Monday, March 25, 2019

विकास के पथ पर भारत


समाजसेवी और संस्कृतिकर्मी डॉ. सौरभ मालवीय जी ने केंद्र व राज्य सरकारों की 34 प्रमुख योजनाओं को बेहद सहज और सरल भाषा में समझाने की सकारात्मक पहल की है.
किताबः विकास के पथ पर भारत
लोकसभा चुनाव में अब महीने भर से भी कम समय बचे है । चुनावी दौर में सरकारें जहां दावे कर रही हो...विपक्ष वादा कर रहा हो वहां एक पत्रकार होने के नाते यह नैतिक कर्तव्य हो जाता है कि समाज को सच से वाकिफ कराएं । 

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय जी की यह किताब 'विकास के पथ पर भारत' हमें सरकारी योजनाओं के सच से जोड़ के रखती है । पुस्तक में कुल चौतीस योजनाओं का सूचनात्मक विश्लेषण किया गया है । 
किसी भी लोकतान्त्रिक देश के नागरिकों के सामजिक ,आर्थिक उत्थान के लिए सरकारें समय समय पर जनकल्याणकारी योजनाए लाती है।  इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना होता है। ऐसी ही कुछ योजनाओं को अपने अंदर समेटे यह किताब लोगों तक पहुँच रही है। 
समग्र ग्रामीण विकास के बिना भारत निर्माण असंभव है।  इस पुस्तक के अध्याय व पृष्ठ पलटने के बाद यह  स्पष्ट  हो जाता है कि यह किताब सरकारी योजनाओं के सूचनात्मक, व्याख्यात्मक विवरण और तथ्यों पर आधारित है. इस पुस्तक के माध्यम से यह भी पता चलता है की देश की एक बड़ी आबादी जो किसान है मजदूर हैं उनके लिए "राष्ट्रीय मृदा स्वस्थ कार्ड योजना" "प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना' ' "दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना " प्रधानमंत्री फसल बिमा योजना" राष्ट्रीय कृषि बाजार" जैसे अनेको योजनाएँ उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही है।

किसी भी योजना की सफलता और असफलता इस बात पर निर्भर करती है की वह योजना लोगो के जीवनशैली और भौगोलिक परिदृश्य के अनुसार किस तरह कार्यवन्तित हो रही है। योजना सरकारी सोच से आम नागरिको के सोच में किस तरह तब्दील हो रही है।  प्रशाशनिक सूझबूझ भी योजनाओं की सफलता सुनिश्चित कराती है। सुचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गयी एक जानकारी में यह बात सामने आयी है की देश के 81 % जिलाधिकारी देश के 15 बड़े शहरों से आते है। शहरी इंडिया जब भारतीय ग्रामीण जीवनशैली और उनके सामाजिक सरोकारों को नहीं समझ पाता है तो विकास के पहिये की गति धीमी पड़ जाती है। 
विभिन्न सरकारी योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य यही है कि योजना की पहुंच हर किसी तक हो , विकास समावेशी हो ।  कुछ ऐसे ही पैमानों के आधार पर यहां उल्लेखित 34 योजनाओं का आंकलन किया जाना चाहिए. 
इस किताब की प्रस्तावना में डॉ सौरभ मालवीय ने लिखा भी है कि 'देश के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही हैं. हर योजना का उद्देश्य होता है कि उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे. जब योजना का लाभ व्यक्ति तक पहुंचता है, वह योजना सफल होती है. इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं. इनमें अधिकतर पुरानी योजनाएं हैं. इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं, जिनके नाम बदल दिए गए हैं. इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं, जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा शुरू किया गया है. इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं. देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं. पहली योजनाएं वे हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं. इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में चलाई जाती हैं. दूसरी योजनाएं वे हैं, जो राज्य सरकारें चलाती हैं. इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है. अकसर ऐसा होता है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं. इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही है।. इन योजनाओं की जानकारी संबंधित मंत्रालयों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. उल्लेखनीय है कि समय-समय पर योजनाओं में आंशिक रूप से परिवर्तन भी होता रहता है.

