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Showing posts from 2017

छठ महापर्व

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ॐ सूर्याय नमः
भगवान भास्कर सभी का कल्याण करें

सार्थक संवाद

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भारतीय शिक्षा व्यवस्था'
Centre for Civil Society द्वारा आयोजित परिचर्चा दिल्ली पत्रकार संघ कार्यालय में। सार्थक संवाद। शानदार आयोजन। शुभकामनाएं Avinash Chandra

संवाद

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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि-नोएडा परिसर में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए।

आस्था

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लखनऊ में संजीव सिन्हा के साथ

अन्त्योदय

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एकात्म मानववाद जिसका लक्ष्य अन्त्योदय,जिसके केंद्र बिन्दु में व्यक्ति,परिवार,समाज,राष्ट्र ,व्यष्टि और समष्टि के कल्याण की भावना है इस विचार के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार दर्शन पर आधारित पुस्तक “अन्त्योदय” जिसके लेखक राजकुमार है और प्रकाशक “सुमंगलम’ कैसरबाग ,लखनऊ है निश्चय है पठनीय एवं संग्रहणीय है | लेखक ने इस पुस्तक में सुचिता और समरसता को रेखांकित करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मता के सूत्र को तार्किक रूप से प्रस्तुत किया है साथ ही समाज के सामने मूल-भूत चुनौतियां का समाधान भी सुझाया है |
कुल पेज -160
मूल्य- 90 रूपये

जन्मदिन की बधाई

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सुमन मालवीय को जन्मदिन की बधाई

जन्मदिन की हार्दिक बधाई!

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जन्मदिन की हार्दिक बधाई!
भारतीय राजनीति के राष्ट्र ऋषि आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी आज 90 साल पूर्ण किये! शुभकामनाएं

सफ़र में ख़ास मुलाक़ात

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डॉ. सरिता शर्मा हिन्दी की उन श्रेष्ठ कवयित्रियों में हैं जिन्होंने हिन्दी काव्य की वाचिक परंपरा को समृद्ध किया है। अपनी प्रस्तुति की मार्मिक शैली के कारण काफी लोकप्रिय है। हिन्दी कविता की तमाम विधाओं -गीत, मुक्तक, गजल आदि में रचना की है नए शिल्प और नए बिम्बों के प्रयोग को जन्म दी है।
हार्दिक शुभकामनाएं

मुलाक़ात

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Amreash Chandra के साथ

नवभारत टाइम्स के दफ़्तर में

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पत्रकारिता के विद्यार्थी समाचार कक्ष का भ्रमण किया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रियरंजन झा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ.

मुलाक़ात

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प्रख्यात आलोचक डॉ. सुनीता का सानिध्य

सम्मान

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नोएडा परिसर के प्रभारी आदरणीय डॉ. वाजपेयी जी का सम्मान करते हुए.

संवादी

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दैनिक जागरण का आत्मीय आयोजन 'संवादी'

मुलाक़ात

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दैनिक जागरण संवादी कार्यक्रम में समकालीन भारत के श्रेष्ठ लेखक श्री अमीश त्रिपाठी के साथ.

लोकार्पण

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दैनिक जगरण द्वारा आयोजित संवादी में आज दैनिक जागरण संवादी में चर्चित कथाकार-पत्रकार गीताश्री की शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक 'हसीनाबाद' कवर लोकार्पण। बधाई -शुभकामनाएं!

जन्मदिन मुबारक

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2003 में जब दिल्ली आया तो पहली मुलाकात प्रशांत से हुई. उस समय लोकसभा चुनाव (भाजपा मीडिया सेल ) से प्रशांत जुड़े थे. मिलनसार, मृदुभाषी और हरदिल अजीज मित्र को जन्मदिन की शुभकामनाएं

कुल्हड़ वाली चाय

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कनाट प्लेस सर्किल पर 'कुल्हड़ वाली चाय'। आनन्द ही आनंद

माई और पापाजी

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गावं से ताज़ा फोटो
माई और पापाजी

सूर्यदर्शन

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सूर्यदर्शन
श्रीन्द्र मालवीय

चर्चा

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महिलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण संवाद

