं गर्व से मुस्कुरा उठी।
अर्पिता स्नेह राजपूत 

भव्य निर्माण की ओर अग्रसर





















भव्य निर्माण की ओर अग्रसर: सरस्वती प्रशिक्षण मंदिर एवं एनी बेसेंट बालिका विद्यालय 
दिनांक 30 दिसंबर 2025 को प्रयागराज की पावन धरा पर विद्या भारती के महत्वाकांक्षी प्रकल्प 'सरस्वती प्रशिक्षण मंदिर' के प्रस्तावित वृहद स्वरूप के अवलोकन और गहन विमर्श का सुअवसर प्राप्त हुआ।
प्रस्तावित भव्य परियोजना की झलकियाँ
60 कक्षों का विशाल परिसर: आधुनिक सुविधाओं से युक्त कक्षाओं का निर्माण प्रस्तावित है।
छात्रावास (Hostel): विद्यार्थियों के लिए पूर्ण आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
अत्याधुनिक सभागार (Auditorium): वृहद आयोजनों और संवाद हेतु एक विशाल सभागार की योजना है।
शिशु वाटिका:नन्हे मुन्नों के लिए भारतीय पद्धति पर आधारित आदर्श खेल-शिक्षा केंद्र।
इस अवसर पर क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय जी, सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर जी, संभाग निरीक्षक श्री गोपाल तिवारी जी, प्रदेश निरीक्षक श्री शेषधर द्विवेदी जी एवं सुल्तानपुर के प्रधानाचार्य श्री राकेश मणि त्रिपाठी जी के साथ इस भव्य योजना की रूपरेखा पर गंभीर मंथन हुआ।
यह संस्थान आने वाले समय में विद्या भारती की गौरवशाली परंपरा और आधुनिक शिक्षा का एक अद्भुत संगम सिद्ध होगा।

बैठक







प्रधानाचार्य संवाद बैठक - प्रयागराज 
सिविल लाइन्स स्थित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर के सभागार में दिनांक 29 दिसम्बर 2025 को काशी प्रान्त की  एक दिवसीय बैठक के उदघाटन सत्र में उपस्थित रहा।
 बैठक में आ. डॉ. राममनोहर जी का सान्निध्य मिला.

Sunday, December 28, 2025

बैठक











प्रांतीय विषय संयोजक बैठक - प्रयागराज 
सिविल लाइन्स स्थित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर के सभागार में दिनांक 28 दिसम्बर 2025 को काशी प्रान्त की प्रान्तीय विषय संयोजकों की एक दिवसीय बैठक के उदघाटन सत्र में उपस्थित रहा.
 बैठक में आ. डॉ. राममनोहर जी का सान्निध्य मिला.

बैठक









भारतीय शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश 
प्रांतीय विषय संयोजक बैठक 
इंद्रानगर - लखनऊ
संस्कारयुक्त शिक्षा विद्या भारती

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक   3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2026   हरि नगर (दिल्ली)