Friday, September 12, 2025

क्षितिज की गोद में प्रकृति की अनुपम छटा की अनुभूति


जब सूरज की किरणें आकाश को स्वर्णिम रंगों से रंगती हैं, और दूर-दूर तक फैले बादल सुनहरे चादर की भाँति क्षितिज को ढँक लेते हैं, तब मानो प्रकृति अपनी सबसे सुंदर मुस्कान बिखेरती है। उस क्षण, जब धरती और आकाश एक-दूसरे में विलीन होते प्रतीत होते हैं, मन में एक अलौकिक शांति का संचार होता है।
नीला आसमान, हरियाली से ढकी धरती, पक्षियों की चहचहाहट, और मंद समीर की छुअन—इन सबका संगम क्षितिज की गोद में होता है।
 यह दृश्य न केवल आँखों को आनंदित करता है, बल्कि आत्मा को भी शुद्ध करता है। क्षितिज के निकट खड़े होकर जो अनुभूति होती है, वह शब्दों से परे है—एक ऐसी अनुभूति, जो हमें ब्रह्मांड से जोड़ देती है और अध्यात्म से भर देती है. 
अनुभूति की यह दृष्टि भाव से जन्म लेती है.... उस भाव जागृति के प्रति कृतज्ञता ही अनुभूति को परिभाषित करती.
माउन्ट आबू

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