जन्मदिन मुबारक

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जन्मदिन मुबारक
राष्ट्रवादी राजनीति और भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन हेतु 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी. 66 वर्ष की यात्रा पूरी हुई वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी इस विचार यात्रा को आगे बढ़ा रही है पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह है देश की राजनीतिक नब्ज की समझ रखते है साथ ही सफलतम अध्यक्ष साबित हो रहे है। आज अमित शाह का जन्मदिन है हार्दिक बधाई

संघ को दिल से समझिए

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संघ को दिल से समझिए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना है तो दिमाग से नहीं दिल से समझिए। आखिर क्या कारण है कि देश के तथाकथित तमाम बुद्धिजीवियों के आलोचना के केंद्र में संघ रहता है। आरएसएस के बारे में बहुत भ्रम है जबकि संघ की कार्य पद्धति कार्य करने की है प्रचार नहीं।
संघ के मूल विचार को रेखांखित करता मीडिया विमर्श का यह अंक पठनीय है। Sanjay Dwivedi जी को रचनात्मक प्रयास हेतु साधुवाद एवं आभार।

वंदे मातरम का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होगा

डॊ. सौरभ मालवीय
राष्ट्र गीत वंदे मातरम एक बार भी चर्चा में है. इस बार मद्रास उच्च न्यायालय की वजह से इसके गायन का मुद्दा गरमाया है.   मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायधीश एमवी मुरलीधरन ने आदेश दिया है कि राष्ट्रगीत वंदे-मातरम को हर सरकारी/ग़ैर-सरकारी कार्यालयों/संस्थानों/उद्योगों में हर महीने कम से कम एक बार गाना होगा. यह गीत मूल रूप से बांग्ला और संस्कृत भाषा में है, इसलिए इसे तमिल और अंग्रेज़ी में अनुवाद करने के भी आदेश दिए गए हैं. उल्लेखनीय है कि एक ओर मुस्लिम समुदाय से ही वंदे मातरम के विरोध में स्वर उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक मुस्लिम लड़की ने ही वंदे मातरम का पंजाबी में अनुवाद कर सराहनीय कार्य किया है.वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद करने वाली फ़िरदौस ख़ान शाइरा, लेखिका और पत्रकार हैं. अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेज़ी में और आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने उर्दू में अनुवाद किया. उर्दू में ’वंदे मातरम’ का अर्थ है ’मां तुझे सलाम’. ऐसे में किसी को भी अपनी मां को सलाम करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए. आशा है कि आगे भी देश-विदेश की अन्य भाषाओं में इसका अनुवाद होगा.

उल्लेखनीय यह भी है कि जिस मामले में मद…

सेवाकार्य

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आशीष भैया है
कुष्ट पीड़ित बन्धुओं/ भगनियों की सेवा हेतु जीवन समर्पित 'दिव्यप्रेम सेवा मिशन' नाम से हरिद्वार में प्रकल्प है अनाथ बच्चों और उस पीड़ित परिवार के बच्चो की शिक्षा,चिकित्सा हेतु आवासीय सेवाकार्य का प्रकल्प है।
आशीष भैया विज्ञान संकाय से स्नातकोत्तर करने के बाद माँ भारती की सेवा हेतु संघ के प्रचारक बन गए गोरखपुर में महानगर प्रचारक रहे उस समय मैं 10वी का विद्यार्थी था आशीष जी स्कूटर से चलते थे मुझे सौभाग्य मिला कुछ वर्ष साथ रहने का । कुष्ट पीड़ित लोगों की समाज में उपेक्षा और तिरस्कार देख कर उनके लिए कुछ करना चाहिए यह सोचते हुए उन पीड़ितों के साथ ही अपना आश्रम बना लिए । इस पुनीत कार्य हेतु आशीष जी को प्रणाम।

नवभारत टाइम्स

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सहारनपुर का सच
नवभारत टाइम्स

सावरकर जयंती

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स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है।
भारत माता के लिए असंख्य कष्ट भोगने वाले सावरकर को कोटि-कोटि प्रणाम...