डॉ मालवीय जी ने गहन अध्ययन के बाद इस किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 34 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है. जिस संतुलन के साथ विषयवस्तु को प्रस्तुत किया गया है अनुकरणीय है। यह पुस्तक निःसंदेह सामजिक मानसिकता को एक नयी दिशा देगी और आशावादी बनने को प्रेरित करेगी। 
पुस्तक का प्रकाशन यश पब्लिकेशन ने किया है । प्रकाशक ने पुस्तक के बारे में लिखा है कि देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जनता के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा सभी क्षेत्रों का समान विकास सुनिश्चित बनाना है. सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित समूहों की स्थिति के अनुरूप तैयार किया जाता है, ताकि लक्षित वर्ग इन से लाभान्वित हो सके. सरकार महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है और इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं. सरकार द्वारा  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, डिजीटल इंडिया तथा स्वच्छ भारत मिशन आदि महत्वकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं. यह पुस्तक केंद्र और राज्य सरकारों की ऐसी ही कुछ योजनाओं पर प्रकाश डालती है. इस पुस्तक के माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है. निश्चित रूप से यह पुस्तक  अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त करेगी.
किताब के कवर डिजाइन पाठकों को आकर्षित करती है ।
पुस्तक के मुखपृष्ठ पर प्रधानमन्त्री मोदी और किसान की खिलखिलाती छवि देश की समृद्धि की तरफ इशारे कर रही है। सड़क से संसद ,गांव शहर या संस्कृति सबको ओढ़े हुए...
वैसे किसी किताब के मुखपृष्ठ से पुरे किताब की अवधारणा स्पष्ट नहीं होती है । पुस्तक के मूल स्वरूप को जानने के लिए पन्ने पलटने पड़ते है । हजारों शब्दों से जूझ के कुछ बुझ पाते है ।
-रजनीकांत  

Saturday, March 23, 2019

विकास के पथ पर भारत : सौरभ मालवीय


नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल में विकास के कई बड़े कीर्तिमान दर्ज कराए हैं। एनडीए की दूसरी पारी के दौरान लिए गए साहसिक निर्णयों के विश्लेषण और सिंहावलोकन करती पुस्तक कई नई चीजों से परिचय कराती है। केंद्र की उपलब्धियों और आम आदमी की सहूलियतों की दृष्टि से लिए गए साहसिक निर्णयों और नरेंद्र मोदी के विजन को डॉ. सौरभ मालवीय की यह पुस्तक विशद रूप से स्पष्ट करती है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकरिता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक के नाते मीडया से उनका सीधा जुड़ाव का असर भी पुस्तक में जगह-जगह देखने को मिलता है। डॉ. साहब की यह दूसरी पुस्तक है। इससे पहले वह "राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष : अटलबिहारी वाजपेयी" लिख चुके हैं। पुस्तक के बारे में विस्तृत विचार पूरी पढ़ने के बाद लिखूंगा। फ़िलहाल गुरुदेव को अनंत बधाई और अशेष शुभकामनाएं। आप स्वस्थ और सानंद रहकर साहित्य सृजन करते रहें, ऐसी प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है। यह पुस्तक यश पब्लिकेशन से छपकर आई है। प्रकाशक को भी बधाई।
-डॉ. अतुल मोहन सिंह

Friday, March 22, 2019

विकास के पथ पर भारत


बंगलुरु हवाई अड्डे पर बैठा हूं और साथी बनी है डॉ सौरभ मालवीय जी द्वारा लिखी गई शानदार पुस्तक "विकास के पथ पर भारत"। मोदी सरकार द्वारा किए गए कामकाज के लेखा-जोखा को बहुत ही सुंदर ढंग से लिपिबद्ध किया है डॉ मालवीय जी ने। आज जब देश चुनाव के जश्न में डूबा है ऐसे समय में विकास के पथ पर बढ़ते हुए भारत को पढ़ कर यह विश्वास और मजबूत हो रहा है कि देश में दोबारा मोदी सरकार बनने जा रही है। मोदी सरकार ने सामान्य जन विशेषकर गरीब,किसान और महिलाओं के जीवन में सुधार के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए हैं और विकास की निर्बाध गति को देश की जनता ईवीएम पर बटन दबाकर और तीव्र करेगी।
लेखक परिचय- इस पुस्तक के लेखक डॉ सौरभ मालवीय जी वैसे तो परिचय के मोहताज नहीं है फिर भी शुभचिंतक मित्रों की जानकारी के लिए प्रख्यात पत्रकार, स्तंभकार, राष्ट्रवादी चिंतक, चुनावी विशेषज्ञ, राजनीतिक विश्लेषक, डॉ सौरभ मालवीय जी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल में प्राध्यापक हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही नोएडा परिसर से भोपाल परिसर में स्थानांतरित किया गया है।
-राकेश त्रिपाठी 
प्रवक्ता 
भारतीय जनता पार्टी 
उत्तर प्रदेश

