Friday, January 31, 2025

बाबा साहब एवं भारतीय संविधान संगोष्ठी




बाबा साहब एवं भारतीय संविधान संगोष्ठी, कमलज्योति विशेषांक लोकार्पण
31 जनवरी। भाजपा मुख्यालय मालवीय ग्रन्थालय में कमलज्योति पत्रिका संविधान विशेषांक का लोकार्पण मुख्य अतिथि अवध क्षेत्रीय अध्यक्ष मा. कमलेश मिश्र जी ,विशिष्ठ अतिथि प्रदेश उपाध्यक्ष मा. देवेश कोरी जी, अध्यक्षता मा. भारत दीक्षित जी, अतिथि प्रदेश मंत्री मा. शंकर लाल लोधी जी ,वरिष्ठ पत्रकार प्रो.सौरभ मालवीय जी, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य मा. अशोक कुमार जी, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती विनीता जौहरी जी ,सुश्री शिल्पी राय, सुश्री स्वाति सिंह ई. विद्याभूषण गोंड़ जी ने किया।
संगोष्ठी की प्रस्तावना करते हुए डॉ चेत नारायण सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान सर्व हितकारी लोककल्याण कारी है।  कुछ राजनीतिक दल वितंडावाद के तहत भाजपा सरकार द्वारा इसे समाप्त करने की बात दोहरा रहे है।
क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री कमलेश मिश्र ने कहा कि काँग्रेस ने बाबा साहब का अपमान किया।
कार्यक्रम  श्री युगलकिशोर पांडेय दाऊ जी, प्रदीप सिंह बब्बू ,श्री शैलेश कुमार सिंह शैलू, सूर्यकांत अवस्थी तरुण कांत त्रिपाठी, श्री विमल सिंह ,सारिका शुक्ला, शिल्पी राय, पूनम पाल ,सोमदत्त वाजपेयी, राम प्रताप सिंह ,राजेश कुमार गोंड़, देवेश कुमार श्रीवास्तव, धीरेंद्र प्रताप वर्मा,अमरेंद्र सिंह,विश्वास पाल  आदि प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का संचालन आभार,साधक राज कुमार ने किया।

Monday, January 27, 2025

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू


डॉ. सौरभ मालवीय  
उत्तराखंड सरकार ने आज से राज्य में समान नागरिक संहित लागू कर दी है। उत्तराखंड विधानसभा द्वारा गत वर्ष समान नागरिक संहिता विधेयक-2024 पारित किया गया था। उत्तराखंड समान नागरिक संहित लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

समान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में एक बार फिर से बहस जारी है। देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात बार-बार उठती रही है, परन्तु इस पर विवाद होने के पश्चात यह मामला दबकर रह जाता है। किन्तु जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी हुई है, तब से यह मामला फिर से तूल पकड़ने लगा है। जहां भाजपा इसे देशभर में लागू करना चाहती है, वहीं मुस्लिम संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम समाज में विवाह कानूनों को लेकर ब्रिटिश शासनकाल से ही विवाद होता रहा है, क्योंकि मुसलमानों में बहु पत्नी प्रथा का चलन है। शरीयत के अनुसार पुरुषों को चार विवाह करने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में मुस्लिम समाज में महिलाओं की स्थिति कितनी दयनीय होगी, यह सर्वविदित है। पति जब चाहे पत्नी को तीन तलाक कहकर घर से निकाल देता है। ऐसी स्थिति में महिला का जीवन नारकीय बन जाता है। शाह बानो प्रकरण ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा था। वर्ष 1978 में शाह बानो नाम की वृद्धा को उसके पति ने तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था। उसके पांच बच्चे थे। पीड़ित महिला के पास जीविकोपार्जन का कोई साधन नहीं था। उसके पति ने उसे गुजारा भत्ता देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। इस पर महिला ने न्यायालय का द्वार खटखटाया। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने में सात वर्ष लग गए। वर्ष 1985 में सर्वोच्च न्यायालय ने उसके पति को निर्देश दिया कि वह अपनी तलाकशुदा पत्नी को जीविकोपार्जन के लिए मासिक भत्ता दे। न्यायालय ने यह निर्णय अपराध दंड संहिता की धारा-125 के अंतर्गत लिया था। विदित रहे कि अपराध दंड संहिता की यह धारा सब लोगों पर लागू होती है चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय से संबंध रखते हों। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से मुस्लिम महिलाओं की स्थिति बेहतर हो जाती, परन्तु कट्टरपंथियों को यह सहन नहीं हुआ और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का कड़ा विरोध किया। उन्होंने ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड नाम की एक संस्था का गठन किया तथा सरकार को देशभर में आन्दोलन करने की चेतावनी दे डाली। परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी कट्टरपंथियों के आगे झुक गए था तथा उनकी सरकार ने 1986 में संसद में कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पलट दिया। इससे शाह बानो के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया। मानवता के नाते जिस समाज को वृद्धा की सहायता करनी चाहिए थी, वही उसका शत्रु बन गया। आज भी यही स्थिति है। मुस्लिम समाज में शाह बानो जैसी महिलाओं की कमी नहीं है। मुस्लिम समाज में ऐसे मामले सामने आते रहते हैं कि पति ने तीन तलाक कहकर पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया। ऐसी स्थिति में पीड़ित महिला का कोई साथ नहीं देता। मुस्लिम समाज की महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए पहले भाजपा सरकार ने तीन तलाक को रोकने का कानून बनाया और अब समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रयासरत है। भाजपा ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। इससे पूर्व  आरएसएस तथा जनसंघ द्वारा भी देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की मांग की गई थी। वर्ष 1998 में भी भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने का वादा किया था। 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में सामान नागरिक संहिता कानून लाया जाएगा।  उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले हमने समान नागरिक संहिता कानून लाने की घोषणा की थी। अब इसे विधानसभा से पारित करके कानून बना लिया जाएगा। इसी प्रकार अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा और राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दिया जाएगा। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि इसे देश-प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए, ऐसा करना अत्यंत आवश्यक है। उनका यह भी कहना है कि प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता कानून लागू करने पर विचार कर रही है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने के बारे में सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के लिए एक सम्मान का विषय है। 