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो.मक्खन सिंह

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सानिध्य
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो.मक्खन सिंह
विचार दर्शन भारतीय दृष्टि
विश्व सभ्यता और विचार-चिन्तन का इतिहास काफी पुराना है। लेकिन इस समूची पृथ्वी पर पहली बार भारत में ही मनुष्य की संवेदनाओं चिंतन प्रारंभ किया भारतीय चिंतन का आधार हमारी युगों पुरानी संस्कृति है। भारत एक देश है और सभी भारतीय जन एक है, परन्तु हमारा यह विश्वास है कि भारत के एकत्व का आधार उसकी युगों पुरानी अपनी संस्कृति में निहित है- इस बात को न्यायालयों ने उनके निर्णयों में स्वीकार किया है। सांस्कृतिक चिंतन एक आध्यात्मिक अवधारणा है और यही है भारतीय का वैशिष्ट्य। राष्ट्र का आधार हमारी संस्कृति और विरासत है। हमारे लिए ऐसे राष्ट्रवाद का कोई अर्थ नहीं जो हमे वेदों, पुराणों, रामायण, महाभारत, गौतमबुद्ध, भगवान महावीर स्वामी, शंकराचार्य, गुरूनानक, महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज, स्वामी दयानन्द, लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय और असंख्य अन्य राष्ट्रीय अधिनायकों से अलग करता हो। यह राष्ट्रवाद ही हमारा धर्म है।

लड़की तो नहीं मिली, जिन्दगी का मिशन मिल गया

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17 अगस्त 2006 को रोड एक्सीडेंट में सर फट गया. 60 प्रतिशत हिस्सा बाहर निकल गया. डॉक्टरों ने मृत बता दिया. शरीर को अग्नि में सुपुर्द करने की तैयारी शुरू हो गई, लेकिन नियति को कुछ और ही कराना था इसलिए आजाद पाण्डेय की सांसे किसी कोने में छुपी थी. आजाद जिन्दा थे, शरीर में कुछ हल-चल हुई. गोरखपुर सावित्री नर्सिंग होम में भगवन बनकर एक डॉक्टर आजाद को नई जिन्दगी देने में सहायक बने, परन्तु आजाद स्मरण शक्ति खो दिए थे. शरीर और दिमाग दोनों का इलाज दिल्ली और गोरखपुर में चलता रहा. धीरे-धीरे सुधार होता गया. इसी बिच एक घटना होती है दिल्ली इलाज के लिए आजाद अपने पापा के साथ आते है. ट्रेन के जनरल डिब्बे में दोनों बैठे है. खिड़की से बहार आजाद की नज़र पड़ती है. एक छोटी सी बच्ची 7-8 साल की जो ट्रेन से फेकी हुई गंदगी को खा रही थी. यह देखकर आजाद चिल्लाये,शोर मचाये और पापा से बोले इसे अपना खाना दीजिये. पापा ने डांटा, लोगो ने समझाया. मगर आजाद के जिद्द के सामने किसी की नही चली और पापा ने पूरा खाना दे दिया. बच्ची खाने लगी. ट्रेन चल पड़ी. आजाद बोलने लगे पापा को ख़ुशी हुई. मेरा बेटा ठीक हो गया.
कुछ वर्षो तक आजाद पाण्डेय…

लोकार्पण

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वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय पत्रकारिता, पुस्तिका का लोकार्पण

आखिर राष्ट्रवाद से भय क्यों

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पत्रकारिता के राष्ट्रवादी स्वरूप के इतने महत्वपूर्ण योगदान के बाद भी, दुर्भाग्यवश स्वाधीनता प्राप्ति के बाद पत्रकारिता जगत में राष्ट्रवाद की उपेक्षा होने लगी | आज स्थिति यह है कि पत्रकारिता के आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रवाद को संकुचित विचार माना जाता है | इसलिए राष्ट्रवादी विचारों और मुद्दों पर की जाने वाली पत्रकारिता को मुख्यधरा की पत्रकारिता में शामिल नही किया जाता ,परन्तु यदि हम राष्ट्रवाद की परिभाषा और व्यख्या पर नजर डालें तो यह स्थापित सत्य दीखता है कि पत्रकारिता का राष्ट्रवाद से सीधा सम्बन्ध है सामाजिक मान्यता है कि मीडिया संस्कृति का वाहक भी है, दर्पण भी है और निर्माता भी अतएव पत्रकारिता का मौलिक कार्य समाज की विकास के प्रक्रियाओं को मजबूत करना है जिसके लिए उसे निर्भीक ,सत्यवादी और सुचितापूर्ण अनुशासन की भूमिका मे अपने को रखना है |