Sunday, March 17, 2019

पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत'


डॉक्टर सौरभ मालवीय जी भाई साहब !
आपकी पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत' आज प्राप्त हो गयी।
एकबार फिर से शानदार लेखन के लिये आपको बधाई। 
यह पुस्तक हमारा इस चुनाव के समय सभाओं और कार्यक्रमों में सरकार विषय रखने में मार्गदर्शन करेगी।
प्रीतिश नंदी 

Thursday, March 14, 2019

विकास के पथ पर भारत


वरिष्ठ पत्रकार और एबीपी न्यूज के लोकप्रिय एंकर सुमित अवस्थी के हाथ में पहुंची डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत'। 

Saturday, March 9, 2019

विकास के पथ पर भारत


आजतक 
माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय ने गहन अध्ययन के बाद 'विकास के पथ पर भारत' किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है.
लोकसभा चुनाव के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले लेखकों में उनकी तारीफ करने की होड़ सी लगी है.उन पर लिखी किताबों की बाढ़ सी आ गई है. कुछ लोग उनके व्यक्तित्व पर लिख रहे, तो कुछ कृतित्व पर, कुछ जीवनी लिख रहे तो कुछ उनके व्याख्यान सहेज रहे. पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ  मालवीय की किताब 'विकास के पथ पर भारत' इससे  थोड़ी अलग है.  हालांकि किताब के कवर पर संसद भवन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की खिलखिलाती तस्वीर देख यह लगता है कि यह किताब भी उनका प्रचार करने वाली ही है, पर इसके अध्याय व पृष्ठ पलटने के बाद यह मान्यता बदलती सी लगती है,  और यह स्पष्ट सा हो जाता है कि यह किताब सरकारी योजनाओं के सूचनात्मक, व्याख्यात्मक विवरण और तथ्यों पर आधारित है न कि तारीफ पर. सौरभ मालवीय ने गहन अध्ययन के बाद इस किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है. 

इस किताब की प्रस्तावना में सौरभ मालवीय ने लिखा भी है कि देश के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही है। हर योजना का उद्देश्य होता है कि उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। जब योजना का लाभ व्यक्ति तक पहुंचता है, वह योजना सफल होती है। इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं। इनमें अधिकतर पुरानी योजनाएं हैं। इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं, जिनके नाम बदल दिए गए हैं। इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं, जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा शुरू किया गया है। इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं। देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं। पहली योजनाएं वे हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में चलाई जाती हैं। दूसरी योजनाएं वे हैं, जो राज्य सरकारें चलाती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। अकसर ऐसा होता है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही है. इन योजनाओं की जानकारी संबंधित मंत्रालयों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. उल्लेखनीय है कि समय-समय पर योजनाओं में आंशिक रूप से परिवर्तन भी होता रहता है.  

प्रकाशक यश पब्लिकेशंस ने भी अपनी बात कही है. प्रकाशक ने लिखा है कि देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जनता के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा  सभी क्षेत्रों का समान विकास सुनिश्चित बनाना है. सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित समूहों की स्थिति के अनुरूप तैयार किया जाता है,  ताकि लक्षित वर्ग इन से लाभान्वित हो सके. सरकार महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है और इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं. सरकार द्वारा  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,  प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, डिजीटल इंडिया तथा स्वच्छ भारत मिशन आदि महत्वकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं. यह पुस्तक केंद्र और राज्य सरकारों की ऐसी ही कुछ योजनाओं पर प्रकाश डालती है. इस पुस्तक के माध्यम से सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है. निश्चित रूप से यह पुस्तक  अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त करेगी. 

