Monday, June 1, 2026

प्रशिक्षण वर्ग का समापन


सीतापुर। आनंदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में विद्या भारती द्वारा आयोजित 15 दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का रविवार को गरिमापूर्ण माहौल में समापन हो गया। इस समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय और विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष हरेन्द्र श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और अतिथियों के आत्मीय परिचय के साथ हुई।

शिक्षा का असली उद्देश्य किताबी ज्ञान से परे:

प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय ने शिक्षा के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना या डिग्रियां बांटना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के आचरण और चरित्र का निर्माण करना है।

15 दिनों के प्रशिक्षण की मुख्य बातें:

सकारात्मक परिवर्तन: डॉ. मालवीय ने बताया कि इस गहन प्रशिक्षण के दौरान वंदना, भोजन मंत्र और व्यावहारिक अनुशासन के माध्यम से नवनियुक्त शिक्षकों के मन, कर्म और वाणी में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है।

स्वामी विवेकानंद का संदेश: स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी देश की उन्नति और प्रगति वहां की सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था पर ही टिकी होती है।

शिक्षकों से आह्वान: उन्होंने सभी नवनियुक्त आचार्यों से अपील की कि वे नई पीढ़ी को 'श्रेष्ठ और समर्थ भारत' बनाने के पवित्र संकल्प के साथ पढ़ाएं।

विद्या भारती मनाएगी अमृत महोत्सव:

क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि विद्या भारती अगले वर्ष गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर से अपना 75वां अमृत महोत्सव वर्ष मनाने जा रही है, जो संस्थान की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र अग्निहोत्री ने सभी आगंतुक अतिथियों, प्रशिक्षकों और संभागियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

विद्या भारती का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज को ऐसे राष्ट्रभक्त और समर्पित शिक्षक देगा जो देश के भविष्य को सही दिशा दिखाएंगे।

चरित्र निर्माण और भारतीय मूल्यों पर आधारित इस शिक्षा पद्धति पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करें! 

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