उल्लेखनीय है कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत देश में निवास करने वाले सभी लोगों के लिए एक समान कानून का प्रावधान किया गया है। धर्म के आधार पर किसी भी समुदाय को कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। इसके लागू होने की स्थिति में देश में निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर एक ही कानून लागू होगा, अर्थात कानून का किसी धर्म विशेष से कोई संबंध नहीं रह जाएगा। ऐसी स्थिति में अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ समाप्त हो जाएंगे। वर्तमान में देश में कई निजी कानून लागू हैं, उदाहरण के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ, इसाई पर्सनल लॉ एवं पारसी पर्सनल लॉ। इसी प्रकार हिंदू सिविल लॉ के अंतर्गत हिंदू, सिख एवं जैन समुदाय के लोग आते हैं।  समान नागरिक संहिता लागू होने से इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा तथा विवाह, तलाक एवं संपत्ति के मामले में सबके लिए एक ही कानून होगा।
 
इसके दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता को असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए सरकार से इसे लागू न करने की अपील है। बोर्ड का कहना कि भारत के संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को उसके धर्म के अनुसार जीवन जीने की अनुमति दी है। इसे मौलिक अधिकारों में सम्मिलित किया गया है। 
 
नि:संदेह देश में समान नागरिक संहिता लागू होने से मुस्लिम समाज की महिलाओं का जीवन स्तर बेहतर हो जाएगा। यह कानून मुस्लिम समाज से बहुपत्नी प्रथा का उन्मूलन करने में प्रभावी सिद्ध हो सकेगा, क्योंकि इस समाज के पुरुष अपनी पत्नी के जीवित रहते दूसरा, तीसरा एवं चौथा विवाह नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, संपत्ति में भी पुत्रियों को पुत्रों के समान ही भाग मिलेगा। इसमें दो मत नहीं है कि समान नागरिक संहिता मुस्लिम महिलाओं के लिए सम्मानजनक कानून है, जो उन्हें सम्मान से जीवन जीने का अधिकार देगा। 


Sunday, January 26, 2025

महाकुम्भ प्रयागराज




विद्या भारती द्वारा आयोजित "सेवा क्षेत्र में शिक्षा" कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मा. डॉ.कृष्ण गोपाल जी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. हेमचंद्र जी, सह संगठन मंत्री डॉ.राम मनोहर जी, क्षेत्रीय सेवा प्रमुख योगेश जी के साथ रहना हुआ।

शिक्षा कार्यक्रम




महाकुम्भ प्रयागराज में विद्या भारती द्वारा आयोजित सेवा क्षेत्र में शिक्षा कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

Sunday, January 19, 2025

टूटते संबंध, बढ़ता अवसाद


डॉ. सौरभ मालवीय 
मनुष्य जिस तीव्र गति से उन्नति कर रहा है, उसी गति से उसके संबंध पीछे छूटते जा रहे हैं. भौतिक सुख-सुविधाओं की बढ़ती इच्छाओं के कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं. माता-पिता बड़ी लगन से अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं. उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. परिवार में लड़कियां हैं, तो वे विवाह के पश्चात ससुराल चली जाती हैं और लड़के नौकरी की खोज में बड़े शहरों में चले जाते हैं. इस प्रकार वृद्धावस्था में माता-पिता अकेले रह जाते हैं. इसी प्रकार शहरों में उनके बेटे भी अकेले हो जाते हैं.