किताब की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने लिखा है कि विकास के आंकड़ों में आम आदमी हमेशा ही  एक सवाल का जवाब ढ़ूंढता है. सवाल ये है कि इन आंकड़ों का 'मेरे' लिए क्या मतलब है? सवाल तब और भी अहम बन जाता है कि एक ही दिन अखबार की दो सुर्खियां अलग-अलग कहानी कहती हैं. पहली सुर्खी है, 'भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला देश बना' या फिर 'भारत अगले दो वर्षों तक सबसे तेजी से विकास करने वाला बना रहेगा देश,' वहीं दूसरी सुर्खी है 'अरबपतियों की संपत्ति रोजाना औसतन 2200 करोड़ रुपए बढ़ी,  भारी गरीबी में जी रही 10 फीसदी आबादी लगातार 14 सालों से कर्ज में है डूबी.'ऐसे में ये सवाल और भी अहम बन जाता है कि 7.3, 7.5 या 7.7 फीसदी की सालाना विकास दर के मायने आबादी के एक बहुत ही छोटे हिस्से तक सीमित है, या फिर इनका फायदा समाज में आखिरी पायदान के व्यक्ति को भी मिल पा रहा है या नहीं?


ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिए ये जरुरी हो जाता है कि विकास को सुर्खी से आगे जन-जन तक पहुंचाने के लिए आखिरकार सरकार ने किया क्या, या फिर जो किया वो पहले से किस तरह से अलग था?इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश यह किताब करती है...अपनी भूमिका में उन्होंने आगे लिखा है कि सच तो यही है कि किसी भी सरकारी योजना की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि कितनी जल्दी वो सरकारी सोच से आम आदमी की सोच में अपनी जगह बना पाती है. साथ ही जरुरी ये भी है कि सरकारी योजनाओं को महज पैसा बांटने का एक माध्यम नहीं माना जाए,  बल्कि ये देखना भी जरुरी होगा कि वो किस तरह व्यक्ति से लेकर समाज, राज्य और फिर देश की बेहतरी मे योगदान कर सके. ये भी बेहतर होगा कि मुफ्त में कुछ भी बांटने का सिलसिला बंद होना चाहिए. क्या ऐसा सब कुछ पिछले साढ़े चार साल के दौरान शुरु की गयी योजनाओं में देखने को मिला है, इसका जवाब काफी हद तक हां में होगा. एक और बात. राज्यों के बीच भी नए प्रयोगों के साथ योजनाएं शुरु करने की प्रतिस्पर्धा चल रही है और सुखद निष्कर्ष ये है कि चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल की सरकार ने शुरु की हो, उसकी उपयोगिता को दूसरी राजनीतिक दलों की सरकारों ने पहचाना.  तेलंगाना की रायतु बंधु योजना और ओड़िशा की कालिया योजना को ही ले लीजिए. किसानों की जिंदगी बदलने की इन योजनाओं का केंद्र सरकार अध्ययन कर रही है, ताकि राष्ट्रीय स्तर की योजना में इन योजनाओं की कुछ खास बातों को शामिल किया किया जा सके. 
विभिन्न सरकारी योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य यही है कि विकास का फायदा हर किसी को मिले यानी विकास समावेशी हो. कुछ ऐसे ही पैमानों के आधार पर यहां उल्लेखित 36 योजनाओं का आंकलन किया जाना चाहिए. फिर ये सवाल उठाया जा सकता है कि क्या ये योजनाएं कामयाब हैं? अगर सरकार कहे कामयाब तो असमानता को लेकर जारी नई रिपोर्ट को सामने रख चर्चा करने से नहीं हिचकना चाहिए.  एक बात तो तय है कोई कितना भी धर्म-जाति-संप्रदाय को आधार बनाकर राजनीति कर ले लेकिन मतदाता ईवीएम पर बटन दबाने के पहले एक बार जरुर सोचता है कि अमुक उम्मीदवार ने विकास के लिए क्या कुछ किया है, या फिर क्या वो आगे विकास के बारे में कुछ ठोस कर सकेगा.  मत भूलिए सरकारी योजनाएं आपके ही पैसे से चलती हैं और इन योजनाओं की सार्थकता पर अपना पक्ष रखने के लिए हर पांच साल में आपको एक मौका तो मिलता ही है.  ऐसी सोच विकसित करने के लिए जरुरी है कि आपके समक्ष सरकारी योजनाओं का ब्यौरा सरल और सहज तरीके से पेश किया जाए. पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत' इस काम में मदद करेगी.

पुस्तकः विकास के पथ पर भारत 
लेखकः डॉ सौरभ मालवीय
प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक

विद्या भारती की साधारण सभा बैठक   3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2026   हरि नगर (दिल्ली)