Sunday, May 31, 2026

संस्कारयुक्त, भारत-केंद्रित शिक्षा विद्या भारती का उद्देश्य : डॉ. सौरभ मालवीय






















सीतापुर। आनंदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सीतापुर में विद्या भारती द्वारा आयोजित पंद्रह दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन सत्र गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष तथा विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष माननीय हरेन्द्र श्रीवास्तव उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राम निवास सिंह ने कराया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व एवं आचरण का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग में वंदना, भोजन मंत्र, व्यवहार एवं विचार-विमर्श के माध्यम से आचार्यों के मन, चित्त और वाणी में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया है।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। यदि शिक्षा समाज की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय मूल्यों के अनुरूप होगी, तो राष्ट्र समृद्ध, समर्थ और शक्तिशाली बनेगा। उन्होंने आचार्यों का आह्वान किया कि वे नई पीढ़ी के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए “श्रेष्ठ, समर्थ एवं संपन्न भारत” के निर्माण का संकल्प लें।
डॉ. मालवीय ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि आनंद, ज्ञान, मुक्ति और परोपकार की जीवनदृष्टि का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति संबंधों, कर्तव्यों और मर्यादाओं पर आधारित है। उन्होंने भगवान राम, लक्ष्मण एवं माता सीता के उदाहरणों के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों की व्याख्या करते हुए कहा कि मर्यादा और धर्मयुक्त संबंध ही भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूंजीवाद, समाजवाद और सांस्कृतिक अतिवाद जैसी विचारधाराएँ भारतीय जीवन मूल्यों को चुनौती देने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में विद्या भारती के आचार्यों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा, ऋषियों के चिंतन तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को समाज तक पहुँचाएं।
डॉ. मालवीय ने बताया कि विद्या भारती आगामी वर्ष गुरु पूर्णिमा से अपना 75वाँ अमृत महोत्सव वर्ष प्रारम्भ करने जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्या भारती की उपस्थिति लगभग 24 हजार केंद्रों तक है, किन्तु जब यह संख्या 24 लाख अथवा 24 करोड़ तक पहुँचेगी, तभी भारत में वास्तविक भारत-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था का व्यापक स्वरूप स्थापित हो सकेगा।
इस अवसर पर अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्षक श्री रामजी सिंह, पूर्णकालिक अधिकारी बंधु, संभाग निरीक्षक तथा अनेक शिक्षाविद् एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री सुभाष चन्द्र अग्निहोत्री ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षक आचार्यों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त नवचयनित आचार्यों ने राष्ट्रनिर्माण एवं शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित भाव से योगदान देने का संकल्प लिया। 

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