संयुक्त परिवार टूटने के कारण एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. एकल परिवारों के कारण संबंध टूट रहे हैं. संयुक्त परिवारों में बहुत से रिश्ते होते थे. दादा-दादी, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी, मौसी-मौसा तथा उनके बच्चे अर्थात बहुत से भाई-बहन. बच्चे बचपन से ही इन सभी संबंधों को जानते थे, परन्तु अब एकल परिवारों में माता-पिता और उनके दो या एक बच्चे ही हैं. संयुक्त परिवार टूटने के अनेक कारण हैं. रोजगार के अतिरिक्त परिवार के सदस्यों में बढ़ते मतभेद, कटुता एवं स्वार्थ आदि के कारण भी एकल परिवार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति नितांत अकेला पड़ता जा रहा है. संयुक्त परिवार में समस्याएं सांझी होती थीं. व्यक्ति किसी कठिनाई या समस्या होने पर परिवार के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श कर लेता था. इस प्रकार उसे समस्या का समाधान घर में ही मिल जाता था.

संयुक्त परिवार के बहुत से लाभ हैं. परिवार के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा का दायित्व सबका होता है. किसी भी सदस्य की समस्या पूरे परिवार की होती है. यदि किसी को पैसे आदि की आवश्यकता है, तो पैसे बाहर किसी से मांगने नहीं पड़ते. परिवार के सदस्य ही मिलजुल कर सहयोग कर देते हैं. परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण घर और बाहर के कार्यों का विभाजन हो जाता है. प्रत्येक सदस्य अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार कार्य कर लेता है तथा अन्य कार्यों से मुक्त रहता है. ऐसे में उसे अपने लिए पर्याप्त समय मिल जाता है. इसके अतिरिक्त संयुक्त परिवार में रसोई एक होने के कारण खर्च भी कम हो जाता है. उदाहरण के लिए दो या तीन एकल परिवार यदि संयुक्त परिवार के रूप में रहते हैं, तो उन्हें अधिक सामान की आवश्यकता होगी. थोक में अधिक सामान लेने पर वह सस्ता पड़ता है. इसी प्रकार तीन के बजाय एक ही फ्रिज से काम चल जाता है. ऐसी ही और भी चीजें हैं. परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने पर उसकी ठीक से देखभाल हो जाती है. परिवार के सदस्य साथ रहते हैं, तो उनमें भावनात्मक लगाव भी बना रहता है. इसके अतिरिक्त बच्चों का पालन-पोषण भी भली-भांति आसानी से हो जाता है. उनमें अच्छे संस्कार पैदा होते हैं. वे यह भी सीख जाते हैं कि किस व्यक्ति के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए. इसमें बड़ों का सम्मान करना, अपनी आयु के लोगों के साथ मित्रवत व्यवहार करना तथा छोटों से स्नेह रखना आदि सम्मिलित हैं.   
   
आज परिस्थितियां पृथक हैं. मनुष्य किसी भी कठिनाई या किसी संकट के समय स्वयं को अकेला ही पाता है. यदि परिवार में महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो तब भी उसे घर का सारा कार्य स्वयं करना पड़ता है, जबकि संयुक्त परिवार में अन्य महिलाएं होने के कारण उसे आराम करने का समय मिल जाता था. साथ ही उसकी भी उचित प्रकार से देखभाल भी हो जाती थी.    

एकल परिवार में अकेले पड़ जाने के कारण व्यक्ति अवसाद का शिकार हो जाता है. अवसाद एक मानसिक रोग है. इस अवस्था में व्यक्ति स्वयं को निराश अनुभव करता है. वह स्वयं को अत्यधिक लाचार समझने लगता है. ऐसी स्थिति में प्रसन्नता एवं आशा उसे व्यर्थ लगती है. वे अपने आप में गूम रहने लगता है. वह किसी से बात करना पसंद नहीं करता. हर समय चिड़चिड़ा रहता है. यदि कोई उससे बात करने का प्रयास करता है, तो वे क्रोधित हो जाता है. कभी वह उसके साथ असभ्य अथवा उग्र व्यवहार भी करता है. मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद के भौतिक कारण भी होते हैं, जिनमें आनुवांशिकता, कुपोषण, गंभीर रोग, नशा, कार्य का बोझ, अप्रिय स्थितियां आदि प्रमुख हैं. अवसाद की अधिकता होने पर व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है. अवसाद के कारण आत्महत्या करने के अप्रिय समाचार सुनने को मिलते रहते हैं. ऐसे विचलित करने वाले समाचार भी मिलते हैं कि अमुक व्यक्ति ने सपरिवार आत्महत्या कर ली या परिवार के सदस्यों की हत्या करने के पश्चात स्वयं भी आत्महत्या कर ली.   