देश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अस्मिता को जगाने के व्यापक एवं उच्चादर्श से जुड़ा है भारतीय पत्रकारिता।इसे समझने के लिए भारतीय मन का बोध होना जरुरी है, रहते भारत में है और सोचते पश्चिम की दृष्टि से ना ना अब वक्त के हिसाब से अपनी सोच बदलिए (लाल चश्मा) और …

प्रातः संविमर्श

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आइआइएमसी में यज्ञ ,पूजन और ॐ शंखनाद के साथ प्रारम्भ हुआ आज प्रातः संविमर्श

राष्ट्रीय परिसंवाद राष्ट्रवाद और मीडिया

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डॉ सौरभ मालवीय
भारत में पलने-बढ़ने वाले विदेशी मानसिकता के ये लोग यज्ञ से डरते हैं. यह कटु सत्य है कि बामपंथी विचारकों का भारत की बुद्धिवाद पर और कॉंग्रेंस का देश की सत्ता पर दीघ्रकाल तक आधिपत्य या गाहे बगाहे कब्जा रहा है । इनके लिये राष्ट्र जमीन का एक टुकड़ा और उपभोग के केन्द्र के सिवाय कुछ नहीं है । यह वह वर्ग है जो रहता भारत में है खाता और जीता भी भारत में ही है देश के संसाधनों और अधिकांश प्रतिष्ठानों पर भी लम्बे समय तक यही वर्ग काबिज रहा है बावजूद इसके इनके लिये देश सत्ता उपभोग का केन्द्र या हेतु मात्र है। ये नहीं चाहते कि भारत दुनियां के सामने सिरमौर राष्ट्र के रूप में स्थापित हो ये यह भी नहीं चाहते कि भारत एक बार फिर से विश्व गुरू के रूप में अपना पुराना स्थान हासिल करें। इनके लिये दुनिया के सामने दीन-हीन हिन्दुस्तान शोषित अपमानित और निम्नतर भारत की तस्वीर प्रस्तुत करना गर्व का विषय रहा है। इन्हें सिर्फ यहां की बुराई के सिवाय कुछ भी नहीं दिखाई देता। इस खास वर्ग को गौरवहीन भारत और अपमानति हिन्दू अच्छा लगता है। राष्ट्र हिन्दुत्व व राष्ट्रवादी प्रतिष्ठानों का शक्तिशाली या प्रतिष्ठित…

स्मृतियों के संसार से

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बात 1996-97 की है मैं गोरखपुर में विद्यार्थी था संघ कार्यालय में रहता था. एक नगर सायं शाखा की जिम्मेदारी थी. वर्तमान का मुहद्दीपुर जिसे (विश्वविद्यालय नगर) संघ की योजना में कहते थे. नगर में शिशु विद्यार्थी से लेकर तरुण विद्यार्थी तक संपर्क करना शाखा एवं अनेक प्रकार के कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास वास्तव में यह रोमांचपूर्ण कार्य बहुत ही आनंद आता था, उसी क्रम में क्लास ६ से १० तक के छात्रों के साथ एक दिन का वनविहार (कुसमी जंगल) करना तय हुआ. मेरे नगर प्रचारक युगल जी थे. उनके सहयोग से आयोजन सम्पन्न हुआ. उस शिविर में शिशु विद्यार्थी रणवीर सिंह भी थे. वक्त का पहिया अपने गति से चलता रहता है. लम्बे अन्तराल के बाद रणवीर से मिलकर अच्छा लगा. आप के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं.
(टीवी पत्रकार है Ranveer Singh )