कोरोना काल में जहां संयुक्त परिवारों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहे, वहीं एकल परिवारों के लोग अवसाद का शिकार होने लगे. ‘द लैंसेट पब्लिक हेल्थ’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में अवसाद एवं घबराहट की शिकायतें देखने को मिल रही है. सात दिन या उससे अधिक समय तक कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित रहे लोगों में अवसाद एवं घबराहट की दर उन लोगों की तुलना में अधिक थी, जो संक्रमित रोगी कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए अर्थात वे अपने परिजनों के मध्य ही रहे. रिपोर्ट के अनुसार सार्स-कोव-2 संक्रमण वाले ऐसे रोगी जो अस्पताल में भर्ती हुए उनमें 16 महीने तक अवसाद के लक्षण देखे गए, परन्तु जिन रोगियों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा, उनमें अवसाद और घबराहट के लक्षण दो महीने के भीतर ही कम हो गए. सात दिनों या उससे अधिक समय तक बिस्तर पर रहने वाले लोगों में 16 महीने तक अवसाद और घबराहट की समस्या 50 से 60 प्रतिशत अधिक थी.

मनोचिकित्सकों के अनुसार अवसाद से निकलने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ समय व्यतीत करे. किसी भी समस्या या संकट के समय परिजनों से बात करे. स्वयं को अकेला न समझे. सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से बात करे. परिजनों को भी चाहिए कि वे अवसादग्रस्त लोगों में सकारात्मक विचार पैदा करने का प्रयास करें, उन्हें अकेला न छोड़ें, क्योंकि ऐसे लोग आसानी से अपराध की ओर अग्रसर हो सकते हैं. उन्हें उनकी किसी भी नाकामी के लिए तानें न दें, अपितु उनको प्रोत्साहित करें तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं.

वास्तव में आज तकनीकी ने समस्त संसार के लोगों को जितना समीप कर दिया है, उतना ही एक-दूसरे से दूर भी कर दिया है. मोबाइल के माध्यम से व्यक्ति क्षण भर में विदेश में बैठे व्यक्ति से भी बात कर लेता है. परन्तु मोबाइल के कारण ही लोगों को परिवार के सदस्यों से बात करने का समय नहीं मिल पाता. प्रत्येक स्थान पर लोग अपने मोबाइल के साथ व्यस्त दिखाई देते हैं. परिणामस्वरूप व्यक्ति का अकेलापन बढ़ता जा रहा है. व्यक्ति व्यक्ति से दूर होता चला जा रहा है. आवश्यकता है सामूहिक संवाद की, प्रत्यक्ष संवाद मन से भाव से विचार से हमे जोड़ता है, दुख-सुख में सहायक होकर साथ होने की अनुभूति प्रदान करता है।

Wednesday, January 15, 2025

माटी की महक

 

रोपन छपरा निवासी प्रो.ध्रुव सेन सिंह जी के आमंत्रण पर उनके परिवार द्वारा संचालित जूनियर हाई स्कूल रोपन छपरा, लार में स्वर्गीय भद्रसेन सिंह जी की 13वीं पुण्यतिथि पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर और विज्ञान प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन जी के साथ रहना हुआ।

Monday, January 13, 2025

बस्ती में आयोजित पूर्व छात्र समागम

 बस्ती के सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित पूर्व छात्र समागम 







मासिक गोष्ठी : भविष्य का भारत मार्गदर्शन




मासिक गोष्ठी
विषय : भविष्य का भारत
मार्गदर्शन -
मा. स्वांत रंजन जी
अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,
संस्कृति पुनरूत्थान समिति व राष्ट्रधर्म प्रकाशन लि. के तत्वावधान में उक्त विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

Sunday, January 12, 2025

समाचार पत्रों में







बस्ती में आयोजित पूर्व छात्र समागम 
संस्कारयुक्त शिक्षा विद्या मंदिर विद्याभारती

पूर्व छात्र समागम 2025

पूर्व छात्र समागम 2025 सरस्वती विद्या मंदिर,रामबाग बस्ती

Saturday, January 11, 2025

पूर्व छात्र संगम 2025











देश और राष्ट्र के प्रति हमारी कृतज्ञता दिखनी चाहिए : डॉ. सौरभ मालवीय 
विद्या मंदिर रामबाग बस्ती में पूर्व छात्र संगम 2025 का आयोजन

पूर्व छात्र समागम 202












पूर्व छात्र समागम 2025
सरस्वती विद्या मंदिर - रामबाग बस्ती

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक   3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2026   हरि नगर (दिल्ली)